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Monday,31-August-2026
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लड़ाकू विमानों के लिए एचएएल को मिला चौथा जीई-404 जेट इंजन

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नई दिल्ली, 1 अक्टूबर : भारतीय फाइटर जेट एलसीए एमके-1ए के निर्माण में तेजी आ रही है। इस श्रेणी के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस एलसीए एमके-1ए के लिए भारत के एचएएल को चौथा जीई-404 जेट इंजन मिल गया है। यह जानकारी बुधवार को दी गई। एचएएल को बीते महीने सितंबर में ही तीसरा जेट इंजन मिला था।

एचएएल को इस वित्त वर्ष के अंत तक कुल 12 जीई-404 जेट इंजन मिलने की संभावना है। ये सभी इंजन भारतीय लड़ाकू विमान तेजस मार्क-1ए में लगाए जाएंगे।

गौरतलब है कि अमेरिकी कंपनी भारत में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को यह जेट इंजन सप्लाई कर रही है। एचएएल के अधिकारियों ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि, उन्हें एलसीए एमके-1ए के लिए चौथा जीई-404 इंजन मिला है।

एचएएल का कहना है कि इंजन आपूर्ति श्रृंखला में सुधार होने से लड़ाकू विमान तेजस एमके-1ए के उत्पादन और वायुसेना को इसकी डिलीवरी देने के कार्यक्रम में गति आएगी।

दरअसल भारतीय वायुसेना ने तेजस एमके-1ए विमानों के निर्माण का ऑर्डर दिया है, जिन्हें आने वाले वर्षों में क्रमिक रूप से डिलीवर किया जाएगा। यह विमान आधुनिक एवियोनिक्स, बेहतर हथियार क्षमता और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम से लैस होंगे। भारतीय वायुसेना को लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के लिए हाल ही में एक नया अनुबंध किया गया है। इस करार के मुताबिक 62 हजार करोड़ रुपए से अधिक की लागत से भारतीय वायुसेना को 97 स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट उपलब्ध कराए जाएंगे।

इन लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के लिए रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ 97 स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस एमके-1ए की खरीद हेतु 62,370 करोड़ रुपए का अनुबंध किया है। अनुबंध के मुताबिक इनमें 68 सिंगल-सीटर लड़ाकू विमान और 29 ट्विन-सीटर ट्रेनर विमान शामिल हैं।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस आपूर्ति से भारतीय वायुसेना की क्षमता को और मजबूती मिलेगी। लड़ाकू विमानों की डिलीवरी की समय-सीमा की बात करें तो इन विमानों की डिलीवरी वर्ष 2027-28 से शुरू होगी। तय अनुबंध के मुताबिक भारतीय वायुसेना को इन लड़ाकू विमानों की आपूर्ति अगले छह वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। ये विमान स्वदेशीकरण पर आधारित होंगे और इनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकी विशेषताएं होंगी।

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस परियोजना में 64 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग होगा। जनवरी 2021 में हुए पहले स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट एमके-1ए अनुबंध की तुलना में इस बार 67 अतिरिक्त स्वदेशी उपकरण शामिल किए गए हैं। इसमें कई प्रमुख उन्नत प्रणालियां सम्मिलित हैं। भारत के ये स्वदेशी लड़ाकू विमान ‘उत्तम एईएसए’ रडार से लैस होंगे। यह सक्रिय इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे रडार है। इसमें ‘स्वयं रक्षा कवच’ प्रणाली व स्वदेशी नियंत्रण सतह एक्ट्यूएटर्स होंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक इन उन्नत तकनीकों से विमान की युद्धक क्षमता और आत्मनिर्भर भारत पहल को और बल मिलेगा।

राष्ट्रीय समाचार

नीट-पीजी 2026 : 2.73 लाख से अधिक मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए रविवार को परीक्षा

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नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट फॉर पोस्ट-ग्रेजुएट (नीट-पीजी) 2026 रविवार को देश भर के 340 शहरों में निर्धारित 1,300 केंद्रों पर आयोजित की जाएगी, जिसमें 2.73 लाख से ज्यादा मेडिकल ग्रेजुएट के शामिल होने की उम्मीद है।

एक अधिकारी ने बताया कि नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) ने 26 अगस्त को नीट-पीजी 2026 का एडमिट कार्ड आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया था।

अधिकारी ने बताया कि नीट-पीजी 2026 के लिए कुल 2,73,183 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.5 प्रतिशत से ज्यादा है। उन्होंने यह भी बताया कि परीक्षा एक ही शिफ्ट में आयोजित की जाएगी।

नीट-पीजी पास करने के बाद डॉक्टर सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में कई एडवांस्ड मेडिकल कोर्स में सीट पा सकते हैं और एमडी (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन) और एमएस (मास्टर ऑफ सर्जरी) जैसे कोर्स कर सकते हैं।

