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2014 में क्यों टूटा था शिवसेना-भाजपा का गठबंधन? सीएम फडणवीस ने किया खुलासा

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मुंबई, 25 मार्च। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक बड़ा खुलासा करते हुए 2014 में शिवसेना और भाजपा के बीच हुए नाटकीय विवाद की अंदरूनी कहानी साझा की। सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के अभिनंदन समारोह में फडणवीस ने पहली बार गठबंधन टूटने के कारणों के बारे में खुलकर बात की।

फडणवीस ने कहा: “हम शिवसेना को 147 सीटें देने के लिए तैयार थे, और यह तय हुआ था कि मुख्यमंत्री हमारी तरफ से होगा, जबकि उपमुख्यमंत्री शिवसेना से होगा।”

उन्होंने आगे दावा किया कि शुरुआती चर्चाओं में आपसी समझ का संकेत मिला, लेकिन सीट आवंटन पर समझौता करने से शिवसेना के इनकार के कारण गठबंधन टूट गया।

फडणवीस ने बताया, “लेकिन उद्धव ठाकरे 151 सीटों पर अड़े रहे और यही वह समय था जब गठबंधन टूट गया।”

उनके अनुसार, भाजपा ने सीट बंटवारे का एक फॉर्मूला प्रस्तावित किया था, जिसके तहत शिवसेना 147 सीटों पर लड़ेगी और भाजपा 127 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। हालांकि, उद्धव ठाकरे 151 सीटों की मांग पर अड़े रहे, जिससे दोनों दलों के बीच एक ऐसा मतभेद पैदा हो गया, जिसे सुलझाया नहीं जा सकता।

फडणवीस ने आगे कहा: “हम शिवसेना के नेतृत्व के साथ बातचीत कर रहे थे और हम उन्हें और जगह देने के लिए भी तैयार थे। लेकिन उद्धव ने अपने दिमाग में 151 की संख्या तय कर ली थी।”

देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “मैं पार्टी अध्यक्ष था। उन्होंने (ओमप्रकाश माथुर) कहा कि हम मिलकर सरकार लाएंगे और यह वो समय था जब हमारे प्रिय मित्र उस समय की तत्कालीन शिवसेना के साथ हमारी बातचीत चल रही थी।”

उन्होंने ओम प्रकाश माथुर के महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के बारे में विस्तार से बताया, जिन्होंने भाजपा नेता अमित शाह से बात की, जिन्होंने फिर इस मामले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाया।

“गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री से बात की, और यह तय हुआ कि अगर भाजपा के लिए 127 और शिवसेना के लिए 147 का फॉर्मूला होगा, तभी गठबंधन जारी रहेगा। अन्यथा, गठबंधन काम नहीं करेगा,” फडणवीस ने कहा।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने उस महत्वपूर्ण क्षण का खुलासा किया, जिसके कारण अंतिम रूप से गठबंधन टूट गया। उन्होंने कहा: “मुझे अमित शाह और ओम प्रकाश माथुर पर भरोसा था। हमें विश्वास था कि हम जीत सकते हैं, लेकिन पार्टी के बाकी लोग उतने आशावादी नहीं थे।”

अंततः, माथुर और अमित शाह के समर्थन से फडणवीस ने शिवसेना को अल्टीमेटम दिया, जिसमें शिवसेना के लिए 147 और भाजपा के लिए 127 के प्रस्तावित फॉर्मूले पर शिवसेना के साथ चुनाव लड़ने की पेशकश की गई।

फडणवीस ने याद करते हुए कहा, “हमने उनसे कहा कि अगर आप 147 सीटों पर लड़ने के लिए तैयार हैं, तो हम आपके साथ खड़े होंगे और हम 127 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। दोनों पार्टियों को बेहतरीन नतीजे मिलेंगे और दोनों 200 से ज़्यादा सीटें जीतेंगे।” हालांकि, उद्धव ठाकरे ने 151 सीटों पर अड़े रहने के कारण प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

फडणवीस के अनुसार, इस हठ के कारण गठबंधन टूट गया।

फडणवीस ने कहा: “लेकिन ऐसा लगता है कि नियति के नियम में कुछ और ही लिखा था – मुझे मुख्यमंत्री बनना था।”

फडणवीस ने चुनाव रणनीति के बारे में भी जानकारी साझा की। सीट बंटवारे की बातचीत में असफलता के बावजूद, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि कैसे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने रिकॉर्ड संख्या में निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ा।

