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मारुति सुजुकी इंडिया ने 4 प्रतिशत तक बढ़ाई कीमत, अप्रैल से होगी लागू

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नई दिल्ली, 17 मार्च। प्रमुख वाहन निर्माता ‘मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड’ ने सोमवार को इस साल तीसरी बार कीमत बढ़ाए जाने का ऐलान किया। 4 प्रतिशत तक की यह ‘कीमत वृद्धि’ बिक्री में कमी के बीच बढ़ती इनपुट लागत की भरपाई के लिए की जा रही है, जो अप्रैल से प्रभावी होगी।

कंपनी की एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, अगले महीने से वाहनों की कीमत में वृद्धि मॉडल के आधार पर अलग-अलग होगी।

मारुति सुजुकी इंडिया ने कहा, “बढ़ती इनपुट लागत और परिचालन व्यय को देखते हुए कंपनी ने अप्रैल, 2025 से अपनी कारों की कीमतों में वृद्धि करने की योजना बनाई है। कीमत में 4 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की उम्मीद है और यह मॉडल के आधार पर अलग-अलग होगी।”

कंपनी ने फाइलिंग में कहा, “हालांकि कंपनी लगातार लागत को अनुकूलित करने और अपने ग्राहकों पर पड़ने वाले असर को कम करने का प्रयास करती है, लेकिन बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा बाजार पर डालने की जरूरत है।”

मारुति सुजुकी इंडिया ने इससे पहले 1 जनवरी और 1 फरवरी को अपनी कारों की कीमतें बढ़ाई थीं।

लीडिंग कार मैन्युफैक्चरर ने चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए शुद्ध लाभ में 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही में 3,206.8 करोड़ रुपये की तुलना में वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में 3,727 करोड़ रुपये रहा।

कंपनी का शुद्ध लाभ पिछले वर्ष की इसी तिमाही के 3,130 करोड़ रुपये से 13 प्रतिशत बढ़कर 3,525 करोड़ रुपये हो गया।

इस बीच, मारुति सुजुकी इंडिया की पैरेंट कंपनी जापान की ‘सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन’ ने पिछले महीने अपनी रणनीति में “रिथिंक” के साथ एक नई मिड-टर्म योजना की घोषणा की। ऐसा “भारत में बाजार हिस्सेदारी में गिरावट” और बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन सेगमेंट के कारण कारोबारी माहौल बदलने की वजह से किया जा रहा है।

2025-30 के लिए अपनी नई मिड-टर्म योजना में कंपनी ने भारत को अपना “सबसे महत्वपूर्ण बाजार” बताया है।

मारुति सुजुकी का लक्ष्य भारत में 50 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी हासिल करने और देश को वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में उपयोग करने के लिए सालाना 4 मिलियन कारों का उत्पादन करने की विनिर्माण क्षमता बनाना है।

मारुति सुजुकी वर्तमान में भारत से सालाना तीन लाख वाहनों का निर्यात कर रही है।

इस दशक के अंत तक कंपनी प्रति वर्ष 7.5-8 लाख यूनिट के निर्यात का लक्ष्य बना रही है।

राजनीति

प्रधानमंत्री मोदी की उपलब्धि लोकतंत्र की शक्ति का प्रमाण : नीतीश कुमार

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नई दिल्ली, 10 जून: नरेंद्र मोदी बुधवार को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बने। इस अवसर पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य नीतीश कुमार ने उनकी प्रशंसा की है। उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक उपलब्धि को लोकतंत्र की शक्ति का सशक्त प्रमाण बताया और कहा कि साधारण शुरुआत से उठकर सबसे ऊंचे चुने हुए पद तक पहुंचने वाले वे लाखों युवा भारतीयों, खासकर साधारण पृष्ठभूमि वाले लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत बन गए हैं।

नीतीश कुमार ने अपने एक लेख में प्रधानमंत्री मोदी को लेकर अपना नजरिया पेश किया। उन्होंने कहा कि दशकों तक यह धारणा रही कि सबसे ऊंचे पद कुछ खास लोगों या प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में पैदा हुए लोगों के लिए ही आरक्षित हैं। प्रधानमंत्री मोदी के सफर ने इस धारणा को चुनौती दी है।

पीएम मोदी की सराहना करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत जैसे बड़े और प्रतिस्पर्धी लोकतंत्र में जनता का भरोसा जीतना मुश्किल है और उसे बनाए रखना और भी कठिन। फिर भी, लगातार राजनीतिक खींचतान और जनता की कड़ी नजर के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों का विश्वास बनाए रखा है। भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनकर उन्होंने लोकतांत्रिक राजनीति में एक नया मानदंड स्थापित किया है।

उन्होंने कहा कि हम भारत के अलग-अलग हिस्सों से आते हैं, लेकिन पीएम मोदी और मैं एक ही पीढ़ी से हैं, जिसकी राजनीतिक चेतना आपातकाल के दौर में आकार ग्रहण कर रही थी। हमने लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं पर हुए आघात को प्रत्यक्ष रूप से देखा और उन्हें पुनर्स्थापित करने वाले आंदोलन में भाग लिया। वह संघर्ष सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि एक ऐसा अनुभव था जिसने सार्वजनिक जीवन और लोकतांत्रिक मूल्यों के बारे में हमारी समझ को आकार दिया।