इससे पहले, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने नीट-पीजी 2026 की तैयारियों का जायजा लिया था। केंद्रीय मंत्री ने सभी संबंधित लोगों को परीक्षा की प्रक्रिया को सुचारू, सुरक्षित, पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-आधारित बनाने का निर्देश दिया।

परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए अधिकारी एक व्यापक सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा कर रहे हैं, जिसमें सीसीटीवी निगरानी, ​​बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, तलाशी, सिग्नल जैमर, डायनामिक कंप्यूटर आवंटन, केंद्रीय और क्षेत्रीय कमांड सेंटरों के जरिए लाइव मॉनिटरिंग और 60,000 से ज्यादा परीक्षा कर्मियों की तैनाती शामिल है।

इसी के साथ नड्डा ने उम्मीदवारों से अपील की कि वे परीक्षा से जुड़ी अफवाहों या धोखाधड़ी वाले दावों से गुमराह न हों। उन्होंने बताया कि फाइनल प्रश्न पत्र परीक्षा शुरू होने से कुछ समय पहले एक बहुत सुरक्षित, एन्क्रिप्टेड और समय-सीमा वाली प्रक्रिया के जरिए चुना जाता है। इसमें कई स्तरों पर तकनीकी और ऑपरेशनल सुरक्षा उपाय किए जाते हैं।

उन्होंने उम्मीदवारों को सलाह दी कि वे केवल एनबीईएमएस और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अनुचित तरीकों की कोशिश की तुरंत रिपोर्ट करें। इस वर्ष छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई सुधार किए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, उम्मीदवार परीक्षा केंद्रों के लिए तीन राज्यों का विकल्प चुन सकते थे, जिसमें उनके पत्राचार वाले राज्य को पहली प्राथमिकता के तौर पर चुनना अनिवार्य था।

परीक्षा के पैटर्न में भी बदलाव किया गया है, जिसके तहत 210 मिनट में 180 सवालों के जवाब देने होंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि उम्मीदवारों को हर सवाल के लिए ज्यादा समय मिले।

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चीनी की एक्स-मिल कीमतों में 20 प्रतिशत की गिरावट, खुदरा बाजार में भी शुरू हुई नरमी: सरकार

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उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि देश में एक्स-मिल चीनी कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और अब खुदरा बाजार में भी चीनी के दाम नीचे आने लगे हैं। सरकार के अनुसार, आपूर्ति शृंखला में कीमतों का प्रभाव धीरे-धीरे पहुंचता है, इसलिए आने वाले दिनों में खुदरा स्तर पर भी कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है।

मंत्रालय ने बताया कि सरकार लगातार देशभर में चीनी की कीमतों, स्टॉक और आपूर्ति की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हाल के दिनों में कीमतों में आई तेज वृद्धि के बाद सरकार ने कई सक्रिय कदम उठाए, जिनका असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है।

मंत्रालय के अनुसार, एक्स-मिल और खुदरा दोनों स्तरों पर कीमतों में आई गिरावट यह संकेत देती है कि हालिया मूल्य वृद्धि का प्रमुख कारण वास्तविक कमी नहीं, बल्कि जमाखोरी और सट्टेबाजी थी।

सरकार द्वारा देशभर की चीनी मिलों में भंडार के भौतिक सत्यापन अभियान चलाए गए। जांच के दौरान कई मामलों में यह पाया गया कि कुछ मिलों के पास घोषित आंकड़ों से अधिक चीनी का भंडार मौजूद था। इस सत्यापन अभियान से यह स्पष्ट हुआ कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और घबराहट में खरीदारी या अतिरिक्त भंडारण का कोई औचित्य नहीं है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि कुछ मामलों में चीनी मिलें “शॉर्ट सेलिंग” का सहारा ले रही थीं, जिसका अर्थ है कि मासिक कोटा के तहत उन्हें जितनी चीनी बाजार में बेचनी चाहिए थी, उससे कम मात्रा जारी की जा रही थी। इस तरह की गतिविधियों से पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद बाजार में आपूर्ति प्रभावित होती है और कीमतों पर अनावश्यक दबाव बनता है।

सरकार ने यह भी देखा कि कई बार महीने की शुरुआत में चीनी की बिक्री होने के बावजूद खरीदार उसे मिलों से महीने के अंत तक नहीं उठाते थे, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बनता था। इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने सितंबर से मासिक कोटा प्रणाली की जगह पखवाड़ा-आधारित चीनी आवंटन प्रणाली लागू करने का फैसला किया है।

नई व्यवस्था के तहत चीनी मिलों को आवंटित मात्रा का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा पहले सप्ताह में और शेष मात्रा अगले सप्ताह में बाजार में जारी करनी होगी। इसके अलावा, सरकार ने चीनी मिलों को निर्देश दिया है कि बिक्री के बाद चीनी को सात दिनों के भीतर मिल परिसर से भेजना अनिवार्य होगा।

