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वक्फ एक्ट भेदभावपूर्ण कानून है, लोकतंत्र पर हमला है…अदालत में लड़ाई के साथ-साथ लोकतांत्रिक विरोध भी तब तक जारी रहेगा जब तक कानून वापस नहीं हो जाता: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लेबर बोर्ड

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मुंबई: मुंबई वक्फ अधिनियम अल्पसंख्यकों के प्रति अनुचित है और इसमें कई खामियां हैं। वक्फ अधिनियम मुसलमानों को उनके अधिकारों से वंचित करने के लिए पूर्वाग्रह के आधार पर लाया गया है और यह लोकतंत्र को नष्ट करने वाला कानून है। इस कानून के खिलाफ विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक इसे वापस नहीं लिया जाता। इस कानून से कानून और व्यवस्था की समस्या भी पैदा हो गई है। इस कानून के तहत राज्य सरकारों की शक्तियां भी छीन ली गई हैं। ये विचार आज यहां जमात-ए-इस्लामी प्रमुख सआदतुल्लाह हुसैनी ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि वक्फ अधिनियम मुसलमानों के लिए अनुचित है और यह अस्वीकार्य है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता कासिम रसूल इलियास ने कहा कि वक्फ एक्ट में लागू कानून पर जेपीसी में आपत्ति जताई गई। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के अधीन है। अदालत ने अस्थायी राहत जरूर दी है, लेकिन जब तक यह वापस नहीं हो जाती, हम इसके खिलाफ अपनी कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रखेंगे। यह एक भेदभावपूर्ण कानून है। अन्य धर्मों के लिए अलग कानून है और संविधान हमें धार्मिक संस्थान स्थापित करने तथा अपने रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार पूजा करने की अनुमति देता है। इस अधिनियम के तहत हमें इस अधिकार से वंचित करने का प्रयास किया गया है। गरीबों और अन्य पिछड़े वर्गों की आड़ में वक्फ अधिनियम का प्रयोग धोखाधड़ी और छलावा है। सरकार ने वक्फ के संबंध में जो संदेह पैदा किया है वह पूरी तरह झूठ पर आधारित है। अगर सरकार वक्फ एक्ट के जरिए गरीबों व अन्य वर्गों को अधिकार दिलाने के लिए काम करना चाहती है तो वक्फ विकास निगम को क्यों छीन लिया गया?

वक्फ एक्ट की आड़ में सरकार ने भारतीय लोकतंत्र और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान पर हमला किया है और उसे धमकाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इस कानून को स्वीकार करना ही होगा। यह कानून न केवल मुसलमानों को प्रभावित करेगा बल्कि संविधान की भावना पर हमला है। अगर प्रधानमंत्री गरीब विधवाओं के प्रति इतने हमदर्द हैं तो उन्होंने बिलकिस बानो को न्याय क्यों नहीं दिलाया? गुजरात दंगों में एहसान जाफरी की विधवा जकिया जाफरी न्याय की मांग कर रही एक पीड़ित हैं। पीड़िता कब्र तक पहुंच चुकी है। गुजरात में 11 वर्षों में मुसलमानों पर क्या अत्याचार हुए हैं? सभी जानते हैं कि यह सरकार मुसलमानों का पोषण नहीं, बल्कि विनाश चाहती है। विपक्ष ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया, लेकिन इसके बावजूद इसे पारित कर दिया गया। वक्फ अधिनियम 2013 में सर्वसम्मति से पारित किया गया था। उस समय इस कानून को लाने की क्या जरूरत थी? जब यह कानून पारित हुआ तो भाजपा भी इसके पक्ष में थी। इसका कोई विरोध नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह कानून हमारे अधिकारों की रक्षा करने वाले अनुच्छेद 24, 25, 11 का स्पष्ट उल्लंघन है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव फजलुर रहमान मुजद्दिदी ने कहा कि अब वक्फ एक्ट के तहत वक्फ को यह साबित करना होगा कि वह मुसलमान है। इसमें जेपीसी ने प्रैक्टिसिंग मुस्लिम होना शर्त रखी है। यह कानून के खिलाफ है। पहले कहा जाता था कि पांच साल तक मुसलमान बने रहना शर्त है, लेकिन अब यह साबित करना होगा कि आप मुसलमान हैं और इस्लाम का पालन करते हैं। इसके साथ ही विवाद की स्थिति में इस भूमि को सरकारी भूमि घोषित कर दिया जाएगा। वक्फ अधिनियम और वक्फ के संबंध में गलतफहमियां पैदा की गई हैं और सोशल मीडिया पर इन गलतफहमियों को हवा दी गई है। मीडिया में यह भी फैलाया गया कि वक्फ का मालिकाना हक इतना अधिक है और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मामले में कहा गया कि अब वक्फ के मामले में न्याय के लिए उच्च न्यायालय को सर्वोच्च न्यायालय जाना पड़ेगा। यह पूरी तरह ग़लत है। यह विवाद हाईकोर्ट के बाहर सड़क पर स्थित एक मस्जिद को लेकर था जिसे काज़मी साहब ने नमाजियों के लिए बनवाया था। इस तरह से संदेह फैलाया जा रहा है।

