राष्ट्रीय समाचार
दादर कबूतर खाना में कबूतरबाजी विवाद के बीच दंगा नियंत्रण पुलिस तैनात
दादर के कबूतरखाने में रविवार को एक अजीबोगरीब नजारा देखने को मिला, जहाँ किसी भी तरह की हिंसा न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए दंगा नियंत्रण पुलिस को मौके पर तैनात किया गया था। मुंबई पुलिस ने यह कदम शनिवार को हुई एक घटना के बाद उठाया, जब एक व्यक्ति अपनी कार की छत पर कबूतरों को दाना डालने के लिए अनाज की ट्रे लेकर आया था। स्थानीय निवासियों ने उसे कबूतरों को दाना डालने से रोका और उसके साथ तीखी बहस हुई। इस दौरान, उसने दावा किया कि अनाज की ट्रे लगी 12 और कारें आने वाली हैं।
शिवाजी पार्क पुलिस ने भी बीएमसी के जी-नॉर्थ वार्ड कार्यालय के जूनियर सुपरवाइजर संदेश विक्रम मटकर (57) की शिकायत के बाद चिराबाजार के गजदार स्ट्रीट निवासी महेंद्र डी. संकलेचा (55) के रूप में पहचाने गए आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
दादर कबूतरखाना कबूतरों को दाना डालने से रोकने के लिए बांस और तिरपाल से ढका हुआ है। अब इसे अतिरिक्त बैरिकेड्स से भी ढक दिया गया है। स्थानीय निवासी और नागरिक कार्यकर्ता चेतन कांबले के अनुसार, रविवार को दादर कबूतरखाना में तीन पुलिस वैन और एक दंगा नियंत्रण वैन के साथ-साथ नगर निगम के अधिकारी तैनात थे। साथ ही, जैन मंदिर के बाहर भी पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
रविवार तक, कबूतरों को दाना डालने पर प्रतिबंध जारी रहेगा। बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते कहा था कि उसने कबूतरखानों को बंद करने का आदेश नहीं दिया था और यह बीएमसी का फ़ैसला था। उसने यह भी कहा कि कबूतर खिलाने वाले बीएमसी से दाना डालने की अनुमति ले सकते हैं।
हालांकि, बाद में बीएमसी ने कहा कि उसने राज्य सरकार के निर्देश के बाद जुर्माना लगाने जैसी कार्रवाई शुरू कर दी है, और दादर कबूतरखाना को उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद ढक दिया गया है।
नगर निगम चुनावों से पहले यह मामला राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है क्योंकि जैन समुदाय बीएमसी पर कबूतरखानों को फिर से खोलने और कबूतरों को दाना डालने की अनुमति देने का दबाव बना रहा है। एफपीजे ने अपने शनिवार, 9 अगस्त के अंक में बताया था कि जैन समुदाय ने बीएमसी कमिश्नर भूषण गगरानी को एक पत्र लिखकर मुंबई में कबूतरखानों को खोलने और कबूतरों को दाना खिलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई रोकने की मांग की है।
अखिल भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के सदस्य एडवोकेट कमलेश शाह ने कहा, “अदालत ने कहा है कि अगर कबूतरबाज़ चाहें तो बीएमसी से अनुमति ले सकते हैं। बीएमसी ने ही कबूतरबाज़ों को दाना-पानी बंद किया था। अब इसे दोबारा खोलने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। हमारा पत्र बीएमसी तक पहुँच गया है। हमें उम्मीद है कि सोमवार को वे अनुमति दे देंगे, जब उनका क़ानूनी विभाग मंज़ूरी दे देगा या राज्य सरकार हाईकोर्ट के आदेश के बाद कुछ निर्देश देगी।”
समुदाय का दावा है कि कबूतरखाने बंद होने के बाद से हज़ारों कबूतर भूख-प्यास से मर गए हैं। भाजपा नेताओं ने भरोसा जताया है कि बीएमसी चुनाव से पहले कबूतरखाने फिर से खोल देगी।
इस बीच, उच्च न्यायालय ने एक विशेषज्ञ के गठन का प्रस्ताव दिया है, जो यह निर्धारित करेगा कि क्या कबूतरखाने से स्वास्थ्य को कोई खतरा है, विशेष रूप से कबूतरों की बीट के कारण।
3 जुलाई को विधान परिषद में हुए घटनाक्रम के बाद, बीएमसी ने स्वास्थ्य संबंधी खतरों, विशेष रूप से कबूतरों की बीट और पंखों के कारण होने वाली श्वसन संबंधी बीमारियों का हवाला देते हुए मुंबई भर में 51 कबूतरखानों को बंद करना शुरू कर दिया था।
राष्ट्रीय समाचार
नीट-2026 पुनर्परीक्षा: 20 जून को राष्ट्रव्यापी मॉक ड्रिल, 2.5 लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर तैनात

