अंतरराष्ट्रीय
डोनाल्ड ट्रंप का 50 प्रतिशत वाला टैरिफ बम, भारत के लिए ‘अब्बा-डब्बा-जब्बा’
PM MODI
नई दिल्ली, 8 अगस्त। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा रह-रहकर भारत को टैरिफ का दिखाया जा रहा डर अब उनके लिए ही परेशानी का कारण बनता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से अमेरिका भारत के खिलाफ टैरिफ बम फोड़ने की धमकी दे रहा है, उसका माकूल जवाब भारत सरकार की तरफ से दिया जा रहा है।
दरअसल, भारत एक ऐसा वैश्विक बाजार बन चुका है, जिसकी जरूरत दुनिया के देशों को अपना व्यापार चलाने के लिए है। इसकी सबसे बड़ी वजह भारत की परचेजिंग पावर पैरिटी है। भारत इस मामले में अमेरिका से आगे है और यही वजह है कि भारत के बाजार पर पूरी दुनिया की नजर है।
पिछले कुछ दिनों में भारत को अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा दी जा रही टैरिफ धमकी का जवाब जिस तरह से दिया जा रहा है, वह भारत की वैश्विक ताकत को दिखाता है। एक तरफ जहां भारत के खिलाफ टैरिफ की धमकी अमेरिका के राष्ट्रपति दे रहे हैं तो उनका जवाब भारत की तरफ से देने के लिए विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता सामने आ रहे हैं। मतलब दुनिया के सबसे ताकतवर देश होने का दंभ भरने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति की धमकी का जवाब भी भारत के प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री स्तर के नेता के द्वारा नहीं दिया जा रहा है।
अब एक बार भारत की तरफ से किए गए निश्चय पर ध्यान दें तो आपको पता चल जाएगा कि आखिर भारत अमेरिका की टैरिफ वाली धमकी को इतनी गंभीरता से क्यों नहीं ले रहा है। भारत ने ट्रंप की टैरिफ वाली धमकी पर जो जवाब दिया है, उसका संदेश साफ है। भारत की तरफ से दिए गए जवाब को देखेंगे तो इससे स्पष्ट होता है कि अमेरिका के टैरिफ की भारत को कोई चिंता नहीं है और इसकी सबसे बड़ी वजह भारत का खुद आत्मनिर्भर बनना है। चाहे वह रक्षा का मामला हो या सुरक्षा का। दूसरी तरफ यह भी देखा जा रहा है कि अमेरिका से डील की किसी डेडलाइन की चिंता भारत में दिख नहीं रही है और सरकार की तरफ से साफ संदेश जा रहा है कि भारत प्रेशर में आने वाला नहीं है, ना ही प्रेशर में आकर कोई डील करेगा। इसके साथ ही भारत ट्रंप की मंशा भी अच्छी तरह से समझ रहा है कि अमेरिका भारत के पूरे बाजार में बेरोकटोक एक्सेस चाहता है जो किसी हाल में भारत देने को तैयार नहीं है।
इसके साथ ही नरेंद्र मोदी सरकार देश के किसानों और छोटे व्यवसायियों को किसी भी हाल में नुकसान होने देने के मूड में नहीं दिख रही है। वहीं, अमेरिका की तरफ से इस टैरिफ धमकी के जरिए इस पर भी दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है कि भारत अपने सबसे पुराने मित्र रूस से अपनी दोस्ती समाप्त कर ले तो भारत का यह संदेश भी स्पष्ट है कि ऐसा कभी होने वाला नहीं है।
भारत की अर्थव्यवस्था को ‘डेड’ बताने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को भी पता है कि भारत का बाजार जिस दिन अमेरिका के लिए बंद हुआ, उस दिन उनकी कई कंपनियों पर ताले लग जाएंगे। इसकी सबसे बड़ी वजह भारत की परचेजिंग पावर पैरिटी है। अब एक बार जानिए कि परचेजिंग पावर पैरिटी है क्या?
