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Friday,18-September-2026
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भारत और ग्रीस के बीच रक्षा बातचीत हुई तेज, भारत ने S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का दिया ऑफर… तुर्की और पाकिस्तान में हड़कंप

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अंकारा : तुर्की की मीडिया ने दावा किया है कि भारत ने ग्रीस को Long Range Land Attack Cruise Missile (LR-LACM) की “अनौपचारिक पेशकश” की है। यानि भारत और ग्रीस के बीच LR-LACM क्रूज मिसाइल को लेकर पर्दे के पीछे से बात चल रही है जो तुर्की के लिए खतरे का संकेत है। तुर्की के TRHaber की रिपोर्ट में ग्रीस के साथ भारत की LR-LACM मिसाइल को लेकर हो रही बातचीत को तुर्की की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि “भारत का यह प्रस्ताव ग्रीस के साथ उसके बढ़ते रणनीतिक संबंधों और हालिया ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की के पाकिस्तान को समर्थन देने के जवाब में हो सकता है।” हालांकि, नई दिल्ली या एथेंस की तरफ से अभी तक ऐसे किसी पेशकश को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की को सबसे ज्यादा डर इस मिसाइल की क्षमता और रेंज को लेकर है। इस मिसाइल को DRDO ने विकसित किया है और ब्रह्मोस मिसाइल की कामयाबी ने भारत की मिसाइल क्षमता का पूरी दुनिया में डंका पीट दिया है। भारत की ये LR-LACM मिसाइल 1,000 से 1,500 किलोमीटर तक की दूरी तक सटीक निशाना साध सकती है और पारंपरिक के साथ-साथ परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। सबसे खास बात ये है कि इसे भी ब्रह्मोस मिसाइल की ही तरह दुश्मनों के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने के लिए डिजाइन किया गया है।

LR-LACM मिसाइल की खतरनाक खासियत इसकी terrain-hugging flight path यानि धरती से काफी कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता है, जिससे यह दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को काफी आसानी से चकमा दे देती है। इसकी यही शानदार ताकत तुर्की के लिए इसे परेशानी भरा बनाती है। तुर्की एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल करता है और इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत ऐसे एयर डिफेंस सिस्टम को ही चकमा देना है। हालांकि तुर्की ने अभी तक एस-400 को एक्टिव नहीं किया है और वो घरेलू एयर डिफेंस सिस्टम बना रहा है, लेकिन अभी तक उसे ज्यादा कामयाबी नहीं मिल पाई है। एस-400 इसलिए उसने एक्टिव नहीं किया है, क्योंकि वो एफ-35 फाइटर जेट के लिए अमेरिका से डील कर रहा है।

तुर्की मीडिया के मुताबिक, अगर ग्रीस इस मिसाइल को भारत से हासिल कर लेता है तो यह एथेंस को तुर्की के संवेदनशील ठिकानों पर अचूक हमला करने की क्षमता दे सकता है। यह मिसाइल मोबाइल लॉन्चर और भारतीय नौसेना के 30 से ज्यादा जहाजों पर लगे वर्टिकल लॉन्च सिस्टम से दागी जा सकती है। TRHaber ने यह भी कहा है कि यह मिसाइल तुर्की के S-400 जैसे हवाई रक्षा सिस्टम को भी चकमा दे सकती है। इससे अंकारा (तुर्की की राजधानी) की चिंता बढ़ गई है, खासकर अगर ग्रीस इसे तैनात करता है तो।

इसके अलावा TRHaber की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत और ग्रीस के बीच हाल ही में रक्षा बातचीत तेज हुई है। इस सिलसिले में पिछले महीने भारतीय वायुसेना के प्रमुख एपी सिंह ने एथेंस का दौरा किया था और ग्रीक वायुसेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल दिमोस्थेनीस ग्रिगोरियादिस से मुलाकात की थी। यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब भारत ने एथेंस में आयोजित DEFEA-25 रक्षा प्रदर्शनी में LR-LACM को भी प्रदर्शित किया था। भले ही इस मुलाकात में मिसाइल को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया, लेकिन तुर्की मीडिया ने इसे रक्षा सौदे की दिशा में एक संकेत के तौर पर देखा है। तुर्की का यह भी दावा है कि भारत-ग्रीस के बीच का यह संभावित सौदा भारत के ऑपरेशन सिंदूर में तुर्की की पाकिस्तान को दी गई मदद का जवाब हो सकता है।

