मुंबई प्रेस एक्सक्लूसिव न्यूज
सुपर स्टार दिनेशलाल यादव निरहुआ की अपकमिंग फिल्म “बलमा बड़ा नादान 2” का फर्स्ट लुक हुआ वायरल
भोजपुरी सिनेमा के जुबली स्टार दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ एक बार फिर अपने दर्शकों के दिलों पर छाने के लिए तैयार हैं। उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बलमा बड़ा नादान 2’ का धांसू फर्स्ट लुक रिलीज़ होते ही सोशल मीडिया पर धमाल मचा रहा है। इस पोस्टर में निरहुआ सेहरे में सजे नजर आ रहे हैं, जो फिल्म की कहानी में शादी और रिश्तों से जुड़े रोचक मोड़ की ओर इशारा करता है। पोस्टर में उनका गंभीर और प्रभावशाली अंदाज दर्शकों की उत्सुकता को और बढ़ा रहा है। फिल्म का यह फर्स्ट लुक MADZ मूवीज और आलम ब्रदर्स प्रोडक्शन के बैनर तले पेश किया गया है, जिसे ग्लोबल म्यूजिक जंक्शन और राजकुमार सिंह प्रस्तुत कर रहे हैं।
फिल्म को लेकर निरहुआ ने कहा कि यह सिर्फ एक मनोरंजक कहानी नहीं है, बल्कि इसमें भावनाओं, रिश्तों और समाज के बदलते नजरिए को भी दिखाया गया है। उन्होंने बताया कि पहले भाग को दर्शकों ने जिस तरह प्यार दिया, उसने टीम का हौसला बढ़ाया है और इस बार इसे और बड़े स्तर पर बनाया गया है। उनके अनुसार, फिल्म में दर्शकों को दमदार एक्शन, दिल को छू लेने वाले गाने और पारिवारिक ड्रामा का ऐसा मेल मिलेगा, जो उन्हें शुरू से अंत तक बांधे रखेगा। निरहुआ ने कहा कि पोस्टर में जो लुक दिख रहा है, वह फिल्म की कहानी के अहम मोड़ से जुड़ा है और दर्शक थिएटर में इसे देखकर जरूर चौंक जाएंगे।
इस फिल्म का निर्देशन और कथा लेखन महमूद आलम ने किया है, जो भोजपुरी इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान रखते हैं। निर्माता महमूद आलम और समीर आफताब ने इस फिल्म के निर्माण में कोई कमी नहीं छोड़ी है, जबकि सह-निर्माता मकसूद आलम, मंसूर आलम, सल्लाउद्दीन और साहेब हुसैन ने इसे मजबूती दी है। फिल्म के गीत प्यारे लाल यादव, विनय बिहारी और जाहिद अख्तर ने लिखे हैं, जबकि संगीत मधुकर आनंद का है, जिनके गीत और धुनें भोजपुरी दर्शकों के बीच पहले से ही बेहद लोकप्रिय हैं।
फिल्म की पटकथा एस. के. चौहान और महमूद आलम ने मिलकर तैयार की है, जबकि संवादों को दमदार अंदाज देने का काम संदीप कुशवाहा ने किया है। छायांकन सुनील अहेर का है, जो अपनी लाजवाब सिनेमैटोग्राफी के लिए जाने जाते हैं। एक्शन का जिम्मा दिलीप यादव के हाथों में है, वहीं संपादन गुल मोहम्मद अंसारी ने संभाला है। नृत्य निर्देशन एम. के. गुप्ता (ज्वाय) ने किया है और कला निर्देशन नाजीर शेख का है, जिससे फिल्म का हर फ्रेम जीवंत नजर आता है।
ट्रेलर एडिटिंग का जिम्मा विकास पवार ने संभाला है, जबकि कार्यकारी निर्माता अजय सिंह मल्ल और आशीष दुबे हैं। फिल्म को मजबूत बनाने में सह-निर्देशक अमर गुप्ता, नटवर नागर, पियूष, शिवम और मोहित का भी योगदान है। पोस्ट प्रोडक्शन साहिल स्टूडियो में हुआ है और प्रचार की जिम्मेदारी रंजन सिन्हा ने संभाली है, जबकि डिजाइनर प्रशांत ने फिल्म के पोस्टर्स को आकर्षक रूप दिया है।
कलाकारों की बात करें तो फिल्म में निरहुआ के साथ ऋचा दीक्षित, विजय महादेव गोस्वामी, पुष्पा वर्मा, संजय पांडेय, मनोज सिंह टाइगर, अनूप अरोड़ा, अंजली चौहान, कादिर शेख, रत्नेश वर्मावाल, नीलम पांडेय, जय प्रसाद, फारुख अंसारी, कलामुदिन, दिनेश लहरी और रवि राज जैसे दिग्गज और प्रतिभाशाली कलाकार नजर आएंगे।
मुंबई प्रेस एक्सक्लूसिव न्यूज
स्थानीय निकाय चुनावों से अजित पवार को झटका, गठबंधन नेता चुनाव प्रक्रिया से हटे

ajit pawar