दरअसल, क्रय-शक्ति समता (परचेजिंग पावर पैरिटी- पीपीपी) अंतरराष्ट्रीय विनिमय का एक सिद्धांत है। जिसको आसान भाषा में समझिए कि यह एक-दूसरे देश में जीवन शैली पर किए गए व्यय के अनुपात को दर्शाता है। इसके अनुसार विभिन्न देशों में एकसमान वस्तुओं की कीमत समान रहती है। मतलब परचेजिंग पावर पैरिटी विभिन्न देशों में कीमतों का माप है, जो देशों की मुद्राओं की पूर्ण क्रय शक्ति की तुलना करने के लिए विशिष्ट वस्तुओं की कीमतों का उपयोग करती है।
यानी प्रत्येक देश में सामान और सेवाएं खरीदने के लिए एक देश की मुद्रा को दूसरे देश की मुद्रा में परिवर्तित करना होता है। अब इसे ऐसे समझें कि भारत के मध्यम वर्ग के लिए एक साल का बजट अगर 25 लाख का होता है, तो अमेरिका के मध्यम वर्गीय परिवार के लिए यही बजट यहां की मुद्रा के अनुसार 80 लाख से ज्यादा होता है।
अब भारत ने अमेरिका के उस दोहरे रवैये को भी उजागर कर दिया है, जिसमें अमेरिका भारत को रूस से दोस्ती और व्यापार खत्म करने के लिए धमकी दे रहा है। वहीं, वह खुद रूस से भारी मात्रा में तेल, गैस और फर्टिलाइजर खरीदता है।
हालांकि, भारत का विपक्ष अमेरिकी राष्ट्रपति के भारत के ‘डेड’ इकोनॉमी वाले दावे पर सरकार को घेरने की कोशिश तो कर रहा है। लेकिन, विपक्ष के शशि थरूर, मनीष तिवारी और राजीव शुक्ला के साथ कई अन्य नेता भी हैं, जो ट्रंप के इस दावे को भद्दा मजाक तक बता दे रहे हैं। मतलब भारत में तो ट्रंप के दावे को भी मजाक में ही लिया जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की सत्ता में वापसी के बाद दुनिया के 70 से ज्यादा देशों पर टैरिफ बम फोड़ रखा है और उसे भी यह पता है कि इससे अमेरिका को भी बड़ा नुकसान होने वाला है। इसको सबसे पहले टेस्ला के मालिक एलन मस्क ने समझा और उन्होंने सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति का विरोध करते हुए उनका साथ छोड़ दिया। ट्रंप के टैरिफ बम वाले दिखावे की वजह से अमेरिका के उद्योगपति भी घबराए हुए हैं। डोनाल्ड ट्रंप के साथ जिन देशों ने ट्रेड डील करने का दावा किया, उन्हें भी इस टैरिफ के मामले में नहीं बख्शा गया है। अब पाकिस्तान को हीं देख लें, जिस देश का सेना प्रमुख डोनाल्ड ट्रंप के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग कर रहा है, उस पर भी ट्रंप ने 19 प्रतिशत टैरिफ ठोंक रखा है।
वैसे भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की व्यापक सफलता के बाद से भारत में निर्मित हथियारों की दुनिया में तेजी से मांग बढ़ी है। ऐसे में अमेरिका, जो अपने आप को आधुनिक हथियारों का सबसे बड़ा डीलर मानता है, उसकी चिंता ज्यादा बढ़ गई है।
दूसरा, भारत तेल की खरीदारी भी भारी मात्रा में रूस से करता है, जबकि अमेरिका इस पर भी नजरें गड़ाए बैठा है कि भारत रूस को छोड़कर उससे तेल का सौदा करे। लेकिन, इस सब के बीच जैसे ही ट्रंप ने भारत के खिलाफ 50 प्रतिशत टैरिफ की बात कही, उससे पहले पीएम मोदी के चीन दौरे और फिर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे की खबर ने उसकी बेचैनी बढ़ा दी है। अमेरिका जानता है कि रूस, चीन और भारत अगर एक बेस पर आ गए तो अमेरिका के लिए यह बड़ा महंगा पड़ सकता है। डोनाल्ड ट्रंप भी इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि भारत के खिलाफ जो उनका टैरिफ बम है, वह उनके देश की सेहत को भी नुकसान पहुंचाएगा। अमेरिका में दवाएं, ज्वेलरी, गोल्ड प्लेटेड गहने, स्मार्टफोन, तौलिये, बेडशीट, बच्चों के कपड़े तक महंगे हो जाएंगे।
अभी ये तो भारत की बात थी, लेकिन देखिए कैसे अमेरिका के खिलाफ दुनिया के और देश आगे आए हैं। भारत की वैश्विक ताकत का अंदाजा इससे लगाइए कि अभी कुछ दिन पहले विदेशी मीडिया की खबरों के अनुसार ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने अमेरिकी टैरिफ के मुद्दे को सुलझाने के लिए ट्रंप से बात करने के सवाल पर साफ कह दिया कि उन्हें इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। इसके बजाय वे भारत के पीएम नरेंद्र मोदी को कॉल कर लेंगे, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को कॉल कर लेंगे, लेकिन वे ट्रंप को कॉल नहीं करेंगे।
लूला ने जो कहा उसके अनुसार, ”मैं ट्रंप को कॉल नहीं करूंगा क्योंकि वे बात ही नहीं करना चाहते हैं, मैं शी जिनपिंग को कॉल करूंगा, मैं पीएम मोदी को कॉल करूंगा, मैं पुतिन को इस समय कॉल नहीं करूंगा क्योंकि वे अभी यात्रा करने की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन मैं कई और राष्ट्रपतियों को कॉल करूंगा।”
