व्यापार
एप्पल आईफोन 16 : 2025 की पहली तिमाही में दुनिया का बेस्ट सेलिंग स्मार्टफोन
नई दिल्ली, 28 मई। एप्पल का आईफोन 16 इस वर्ष की पहली तिमाही में दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला स्मार्टफोन था। यह जानकारी बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
काउंटरपॉइंट रिसर्च के ‘ग्लोबल हैंडसेट मॉडल सेल्स ट्रैकर’ के अनुसार, यह दो साल के अंतराल के बाद पहली तिमाही में आईफोन सीरीज के बेस वेरिएंट की शीर्ष स्थान पर वापसी को भी दर्शाता है।
एप्पल ने लगातार पांचवीं मार्च तिमाही में पांचवां स्थान हासिल करते हुए टॉप-10 लिस्ट में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी।
इस बीच, सैमसंग ने पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में एक मॉडल कम पेश किया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल वैश्विक बिक्री में शीर्ष 10 स्मार्टफोन की हिस्सेदारी स्थिर रही, जबकि शीर्ष 10 में लो-एंड (100 डॉलर से कम) वाले स्मार्टफोन के योगदान में वृद्धि दर्ज की गई।
आईफोन 16 ने जापान और मध्य पूर्व और अफ्रीका में अच्छा प्रदर्शन किया, जिसमें जापान ने बेस वेरिएंट की बिक्री में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की।
आईफोन 16 प्रो मैक्स और आईफोन 16 प्रो क्रमशः सूची में दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
आईफोन 16ई ने मार्च 2025 के लिए वैश्विक शीर्ष-10 सूची में छठा स्थान हासिल करते हुए एक मजबूत शुरुआत की।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एसई 2022 की तुलना में अधिक कीमत के बावजूद, 16ई के अपने पूर्ववर्ती से बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है।
सैमसंग के गैलेक्सी एस25 अल्ट्रा ने 2025 की पहली तिमाही में सातवां स्थान हासिल किया, जबकि 2024 की पहली तिमाही में एस24 अल्ट्रा पांचवें स्थान पर था।
यह बदलाव मुख्य रूप से तिमाही के दौरान एस25 अल्ट्रा के लिए कम बिक्री विंडो के कारण हुआ। सीमित उपलब्धता के बावजूद, एस25 सीरीज ने स्थिर परिणाम दिए, जिसने अपने सक्रिय बिक्री महीने में सैमसंग की कुल स्मार्टफोन बिक्री में एक-चौथाई का योगदान दिया।
शाओमी का रेडमी 14सी 4जी एप्पल और सैमसंग के बाद एकमात्र मॉडल था, जो वैश्विक शीर्ष-10 सूची में जगह बनाने में सफल रहा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान टैरिफ तनाव और व्यापक बाजार अनिश्चितताओं के बावजूद, शीर्ष 10 सबसे अधिक बिकने वाले स्मार्टफोन मॉडलों की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत स्थिर रहने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय समाचार
दिवाली पर कारोबार में उछाल, दिल्ली का व्यापार 80,000 करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद: सीटीआई

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने शनिवार को बताया कि दिवाली के त्योहारी सीजन के दौरान देशभर में कारोबार लगभग 5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है। जबकि अकेले दिल्ली में लगभग 80,000 करोड़ रुपए का कारोबार दर्ज होने की संभावना है।
सीटीआई के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने कहा कि त्योहारी सीजन ने देशभर के व्यापारियों के लिए कारोबार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा किए हैं, क्योंकि स्वदेशी उत्पादों की उपभोक्ताओं के बीच मजबूत मांग देखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के जिन व्यापारियों को पिछले महीने रैलियों और विरोध प्रदर्शनों के कारण कारोबार में बाधाओं का सामना करना पड़ा था, अब दिवाली की खरीदारी के बंपर सीजन से अपने नुकसान की भरपाई करने की उम्मीद कर रहे हैं।
