राष्ट्रीय समाचार
दिल्ली : शेख सराय में आंधी-तूफान का कहर, कई मकान और गाड़ियां क्षतिग्रस्त
नई दिल्ली, 2 मई। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के शेख सराय इलाके में शुक्रवार को भारी बारिश और तेज हवा के चलते पेड़ गिरने से कई मकान और गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं। यह हादसा सुबह 5 बजे के आसपास हुआ। स्थानीय लोगों ने बताया कि वे कई बार प्रशासन को पत्र लिखकर यह मांग कर चुके हैं कि पेड़ों को हटा दिया जाए, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
स्थानीय निवासी राकेश शर्मा ने मिडिया को बताया कि यह हादसा सुबह उस समय हुआ, जब तेज आंधी-तूफान चला था। इस वजह से कई गाड़ियां और मकान क्षतिग्रस्त हो गए। हालांकि, अभी तक गाड़ियों की निश्चित संख्या के बारे में हमें जानकारी नहीं है कि कितनी क्षतिग्रस्त हुई हैं। यहां आसपास में कई ऐसे विशाल पेड़ हैं, जिनके बारे में मैं संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र लिख चुका हूं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने आगे बताया कि इससे पहले हॉर्टिकल्चर विभाग के मनोज वैरी जी यहां आए थे। उन्होंने पूरे इलाके का मुआयना किया था। लेकिन, अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
एक अन्य स्थानीय निवासी प्रवीण वत्स ने बताया कि सुबह पांच बजे आंधी-तूफान चलने से यह हादसा हुआ। इन विशाल पेड़ों के गिरने से कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए, तो कई गाड़ियों को नुकसान पहुंचा है। इस वजह से कई लोग स्कूल और ऑफिस नहीं जा सके।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में हम पहले भी अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन अभी तक इस दिशा में किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है। यही नहीं, हमने अधिकारियों को पत्र लिखकर उनका ध्यान इस दिशा में आकृष्ट कराया था कि हमारे आसपास करीब 35 से 40 ऐसे पेड़ हैं, जो काफी विशाल हैं। निश्चित तौर पर अगर उन्हें समय रहते छोटा नहीं किया गया, तो यह आगे चलकर किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हम पर्यावरण का सम्मान करते हैं। हम चाहते हैं कि हमारे आसपास पेड़-पौधे हों, लेकिन हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि इस तरह के विशालकाय पेड़ किसी बड़े हादसे का कारण न बनें। हमने अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा है कि वे इन पेड़ों को छोटा कर दें, ताकि हमें भविष्य में किसी हादसे का सामना नहीं करना पड़े।
राजनीति
ब्रिक्स समिट में भारत की नेतृत्व भूमिका पर उरुग्वे के विदेश मंत्री बोले- ग्लोबल साउथ में भारत प्रमुख नेताओं में से एक

भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का नतीजा बेहद सफल रहा। हमने एक बहुत गंभीर, ठोस और आम सहमति वाला ‘फाइनल डिक्लेरेशन’ हासिल किया है। यह बात उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन ने साथ हुई विशेष बातचीत में कही।
विदेश मंत्री लुबेटकिन ने अपनी भारत की यात्रा को लेकर आईएएनएस को बताया कि मैं अपनी इस यात्रा में कई लक्ष्य हासिल करना चाहता था। सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण, मैं भारत सरकार के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना चाहता था। दूसरा महत्वपूर्ण उद्देश्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन था और तीसरा, मैं भारत और मर्कोसुर के बीच संबंधों को आगे बढ़ाना चाहता था।
आईए जानते हैं इस दौरान उन्होंने और कौन-कौन से मुद्दों पर चर्चा की।
विदेश मंत्री लुबेटकिन पूछा गया कि आप ब्रिक्स में भारत की नेतृत्व भूमिका को कैसे देखते हैं?