TRHaber ने मिसाइल की पेशकश को भारत की क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2023 में ग्रीस और 2025 में साइप्रस की यात्राओं का भी जिक्र किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये दौरे भारत, ग्रीस और साइप्रस के बीच तुर्की के प्रभाव को कम करने के लिए त्रिपक्षीय सहयोग के संकेत हैं। उनका यह भी कहना है कि इससे साइप्रस के बंदरगाहों के पास भारतीय नौसेना की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। तुर्की मीडिया के मुताबि, भारत का ग्रीस और साइप्रस के साथ बढ़ता सहयोग पूर्वी भूमध्य सागर में तुर्की के प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में एक सोची-समझी पहल है। रिपोर्ट यह भी कहती है कि भविष्य में भारतीय नौसेना की मौजूदगी साइप्रस के बंदरगाहों पर बढ़ सकती है, जिससे तुर्की की समुद्री सुरक्षा को नई चुनौती मिलेगी।

व्यापार

भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2027 में 7 प्रतिशत तक रहने की उम्मीद: रिपोर्ट

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भारत चालू वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5-7 प्रतिशत हासिल करने की राह पर है। इस दौरान मजबूत घरेलू मांग, बैंक ऋण में तेजी और आर्थिक गतिविधियों में सुधार के चलते नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 11-12 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है। यह जानकारी जेफरीज की ओर से जारी एक रिपोर्ट में दी गई है।

जेफरीज ने अपनी ताजा ‘ग्रीड एंड फियर’ रिपोर्ट में कहा कि भारत का आर्थिक प्रदर्शन छह महीने पहले की अपेक्षाओं से बेहतर रहा है। इसकी वजह ऋण में व्यापक स्तर पर विस्तार और मांग से जुड़े संकेतकों में सुधार है।

रिपोर्ट में आगे बताया गया कि जुलाई में बैंक ऋण वृद्धि सालाना आधार पर बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गई।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को दिए जाने वाले ऋण में 24.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि उद्योग क्षेत्र को कर्ज 20 प्रतिशत, सेवा क्षेत्र को ऋण 22.9 प्रतिशत और कॉरपोरेट ऋण में 21.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

रिपोर्ट में कहा गया, “कॉरपोरेट ऋण में तेजी यह भी संकेत देती है कि लंबे समय से प्रतीक्षित निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) चक्र की शुरुआत आखिरकार हो रही है।”

जेफरीज में इंडिया रिसर्च के प्रमुख महेश नंदूरकर ने कहा कि आय वृद्धि चालू वित्त वर्ष के 14 प्रतिशत से बढ़कर 1 अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष में 17 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट में घरेलू मांग में लगातार बनी मजबूती की ओर भी इशारा किया गया है।

इसके अलावा, अगस्त में जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि अप्रैल-अगस्त के दौरान बिजली की मांग में वृद्धि बढ़कर 9.4 प्रतिशत हो गई। इसकी तुलना में जनवरी-मार्च की अवधि में बिजली मांग में 1.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

वहीं, रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एफसीएनआर (बी) पहल के तहत विदेशी मुद्रा का मजबूत प्रवाह देखने को मिला, जिसके तहत सरकार ने अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) से उम्मीद से बेहतर 136 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जमा राशि जुटाई।

राजकोषीय मोर्चे पर ब्रोकरेज ने कहा कि सरकार के राजकोषीय समेकन के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है और आने वाले वर्षों में इसके और कम होने की उम्मीद है।

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व्यापार

सोने और चांदी का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ा, निवेशकों को फेड के फैसले का इंतजार