मुंबई: मुंबई में चुनावी गहमागहमी के बीच अजित पवार को बड़ा झटका लगा है। पिंपरी चिंचवड़ और पुणे में अजित पवार का चुनावी गणित फेल हो गया है। इसलिए सवाल उठ रहा है कि अब असल में क्या होगा। अजित पवार के ग्रुप के बड़े नेताओं ने गठबंधन छोड़ दिया है। लोकल बॉडी इलेक्शन की वजह से राज्य में माहौल गरमा गया है। जैसे-जैसे वोटिंग की तारीख पास आ रही है, कैंपेन अब पूरे ज़ोरों पर है। राज्य के बड़े नेता पूरे राज्य में मीटिंग कर रहे हैं। इन नेताओं की मीटिंग में लोगों की अच्छी भीड़ देखी जा रही है। राज्य की सभी पार्टियां मुंबई, ठाणे, नासिक जैसे ज़रूरी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन जीतने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। पुणे और पिंपरी चिंचवड़ दोनों म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन बराबर ज़रूरी हैं और राज्य के डिप्टी चीफ मिनिस्टर अजित पवार बड़ी मजबूती के साथ आए हैं। लेकिन अब अजित पवार को सबसे बड़ा झटका लगा है। दादा को यह ज़ोरदार झटका तब लगा है जब कैंपेन अपने पीक पर पहुंच गया है। इसलिए पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में चुनावी गणित बदलने वाला है। अजित पवार ने दलित वोटरों को लुभाने के लिए RPI (खरात) ग्रुप के साथ गठबंधन किया था। लेकिन अब अजित पवार को RPI (खरात ग्रुप) पार्टी के चीफ सचिन खरात ने बड़ा झटका दिया है। सचिन खरात ने अचानक लोकल बॉडी इलेक्शन से नाम वापस ले लिया है। उन्होंने यह भी ऐलान किया है कि वे किसी भी कैंडिडेट को सपोर्ट नहीं करेंगे। अजित पवार ने खरात को पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में दलित वोटरों के लिए कुछ सीटें दी थीं। लेकिन अब खरात खुद इलेक्शन से हट गए हैं, जिससे अजित के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। सचिन खरात ने एक वीडियो के ज़रिए अपना स्टैंड बताया है। खरात ने इस वीडियो में कहा है कि “मुझे इज्ज़त से कोई सीट नहीं मिली है। इसलिए, मैं महाराष्ट्र में अभी चल रहे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन इलेक्शन के चुनावी प्रोसेस से नाम वापस ले रहा हूं। मैं किसी भी हालत में किसी भी पार्टी या किसी भी कैंडिडेट को सपोर्ट नहीं करता हूं,” खरात ने इस वीडियो में कहा है। तो अब अजित पवार क्या करेंगे? यह देखना ज़रूरी है।
महाराष्ट्र
अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता से बाहर हुई शिवसेना, भाजपा-कांग्रेस का अप्रत्याशित गठबंधन

BJP CONGRES
ठाणे: अंबरनाथ नगर परिषद की राजनीति में एक चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। हाल ही में संपन्न नगर परिषद चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस ने मिलकर गठबंधन बनाया, जिससे शिवसेना सत्ता से बाहर हो गई, जबकि वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।
चुनाव परिणामों में शिवसेना को सबसे अधिक सीटें मिलीं, लेकिन वह पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर सकी। इस स्थिति का लाभ उठाते हुए भाजपा ने कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के साथ मिलकर बहुमत का आंकड़ा पार किया और नगर परिषद में नई सत्ताधारी व्यवस्था स्थापित की।
नए गठबंधन ने विकास और स्थिर प्रशासन को अपना प्रमुख उद्देश्य बताते हुए कहा कि स्थानीय निकायों में कामकाज को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि पारंपरिक राजनीतिक मतभेदों को। गठबंधन के तहत भाजपा को नगर परिषद में प्रमुख पद मिला, जबकि सहयोगी दलों को भी सत्ता में हिस्सेदारी दी गई।
इस घटनाक्रम पर शिवसेना ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे जनादेश के साथ विश्वासघात बताया और आरोप लगाया कि सत्ता के लिए वैचारिक मतभेदों को दरकिनार कर दिया गया है। शिवसेना नेताओं ने कहा कि पार्टी एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएगी और जनता से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरी स्थानीय निकायों में अब ऐसे गठबंधन आम होते जा रहे हैं, जहाँ सीटों का गणित और स्थानीय समीकरण राष्ट्रीय या राज्य स्तर की राजनीति से अलग दिशा तय करते हैं।