लूला के इस बयान से ट्रंप को कैसी मिर्ची लगी होगी, यह तो सभी जानते हैं। उधर, पीएम मोदी का जिस अंदाज में लूला ने नाम लिया, वह भी ट्रंप के लिए चुभने वाला है। लूला ने तो ट्रंप की नीतियों को “ब्लैकमेल” बताते हुए साफ कर दिया कि अमेरिका ब्राजील पर टैरिफ लगाकर देखे, ब्राजील भी इसका जवाब शुल्क लगाकर देगा।
इसके साथ ही भारत और रूस की दोस्ती ही केवल अमेरिकी राष्ट्रपति की घबराहट की वजह नहीं है। दरअसल, भारत-पाकिस्तान और कंबोडिया और थाइलैंड के बीच सीजफायर को लेकर ट्रंप ने जैसे अपनी पीठ बिना किसी बात के थपथपाई वही कोशिश वह रूस-यूक्रेन के बीच भी सीजफायर होने के बाद करना चाह रहे थे। लेकिन, यूक्रेन-रूस की जंग रोकने के लिए ट्रंप ने जितने हथकंडे अपनाए सब फेल हो गए। पुतिन को ट्रंप ने हाई टैरिफ की धमकी भी दी, लेकिन रूस पर फिर भी कोई असर नहीं पड़ा तो ट्रंप बैखला गए। इसके बाद ट्रंप ने रूस के मित्र देशों और उनके साथ व्यापार करने वालों को निशाना बनाना शुरू किया। इसमें सबसे पहले ट्रंप के निशाने पर भारत, चीन और ब्राजील आए, लेकिन तीनों ही देशों पर ट्रंप की धमकी का वैसा ही असर पड़ा, जैसा रूस पर पड़ा था। अब ट्रंप गुस्से से आग बबूला होकर लगातार बयानबाजी कर रहे हैं।
वहीं, ट्रंप ब्रिक्स देशों के फाउंडर रहे भारत के खिलाफ तो टैरिफ की धमकी दे ही रहे हैं। वह ब्रिक्स में शामिल अन्य देशों के खिलाफ भी 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ की धमकी दे चुके हैं। ब्रिक्स दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है, जिसमें, ब्राजील, रूस, भारत, चीन, साउथ अफ्रीका, ईरान, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात शामिल है। इन ब्रिक्स देशों की तरफ से एक-दूसरे से अपनी करेंसी में ट्रेड किया जाता है, वहीं इस समूह ने एक प्रपोजल भी दिया था कि इन देशों के बीच ट्रेड के लिए एक इंटरनेशनल करेंसी तैयार की जाए, ऐसे में डॉलर पर बड़े देशों या कहें कि उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों की निर्भरता कम हो जाने से अमेरिका का विश्व में प्रभुत्व बरकरार रखने पर भी खतरा मंडराएगा। ट्रंप को यह चिंता भी सता रही है।
जिस तरह से भारत डोनाल्ड ट्रंप की तमाम धमकियों के बाद भी अपने रुख पर अड़ा हुआ है और भारतीय बाजार को अमेरिका के लिए उसकी शर्तों पर खोलने के लिए तैयार नहीं हो रहा है। इससे भी ट्रंप के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ उभर आई हैं। ऐसे में अब ट्रंप को भारत से जिस भाषा में जवाब मिल रहा है, वह स्पष्ट संकेत दे रहा है कि अमेरिका की टैरिफ धमकी भारत के लिए ‘अब्बा-डब्बा-जब्बा’ जैसी है, इससे ज्यादा कुछ नहीं।
अंतरराष्ट्रीय
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामना देने पर इजरायल के राष्ट्रपति और पीएम नेतन्याहू को प्रधानमंत्री मोदी ने कहा धन्यवाद

नई दिल्ली, 16 अगस्त: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति हर्जोग की ओर से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुभकामना दिए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका धन्यवाद अदा किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “प्रधानमंत्री नेतन्याहू, आपकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। भारत-इजरायल की विशेष रणनीतिक साझेदारी और मजबूत हो, जिससे नए अवसर खुलें और हमारे देशों के लोगों के बीच गहरे संबंध बनें।
इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग की ओर से शुभकामना देने पर पीएम मोदी ने उनको धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा गया, “राष्ट्रपति हर्जोग, आपकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। भारत इजरायल के साथ अपनी दोस्ती को बहुत महत्व देता है। हम अपने लोगों के फायदे के लिए अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
बीते दिन शनिवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा गया था, “भारत और मेरे प्यारे दोस्त नरेंद्र मोदी को 80वें स्वतंत्रता दिवस की बधाई। भारत और इजरायल को एक साल के अंतर से आजादी मिली। हम दो प्राचीन देश हैं जो अपने लोगों के लिए बेहतर जीवन लाने के लिए मिलकर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं। हमारी इनोवेशन और दोस्ती की कोई सीमा नहीं है। सबसे अच्छा समय तो अभी आना बाकी है!”