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सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को तेजी देखने को मिली और दोनों कीमती धातुओं का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ गया।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,50,809 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,291 रुपए या 0.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,52,100 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।

दोपहर 12 बजे यह 953 रुपए या 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,51,762 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

अब तक के कारोबार में सोने ने 1,51,450 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,52,100 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है, यह दिखाता है कि खुलने के बाद सोना सीमित दायरे में बना हुआ है।

सोने के साथ चांदी में भी तेजी देखने को मिल रही है।

चांदी का 4 दिसंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,32,118 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 3,667 रुपए या 1.57 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,35,785 रुपए प्रति किलो पर खुला।

फिलहाल यह 3,250 रुपए या 1.40 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,35,988 रुपए प्रति किलो पर था।

अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,34,540 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,35,988 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर बनाया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में तेजी देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.77 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,366 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.96 प्रतिशत की बढ़त के साथ 65 डॉलर प्रति औंस पर थी।

ब्याज दरों पर दो दिवसीय अमेरिकी फेड बैठक के फैसलों का ऐलान आज देर शाम किया जाएगा। यह ऐसे समय पर आ रहा है, जब मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत करीब चार महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और यूएस बॉन्ड यील्ड भी 5 प्रतिशत के ऊपर जा चुकी है। इस कारण इस फैसले पर निवेशक करीब से निगाह रख रहे हैं।

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व्यापार

भारत का आवासीय बाजार स्थिर, हाउसिंग प्राइस इंडेक्स पहली तिमाही में 3.6 प्रतिशत बढ़ा

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भारत का हाउसिंग प्राइस इंडेक्स (एचपीआई) वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सालाना आधार पर 3.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो पिछले साल की समान अवधि की वृद्धि के समान ही है। वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में यह सालाना 4.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा था। यह देश के स्थिर आवासीय बाजार को दिखाता है। यह जानकारी बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में बताया गया कि तिमाही आधार पर एचपीआई वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 1.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में की वृद्धि दर 0.5 प्रतिशत से ज्यादा है। वहीं, हाउसिंग क्रेडिट वृद्धि दर वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 11 प्रतिशत रही है।

रिपोर्ट में बताया गया कि हाउसिंग के क्षेत्र में महंगाई पर इनपुट लागत बढ़ने का असर हुआ है। ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों और कंस्ट्रक्शन की लागत में बढ़ोतरी से घरों की कीमतें बढ़ीं।

पश्चिम एशिया में संघर्ष के असर से ग्लोबल ग्रोथ पर दबाव पड़ा, क्योंकि इससे कमोडिटी की कीमतें बढ़ीं और सप्लाई चेन में रुकावट आई। भारत में भी वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में महंगाई तेजी से बढ़ी और इसका असर अलग-अलग इंडस्ट्रीज पर देखा गया।

वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में एचपीआई की सालाना बढ़ोतरी में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले शहरों में चंडीगढ़ (49.6 प्रतिशत), जयपुर (36.4 प्रतिशत), कानपुर (27.5 प्रतिशत), लखनऊ (17.7 प्रतिशत) और तिरुवनंतपुरम (16.3 प्रतिशत) शामिल थे।

चंडीगढ़ में कीमतों में बढ़ोतरी की वजह कलेक्टर रेट में हालिया बदलाव है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू हुआ है। इसके अलावा, नई जमीन की कमी ने भी हाल के समय में कीमतों को बढ़ाया है।

दिल्ली (-1.2 प्रतिशत), कोलकाता (-31.5 प्रतिशत), मुंबई (2.8 प्रतिशत) और हैदराबाद (-0.8 प्रतिशत) जैसे शहरों में वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के दौरान गिरावट आई है या बढ़ोतरी की रफ्तार बहुत धीमी रही है।

बेहतर कनेक्टिविटी और सर्विस-सेक्टर में रोजगार के बढ़ते मौकों की वजह से बड़े शहरों के बजाय टियर-2 शहर बाजार की मांग को आगे बढ़ा रहे हैं।

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