उन्होंने कहा, मेरे विचार से इस शिखर सम्मेलन का नतीजा बेहद सफल रहा। सम्मेलन की तैयारी के दौरान कई सवाल थे और बहुत कम लोगों को पता था कि आखिरकार क्या परिणाम निकलेंगे। लेकिन अंत में हम एक ऐसे संयुक्त घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन) तक पहुंचे जो गंभीर, व्यावहारिक और सभी की सहमति पर आधारित था। इसमें कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों पर सहमति बनी।
उन्होंने कहा कि दुनिया में चल रहे कुछ युद्धों और संघर्षों में अलग-अलग पक्ष शामिल हैं, लेकिन मुझे लगता है कि बैठक के अध्यक्ष के रूप में भारत के राष्ट्रपति और भारत सरकार ने सभी पक्षों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने और सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह दिखाता है कि आज के समय में खासकर ग्लोबल साउथ में भारत प्रमुख नेताओं में से एक है।
उन्होंने कहा कि सिर्फ बातें करने के बजाय हमें नतीजों को देखना चाहिए और समझना चाहिए कि भारत ने इस सम्मेलन में क्या हासिल किया।
सवाल: भारत और उरुग्वे के संबंधों का भविष्य आप कैसे देखते हैं?
जवाब: मैं पूरी तरह उम्मीद से भरा हूं, क्योंकि मुझे लगता है कि हमारे दोनों देश कई मायनों में एक-दूसरे के पूरक हैं। कई मुद्दों पर हमारी लोकतांत्रिक सोच भी मिलती-जुलती है और ऐसे बहुत से क्षेत्र हैं जहां हम साथ मिलकर काम कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि हमारे रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए तीन अलग-अलग रास्ते हैं, जो एक साथ चल सकते हैं।
पहला रास्ता द्विपक्षीय संबंधों का है। इसमें अर्थव्यवस्था, संस्कृति, फिल्म और ऑडियो-विजुअल सहयोग (जिसमें बॉलीवुड भी शामिल है), खेल और कई अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा सकता है।
दूसरा रास्ता भारत और मर्कोसुर के बीच संबंधों का है। आज मैंने व्यापार मंत्री के साथ मिलकर भारत और मर्कोसुर के बीच बातचीत के अगले चरण को शुरू करने पर सहमति बनाई है। यह सिर्फ उरुग्वे के लिए ही नहीं, बल्कि अर्जेंटीना, ब्राजील और पराग्वे जैसे अन्य मर्कोसुर देशों के लिए भी एक महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रक्रिया है।
तीसरा रास्ता क्षेत्रीय सहयोग का है। फिलहाल उरुग्वे मर्कोसुर की अध्यक्षता कर रहा है और साथ ही ‘सेलाक’ की भी अध्यक्षता कर रहा है। ‘सेलाक’ एक ऐसा समूह है जिसमें लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र के 33 देश शामिल हैं।
इससे भारत और ‘सेलाक’ के बीच संबंधों को मजबूत करने का एक और महत्वपूर्ण अवसर मिलता है।
इसी संदर्भ में कुछ दिनों बाद न्यूयॉर्क में भारत के विदेश मंत्री और ‘सेलाक’ के तहत लैटिन अमेरिका तथा कैरेबियाई देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होगी। उस बैठक का उद्देश्य यह चर्चा करना होगा कि भारत और पूरे क्षेत्र के बीच संबंधों को और कैसे मजबूत किया जाए।
सवाल: आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक वैश्विक नेता के रूप में कैसे देखते हैं?
जवाब: जैसा कि मैंने पहले कहा, इस शिखर सम्मेलन की सफलता भारत की सफलता थी और यह प्रधानमंत्री मोदी की भी सफलता थी।
शनिवार और रविवार के दौरान आपने देखा होगा कि प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के कई महत्वपूर्ण नेताओं के साथ किस तरह बातचीत कर रहे थे। और सभी उनकी बात ध्यान से सुन रहे थे और उन्हें एक अहम और भरोसेमंद नेता के रूप में देख रहे थे।
मैं उन द्विपक्षीय बैठकों का हिस्सा नहीं था, लेकिन अंदरूनी बैठकों में यह माहौल स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था। बैठक के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि ‘सभी मुद्दों पर सहमति’ बन गई है।
उन्होंने कहा कि मेरे हिसाब से यह बात बताती है कि इस समय वैश्विक स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी की क्या भूमिका और महत्व है।
सवाल: एशिया और व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साथ उरुग्वे के संबंधों के लिए भारत कितना महत्वपूर्ण है?
