राष्ट्रीय समाचार
2025 में भारत का निर्यात पिछले साल से अधिक रहेगा : पीयूष गोयल
नई दिल्ली, 29 अगस्त। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि इस वर्ष भारत का निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में अधिक रहेगा, जो घरेलू उद्योग की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता और मजबूती को दर्शाता है। साथ ही सरकार नए अवसरों को खोलने के लिए दुनिया भर के साझेदार देशों से संपर्क कर रही है।
राष्ट्रीय राजधानी में ‘भारत बिल्डकॉन 2026’ कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) होने से भारत का नेटवर्क बढ़ रहा है। भारत ने अभी तक ऑस्ट्रेलिया, यूएई, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टीन, आइसलैंड और यूके के साथ एफटीए किया है और यूरोपीय यूनियन (ईयू) के साथ इस पर चर्चा चल रही है।
इन एग्रीमेंट्स से भारतीय कंपनियों के लिए निर्माण, स्टील और उससे जुड़े सेक्टर में मौके खुल रहे हैं।
गोयल ने आगे कहा कि कई विकसित देश भारत के साथ व्यापार संबंधों का विस्तार करने के इच्छुक हैं।
केंद्रीय मंत्री का बयान ऐसे समय पर आया है, जब रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिए हैं।
गोयल ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि उद्योग जगत को कुछ देशों की एकतरफा कार्रवाइयों से उत्पन्न अनावश्यक तनाव या कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। उन्होंने उद्योग प्रतिनिधियों से उन क्षेत्रों को उजागर करने का आग्रह किया, जहां वैकल्पिक बाजारों की आवश्यकता है, और आश्वासन दिया कि वाणिज्य मंत्रालय नए अवसर खोलने के लिए दुनिया भर के भागीदारों से संपर्क कर रहा है।
उन्होंने इस्पात और लौह अयस्क में व्यापक निर्यात संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला और कहा कि भारत सालाना 15 मिलियन टन इस्पात का निर्यात कर सकता है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले, प्रतिस्पर्धी मूल्य वाले उत्पादों के साथ उसका निर्यात क्षेत्र मजबूत हो सकता है।
गोयल ने कहा कि देश ‘विकसित भारत 2047’ की ओर अग्रसर है। इस कारण ‘भारत बिल्डकॉन 2026’ देश की ताकत, इनोवेशन, मजबूती और प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रदर्शित करेगा।
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एमएलएस: 2-2 से ड्रॉ रहा इंटर मियामी और सैन डिएगो के बीच खेला गया मुकाबला, मेसी ने दागा एक गोल

एमएलएस रेगुलर सीजन में इंटर मियामी सीएफ और सैन डिएगो एफसी के बीच मुकाबला 2-2 की बराबरी पर खत्म हुआ। इंटर मियामी को इस मैच में एक अंक मिला। टीम के लिए कप्तान लियोनेल मेसी और स्टार स्ट्राइकर लुइस सुआरेज ने गोल किए।
मेहमान टीम सैन डिएगो एफसी ने मैच के 12वें मिनट में एंडर्स ड्रायर के गोल की मदद से बढ़त हासिल की। इसके बाद 24वें मिनट में लियोनेल मेसी ने इंटर मियामी की ओर से शानदार गोल दागते हुए स्कोर को 1-1 से बराबर कर दिया। मेसी की फ्री-किक सीधे गोल के ऊपरी बाएं कोने में गई और गोलकीपर उसे रोक नहीं पाया।
यह मेसी का इस सीजन का 20वां गोल रहा। वह एमएलएस 2026 गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। इसके साथ ही मेसी एमएलएस इतिहास के केवल दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने लगातार तीन सीजन में 20 या उससे अधिक गोल किए हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि एलएएफसी के डेनिस बुआंगा ने 2023 से 2025 के बीच हासिल की थी।
मेसी के इस गोल ने गोल्डन बूट की रेस में उनकी बढ़त को और मजबूत कर दिया है; उनके नाम लीग में सबसे ज्यादा 33 गोल योगदान (गोल + असिस्ट) हैं और वह एमएलएस में गोल (20) और असिस्ट (13) के मामले में सबसे आगे हैं। हाफ टाइम तक स्कोर 1-1 रहा, जिसके बाद दूसरे हाफ में इंटर मियामी ने जीत हासिल करने के लिए लगातार 45 मिनट तक हमले जारी रखे।
मेजबान टीम की कोशिशों का फल उन्हें 74वें मिनट में मिला। डी पॉल ने बॉक्स के दाईं ओर सुआरेज को एक सटीक पास दिया, जहां उरुग्वे के दिग्गज फॉरवर्ड ने अपने दाहिने पैर से पहला शॉट लेते हुए गेंद को गोल पोस्ट में पहुंचा दिया। यह इस रेगुलर सीजन में सुआरेज का 13वां गोल था, जबकि इस असिस्ट के साथ डी पॉल के असिस्ट की संख्या 12 हो गई।