उन्होंने कहा, “हमने 260 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा था, जो अभूतपूर्व था। इससे पहले, हमने कभी 117 से ज़्यादा सीटों पर चुनाव नहीं लड़ा था।” फडणवीस के अनुसार, 260 सीटों पर लड़ने के इस साहसिक निर्णय ने महाराष्ट्र में भाजपा की सफलता की नींव रखी।

फडणवीस के मुताबिक, “तब से, भाजपा महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है और पिछले 30 वर्षों में 100 सीटों का आंकड़ा पार करने वाली एकमात्र पार्टी है। इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और ओम प्रकाश माथुर को जाता है।”

यह खुलासा उन नाटकीय राजनीतिक घटनाओं पर नई रोशनी डालता है, जिसके कारण भाजपा-शिवसेना गठबंधन टूट गया और महाराष्ट्र की राजनीति पूरी तरह बदल गई।

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‘अराजकतावादी मानसिकता’: मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर नितिन नबीन ने राहुल गांधी पर निशाना साधा

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वाराणसी: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष में हिम्मत है, तो उन्हें उन सीटों से इस्तीफा दे देना चाहिए जो भारत निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए चुनावों में जीती गई थीं। यह बयान बुधवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में जंतर-मंतर की ओर किए गए एक और विरोध प्रदर्शन के बाद आया। इंडिया ब्लॉक के सांसद जब सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध करने की कोशिश कर रहे थे, तब उन्हें ले जा रही बस को जनपथ के पास रोक दिया गया और दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और विपक्ष के अन्य सांसदों को हिरासत में ले लिया। पत्रकारों से बात करते हुए नितिन नबीन ने कहा, “मैं कहूंगा कि ये लोग अराजकतावादी सोच वाले हैं, जो समाज में सिर्फ जहर घोलना जानते हैं। आखिर, इसी चुनाव आयोग ने केरल में चुनाव कराए थे।”

उन्होंने कहा, “इसने तमिलनाडु में भी चुनाव कराए, जहां वे सत्ता में आए। अगर हिम्मत है, तो राहुल गांधी को पहले इस्तीफा देना चाहिए। जनता उनके खेल को अच्छी तरह देख रही है। विपक्ष के ये नेता घुसपैठियों को बचाने में लगे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “वे लोगों के अधिकार छीनने की कोशिश कर रहे हैं। हम उन्हें उनके अधिकार वापस दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। मेरा मानना ​​है कि जो लोग यहां के हैं, उनका देश के संसाधनों पर अधिकार है।” नबीन ने काशी विश्वनाथ मंदिर में की गई व्यवस्थाओं के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, “मैं बिहार से हूं और वाराणसी आना हमारी परंपरा का हिस्सा है। मैं कहूंगा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बहुत अच्छे तरीके से बनाया गया है। भक्तों को भी यह पसंद आ रहा है। यह एक शानदार अनुभव है। इसके लिए मैं पीएम मोदी और सीएम योगी को बधाई देना चाहता हूं।” भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बाबा विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। वे महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में युवाओं से बातचीत करेंगे और बाद में गोकुल धाम में आगामी चुनावों की तैयारियों को लेकर पार्टी पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे।

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जंतर-मंतर जा रहे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत इंडिया ब्लॉक के नेता हिरासत में लिए गए

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इंडिया ब्लॉक के नेताओं को बुधवार को जंतर-मंतर जाते समय पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हैं। विपक्षी नेता लगातार दूसरे दिन मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर जा रहे थे।

हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी ने कहा, “गृह मंत्री अमित शाह, पीएम नरेंद्र मोदी, सीईसी ज्ञानेश कुमार और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ये सब कुछ कर सकते हैं, लेकिन हम उन्हें न्याय के कटघरे में लाएंगे। यह मेरी गारंटी है कि इन चारों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। यह सब घबराहट में की गई प्रतिक्रिया है। यह सब डर है।”

पुलिस ने राहुल गांधी समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को धक्का देते हुए बसों में बैठाया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कस्तूरबा गांधी मार्ग पर हिरासत में लिए गए राहुल गांधी और अन्य नेताओं को ले जा रही बस का टायर कथित तौर पर पंक्चर कर दिया।

इससे पहले प्रियंका गांधी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों की भारी मौजूदगी के बीच सड़क पर लेट गईं और विपक्षी नेताओं को चुनाव आयोग से मिलने की अनुमति दिए जाने तक वहां से हटने से इनकार कर दिया।

प्रियंका गांधी ने पत्रकारों से कहा, “यह है कि वे सांसदों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, जो सिर्फ चुनाव आयुक्त से मिलने की मांग कर रहे हैं।”