सरकार का मानना है कि पखवाड़ा-आधारित कोटा और सात दिन के भीतर अनिवार्य आपूर्ति की व्यवस्था से चीनी की आवाजाही तेज होगी, जिससे चीनी सीधे मिलों से थोक विक्रेताओं और फिर उपभोक्ताओं तक जल्दी पहुंचेगी, जबकि जमाखोरी और सट्टेबाजी की संभावना कम होगी। साथ ही बड़े उपभोक्ताओं को भी उनकी वास्तविक आवश्यकता से अधिक स्टॉक न रखने की सलाह दी गई है।

मंत्रालय ने कहा कि नई पेराई सत्र की शुरुआत 15 अक्टूबर से होने जा रही है। अक्टूबर में ही 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक चीनी उत्पादन होने का अनुमान है। सरकार ने यह भी अनुमति दी है कि अक्टूबर में उत्पादित चीनी को मिलें बिना किसी अतिरिक्त प्रतिबंध के बेच सकें, ताकि नए सत्र की चीनी जल्द से जल्द घरेलू बाजार में उपलब्ध हो सके।

सरकार के अनुसार, नवंबर में लगभग 45 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन होने की संभावना है, जिससे बाजार में आपूर्ति और मजबूत होगी तथा कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।

मंत्रालय ने दोहराया कि देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है और उपभोक्ताओं को घबराने या अतिरिक्त खरीदारी करने की आवश्यकता नहीं है। सरकार बाजार पर करीब से नजर रखे हुए है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी उचित हस्तक्षेप करती रहेगी।

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राष्ट्रीय समाचार

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए दाखिल किए गए 7 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न

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आयकर विभाग ने शुक्रवार को बताया कि आकलन वर्ष (एवाई) 2026-27 के लिए अब तक 7 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल किए जा चुके हैं। विभाग ने व्यवसाय या पेशेवर आय वाले उन करदाताओं से रिटर्न जल्द दाखिल करने की अपील की है, जिन्हें अपने खातों का ऑडिट कराने की आवश्यकता नहीं है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किए एक पोस्ट में आयकर विभाग ने कहा कि 31 अगस्त 2026 ऐसे करदाताओं के लिए आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि है, जिनकी आय व्यवसाय या पेशे से है और जो ऑडिट के दायरे में नहीं आते।

विभाग ने कहा, “आकलन वर्ष 2026-27 के लिए 7 करोड़ से अधिक आईटीआर पहले ही दाखिल किए जा चुके हैं।” इसके साथ ही पात्र करदाताओं को अंतिम समय का इंतजार न करने और जल्द से जल्द रिटर्न दाखिल करने की सलाह दी गई है।

आयकर विभाग ने अपने पोस्ट में कहा, “31 अगस्त 2026 आकलन वर्ष 2026-27 के लिए उन करदाताओं की आईटीआर दाखिल करने की नियत तिथि है, जिनकी व्यवसाय या पेशेवर आय है और जिन पर ऑडिट लागू नहीं होता। अंतिम समय तक प्रतीक्षा न करें और अपना रिटर्न आज ही दाखिल करें।”

विभाग की यह अपील ऐसे समय में आई है जब गैर-ऑडिट श्रेणी के व्यवसायी और पेशेवर करदाताओं के लिए निर्धारित अंतिम तिथि नजदीक आ रही है।

आमतौर पर अंतिम दिनों में पोर्टल पर अधिक ट्रैफिक और तकनीकी दबाव देखने को मिलता है, इसलिए विभाग समय रहते रिटर्न दाखिल करने पर जोर दे रहा है।

इससे पहले जुलाई में आयकर विभाग ने जानकारी दी थी कि 31 जुलाई 2026 की समयसीमा तक 5.9 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए गए थे। उस समय विभाग ने करदाताओं का धन्यवाद करते हुए कहा था कि समय पर अनुपालन और करदाताओं का भरोसा देश के विकास को गति प्रदान करता है।

विभाग के अनुसार, 31 जुलाई की अंतिम तिथि वाले दिन ही 40 लाख से अधिक रिटर्न दाखिल किए गए थे। यह उन व्यक्तिगत करदाताओं और संस्थाओं के लिए निर्धारित समयसीमा थी, जिन्हें खातों का ऑडिट कराने की आवश्यकता नहीं थी।

नवीनतम आंकड़े दिखाते हैं कि जुलाई की समयसीमा के बाद भी बड़ी संख्या में व्यवसाय और पेशेवर आय वाले करदाताओं ने अपने रिटर्न दाखिल किए हैं, जिससे कुल संख्या बढ़कर 7 करोड़ के पार पहुंच गई है। आयकर विभाग का मानना है कि डिजिटल प्रणाली और ऑनलाइन फाइलिंग सुविधाओं के विस्तार से कर अनुपालन में लगातार सुधार हो रहा है।

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