सैन डिएगो ने 82वें मिनट में एक बार फिर स्कोर को 2-2 से बराबर कर दिया। मैच के आखिरी पलों में इंटर मियामी को हमले के कई मौके मिले, लेकिन 90+6वें मिनट में मैच के आखिरी प्ले के दौरान गोलकीपर सेंट क्लेयर ने सैन डिएगो के कीरन सार्जेंट के शॉट को रोककर टीम की हार को टाला। इसके बाद इंटर मियामी अपने अगले एमएलएस मुकाबले के लिए 28 सितंबर को ओहायो के कोलंबस शहर जाएगी। वहां टीम का सामना स्कॉट्समिरेकल-ग्रो फील्ड में कोलंबस क्रू से होगा।
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एफडीआई के अगले चरण में सिर्फ निवेश नहीं, मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम पर होना चाहिए फोकस: एसोचैम

उद्योग संगठन एसोचैम द्वारा सोमवार को जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति का अगला चरण केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा माहौल बनाने पर केंद्रित होना चाहिए जहां निवेश टिकाऊ बने, उसका विस्तार हो और वह देश के आर्थिक एवं औद्योगिक तंत्र के साथ गहराई से जुड़ सके।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में भारत का एफडीआई परिदृश्य काफी बदल गया है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2000-01 में 4 अरब डॉलर रहे कुल एफडीआई प्रवाह बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 95 अरब डॉलर तक पहुंच गए हैं। इसी अवधि में एफडीआई इक्विटी निवेश 2 अरब डॉलर से बढ़कर 59 अरब डॉलर हो गया।
अध्ययन में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2000-01 से वित्त वर्ष 2025-26 के बीच भारत को कुल मिलाकर 1.16 ट्रिलियन डॉलर का एफडीआई प्राप्त हुआ, जबकि एफडीआई इक्विटी निवेश 791 अरब डॉलर रहा। यह रुझान वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत के बढ़ते एकीकरण और एफडीआई नीति में क्रमिक उदारीकरण को दर्शाता है।
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल मिंडा ने कहा कि भारत ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। अब अगला चरण निवेशकों के लिए भारत में कारोबार स्थापित करना, संचालन करना और विस्तार करना अधिक आसान बनाने पर केंद्रित होना चाहिए। साथ ही ऐसे निवेशों से देश को मिलने वाले व्यापक आर्थिक लाभों को भी मजबूत करना जरूरी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एफडीआई अब सेवाओं, विनिर्माण और उभरते क्षेत्रों में भारत के विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सेवा क्षेत्र तथा कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर में कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह का लगभग एक-तिहाई हिस्सा आया है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल्स, रसायन, बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर), इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय निवेश हुआ है।
एसोचैम के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. एस.पी. शर्मा ने कहा कि एफडीआई केवल पूंजी ही नहीं लाता, बल्कि तकनीक, वैश्विक बाजारों तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी नेटवर्क भी उपलब्ध कराता है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि निवेश से देश में कितना मूल्य संवर्धन, रोजगार, निर्यात, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी विकसित होती है।
रिपोर्ट में एफडीआई को और प्रभावी बनाने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें निवेशकों के लिए बेहतर आफ्टरकेयर व्यवस्था, सिंगल-विंडो मंजूरी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना, भूमि लागत कम करना, भूमि उपलब्धता बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स और उपयोगिता सेवाओं में सुधार, अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाना तथा वित्त तक पहुंच को मजबूत करना शामिल है।
इसके अलावा, अध्ययन में प्रौद्योगिकी और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) आधारित निवेश को बढ़ावा देने, निवेश के लिए तैयार औद्योगिक अवसंरचना विकसित करने और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की भी सिफारिश की गई है।