उन्होंने सुरक्षाकर्मियों पर सांसदों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए कहा, “पुलिसकर्मियों ने मुझे पूरी तरह खरोंच दिया है। उन्होंने हमें जमीन पर गिरा दिया। अब हम यहां से नहीं हटेंगे। उन्हें अपनी फोर्स वापस बुलाने दीजिए। मैं यहां से नहीं हटूंगी।”

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सुरक्षाकर्मियों पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हम कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज बर्दाश्त नहीं करेंगे। राहुल जी और मैं बस में थे। जब राहुल जी बस से नीचे उतरे तो राहुल जी और प्रियंका जी के साथ धक्का-मुक्की शुरू हो गई। उन्होंने गुंडागर्दी की है और गुंडों की तरह व्यवहार कर रहे हैं।”

कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा, “जब तक हमें अपने सवालों के जवाब नहीं मिलते, हमारी आवाज मजबूत बनी रहेगी।”

वहीं, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ पुलिस के कथित व्यवहार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि नेताओं को बसों में भरकर पुलिस थानों ले जाया गया और दुर्भाग्य से सुबह उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या सार्वजनिक स्थानों पर जाना, धरना देना, विरोध प्रदर्शन करना या मार्च निकालना देश में गैरकानूनी है।

इससे पहले जंतर-मंतर के लिए रवाना होने से पहले राहुल गांधी ने मंगलवार को आकाशवाणी भवन के बाहर नौ घंटे से अधिक समय तक धरना देने के मामले में अपने खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पहले से ही 45 मामले हैं और उनका “लक्ष्य 100 प्राथमिकी” का है।

मंगलवार को इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने चुनाव आयोग के समक्ष अपनी मांगें रखने के लिए प्रदर्शन किया था। बुधवार को भी विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी रखा।

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पिंक पास को लेकर सौरभ भारद्वाज बोले- जनता को परेशान करना इनकी आदत

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दिल्ली की बसों में महिलाओं के मुफ्त सफर के लिए पिंक पास को अनिवार्य किए जाने के बाद आम आदमी पार्टी ने सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि पिंक पास बनवाने के लिए महिलाओं को घंटों लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। उनका दावा है कि दिनभर लाइन में लगने के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाओं के पास नहीं बन पा रहे हैं, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जनता को परेशान करना इस सरकार की आदत बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले से आसानी से मिल रही सुविधाओं को भी जटिल बना दिया गया है और आम लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए सड़कों पर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मुख्यमंत्री ने हर आसान काम और पहले से चल रही सुविधा के लिए लोगों को लाइनों में खड़ा कर दिया है।

उन्होंने नोटबंदी, एसआईआर और पिंक पास के साथ-साथ एलपीजी सिलेंडर से जुड़ी परेशानियों का भी उल्लेख किया। उनका आरोप है कि लोगों को इतना परेशान कर दिया जाए कि वे सरकार से किसी नई सुविधा की मांग ही न करें और अपनी रोजमर्रा की परेशानियों में उलझे रहें। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में पहले सभी महिलाएं बसों में मुफ्त सफर करती थीं और इसके लिए किसी विशेष पास की जरूरत नहीं होती थी।

उनके मुताबिक, अब पिंक पास को अनिवार्य किए जाने से महिलाओं को पास बनवाने के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में बड़ी संख्या में महिलाओं के वोट काटे गए हैं और ऐसे में उन्हें पिंक पास की सुविधा से वंचित किया जा रहा है। वहीं, जिन महिलाओं को पास मिलने की उम्मीद है, उन्हें भी इसे बनवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

आप नेता ने दिल्ली में रहने वाली दूसरे राज्यों की महिलाओं को लेकर भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित आसपास के राज्यों से दिल्ली आने वाली महिलाएं, जिनमें नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम और सोनीपत से आने वाली महिलाएं शामिल हैं, उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में रोजगार, शिक्षा और अन्य जरूरी कामों के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं पड़ोसी शहरों से आती-जाती हैं। ऐसे में मुफ्त बस यात्रा की सुविधा से जुड़ी किसी भी नई व्यवस्था का सीधा असर इन महिलाओं पर पड़ता है। उन्होंने सरकार से व्यवस्था को सरल बनाने और महिलाओं की परेशानियों को तत्काल दूर करने की मांग की।

आम आदमी पार्टी का कहना है कि पहले से उपलब्ध मुफ्त बस यात्रा की सुविधा को आसान बनाए रखने के बजाय पिंक पास की अनिवार्यता से महिलाओं के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार को महिलाओं को राहत देने के लिए व्यवस्था को सरल करना चाहिए, न कि उन्हें पास बनवाने के लिए लंबी कतारों में खड़ा करना चाहिए।

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