जवाब: मैंने अपने कुछ यूरोपीय सहयोगियों से भी कहा है कि उरुग्वे के लिए यह भारत का समय है।
जब मैं कहता हूं कि यह भारत का समय है, तो मेरा मतलब है कि आज भारत पहले की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत है। 20 या 10 साल पहले भी शायद हमने इसकी कल्पना नहीं की थी। इस वजह से आज एक बिल्कुल नई स्थिति पैदा हुई है।
मुझे पूरा विश्वास है कि अगर हम आर्थिक, सांस्कृतिक, खेल, सामाजिक और कुछ अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ठोस समझौते कर पाते हैं, तो उनका फायदा भारत और उरुग्वे दोनों को होगा।
उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में कोई भी देश अकेले आगे नहीं बढ़ सकता। यह वह समय है जब हमें ठोस समझौते करने चाहिए और ऐसे दौर में आगे बढ़ना चाहिए जहां दुनिया विभाजन, मतभेदों और संघर्षों का सामना कर रही है।
ऐसे देशों के बीच सहमति बनाने का समय है जिनकी सोच और दृष्टिकोण काफी हद तक मिलते-जुलते हैं। साथ ही हमें व्यावहारिक नतीजों पर ध्यान देना चाहिए।
मेरा मानना है कि यही हमारे भविष्य के सहयोग का आधार होगा।
उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत ने पहली बार अपने इतिहास में उरुग्वे में दूतावास खोला है।
दोनों देशों के युवा राजनयिकों की पीढ़ी के सदस्य के रूप में मैं उम्मीद करता हूं कि आने वाले महीनों में भारत का विदेश मंत्रालय उरुग्वे आएगा, दूतावास का औपचारिक उद्घाटन करेगा और हमारे साथ मिलकर यह तय करेगा कि हम अपने समझौतों को जमीन पर कैसे उतार सकते हैं।
सवाल: क्या आपकी विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात हुई? वह बैठक कैसी रही?
जवाब: जी हां, विदेश मंत्री के साथ मेरी मुलाकात बहुत महत्वपूर्ण रही। हमारे सामने जो चुनौतियां हैं, उनमें से एक यह है कि अब भारत और उरुग्वे के रिश्तों को और गहरा और व्यापक बनाने का समय आ गया है। मेरा मानना है कि भारत और उरुग्वे के विदेश मंत्रालय इस सोच पर पूरी तरह एकमत हैं।
असल में, यह बात 2025 में रियो डी जेनेरियो में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और उरुग्वे के राष्ट्रपति यामांडू ओर्सी की मुलाकात से जुड़ी हुई है। कई वर्षों बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात थी।
उस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और उरुग्वे के संबंधों को लंबे समय तक मजबूत बनाने की दिशा में चर्चा की थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने मुझे काफी प्रभावित किया। वह उस बैठक में अपने साथ एक कागज लेकर आए थे, जिस पर उन्होंने अगले 10 से 15 वर्षों में भारत-उरुग्वे संबंधों को लेकर अपना विजन लिखा हुआ था। यह एक दीर्घकालिक सोच और योजना थी।
अब हमारे दोनों विदेश मंत्रालयों के सामने यह जिम्मेदारी है कि पिछले साल प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच जो समझ और सहमतियां बनी थीं, उन्हें जमीन पर उतारा जाए।
हमारी लगभग आधे घंटे की बैठक के दौरान हमने एक बहुत दिलचस्प अभ्यास किया और अगले एक साल के लिए भारत-उरुग्वे संबंधों का एक रोडमैप तैयार किया।
हम कोशिश कर रहे हैं कि दोनों नेताओं के बीच हुई व्यापक और रणनीतिक चर्चाओं को वास्तविक कार्यों में बदला जाए।
आने वाले एक साल में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें हम मिलकर काम कर सकते हैं, जैसे आर्थिक सहयोग, राजनीतिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और कई अन्य क्षेत्र।
मुझे उम्मीद है कि अक्टूबर 2027 तक हम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल कर लेंगे। फिलहाल उरुग्वे के राष्ट्रपति यामांडू ओर्सी की भारत यात्रा पर विचार किया जा रहा है।
उस दौरान उनकी फिर से प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात हो सकती है। दोनों नेता यह समीक्षा कर सकते हैं कि 2025 के बाद से क्या प्रगति हुई है और भारत-उरुग्वे संबंधों को मजबूत करने के लिए हम क्या-क्या हासिल कर पाए हैं।