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आदिवासी कल्याण घोटाला: कर्नाटक सीएम का बड़ा बयान, बोले- बेगुनाह को देना पड़ा इस्तीफा

आदिवासी कल्याण घोटाले के सिलसिले में कांग्रेस विधायक बी. नागेंद्र के कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफे का जिक्र करते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को कहा कि विपक्ष के दबाव के कारण सरकार को एक ‘बेगुनाह’ व्यक्ति से इस्तीफा लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने भाजपा विधायकों की आलोचना करते हुए कहा कि वे अपने उठाए गए मुद्दों पर चर्चा होने देने के बजाय विधानसभा की कार्यवाही में बाधा डाल रहे थे।
उन्होंने यह बयान कर्नाटक विधानसभा में सूखा-स्थिति और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने के फैसले का बचाव करते हुए दिया।
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने जोर देकर कहा कि इन मामलों पर उस ‘स्थगन प्रस्ताव’ के तहत चर्चा होनी चाहिए जिसे उन्होंने स्पीकर को सौंपा था।
नागेंद्र के इस्तीफे का जिक्र करते हुए शिवकुमार ने विधानसभा में कहा कि हमने विपक्ष के दबाव में एक बेगुनाह व्यक्ति को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। मैंने ही उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। मैंने विपक्ष से पूछा कि वे उनके इस्तीफे की मांग क्यों कर रहे हैं। वे कुछ नहीं बोले और सदन की कार्यवाही में बाधा डाली। बाद में, उन्होंने विरोध मार्च भी निकाला। उन्हें करने दीजिए, लोकतंत्र में इसकी इजाजत है।
शिवकुमार ने कहा कि ‘काम रोको प्रस्ताव’ की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि सरकार ने उन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए पहले ही विशेष सत्र बुला लिया था।
अशोका ने सरकार से उस प्रावधान के बारे में सवाल किया जिसके तहत विशेष सत्र बुलाया गया था और कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौडा ने कहा कि विपक्ष ने ‘काम रोको प्रस्ताव’ अभी पेश किया है, जबकि सरकार ने उन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए पहले ही विशेष सत्र बुला लिया था।
शिवकुमार ने कहा कि विपक्ष ने पिछले मॉनसून सत्र में बाधा डाली थी और उन्हें एक मिनट भी बोलने नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सूखे की स्थिति पर चर्चा के लिए लिखित अनुरोध किया था, लेकिन बाद में कार्यवाही में बाधा डाली, जिससे सरकार को सत्र दो दिन कम करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि अब, मैंने एक विशेष सत्र बुलाया है। उससे पहले, मैंने सूखे और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के संबंध में विभिन्न जिलों का दौरा किया है। कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर हमारा रुख 27 सितंबर तक केंद्र को बताना है। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए, विशेष सत्र बुलाया गया है।
शिवकुमार ने कहा कि वह पिछली रिपोर्ट सीधे केंद्र को भेज सकते थे, लेकिन वह चाहते थे कि इन मुद्दों पर चुने हुए प्रतिनिधि चर्चा करें, न कि यह उनका व्यक्तिगत निर्णय बने।
उन्होंने कहा कि इस सत्र में सूखे और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा होनी चाहिए। यह सत्र लोगों की इच्छा के अनुसार बुलाया गया है।
उन्होंने बताया कि इन मुद्दों पर चर्चा करने के लिए राज्य के चार डिवीजनों (कलबुर्गी, बेलगावी और चित्रदुर्ग शामिल) में विधायकों के साथ बैठकें की गई थीं।
शिवकुमार ने कहा कि 120 तालुकों को पहले ही सूखा-प्रभावित घोषित किया जा चुका है, जबकि अन्य 100 तालुकों को इसमें शामिल करने के लिए उनकी जांच की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि विधायकों ने उन्हें किसानों पर कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के असर के बारे में बताया है और इसके संभावित नतीजों को गंभीर बताया।
उन्होंने कहा कि सांसदों, विधायकों और एमएलसी को बुलाया गया था और बैठकें की गई थीं।
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