नीतीश कुमार ने कहा कि दशकों तक यह धारणा बनी रही कि देश के सर्वोच्च पद सिर्फ कुछ विशेषाधिकार प्राप्त लोगों या प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में जन्मे व्यक्तियों के लिए आरक्षित हैं। प्रधानमंत्री मोदी की जीवन-यात्रा ने इस धारणा को चुनौती दी है। साधारण पृष्ठभूमि से उठकर देश के सर्वोच्च निर्वाचित पद तक पहुंचने वाले प्रधानमंत्री मोदी लाखों युवाओं, विशेषकर साधारण परिवारों से आने वाले युवाओं, के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हैं। उनकी कहानी इस विश्वास को मजबूत करती है कि एक जीवंत लोकतंत्र में दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और क्षमता जन्म व परिस्थितियों से उत्पन्न बाधाओं को पार कर सकती है। यह उपलब्धि भारतीय लोकतंत्र की शक्ति और खुलेपन का सबूत है।

इस दौरान, नीतीश कुमार ने अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, पिछड़े वर्गों, अति पिछड़े वर्गों, महिलाओं और गरीब परिवारों के लिए मोदी सरकार के निर्णयों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गरीबी उन्मूलन पर पीएम मोदी के विशेष ध्यान के कारण एनडीए सरकार ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सहायता की है। शौचालय, बैंक खाते, आवास, गैस कनेक्शन, नल का जल, स्वास्थ्य बीमा और अन्य अनेक बुनियादी सुविधाएं करोड़ों लोगों तक पहुंची हैं।

नीतीश कुमार ने कहा कि कई वर्षों तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए मैं जानता हूं कि यह सुनिश्चित करना कितना चुनौतीपूर्ण होता है कि योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे। सिर्फ अच्छी नीयत काफी नहीं होती, प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी है। मैंने यह भी देखा है कि नीतिगत निर्णयों को वास्तविक परिणामों में बदलने के लिए लगातार निगरानी, सुधार, प्रशासनिक प्रतिबद्धता और सूक्ष्म स्तर तक ध्यान देना जरूरी होता है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की लीडरशिप इस विश्वास को और मजबूत करती है कि एक सशक्त लोकतंत्र में दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और योग्यता जन्म व परिस्थितियों से उत्पन्न हर बाधा को पार कर सकती है।

उन्होंने पीएम मोदी की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति, संस्थागत सुधारों, रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव व वंदे भारत जैसी नई ट्रेनों की शुरुआत और गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर उनके सफल कार्यकाल का भी उल्लेख किया।

इसके साथ ही, नीतीश कुमार ने बिहार के विकास के लिए प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन को सराहा। नीतीश ने कहा, “पीएम मोदी बिहार की अनोखी संस्कृति और परंपराओं का बहुत सम्मान करते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हस्तियों को राज्य से मखाना, मधुबनी पेंटिंग और अन्य उत्पाद भेंट करके वैश्विक मंच पर बिहार की विरासत को पेश किया है।”

नीतीश कुमार ने कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल की एक खास बात यह रही है कि वैश्विक मंच पर भारत का महत्व बढ़ा है। एक भारतीय के तौर पर मुझे गर्व होता है जब अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, तकनीक, स्वास्थ्य या सहयोग जैसे मामलों में हमारी बात का सम्मान के साथ स्वागत किया जाता है। उन्होंने कहा, “अलग-अलग देशों और समूहों के साथ मजबूत संबंध बनाए रखते हुए पीएम मोदी हमेशा शांति और प्रगति के पक्ष में खड़े रहे हैं। परिणामस्वरूप, 21वीं सदी में वैश्विक विकास के एक प्रमुख चालक के रूप में दुनिया अब हमारे देश की ओर आशा से देखती है।”

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व्यापार

वैश्विक तनावों के बीच भारतीय शेयर बाजार में रौनक, सेंसेक्स में 361 अंकों की बढ़त

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मुंबई, 10 जून: पश्चिम एशिया में तनाव फिर से बढ़ने के कारण वैश्विक बाजार में मिले मिले-जुले संकेतों के बीच बुधवार को भारतीय शेयर बाजार मिश्रित रुख के साथ खुला।

30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 73,918.76 से 69.51 अंक चढ़कर 73,988.27 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,242.10 से 8.15 अंक गिरकर 23,233.95 पर खुला। हालांकि बाद में दोनों प्रमुख बेंचमार्कों में बढ़त देखने को मिली।

खबर लिखे जाने तक (सुबह 9.37 बजे के करीब) सेंसेक्स 361.29 अंकों यानी 0.49 प्रतिशत की तेजी के साथ 74,280.05 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 92.20 (0.40 प्रतिशत) अंकों की बढ़त के साथ 23,334.30 पर ट्रेड करता नजर आया।

व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.15 प्रतिशत तो निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, हालांकि शुरुआती कारोबार में दोनों में मामूली बढ़त देखने को मिली थी।

सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी एफएमसीजी में 1.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और इसने अन्य सेक्टर्स से सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी आईटी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी प्राइवेट बैंक ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मेटल और निफ्टी मीडिया में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई।

निफ्टी 50 इंडेक्स में एचयूएल, नेस्ले इंडिया, टाटा कंज्यूमर, कोटक बैंक, ट्रेंट, इंफोसिस, आईसीआईसीआई बैंक, टीसीएस और एशियन पेंट्स के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की गई, जबकि इसके विपरीत हिंडाल्को के शेयरों में सबसे ज्यादा 3.13 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इसके साथ ही टीएमपीवी, कोल इंडिया, इटरनल, भारती एयरटेल, एनटीपीसी और एमएंडएम के शेयर भी गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।

एक बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, एशिया-प्रशांत बाजारों में कमजोरी, अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली और ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद बढ़े भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय बाजारों पर भी दिखाई दे सकता है।

विशेषज्ञ ने कहा कि जब तक निफ्टी 23,100-23,000 के महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन के ऊपर बना रहता है, तब तक बाजार में रिकवरी की संभावना बनी रहेगी। ऊपर की ओर 23,500-23,600 का स्तर सबसे महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस माना जा रहा है। यदि निफ्टी इस दायरे के ऊपर मजबूती से टिकता है तो आने वाले दिनों में 23,800 से 24,000 तक की तेजी देखने को मिल सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया वीआईएक्स भी 8.53 प्रतिशत गिरकर 15.57 पर आ गया है। यह संकेत देता है कि निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई है और बाजार में भरोसा बढ़ रहा है। हालांकि उनका कहना है कि तेजी का मजबूत माहौल बनने के लिए वीआईएक्स का 15 के नीचे टिकना जरूरी होगा।

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अंतरराष्ट्रीय

फिसीपींस में भूकंप के बाद 37 हुई मृतकों की संख्या, 20 हजार लोग हुए विस्थापित

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नई दिल्ली, 9 जून: दक्षिणी फिलीपींस के सारंगनी प्रांत में सोमवार सुबह आए 7.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से भारी तबाही हुई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है, जबकि लगभग 20 हजार लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं।

भूकंप में करीब 500 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है और अनेक क्षेत्रों में स्कूलों तथा उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ। भूकंप के बाद जापान सहित कई देशों ने सुनामी की चेतावनी जारी की थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया।

फिलीपींस के सिविल डिफेंस कार्यालय की प्रवक्ता जूनी कैस्टिलो ने बताया कि साउथ कोटाबाटो के जनरल सैंटोस शहर में 10 लोगों की मौत की सूचना मिली है। यह पोर्ट सिटी 7 लाख से अधिक आबादी वाला क्षेत्र है। यहां कम से कम 12 लोगों के लापता होने की भी सूचना है। अधिकांश मौतें मलबा गिरने, इमारतों के ढहने और भूस्खलन के कारण हुई हैं।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, फिलीपींस नेशनल पुलिस ने पहले बताया था कि कम से कम 134 लोग घायल हुए हैं। जनरल सैंटोस में एक दो मंजिला स्कूल भवन भी ढह गया, जिसमें छात्रों के फंसे होने की आशंका जताई गई। अधिकारियों ने कहा कि वे घटना से जुड़ी जानकारियों का सत्यापन कर रहे हैं।

सोशल मीडिया और ऑनलाइन वीडियो में आपदा प्रभावित क्षेत्रों में यूनिवर्सिटी और रेस्टोरेंट की बिल्डिंगें गिर गईं। कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को स्ट्रक्चरल डैमेज हुआ, साइनबोर्ड गिर गए और खिड़कियों के शीशे टूट गए। भूकंप के झटकों के बाद लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए।

फिलीपींस में गर्मी की छुट्टियां समाप्त होने के बाद स्कूल खुले ही थे कि यह शक्तिशाली भूकंप आ गया। कई स्कूलों के सर्विलांस फुटेज में भूकंप के दौरान जोरदार झटके दिखे। शिक्षकों और छात्रों को या तो तुरंत निकाला गया या वे डेस्क के नीचे छिप गए। देश के शिक्षा विभाग ने कहा कि जिन स्कूलों पर असर पड़ा है, उनमें 5,800 से ज्यादा स्टूडेंट्स हैं। इन स्टूडेंट्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्लास रोकने का आदेश दिया गया है।

जनरल सैंटोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने पूरी सुरक्षा जांच के लिए स्थानीय समय के हिसाब से सुबह 8:45 बजे से दोपहर 3 बजे तक ऑपरेशन रोक दिया। तीन एयरलाइनों ने कुल 17 घरेलू उड़ानें कैंसिल कर दीं। सिविल एविएशन अधिकारियों के मुताबिक, एयरपोर्ट पर लैंडिंग और टेकऑफ ऑपरेशन अभी सोमवार दोपहर 3 बजे से 11 जून शाम 6 बजे तक सरकारी, मिलिट्री और मानवीय मदद वाली उड़ानों तक ही सीमित हैं।

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