राष्ट्रीय समाचार
बीएसएनएल की रिव्यू मीटिंग में बोले सिंधिया, परिचालन रणनीति में सेवा की गुणवत्ता और ग्राहक अनुभव को दें प्राथमिकता
नई दिल्ली, 28 जुलाई। भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) की रिव्यू मीटिंग में सोमवार को केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम.सिंधिया ने सोमवार को कहा कि कंपनी की परिचालन रणनीति में सेवा की गुणवत्ता (क्यूओएस) और ग्राहक अनुभव को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
मीटिंग के दौरान केंद्रीय ने कहा, “सेवा की गुणवत्ता और ग्राहक संबंध प्रबंधन में सुधार बीएसएनएल की परिचालन रणनीति का केंद्र बिंदु बने रहना चाहिए। अगर आप सेवा की गुणवत्ता में सुधार करते हैं, तो ग्राहक भी आपके पास आएंगे। प्रत्येक रणनीतिक योजना सेवा की गुणवत्ता में मापनीय सुधार और उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करने पर आधारित होनी चाहिए।”
इस बैठक में राज्य मंत्री पेम्मासानी चन्द्र शेखर के साथ पूरे देश के 32 सर्किल में मौजूद सभी चीफ जनरल मैनेजर्स (सीजीएम) शामिल हुए।
सरकार की ओर से बताया गया कि इस उच्च-स्तरीय बैठक में बीएसएनएल की परिचालन प्रगति की समीक्षा की गई, क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान किया गया और कंपनी के नेटवर्क एवं सेवा वितरण के लिए आगे की रणनीति की रूपरेखा तैयार की गई। इस बैठक में संचार राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर और दूरसंचार विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
बैठक में रिव्यू के दौरान बीएसएनएल की विकास रणनीति, नेटवर्क प्रदर्शन में सुधार, ग्राहक सेवा वितरण और संगठनात्मक आधुनिकीकरण पर व्यापक चर्चा हुई।
बयान में आगे कहा गया कि इस व्यापक चर्चा ने बीएसएनएल की एक उपभोक्ता-केंद्रित दूरसंचार सेवा प्रदाता के रूप में स्थिति को और मजबूत किया, जिसका स्पष्ट लक्ष्य सभी व्यावसायिक इकाइयों में “रेवेन्यू फर्स्ट” है।
बीएसएनएल अपने सभी सर्किलों, व्यावसायिक क्षेत्रों और इकाइयों में सेवाओं में बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अपने “ग्राहक सर्वप्रथम” सिद्धांत को आगे रखने के लिए बीएसएनएल सक्रिय ग्राहक जुड़ाव, बेहतर सेवा जवाबदेही और त्वरित शिकायत निवारण पर जोर दे रहा है।
बैठक में बीएसएनएल के सर्किल प्रमुखों को ग्राहक तक पहुंच और सेवा गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कई प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के बारे में जानकारी दी गई, जिसमें ग्रामीण, शहरी, उद्यम और खुदरा क्षेत्रों में ग्राहकों के साथ फिर से जुड़ना, मोबाइल नेटवर्क और फाइबर-टू-द-होम (एफटीटीएच) में सेवा की गुणवत्ता (क्यूओएस) में सुधार, बिलिंग और नेटवर्क अपटाइम में ग्राहकों की शिकायतों का समाधान करना, प्रत्येक परिचालन स्तर पर “रेवेन्यू फर्स्ट” लक्ष्यों के साथ जवाबदेही को बढ़ावा देना, कनेक्टिविटी, वीपीएन समाधान, लीज्ड लाइन सेवाएं और अन्य नए व्यावसायिक अवसरों जैसी उद्यम सेवाओं का विस्तार करना शामिल हैं।
राजनीति
अरुणाचल सीमा पर चीन की गतिविधियों को लेकर ओवैसी के सवाल, केंद्र से मांगा स्पष्टीकरण

एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास चीन की गतिविधियों और भारतीय सेना की पेट्रोलिंग को रोके जाने की खबरों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार से सीमा पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और देश को पूरी जानकारी देने की मांग की है।
एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सरकार की लगातार चुप्पी के कारण वह अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा पर स्थिति को लेकर अपने सवाल दोहरा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलओ) ने हाल में भारतीय सेना की पेट्रोलिंग टीम को उस इलाके में जाने से रोका है, जहां जवान पहले नियमित रूप से गश्त करते रहे हैं।
एआईएमआईएम प्रमुख ने यह भी सवाल उठाया कि क्या पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने भारतीय सेना की पेट्रोलिंग टीम द्वारा इलाके में बनाए गए किसी अस्थायी ढांचे को नष्ट किया है। इसके अलावा उन्होंने पूछा कि क्या चीन ने उन क्षेत्रों में टेंट लगाए हैं, जहां पहले भारतीय पेट्रोलिंग टीम जाती थी और जो भारत के क्षेत्र में आते हैं।
ओवैसी ने इससे पहले भी अरुणाचल प्रदेश की सीमा को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। उन्होंने कहा था कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि सीमा पर वास्तव में क्या हो रहा है। उनके मुताबिक, अब तक सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी अपर्याप्त और अस्पष्ट है।
अगले पोस्ट में एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने लिखा था, ‘एक तरफ सीमा पर यह सब हो रहा है, हम अगले महीने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को नई दिल्ली आने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। क्या चीनी सैनिकों से डील करने की यह हमारी नीति है, जो हमारे इलाके में टेंट गाड़ रहे हैं और हमारे गश्त को रोक रहे हैं? या हमने वो सभी शर्तें स्वीकार कर ली हैं, जो बीजिंग ने द्विपक्षीय संबंधों को ‘सामान्य’ बनाने के लिए हमारे सामने रखी हैं?’
बता दें कि ओवैसी के सवाल ऐसे समय में सामने आए हैं जब अरुणाचल प्रदेश से लगी चीन सीमा पर चीनी गतिविधियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है। उन्होंने सरकार से पारदर्शिता बरतने और सीमा की स्थिति पर देश को स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है। साथ ही उनके सवालों ने भारतीय क्षेत्र में कथित चीनी गतिविधियों और सीमा पर गश्त से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
राजनीति
लखीसराय भगदड़ को लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने व्यक्त किया शोक, पीएम बोले- मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ

बिहार के लखीसराय जिले के अशोकधाम मंदिर में सोमवार को हुई भगदड़ को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने दुख व्यक्त किया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ओर से सोशल मीडिया पर लिखा गया, “बिहार के लखीसराय जिले में भगदड़ की दुर्घटना में श्रद्धालुओं की मृत्यु का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। मैं शोक-संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं और घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पीएमओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “बिहार के लखीसराय में भगदड़ से हुई मौतों से दुखी हूं। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। घायल लोग जल्द स्वस्थ हों। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की मदद कर रहा है।”
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “बिहार के लखीसराय में हुई घटना हृदयविदारक है। इस दुःखद हादसे से मन व्यथित है। अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर से घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने एवं शोकाकुल परिजनों को कठिन घड़ी में संबल देने की प्रार्थना करता हूं।”
बिहार सरकार में मंत्री श्रेयसी सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “लखीसराय की हृदयविदारक घटना में 7 महिलाओं के निधन से मन अत्यंत व्यथित है। प्रभु दिवंगत आत्माओं को श्रीचरणों में स्थान दें, परिजनों को धैर्य तथा घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य प्रदान करें।”
जदयू नेता राजीव रंजन ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “यह बेहद दुखद घटना है और कई श्रद्धालुओं की मौत की खबर दिल दहला देने वाली है। एसडीपीओ ने कुछ अफवाहों का जिक्र किया है, लेकिन जब तक सरकार पूरे घटनाक्रम पर अपना आधिकारिक पक्ष नहीं रखती, तब तक कुछ भी पक्के तौर पर कहना ठीक नहीं होगा।”
बता दें कि भगदड़ में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई है और 12 से ज्यादा लोग घायल हैं। बिहार सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
राष्ट्रीय समाचार
झारखंड छात्र आंदोलन का 24वां दिन : चार मंत्रियों का समूह करेगा रिफॉर्म मंच से बातचीत

झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच सोमवार को एक बार फिर वार्ता होगी। आंदोलन के 24वें दिन दोपहर दो बजे मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में सरकार के चार मंत्रियों का समूह जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करेगा।
छात्रों को उनके विधिक सलाहकारों के साथ वार्ता में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है। आंदोलनकारी छात्र जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने और जेपीएससी-जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की सीबीआई जांच की दो प्रमुख मांगों पर कायम हैं। सरकार और छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद अब तक दोनों प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन सकी है। ऐसे में आज की वार्ता को आंदोलन के मौजूदा गतिरोध को तोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राज्य सरकार की ओर से छात्रों को बातचीत का यह प्रस्ताव रविवार को दिया गया। अनुमंडल पदाधिकारी और एडीएम, लॉ एंड ऑर्डर ने आंदोलनकारियों को वार्ता की जानकारी दी। सरकार ने छात्रों के विधिक सलाहकारों को भी बातचीत में शामिल होने की अनुमति देने की बात कही है। वार्ता से एक दिन पहले रविवार शाम आंदोलनकारी छात्रों ने रांची में विरोध मार्च निकाला। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से निकला मार्च अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचा। यहां छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बिहार के राजद नेता तेजस्वी यादव के पुतले फूंके।
छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को दोहराया। छात्रों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव का ऐलान किया है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच का कहना है कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची पहुंचेंगे। छात्र आंदोलन की दो प्रमुख मांगों को लेकर सरकार का अब तक का रुख अलग है। वर्ष 2024 में हुई जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के माध्यम से दो हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं।
सरकार का तर्क है कि इस चरण पर परीक्षा रद्द करना व्यावहारिक रूप से कठिन है। सरकार यह भी कहती रही है कि परीक्षा से जुड़ी शिकायतों की जांच पहले हुई है और मामला न्यायिक प्रक्रिया से भी गुजर चुका है। फिलहाल मामले से जुड़ी जांच राज्य की सीआईडी कर रही है। छात्र सीआईडी जांच पर भरोसा नहीं जता रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में अब तक हुई जांच से उनका विश्वास बहाल नहीं हुआ है। वे पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।
दूसरी ओर, सरकार की ओर से सीबीआई जांच के विकल्प के रूप में सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने का प्रस्ताव सामने आ चुका है। हालांकि, आंदोलनकारी छात्र इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। इस बीच, सरकार और छात्रों के बीच पूर्व की वार्ताओं में परीक्षा सुधार से जुड़ी कई मांगों पर सहमति बनी है। सरकार 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा और बैकलॉग सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की घोषणा भी कर चुकी है। आंदोलनकारी छात्रों ने पहली बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
हालांकि, सरकार के साथ आज होने वाली बातचीत में मुख्य फोकस भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों और छात्रों की प्रमुख मांगों पर रहने की संभावना है। अब सबकी निगाहें दोपहर दो बजे होने वाली इस वार्ता पर टिकी हैं। यदि सरकार और छात्रों के बीच किसी साझा समाधान पर सहमति बनती है तो करीब साढ़े तीन सप्ताह से चल रहे आंदोलन को विराम देने की राह खुल सकती है। वहीं, बातचीत विफल रहने की स्थिति में 20 अगस्त के प्रस्तावित मुख्यमंत्री आवास घेराव को लेकर आंदोलन और तेज होने की संभावना है।
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