मुन्सा बुशरा आबिदी ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा घोषित किसी भी विरोध प्रदर्शन में मुस्लिम महिलाएं सबसे आगे होंगी। सरकार मुस्लिम महिलाओं को लॉलीपॉप नहीं दे सकती, क्योंकि वे सरकार की मंशा और दवाइयों को जानती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं बती गुल से लेकर सलाम तक हर तरह के विरोध प्रदर्शन में शामिल हैं और हम इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौलाना महमूद दरियाबादी, शांति समिति के प्रमुख फ़रीद शेख और अन्य धर्मों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया:

महाराष्ट्र

किसानों की बढ़ती मुश्किलों को लेकर शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र सरकार पर साधा निशाना

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भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ओर से महाराष्ट्र के ज्यादातर हिस्सों से मानसून की वापसी की आधिकारिक घोषणा के बाद सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा है। शिवसेना (यूबीटी) की ओर से चेतावनी दी गई कि महाराष्ट्र को गंभीर सूखे का सामना करना पड़ सकता है।

पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में ठाकरे गुट की ओर से इस बात पर जोर दिया गया कि बिना बारिश के मॉनसून के चले जाने से राज्यभर के किसानों की आखिरी उम्मीदें भी टूट गई हैं और महाराष्ट्र का आधे से ज्यादा हिस्सा बुरी तरह सूख गया है।

संपादकीय के अनुसार, इस सीजन में महाराष्ट्र के 36 में से 20 से ज्यादा जिलों में बारिश की कमी दर्ज की गई। मानसून के देर से आने के कारण शुरुआती बुआई में रुकावट आई। लगभग दो महीने तक लगातार बारिश नहीं होने से बुआई की कोशिशें भी बेकार गईं जिससे मराठवाड़ा, विदर्भ और मध्य महाराष्ट्र में फसलें बर्बाद हो गईं।

‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया, “राज्य में सबसे ज्यादा कमी सोलापुर में 58 प्रतिशत दर्ज की गई। बीड में बारिश की कमी 51 प्रतिशत रही। हिंगोली में 49 प्रतिशत, जालना में 48 प्रतिशत और अहिल्यानगर व धाराशिव दोनों में 46 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। यहां तक कि तटीय सिंधुदुर्ग, जो आमतौर पर ज्यादा बारिश के लिए जाना जाता है, वहां भी 36 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।”

राज्य प्रशासन पर निशाना साधते हुए ठाकरे गुट की ओर से आरोप लगाया गया कि सूखे से प्रभावित सोलापुर में स्थानीय अधिकारियों ने गार्डियन मिनिस्टर को सिंचाई वाले हरे-भरे खेत का मुआयना कराया जबकि दूसरी जगहों पर फसलें सूख चुकी थीं। इसे उन्होंने पीड़ित किसानों का क्रूर मजाक बताया।

असामान्य मौसम के कारण यह संकट और भी गंभीर गया है। आम तौर पर अक्टूबर में होने वाली गर्मी अगस्त के मध्य में ही शुरू हो गई और राज्य भर में तापमान 36 डिग्री तक पहुंच गया। संपादकीय में कहा गया है कि इस लगातार गर्मी ने हरे-भरे चरागाहों, कुओं और स्थानीय जल स्रोतों को सुखा दिया है, जिससे पीने के पानी और मवेशियों के चारे की भारी कमी हो गई है।

संपादकीय में इस बात पर भी जोर दिया गया कि भारी आर्थिक तंगी के कारण विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे इलाकों में किसानों की आत्महत्या का नया दौर शुरू हो चुका है। राजनीतिक नेताओं पर सीधा निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि सिर्फ सूखा घोषित कर देने से सरकार अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो जाती।

संपादकीय में कहा गया है कि मॉनसून के लौटने के साथ ही, वे मंत्री और नेता भी सचिवालय लौट गए हैं जो पहले फोटो खिंचवाने के लिए खेतों की मेड़ों का दौरा करते थे और किसान अब भी तुरंत राहत का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

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महाराष्ट्र

मुंबई के शिवाजी पार्क में बिना इजाजत जमा होने पर सीजेपी समर्थकों के खिलाफ केस दर्ज

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मुंबई के शिवाजी पार्क में बिना इजाजत के इकट्ठा होने, नारे लगाने और घोषणाएं करने के आरोप में शनिवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

मुंबई पुलिस के अनुसार, लगभग 400 से 500 अज्ञात समर्थक और प्रदर्शनकारी, जिनमें सीजेपी सदस्य अजिंक्य शिंदे, प्रणय अहीरे, आशुतोष रंका, अभिजीत दिपके, सौरव दास, आफरीन नवाज, सौम्या कोर्डे, अंकित भारद्वाज, विजय मलंगी और योगेश इंगले शामिल थे, ने दादर वेस्ट में मीनाताई ठाकरे मेमोरियल के सामने शिवाजी पार्क ग्राउंड के गेट नंबर 6 पर बिना अनुमति के जमा हुए।