इजरायल के राष्ट्रपति की ओर से सोशल मीडिया पर लिखा गया था, “इजरायल की ओर से, मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के शानदार लोगों को आपके 80वें स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक बधाई देता हूं! हम इजरायल और भारत के बीच की खूबसूरत दोस्ती को और मजबूत करते रहें।”
बता दें कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को देशभर में जश्न का माहौल रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से ध्वजारोहण किया था। इस दौरान उन्होंने 75 मिनट तक देशवासियों को संबोधित किया था। देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि आज हम सभी के लिए एक ऐतिहासिक पल है। 80 साल बाद स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर पहली बार ‘वंदे मातरम’ गाया गया। हम 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने की दिशा में काम करेंगे। यह 140 करोड़ से ज्यादा देशवासियों की सामूहिक आवाज है।
व्यापार
फुकेट-दिल्ली एयर इंडिया उड़ान में 4 सेकंड के लिए फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम ने काम करना बंद किया, विमान 300 फीट नीचे गिरा: रिपोर्ट

एयर इंडिया की फुकेट से नई दिल्ली आ रही फ्लाइट एआई2379 से जुड़े 4 अगस्त के घटनाक्रम में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एयरबस ए320नियो विमान ने उड़ान के दौरान लगभग चार सेकंड के लिए अपने प्रमुख फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम पर नियंत्रण खो दिया था, जिसके चलते विमान करीब 300 फीट नीचे आ गया और कम से कम 24 यात्री एवं चालक दल के सदस्य घायल हो गए।
एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, यह जानकारी विमान निर्माता एयरबस द्वारा विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर) के प्रारंभिक विश्लेषण से सामने आई है। घटना के समय विमान में 137 यात्री और 8 क्रू सदस्य, यानी कुल 145 लोग सवार थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में एक साथ असामान्यता आने के कारण विमान के महत्वपूर्ण नियंत्रण तंत्र प्रभावित हो गए। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि विमान के एलेवेटर और एलेरॉन, जो विमान की ऊंचाई और रोल नियंत्रित करते हैं, कुछ समय के लिए सामान्य हाइड्रोलिक नियंत्रण से बाहर हो गए थे। इसके अलावा स्पॉइलर सिस्टम के संचालन पर भी असर पड़ा।
एयरबस के डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक, लगभग चार सेकंड तक एलेवेटर और एलेरॉन बिना पायलट के निर्देश के स्वतः विचलित होते रहे। इस दौरान विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में गड़बड़ी दर्ज की गई।
घटना के दौरान विमान का ऑटोपायलट सिस्टम स्वतः डिस्कनेक्ट हो गया। इसके बाद विमान उड़ा रहे सह-पायलट ने स्टॉल वार्निंग मिलने पर नियंत्रण संभालते हुए साइड-स्टिक को आगे की ओर दबाया। हालांकि उस समय हाइड्रोलिक शक्ति उपलब्ध नहीं होने के कारण नियंत्रण संबंधी इनपुट का अपेक्षित प्रभाव तुरंत नहीं पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही कुछ सेकंड बाद हाइड्रोलिक सिस्टम दोबारा सक्रिय हुए, पायलट द्वारा दिए गए नियंत्रण इनपुट प्रभावी हो गए। इसके परिणामस्वरूप विमान अचानक नीचे की ओर झुक गया, जिससे केबिन के भीतर कई यात्री और क्रू सदस्य अपनी सीटों से उछल गए और कई लोग घायल हो गए।
घटना के बाद विमान के फ्लाइट डेटा को विश्लेषण के लिए एयरबस के फ्रांस स्थित टूलूज में मौजूद तकनीकी सहायता केंद्र एआईआरटीएसी को भेजा गया। मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है।