गोयल के अनुसार, अनुमानित 5 लाख करोड़ रुपए के देशभर के कारोबार में दिवाली की खरीदारी और विभिन्न संबंधित सेवाओं से उत्पन्न कारोबार शामिल है।
ऑटोमोबाइल उद्योग की सर्वोच्च संस्था द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में खुदरा ऑटोमोबाइल बिक्री में 55 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। दोपहिया, तिपहिया, वाणिज्यिक वाहन, यात्री वाहन और ट्रैक्टरों की बिक्री में क्रमशः 52 प्रतिशत, 110 प्रतिशत, 48 प्रतिशत, 70 प्रतिशत और 58 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि ये आंकड़े मजबूत उपभोक्ता मांग को दर्शाते हैं और त्योहारी सीजन के दौरान सकारात्मक व्यावसायिक दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करते हैं।
गोयल ने आगे कहा कि दिवाली के त्योहार के दौरान किफायती वस्तुओं से लेकर प्रीमियम उत्पादों तक लगभग पांच करोड़ उपहारों का आदान-प्रदान हुआ, जिससे त्योहारी बिक्री में काफी योगदान मिला।
सीटीआई ने कहा कि उसने होटल और बैंक्वेट एसोसिएशन, रेस्तरां और मॉल एसोसिएशन, सिनेमा एसोसिएशन, शॉपिंग सेंटर एसोसिएशन, ऑटोमोबाइल डीलर एसोसिएशन, मेकअप और सैलून एसोसिएशन, टूर एंड ट्रैवल एसोसिएशन, मार्केट एसोसिएशन और उद्योग निकायों के प्रतिनिधियों से परामर्श के बाद अपने अनुमानित व्यावसायिक अनुमान तैयार किए हैं।
व्यापारियों के संगठन ने एक बयान में कहा कि इस साल दिवाली के मौसम में स्वदेशी उत्पादों की खरीद-बिक्री पर विशेष जोर दिया जा रहा है और भारतीय निर्मित वस्तुओं की लोकप्रियता उपभोक्ताओं के बीच बढ़ रही है।
संगठन ने यह भी कहा कि जीएसटी सुधारों से भारतीय उत्पादों को अधिक मान्यता मिली है और स्थानीय स्तर पर निर्मित वस्तुओं की मांग मजबूत हुई है।
घर की सजावट के सामान, दिवाली पूजा की सामग्री, मिट्टी के दीये, देवी-देवताओं की मूर्तियां, दीवार पर टांगने वाली वस्तुएं, हस्तशिल्प और शुभ-लाभ और ओम जैसे पारंपरिक शुभ प्रतीक, और उन उत्पादों में शामिल हैं जिनकी मांग देखी जा रही है। देवी-लक्ष्मीो और भगवान गणेश की पूजा से संबंधित वस्तुएं, साथ ही स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और कुशल श्रमिकों द्वारा निर्मित सजावटी उत्पाद भी त्योहारी बिक्री में महत्वपूर्ण योगदान देने की उम्मीद है।
इनके अलावा, कई अन्य क्षेत्रों (एफएमसीजी, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं, खिलौने, इलेक्ट्रॉनिक्स, बिजली के उपकरण, रसोई के बर्तन, उपहार वस्तुएं, मिठाई, स्नैक्स, घरेलू साज-सज्जा, वस्त्र, रेडीमेड कपड़े, फैशन परिधान, जूते, घड़ियां, फर्नीचर, सौंदर्य प्रसाधन, सौंदर्य उत्पाद, मोबाइल फोन और सहायक उपकरण शामिल) में भी अच्छी बिक्री होने की उम्मीद है।
त्योहारी मांग पैदा करने वाले अन्य क्षेत्रों में बर्तन, निर्माण सामग्री, लकड़ी और प्लाईवुड, पेंट और कांच, दूध और डेयरी उत्पाद, किराना, अनाज, खाद्य तेल, दालें, साइकिल और सहायक उपकरण, दीवार घड़ियां, गोटा-जरी, साड़ियाँ और पोशाक सामग्री शामिल हैं।
सीटीआई ने कहा कि दिल्ली के व्यापारी त्योहारी सीजन में लगभग 80,000 करोड़ रुपए के कारोबार की उम्मीद कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 1 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच रैलियां और विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रीय राजधानी के व्यापारियों को लगभग 14,000 करोड़ रुपए का अनुमानित व्यापारिक नुकसान हुआ।
गोयल ने कहा कि अब व्यावसायिक गतिविधियां गति पकड़ रही हैं और त्योहारी खरीदारी के लिए दिल्ली भर के बाजारों में भारी भीड़ उमड़ रही है।