इसके बाद हम आगे के दीर्घकालिक कदमों पर भी चर्चा कर सकेंगे।
मेरा मानना है कि यह एक बेहद गंभीर और सोच-समझकर चलाया जा रहा प्रयास है। हमें साफ पता है कि हमें किस दिशा में आगे बढ़ना है, और भारत तथा उरुग्वे की सरकारों के बीच इस बात पर काफी अच्छी समझ और सहमति है कि दोनों देशों के रिश्तों को किस तरह आगे ले जाना चाहिए।
सवाल: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर अमेरिका-ईरान विवाद पर आपका क्या कहना है?
जवाब: उरुग्वे एक शांतिप्रिय देश है और हम इन संघर्षों में शामिल नहीं हैं। लेकिन यह सच है कि दुनिया भर में संघर्ष और टकराव तेजी से बढ़ रहे हैं।
हम यूक्रेन-रूस युद्ध की बात कर सकते हैं या मध्य पूर्व की स्थिति की, लेकिन इसके अलावा भी दुनिया में कई ऐसे संघर्ष चल रहे हैं जिनमें हजारों लोग, खासकर महिलाएं और बच्चे, अपनी जान गंवा रहे हैं। यह आज की दुनिया के लिए बहुत दुखद और चिंताजनक स्थिति है।
उन्होंने कहा कि मेरा पूरा विश्वास है कि इन संघर्षों का समाधान सिर्फ सैन्य कार्रवाई या युद्ध के जरिए नहीं निकाला जा सकता। जब तक हम गंभीर राजनीतिक बातचीत और ठोस वार्ता की दिशा में प्रयास नहीं करेंगे, तब तक इन समस्याओं का समाधान मुश्किल है।
राष्ट्रीय समाचार
भारतीय शेयर बाजार मजबूती के साथ खुला, आईटी स्टॉक्स में खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को मजबूती के साथ खुला। सुबह 9:17 पर सेंसेक्स 393 अंक या 0.53 प्रतिशत की मजबूती के साथ 75,178 और निफ्टी 103 अंक या 0.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,495 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार में खरीदारी का नेतृत्व आईटी शेयर कर रहे थे। सूचकांकों में निफ्टी आईटी करीब 5 प्रतिशत की बढ़त के साथ टॉप गेनर था। वहीं, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी ऑटो और निफ्टी ऑयलएंडगैस हरे निशान में थे। निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मेटल, निफ्टी पीएसई, निफ्टी फार्मा, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी प्राइवेट बैंक लूजर्स थे।
सेंसेक्स पैक में एचसीएल टेक, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, एचयूएल, आईटीसी, टाटा स्टील, सन फार्मा और ट्रेंट गेनर्स थे। बीईएल, बजाज फिनसर्व, कोटक महिंद्रा बैंक, इंडिगो, टाइटन, पावर ग्रिड, एलएंडटी, अल्ट्राटेक सीमेंट, एमएंडएम, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, भारती एयरटेल और इटरनल लूजर्स थे।
ज्यादातर वैश्विक बाजारों में कमजोरी देखी जा रही है। शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और जकार्ता लाल निशान में थे, जबकि टेक्यो हरे निशान में था। अमेरिकी शेयर बाजार लाल निशान में बंद हुआ था, जिसमें मुख्य सूचकांक डाओ डोन्स 0.29 प्रतिशत की कमजोरी के साथ और नैस्डैक 0.56 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
वैश्विक बाजारों में गिरावट की वजह मध्य पूर्व में लगातार बढ़ता युद्ध है, जिससे पूरे क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इसके चलते डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.53 प्रतिशत की बढ़त के साथ 103 डॉलर प्रति बैरल और बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.31 प्रतिशत की मजबूती के साथ 107 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है।
इससे दूसरी तरफ सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। खबर लिखे जाने तक कॉमैक्स पर सोना 0.18 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,344 डॉलर प्रति औस और चांदी आधा प्रतिशत की कमजोरी के साथ 63 डॉलर प्रति औंस पर थी।
राष्ट्रीय समाचार