देश में 21 जून को होने वाली नीट यूजी पुनर्परीक्षा से पहले, परीक्षा के सुचारू और सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। इसी क्रमी में अधिकारी शनिवार को देशव्यापी मॉक ड्रिल का आयोजन भी करेंगे।
मॉक ड्रिल सुबह 9 बजे शुरू होगी और देर शाम तक चलेगी। देश भर में इस अभ्यास में 2.5 लाख से अधिक सुरक्षाकर्मियों के भाग लेने की उम्मीद है।
सभी परीक्षा केंद्र नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को सौंप दिए गए हैं। परीक्षा के दिन केंद्रों पर त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू रहेगी।
अधिकारियों के अनुसार, प्रश्न पत्रों और उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षा और संरक्षा की जिम्मेदारी अर्धसैनिक बलों की होगी। देशभर में 5,000 से अधिक परीक्षा केंद्रों की निगरानी सीसीटीवी कैमरों और सुरक्षा कर्मियों के माध्यम से की जाएगी।
सीसीटीवी फुटेज नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के लिए रियल टाइम मॉनिटिरिंग के लिए उपलब्ध रहेंगे। इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की निगरानी और परीक्षा से संबंधित किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के लिए एक हाई लेवल मॉनिटिरिंग सेंटर स्थापित किया गया है।
परीक्षा को देखते हुए सभी जांच और सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है। जिला प्रशासन के अलावा, राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारी भी परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्थाओं की देखरेख करेंगे।
21 जून को होने वाली नीट-यूजी पुनर्परीक्षा के लिए लगभग 22 लाख उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया है। इनमें से लगभग 18 लाख उम्मीदवारों ने अपने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर लिए हैं।
देशव्यापी मॉक ड्रिल का उद्देश्य परीक्षा से पहले तैयारियों, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता का आकलन करना है।
राष्ट्रीय समाचार
लगातार दूसरे दिन सोने की चमक पड़ी फीकी; चांदी में भी छाई सुस्ती

सोने और चांदी की कीमत में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली। इससे सोने का दाम 1.45 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 2.32 लाख रुपए प्रति किलो से नीचे आ गया है।
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 3,123 रुपए कम होकर 1,44,970 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,48,093 रुपए प्रति 10 ग्राम था।
22 कैरेट सोने का दाम 1,35,653 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,32,793 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है। 18 कैरेट सोने की कीमत कम होकर 1,08,728 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,11,070 रुपए प्रति 10 ग्राम थी।
सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है।
चांदी का दाम 8,218 रुपए कम होकर 2,31,93 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,40,191 रुपए प्रति किलो था।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। कॉमेक्स पर सोना 1.68 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,174.47 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 64.91 डॉलर प्रति औंस पर थी।
एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि फेडरल रिजर्व की ओर से 2026 में ब्याज दरें एक बार बढ़ाने के संकेत के बाद सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिल रहा है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ और सोने जैसी बिना रिटर्न वाली संपत्तियों का आकर्षण कम हो गया। फेड के सख्त रुख के कारण बुलियन बाजारों में बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग देखी गई।
उन्होंने आगे कहा कि फेड की पॉलिसी के ऐलान के बाद पिछले कुछ सेशन में कॉमेक्स गोल्ड की कीमत लगभग 4375 डॉलर प्रति औंस से गिरकर 4150 डॉलर प्रति औंस हो गई है, जबकि एमसीएक्स गोल्ड का दाम लगभग 1,54,000 रुपए से घटकर 1,47,200 रुपए पर आ गया। डॉलर के मजबूत होने की संभावना और ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों का असर मार्केट सेंटीमेंट पर पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद एलएनजी टैंकर ‘दिशा’ पहुंचा गुजरात, तीन माह बाद होर्मुज से निकला जहाज

अमेरिका और ईरान में हुए समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल दिया गया है और जहाजों की आवाजाही भी धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। इस बीच एलएनजी टैंकर ‘दिशा’ होर्मुज स्ट्रेट को पार करके गुजरात के दाहेज पोर्ट पर सफलतापूर्वक पहुंच गया है। तीन महीने से ज्यादा के इंतजार के बाद, इसने 62,370 मीट्रिक टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) का कार्गो पहुंचाया है।
जहाज के ट्रैकिंग डेटा से मिली जानकारी के मुताबिक यह जहाज बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच खाड़ी इलाके में खड़ा था। अमेरिका-ईरान समझौते के बाद यह शुक्रवार सुबह करीब 7:32 बजे दाहेज टर्मिनल पर पहुंचा।
एलएनजी कार्गो को कतर के रास लफ्फान एलएनजी टर्मिनल पर लोड किया गया। टैंकर 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी ले जा रहा है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक संवेदनशील समय के दौरान भारत की ऊर्जा सप्लाई चेन के लिए एक बड़ी डिलीवरी है।
जहाज दिशा को शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम के तहत चलाया जा रहा है और इसे पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड के लिए किराए पर लिया गया है। जहाज का होर्मुज स्ट्रेट से सफल ट्रांजिट ऐसे समय में हुआ है जब इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है, जिससे दुनिया भर के मुख्य शिपिंग लेन की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
सूत्रों ने बताया कि टैंकर अपनी यात्रा पूरी करने से पहले तीन महीने से ज्यादा समय तक खाड़ी क्षेत्र में रहा था। तेल और गैस शिपमेंट के लिए दुनिया के सबसे जरूरी समुद्री चोकपॉइंट्स में से एक, होर्मुज स्ट्रेट से इसका सुरक्षित गुजरना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी माना गया है।
भरूच में दाहेज एलएनजी टर्मिनल भारत का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस इंपोर्ट हब है और देश के नेचुरल गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में अहम भूमिका निभाता है।
दिशा के आने से एलएनजी की उपलब्धता बढ़ने और इंडस्ट्रियल और घरेलू खपत के लिए स्थिर ऊर्जा सप्लाई को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
पश्चिम एशिया में हाल के भू-राजनीतिक तनाव के बीच एलएनजी कैरियर के सुरक्षित आने से भारत के ऊर्जा क्षेत्र के स्टेकहोल्डर्स को राहत मिली है। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए एक जरूरी रास्ता बना हुआ है और इस इलाके में कोई भी रुकावट वैश्विक तेल और गैस सप्लाई चेन पर प्रभाव डाल सकती है।
इस यात्रा का सफलतापूर्वक पूरा होना भारत में बिना रुकावट ऊर्जा इम्पोर्ट के लिए सुरक्षित समुद्री रास्तों के महत्व को दिखाता है।
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