राष्ट्रीय समाचार
एनआईए की टीम ने महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र का दौरा किया, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी
छत्रपति संभाजीनगर, 21 मार्च। औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग के बीच, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर पहुंची और खुल्ताबाद का निरीक्षण किया, जहां कब्र स्थित है और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी।
यह घटना 17 मार्च की रात को नागपुर में हुई हिंसा के बाद हुई है। एनआईए की टीम ने मराठवाड़ा के परभणी, जालना और नांदेड़ जिलों और विदर्भ के बुलढाणा का भी दौरा किया, ताकि वहां संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। टीम ने कथित तौर पर राज्य के आतंकवाद निरोधी दस्ते की सहायता मांगी है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने 18वीं सदी की संरचना के दो तरफ टिन की चादरें लगा दी हैं। जिला कलेक्टर दिलीप स्वामी और पुलिस अधीक्षक विनयकुमार राठौड़ द्वारा कब्र का दौरा करने के बाद जिला प्रशासन ने तीन दिन पहले ऐसा किया था। औरंगजेब की कब्र को एएसआई ने ‘राष्ट्रीय महत्व के स्मारक’ के तौर पर संरक्षित किया है।
नागपुर पुलिस ने 17 मार्च की हिंसा के मास्टरमाइंड फहीम खान और पांच अन्य के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया है।
नागपुर साइबर क्राइम के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) लोहित मतानी ने कहा, “फहीम खान समेत छह लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। कुछ लोगों ने पुलिस के खिलाफ हिंसा का समर्थन किया और इसकी प्रशंसा की। यह संख्या और बढ़ सकती है। इस हमले का समर्थन करते हुए कुछ टिप्पणियां की गईं, जिससे दंगे और भड़के। ऐसी टिप्पणियां करने वाले लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है।”
उन्होंने कहा कि नागपुर में भड़के दंगों के सिलसिले में 300 से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट की जांच की गई है। इनमें से 140 अकाउंट में आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो पाए गए हैं।
डीसीपी ने कहा कि इन सभी के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है।
इसके अलावा, साइबर सुरक्षा और साइबर अपराध प्रवर्तन के लिए एक नोडल एजेंसी महाराष्ट्र साइबर ने भड़काऊ सामग्री फैलाने वाले सोशल मेडिकल अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। महाराष्ट्र साइबर ने नागपुर सिटी साइबर पुलिस स्टेशन के साथ मिलकर नागपुर में हाल ही में हुए दंगों से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने में लगे कई सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की है।
“फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर और यूट्यूब पर आपत्तिजनक सामग्री के 140 से अधिक मामलों की पहचान की गई है और उनकी रिपोर्ट की गई है। जवाब में, ऐसी सामग्री को तुरंत हटाने की सुविधा के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(बी) के तहत नोटिस जारी किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, इन खातों को संचालित करने वाले व्यक्तियों की वास्तविक पहचान को उजागर करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 94 के तहत नोटिस जारी किए गए हैं। ऐसी भड़काऊ सामग्री फैलाने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी,” महाराष्ट्र राज्य साइबर विभाग के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के कार्यालय द्वारा बुधवार देर रात जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
रणनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर मतभेदों के बावजूद भारत-अमेरिका साझेदारी आगे बढ़ रही है : रिपोर्ट

पिछले 25 वर्षों के ज्यादातर समय में भारत-अमेरिका संबंध इस सोच पर आधारित रहे हैं कि एक मजबूत भारत एशिया में शक्ति संतुलन बनाए रखने, सप्लाई चेन में विविधता लाने और एक स्वतंत्र व खुले इंडो-पैसिफिक को मजबूत करने में मदद करके अमेरिका के बड़े रणनीतिक मकसद को पूरा करता है।
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मतभेद तो हमेशा से रहे हैं, लेकिन व्यापक रणनीतिक वजहें इतनी मजबूत मानी जाती थीं कि वे इन मतभेदों को झेल सकें। हालांकि, अब इस सोच को बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है।
भारत की पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने हाल ही में ‘इंडिया नैरेटिव’ में लिखा, “भारत और अमेरिका के बीच मौजूदा मतभेद सिर्फ तेल के मुद्दे तक सीमित नहीं हैं। शायद साझेदारी के मतलब को लेकर भी गहरी असहमति है। वॉशिंगटन अक्सर रणनीतिक तालमेल को राजनीतिक सहमति की मांग करने का आधार बनाता है। वहीं, नई दिल्ली में साझेदारी का मतलब संप्रभु देशों के बीच सहयोग माना जाता है, जिनके बीच रूस, ईरान और चीन से निपटने के तरीकों को लेकर मतभेद बने रहेंगे।”