उन्होंने बताया कि चांदनी चौक, दरीबा कलां, मालीवाड़ा, सदर बाजार, कमला नगर, अशोक विहार, मॉडल टाउन, शालीमार बाग, वज़ीरपुर, पीतमपुरा, राजौरी गार्डन, साउथ एक्सटेंशन, ग्रेटर कैलाश, ग्रीन पार्क, यूसुफ सराय, लाजपत नगर, प्रीत विहार, शाहदरा और लक्ष्मी नगर जैसे बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही में वृद्धि देखी जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि विभिन्न कंपनियों के ऑटोमोबाइल शोरूम भी त्योहारी अवधि के दौरान अच्छी बिक्री दर्ज कर रहे हैं।
ग्राहक मोबाइल फोन, उपहार, सजावटी सामान, सूखे मेवे, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू साज-सज्जा सहित कई तरह के उत्पाद खरीद रहे हैं, जो राष्ट्रीय राजधानी में खरीदारी गतिविधियों में सुधार का संकेत है।
व्यापार
टेस्ला टेक्सास स्थित गीगाफैक्ट्री में साइबरट्रक का उत्पादन कम करेगी ताकि साइबरकैब का उत्पादन बढ़ाया जा सके: एलन मस्क

अमेरिकी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी टेस्ला अपनी स्वायत्त (ऑटोनॉमस) परिवहन रणनीति को तेजी से आगे बढ़ाते हुए 2027 के मध्य से टेक्सास में गीगाफैक्ट्री में साइबरट्रक का उत्पादन कम करना शुरू करेगी। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एलन मस्क ने कहा कि यह कदम साइबरकैब के उत्पादन के लिए अतिरिक्त विनिर्माण क्षमता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया जाएगा।
मस्क ने कहा कि अगले वर्ष के मध्य से टेक्सास स्थित गीगाफैक्ट्री में साइबरट्रक उत्पादन को चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा, ताकि पूरी तरह से स्वायत्त साइबरकैब वाहनों के बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी की जा सके। यह फैसला टेस्ला की रोबोटैक्सी और स्वचालित परिवहन सेवाओं को लेकर दीर्घकालिक रणनीति को दर्शाता है।
हालांकि मस्क ने यह स्पष्ट नहीं किया कि साइबरट्रक का उत्पादन किसी अन्य संयंत्र में स्थानांतरित किया जाएगा या भविष्य में इसे पूरी तरह बंद किया जा सकता है। इससे इस लोकप्रिय इलेक्ट्रिक पिकअप ट्रक के भविष्य को लेकर कुछ अनिश्चितता बनी हुई है।
वर्ष 2023 में लॉन्च किया गया साइबरट्रक इलेक्ट्रिक पिकअप सेगमेंट में एक क्रांतिकारी उत्पाद के रूप में पेश किया गया था और इसे पारंपरिक ट्रक निर्माताओं, विशेषकर फोर्ड, के लिए बड़ी चुनौती माना गया था। इसके अनोखे डिजाइन और भविष्यवादी फीचर्स ने शुरुआती दौर में व्यापक चर्चा और ग्राहकों की रुचि आकर्षित की थी।
लेकिन लॉन्च के बाद साइबरट्रक को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिसमें कई बार रिकॉल, गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े मुद्दे और कीमतों में बार-बार बदलाव शामिल रहे। बढ़ती प्रतिस्पर्धा और अपेक्षाकृत कमजोर मांग ने भी इसके व्यावसायिक प्रदर्शन पर असर डाला, जिससे यह शुरुआती उत्साह को लंबे समय तक बनाए नहीं रख सका।
टेस्ला ने मांग बढ़ाने के लिए कई बार साइबरट्रक की कीमतों में संशोधन किया। इसके बावजूद कंपनी अब तेजी से अपने भविष्य के स्वायत्त वाहन कार्यक्रम पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
कंपनी का मानना है कि साइबरकैब भविष्य में उसके रोबोटैक्सी नेटवर्क की रीढ़ साबित होगा। इसी वजह से उत्पादन क्षमता का बड़ा हिस्सा इस नई श्रेणी के वाहनों की ओर स्थानांतरित किया जा रहा है। टेस्ला का लक्ष्य स्वचालित ड्राइविंग आधारित परिवहन सेवाओं में अपनी स्थिति को और मजबूत करना है।
इस बीच, पिछले महीने टेस्ला इंडिया ने मॉडल वाई और मॉडल वाई एल वाहनों के लिए एक नया सॉफ्टवेयर अपडेट जारी किया था। कंपनी ने बताया कि इस अपडेट के जरिए वाहन बिना सर्विस सेंटर जाए दूरस्थ रूप से नई सुविधाएं प्राप्त कर सकते हैं।
नए अपडेट में हैलोवीन थीम-आधारित फीचर्स भी जोड़े गए हैं, जिनमें भूत-आधारित वाहन अवतार, विशेष ध्वनि प्रभाव, प्रकाश व्यवस्था, थीम वाले वाहन रैप और अनोखी लॉक ध्वनियां शामिल हैं।