इस बीच, एयर इंडिया ने सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने के लिए 13 अगस्त से समूह के सभी पायलटों की अनिवार्य ड्रग स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। यह कदम हालिया घटना के बाद उठाया गया है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि एआई2379 के पायलट-इन-कमांड ने बाद में किए गए पुष्टिकरण परीक्षण में मारिजुआना के लिए सकारात्मक परिणाम दिया। हालांकि इस संबंध में एयर इंडिया या नियामक अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत टिप्पणी सामने नहीं आई है।
व्यापार
भारत में स्थापित ऊर्जा क्षमता 552 गीगावाट हुई, गैर-जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी करीब 54 प्रतिशत

भारत की कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता बढ़कर जुलाई 2026 तक 552 गीगावाट हो गई है, जो कि 2014 में 249 गीगावाट थी। इसमें गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा की हिस्सेदारी 300.50 गीगावाट (31 जुलाई, 2026 तक) हो गई है, जो कि कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता का 54 प्रतिशत से अधिक है। वैश्विक स्तर पर स्थापित रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में भारत तीसरे स्थान पर है और भारत में स्थापित सोलर एनर्जी क्षमता 164.59 गीगावाट (31 जुलाई, 2026) है, जो कि 2014 में 2.8 गीगावाट थी।
फैक्टशीट के अनुसार, “सोलर अब भारत की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता का सबसे बड़ा हिस्सा है। 2025 में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर ग्रोथ मार्केट बन गया। इसने 37 गीगावाट से ज्यादा सोलर क्षमता जोड़ी, जबकि अमेरिका ने 34 गीगावाट क्षमता जोड़ी थी।” फरवरी 2024 में 1 करोड़ घरों के लिए कुल 75,021 करोड़ रुपए के बजट के साथ शुरू की गई पीएम-सूर्या घर मुफ्त बिजली योजना के तहत, देश भर में 51.58 लाख घरों (12 अगस्त, 2026 तक) को रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन का फायदा मिला है।
लाभार्थियों को लगभग 28,024 करोड़ रुपए की सब्सिडी ट्रांसफर की गई है। अब लगभग 19 लाख घरों का बिजली बिल जीरो आ रहा है। फैक्टशीट के अनुसार, इस स्कीम के तहत अब तक कुल 14.8 गीगावाट की रूफटॉप सोलर क्षमता लगाई जा चुकी है। 58.14 गीगावाट की स्थापित क्षमता (31 जुलाई तक) के साथ, विंड एनर्जी भारत के रिन्यूएबल एनर्जी विस्तार का एक अहम हिस्सा बनी हुई है। स्थापित विंड पावर क्षमता के मामले में भारत दुनिया में चौथे स्थान पर है। इस सेक्टर में सालाना बढ़ोतरी और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग में भी तेजी देखी जा रही है।
भारत ने वित्त वर्ष 2025–26 में 6.05 गीगावाट क्षमता जोड़ी, जो अब तक की सबसे ज्यादा सालाना विंड क्षमता बढ़ोतरी है और वित्त वर्ष 2024–25 की तुलना में 46 प्रतिशत ज्यादा है। लगभग 28 गीगावाट की अतिरिक्त विंड क्षमता पर काम चल रहा है। खास बात यह है कि विंड टरबाइन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 2014 में 10 गीगावाट से बढ़कर लगभग 24 गीगावाट (मार्च 2026) हो गई है। इस सेक्टर ने मुख्य कंपोनेंट्स में 70–80 प्रतिशत स्वदेशीकरण हासिल कर लिया है। इस बीच, भारत की एनर्जी सिक्योरिटी और बिजली सप्लाई में कोयला अहम भूमिका निभाता आ रहा है। यह देश की प्राथमिक ऊर्जा जरूरतों का लगभग 55 प्रतिशत पूरा करता है और बिजली उत्पादन में 70 प्रतिशत से ज्यादा योगदान देता है।
भारत के पास लगभग 4,00,715 मिलियन टन कोयले का भंडार है और यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक और उपभोक्ता देश है। देश ने वित्त वर्ष 2024-25 में 1,047.52 मिलियन टन और वित्त वर्ष 2025-26 में 1,040.08 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया, जबकि वित्त वर्ष 2014-15 में यह उत्पादन 609.18 मिलियन टन था।
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