उन्होंने कहा, “जब ये मतभेद वफादारी की सार्वजनिक परीक्षा बन जाते हैं तो कूटनीति की जगह दिखावा ले लेता है। समझौता करना इसलिए और मुश्किल हो जाता है क्योंकि इसे घुटने-टेकने जैसा दिखाया जाता है।”
राव ने कहा कि नई दिल्ली ने वॉशिंगटन की उस पुरानी सोच से दूर होने में कई साल लगाए हैं, जिसके तहत भारत और पाकिस्तान को एक ही क्षेत्रीय समीकरण का हिस्सा माना जाता था। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करने के ट्रंप के बार-बार किए जा रहे दावों से उस पुरानी सोच पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है।
पूर्व भारतीय राजनयिक ने कहा, “यह आपत्ति सिर्फ सम्मान की बात नहीं है। भारत के वैश्विक आर्थिक, तकनीकी और समुद्री हित हैं, जिन्हें सिर्फ पड़ोसी देश के साथ झगड़े के संकीर्ण नजरिए से नहीं समझा जा सकता, लेकिन सोचने की पुरानी आदतें दशकों की कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद बनी रह सकती हैं, खासकर तब जब वे किसी राष्ट्रपति के राजनीतिक जुनून को पूरा करती हों।”
इस रिपोर्ट में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हाल ही में न्यूयॉर्क में की गई टिप्पणियों का जिक्र किया गया है, जिसमें उन्होंने भारत का पक्ष साफ तौर पर रखा।
विदेश मंत्री जयशंकर ने एशिया सोसाइटी को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अमेरिका के साथ अपनी साझेदारी को और ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि सुरक्षा से जुड़ी भारत की सबसे अहम चिंताओं में से किसी एक को न समझने से दोनों देशों के संबंधों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने पड़ोसी देश से होने वाले आतंकवाद को दशकों से चली आ रही एक सोची-समझी नीति बताया।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रतिक्रिया आहत राष्ट्रवाद से प्रेरित नहीं होनी चाहिए। इसमें कहा गया है कि रणनीतिक स्वायत्तता की असली परीक्षा इस बात से नहीं होती कि बाहरी दबाव की कितनी जोर-शोर से निंदा की जाती है, बल्कि इस बात से होती है कि देश उसका कितनी प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है।
राव ने ‘इंडिया नैरेटिव’ में लिखा, “इसके लिए अलग-अलग तरह की डिफेंस सप्लाई, बेहतर एनर्जी सिक्योरिटी, टेक्नोलॉजी की क्षमता, मैन्युफैक्चरिंग की ताकत और संस्थागत मजबूती की जरूरत है। इन आधारों के बिना स्वायत्तता सिर्फ बातें होंगी जो असल में निर्भरता पर टिकी होंगी। भारत को उन कीमतों को समझना होगा जो उसे चुकानी पड़ सकती हैं और उन्हें चुकाने के साधन भी विकसित करने होंगे।”
इस बात पर जोर देते हुए कि इसका मतलब अमेरिका से पीछे हटना नहीं है, उन्होंने कहा, “एशिया में अनुकूल संतुलन बनाए रखने के लिए भारत को अमेरिकी टेक्नोलॉजी, निवेश और सहयोग की जरूरत है। वहीं, अमेरिका को ऐसे भारत की जरूरत है जो चीन के दबदबे का मुकाबला कर सके। दोनों देशों के पास जो कुछ उन्होंने बनाया है, उसे बनाए रखने की वजह है, और जब भी किसी असहमति को रिश्तों पर जनमत संग्रह बना दिया जाता है, तो किसी को भी फायदा नहीं होता।”
अपराध
असम राइफल्स और कस्टम विभाग ने त्रिपुरा में 25 लाख रुपए मूल्य का 501 किलोग्राम गांजा जब्त किया

असम राइफल्स ने कस्टम विभाग के समन्वय से त्रिपुरा के खोवाई जिले में लगभग 25 लाख रुपए मूल्य का 501 किलोग्राम गांजा जब्त किया है।
रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए असम राइफल्स ने कस्टम विभाग के सहयोग से गुरुवार शाम को त्रिपुरा के खोवाई जिले में एक अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 25 लाख रुपए मूल्य का 501 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया।
यह अभियान खुफिया जानकारी और निरंतर निगरानी के आधार पर चलाया गया था।
संयुक्त टीम ने पश्चिम सोनातला से संदिग्ध वाहन का पीछा शुरू किया। पीछा पश्चिम त्रिपुरा और खोवाई जिले की सीमा पर स्थित हेजामारा ब्लॉक से 18 किलोमीटर पहले बैखुंतपुर गांव में समाप्त हुआ।
हालांकि, अभियान के दौरान वाहन का चालक मौके से भागने में सफल रहा।
इस जब्ती के संबंध में किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं मिली है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अवैध नशीले पदार्थों की बरामदगी पूर्वोत्तर में सक्रिय नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क को बाधित करने के लिए असम राइफल्स और सहयोगी एजेंसियों के निरंतर प्रयासों को उजागर करती है।
बरामद प्रतिबंधित सामग्री को आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए सीमा शुल्क अधिकारियों को सौंप दिया गया है।