व्यापार
ईसीएमएस के तहत 12 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी, 7,500 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश

आईटी सचिव एस. कृष्णन ने शुक्रवार को बताया कि केंद्र सरकार ने ‘इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम’ (ईसीएमएस) के तहत 12 नए आवेदनों को मंजूरी दी है। इनमें 7,500 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। इस कदम से घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और भारत के कंपोनेंट इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी।
हाल ही में मिली मंजूरियों में न केवल इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, बल्कि सामग्री और कैपिटल गुड्स से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन के प्रमुख क्षेत्रों में इस योजना का दायरा और बढ़ गया है।
मंजूरियों का यह नया दौर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक मजबूत घरेलू इकोसिस्टम बनाने और आयातित पुर्जों पर निर्भरता कम करने की सरकार की कोशिशों को और गति देता है।
नीति निर्माता अब कंपोनेंट्स के उत्पादन के साथ-साथ कच्चे माल और मैन्युफैक्चरिंग उपकरणों जैसे अपस्ट्रीम क्षेत्रों को मजबूत करने पर भी जोर दे रहे हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन (मूल्यवर्धन) को गहरा किया जा सके।
ईसीएमएस, भारत की उस व्यापक पहल का हिस्सा है, जिसके जरिए वह पूरी सप्लाई चेन में निवेश को बढ़ावा देकर और जरूरी इनपुट के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ाकर खुद को एक ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना चाहता है।
इसके अलावा सरकार ने शुक्रवार को ‘सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम’ के तहत ‘सेमीकॉन 2.0’ वेब एप्लिकेशन पोर्टल लॉन्च किया। इस बीच, इस साल की शुरुआत में जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 अरब डॉलर का घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करना और 150 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात हासिल करना है।
17 सितंबर को जारी फैक्टशीट के मुताबिक, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के 1.9 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में 13.11 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इसी अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात भी लगभग 38,000 करोड़ से बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
बयान में कहा गया है, “इस निरंतर विकास ने भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लक्ष्यों के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। अब अगली प्राथमिकता घरेलू स्तर पर कंपोनेंट्स का निर्माण, अधिक वैल्यू एडिशन और सप्लाई चेन को और अधिक लचीला बनाकर इस इकोसिस्टम को और गहरा करना है।”
इलेक्ट्रॉनिक्स आज की आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं और रोजमर्रा की जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा बन गए हैं। ये संचार, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन, वित्त, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को संचालित करते हैं।
स्मार्टफोन और ऑटोमोबाइल से लेकर टेलीकॉम नेटवर्क और औद्योगिक प्रणालियों तक, इलेक्ट्रॉनिक्स तकनीकी प्रगति और आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता को आगे बढ़ाते हैं।
इसलिए तकनीकी मजबूती, आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के लिए एक मजबूत घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम का होना बहुत जरूरी है।
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