बताया जा रहा है कि यह जमावड़ा 2 अक्टूबर की शाम 4 बजे से 7 बजे के बीच शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में हुआ।

पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारी एक सार्वजनिक सड़क पर जमा हुए और नारे लगाए, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई। बिना जरूरी अनुमति के लाउडस्पीकर भी लगाए गए थे।

शुक्रवार को सीजेपी ने चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए अपना ‘जेल भरो’ विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।

भारी पुलिस तैनाती और शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन करने की औपचारिक अनुमति न मिलने के बावजूद हजारों नागरिक और समर्थक कार्यक्रम स्थल पर जमा हुए। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को निशाना बनाते हुए नारे लगाए गए।

आयोजकों द्वारा अपने आंदोलन का ‘सीजन 2’ बताए गए इस विरोध प्रदर्शन को मुंबई पुलिस द्वारा अनुमति न दिए जाने के बावजूद आयोजित किया गया। बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे, जबकि दादर इलाके के कई हिस्सों में बैरिकेड्स लगाए गए थे।

इस प्रदर्शन को सार्वजनिक हस्तियों, बुद्धिजीवियों और बॉलीवुड हस्तियों का भी समर्थन मिला, जिन्होंने कार्यक्रम में भाग लिया और मतदान के अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थानों के महत्व के बारे में बात की।

मौजूद लोगों में अभिनेता शबाना आजमी और नसीरुद्दीन शाह के साथ-साथ संगीतकार विशाल ददलानी भी शामिल थे। इस सभा में शामिल लोगों ने वोटिंग के अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया।

अभिनेता प्रकाश राज ने भी एक रिकॉर्डेड वीडियो मैसेज के जरिए अपना समर्थन दिया और नागरिकों से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की अपील की।

सभा को संबोधित करते हुए सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की आलोचना की।

दिपके ने औपचारिक रूप से ‘जेल भरो’ आंदोलन का आह्वान किया और कहा कि वोटिंग के अधिकार की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होना एक मौलिक संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने के खिलाफ पुलिस की चेतावनियों को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को चुनौती भी दी।

दिपके ने कहा, “मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, आपने हमें सिर्फ तीन दिन के लिए जेल में डालने की बात कही थी। अगर आपने तीन महीने कहा होता तो पूरा मुंबई शहर पूरी तरह ठप हो जाता।”

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महाराष्ट्र

महाराष्ट्र से मानसून की और विदाई; कोंकण क्षेत्र के लिए गर्म और आर्द्र मौसम की चेतावनी

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मुंबई प्रेस — भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को घोषणा की है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों के साथ-साथ उत्तर भारत के शेष हिस्सों, गुजरात और मध्य प्रदेश से पूरी तरह वापस चला गया है।

मानसून की वापसी की मौजूदा रेखा महाराष्ट्र में हरनई, बारामती, परभणी और ब्रह्मपुरी से होकर गुजर रही है, जो उत्तर-पूर्व में रायपुर, रांची और सुपौल तक फैली हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 2 से 3 दिनों के दौरान मराठवाड़ा, विदर्भ और मध्य महाराष्ट्र के कुछ और हिस्सों से मानसून की आगे की विदाई के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।
तटीय महाराष्ट्र के लिए गर्म और आर्द्र मौसम का अलर्ट

तटीय इलाकों के निवासियों को इस सप्ताहांत बढ़ती उमस और गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। आईएमडी ने 3 अक्टूबर से 5 अक्टूबर तक कोंकण और गोवा क्षेत्र में गर्म और आर्द्र (हॉट एंड ह्यूमिड) मौसम रहने की चेतावनी जारी की है।
इस शुष्क और उमस भरे दौर के बाद क्षेत्र में हल्की बारिश की गतिविधियां फिर से शुरू होने की संभावना है। 6 से 9 अक्टूबर के बीच कोंकण-गोवा और मध्य महाराष्ट्र में अलग-अलग स्थानों पर छिटपुट वर्षा होने का अनुमान जताया गया है।

दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत का पूर्वानुमान

एक तरफ जहां देश के मध्य और उत्तरी हिस्सों से मानसून विदा ले रहा है, वहीं दक्षिणी राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। केरल, माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 4 से 6 अक्टूबर के दौरान अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा, 5 और 6 अक्टूबर को दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी तेज बौछारें पड़ सकती हैं।
पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 3 अक्टूबर को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश जारी रहने का अनुमान है।

मछुआरों और किसानों के लिए सलाह

अरब सागर के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण, आईएमडी ने मछुआरों को 3 अक्टूबर को केरल तट, लक्षद्वीप, मालदीव और कॉमोरिन क्षेत्र से सटे समुद्र में न जाने की सलाह दी है। साथ ही, भारी बारिश वाले क्षेत्रों के किसानों को फसलों को नुकसान से बचाने के लिए खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था करने और कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखने का परामर्श दिया गया है।

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