ब्रिक्स 2026 की सफलता भारत की वैश्विक कूटनीतिक ताकत का प्रमाण : एस जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ब्रिक्स शिखर सम्मलेन के सफल आयोजन पर कहा कि पूरे देश और दुनिया ने ब्रिक्स सम्मेलन 2026 की सफलता देखी। इस सम्मेलन में कुल 32 प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया, जिनमें 11 सदस्य देशों, 10 साझेदार देशों, 4 क्षेत्रीय संगठनों और 7 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की मजबूत वैश्विक भूमिका रही। सम्मेलन में अधिकांश देशों का प्रतिनिधित्व राष्ट्राध्यक्षों या सरकार प्रमुखों के स्तर पर हुआ। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद, यूएई के क्राउन प्रिंस और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी समेत कई बड़े नेता इसमें शामिल हुए।
इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ-साथ विश्व व्यापार संगठन, विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रमुखों ने भी भाग लिया। सम्मेलन के दौरान इन नेताओं और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बेहतर तालमेल और आत्मीय संबंध भी देखने को मिले।
विदेश मंत्री ने कहा कि यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ, जब दुनिया कई राजनीतिक और भू-राजनीतिक मतभेदों तथा बड़े संघर्षों का सामना कर रही है। इसके बावजूद ब्रिक्स देशों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाने में सफलता हासिल की। विशेष रूप से पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व के संघर्ष को लेकर सदस्य देशों ने शांति, सुरक्षा, स्थिरता और दीर्घकालिक समाधान का समर्थन किया। साथ ही वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखला और ऊर्जा आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने तथा आम नागरिकों और नागरिक ढांचे की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया।
एस. जयशंकर ने कहा कि सम्मेलन केवल मतभेदों को दूर करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने विभिन्न देशों के नेताओं को खुलकर बातचीत करने का अवसर भी दिया। कई ऐसे नेता, जो सामान्य परिस्थितियों में शायद एक-दूसरे से मुलाकात नहीं कर पाते, वे इस मंच पर साथ आए और महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। इससे दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों पर सकारात्मक संवाद को बढ़ावा मिला।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख फोकस वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकास, तकनीक और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत बनाना था। सम्मेलन से यह स्पष्ट संदेश गया कि विकासशील देशों की चिंताओं और जरूरतों को वैश्विक मंचों पर अधिक महत्व मिलना चाहिए। सम्मेलन के दो प्रमुख विषय “सुधार” और “लचीलापन” रहे। इन्हीं विषयों ने सदस्य देशों को एकजुट करने और विभिन्न मुद्दों पर सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर भी ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत सहमति देखने को मिली। सदस्य देशों ने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद का कोई भी कृत्य अपराध है। उन्होंने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले को अस्वीकार्य बताते हुए उसकी निंदा की। साथ ही आतंकवाद के सभी रूपों, विशेषकर सीमा पार आतंकवाद, के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाने और दोहरे मापदंडों को खारिज करने पर जोर दिया।
विदेश मंत्री ने कहा कि यह पूरा सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “संवाद, कूटनीति और विकास” के संदेश को प्रतिबिंबित करता है। दुनियाभर के नेताओं की सक्रिय भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि यह संदेश वैश्विक स्तर पर प्रभावी रहा। उन्होंने कहा कि कई लोगों को संदेह था कि ऐसा सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित हो पाएगा या नहीं, लेकिन यह नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने एक बार फिर अपनी वैश्विक कूटनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया।
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