अंबरनाथ नगर परिषद में बना यह नया सत्ता समीकरण महाराष्ट्र की नगर राजनीति में बदलते रुझानों की ओर इशारा करता है और आने वाले समय में अन्य नगर निकायों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
महाराष्ट्र
फुटपाथ से उठाकर विधायक बनाया, लेकिन पार्टी के लिए कुछ नहीं किया: अबू आसिम आज़मी का रईस शेख पर बड़ा हमला

मुंबई: (कमर अंसारी) समाजवादी पार्टी महाराष्ट्र में अंदरूनी गुटबाज़ी अब खुलकर सामने आ गई है। महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अबू आसिम आज़मी ने एक निजी यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में पार्टी के भिवंडी से विधायक रईस शेख पर तीखा हमला बोला है। आज़मी ने दावा किया कि उन्होंने रईस शेख को “फुटपाथ से उठाकर समाजवादी पार्टी की सीट पर विधायक बनाया”, लेकिन रईस शेख ने कभी भी पार्टी के हित में कोई काम नहीं किया।
अबू आसिम आज़मी ने आरोप लगाया कि रईस शेख लगातार समाजवादी पार्टी के खिलाफ काम कर रहे हैं और उन्हें नैतिकता के आधार पर खुद ही पार्टी से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि रईस शेख ने भिवंडी महानगरपालिका और मुंबई महानगरपालिका चुनावों के लिए उम्मीदवारों के इंटरव्यू खुद लिए और टिकट वितरण में भी दखल दिया। इतना ही नहीं, समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को हराने के लिए उनके सामने कांग्रेस के उम्मीदवार उतारे गए।
आज़मी के मुताबिक, जब पार्टी ने रईस शेख के भाई को टिकट देने से इनकार कर दिया, तो इसी नाराज़गी के चलते उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों के खिलाफ अपने समर्थकों को कांग्रेस की टिकट पर चुनाव मैदान में उतार दिया। अबू आसिम आज़मी ने यह भी आरोप लगाया कि रईस शेख परिवारवाद को बढ़ावा देना चाहते थे, जिसका पार्टी ने विरोध किया और इसी कारण टिकट देने से मना कर दिया गया।
दूसरी ओर, रईस शेख अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि वे वास्तव में किस पार्टी के साथ हैं। एक तरफ उनके समर्थन से कांग्रेस के उम्मीदवार चुनाव लड़ते नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने समाजवादी पार्टी से औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया है। अबू आसिम आज़मी ने कहा कि जल्द ही जनता के सामने रईस शेख का “दोहरा चेहरा” उजागर हो जाएगा। उन्होंने महानगरपालिका चुनावों के बाद रईस शेख के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत भी दिए हैं।
वहीं, रईस शेख का कहना है कि कई राजनीतिक पार्टियां उनकी अनुमति के बिना उनके फोटो का इस्तेमाल कर वोट हासिल करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि समाजवादी पार्टी के टिकट वितरण के किसी भी फैसले में वे शामिल नहीं थे और पार्टी ने उन्हें पहले ही साइडलाइन कर दिया था। रईस शेख के अनुसार, जो उम्मीदवार कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे हैं, उन्हें टिकट कांग्रेस पार्टी ने ही दिया है और इसका उनसे कोई लेना-देना नहीं है।
इस पूरे विवाद के बीच समाजवादी पार्टी के मुस्लिम वोटर असमंजस की स्थिति में हैं। वे यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि रईस शेख के समर्थन से उतरे कांग्रेस उम्मीदवारों को वोट दें या समाजवादी पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों को, क्योंकि इस चुनाव में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि आखिर कौन किसके साथ है।
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