इस बीच, असम राइफल्स ने सीमा शुल्क अधिकारियों के साथ मिलकर 6 अक्टूबर को खोवाई जिले में लगभग 1.74 करोड़ रुपए मूल्य का 340 किलोग्राम गांजा जब्त किया है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि राज्य पुलिस, असम राइफल्स, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (टीएसआर) और अन्य सुरक्षा बल संयुक्त अभियानों में राज्य के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर बांग्लादेश से सटे सेपाहिजाला जिले में अवैध गांजे की खेती को अक्सर नष्ट कर देते हैं।
एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, त्रिपुरा में उत्पादित सूखा गांजा स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल नहीं होता और बिहार और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में तस्करी करके भेजा जाता है, जहां इसकी ऊंची कीमत मिलती है।
परिवहन के दौरान, सूखे गांजे की खेप अक्सर ट्रकों, छोटे वाहनों और यहां तक कि यात्री ट्रेनों से भी जब्त की जाती है।
महिलाओं सहित निवासियों ने दावा किया है कि वे अपनी आजीविका के लिए पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में गांजे की खेती करते हैं।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि कई बार यह पाया गया है कि वन भूमि और अन्य सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करके अवैध रूप से गांजे की खेती की जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि मादक औषधि और मनोरोगी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत किसी भी व्यक्ति द्वारा मादक और मनोरोगी पदार्थों की खेती, कब्जा, बिक्री, खरीद या सेवन करना अवैध है, और उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और 20 साल तक की कैद हो सकती है।
राजनीति
कांग्रेस कार्यकर्ताओं को परेशान कर रही पुलिस, लोकतंत्र की आवाज दबाई नहीं जा सकती: दीपेंद्र हुड्डा

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने हरियाणा कांग्रेस कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों को पुलिस द्वारा कथित तौर पर परेशान किए जाने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा पुलिस, सीआईडी और सीआईए के कर्मचारी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घरों पर पहुंचकर उन्हें रोकने और हिरासत में लेने की कोशिश कर रहे हैं। हुड्डा ने सवाल उठाया कि क्या लोकतंत्र में विपक्षी दल के कार्यकर्ताओं को अपनी बात रखने और आंदोलन में शामिल होने का अधिकार नहीं है?
कांग्रेस सांसद ने कहा कि सुबह से उनके पास हजारों फोन आ चुके हैं। पुलिस और विभिन्न जांच एजेंसियों के कर्मचारियों को अन्य काम छोड़कर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के घरों पर जाने की जिम्मेदारी दी गई है। कार्यकर्ताओं से पूछा जा रहा है कि क्या वे दिल्ली आकर सांसद से मिलेंगे या आंदोलन में शामिल होंगे। जो लोग दिल्ली आने की बात कहते हैं, उन्हें कथित तौर पर रोका जा रहा है और परेशान किया जा रहा है। सांसद ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोकने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि पुलिस को कार्यकर्ताओं के घरों में जाकर उन्हें रोकने की अनुमति किसने दी है।
उन्होंने एक महिला कार्यकर्ता का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि जब वह दिल्ली आई हुई थीं, तब पुलिस उनके घर पहुंची और उनके बच्चों से कहा कि वे अपनी मां को वापस आने के लिए कहें। इस घटना के बाद बच्चे रो रहे थे और परिवार की ओर से फोन आ रहे थे। इस तरह की कार्रवाई बेहद दुखद है। उन्होंने चेतावनी दी कि पुलिस की कार्रवाई से जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। लोकतंत्र में विरोध करने और अपनी मांगें उठाने का अधिकार सभी को मिलना चाहिए।
10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली में जगह-जगह बैरिकेडिंग किए जाने और मेट्रो स्टेशन बंद रखने के ऐलान पर भी दीपेंद्र हुड्डा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलने के लिए विपक्ष के 250 सांसदों को उस दिन अनुमति दे दी जाती, जब वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात कर उनका इस्तीफा मांगना चाहते थे, तो आज दिल्ली में रास्ते बंद करने जैसी स्थिति पैदा नहीं होती।
हुड्डा ने कहा कि विपक्ष अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना चाहता है। उन्होंने सवाल किया कि जब जनप्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलेगा, तो वे अपनी शिकायतें लेकर कहां जाएंगे।
-
दुर्घटना1 year agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
महाराष्ट्र2 years agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
महाराष्ट्र2 years agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
राजनीति2 years agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
खेल2 years agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
