अंतरराष्ट्रीय समाचार
सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को वापस लाने की तैयारी, नासा-स्पेसएक्स का मिशन शुरू
न्यूयॉर्क, 15 मार्च। नासा और स्पेसएक्स ने शनिवार को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए एक मानवयुक्त मिशन लॉन्च किया। नासा के अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को वापस लाएगा, जो पिछले जून से अंतरिक्ष में फंसे हुए हैं।
ड्रैगन अंतरिक्ष यान ने शुक्रवार को शाम 7:03 बजे ईटी (शनिवार आईएसटी पर सुबह 4.33 बजे) पर फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स फाल्कन 9 रॉकेट पर उड़ान भरी।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा किया, “अंतरिक्ष में अच्छा समय बिताएं, आप सभी! #क्रू10 ने शुक्रवार, 14 मार्च को शाम 7:03 बजे ईटी(2303 यूटीसी) पर नासा कैनेडी से उड़ान भरी।”
स्पेसएक्स ने कहा, “फाल्कन 9 ने क्रू-10 को प्रक्षेपित किया, जो अंतरिक्ष स्टेशन के लिए ड्रैगन का 14वां मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है।”
क्रू-10 मिशन नासा के अंतरिक्ष यात्री ऐनी मैकक्लेन और निकोल एयर्स, जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री ताकुया ओनिशी और रूस के रोस्कोस्मोस के अंतरिक्ष यात्री किरिल पेसकोव को आईएसएस ले जाएगा।
आईएसएस के रास्ते में अंतरिक्ष यान को अंतरिक्ष स्टेशन पर स्वायत्त रूप से डॉक करने में लगभग 28.5 घंटे लगेंगे।
क्रू-10 के ऑर्बिटल प्रयोगशाला में पहुंचने के बाद, नासा का स्पेसएक्स क्रू-9 मिशन, पृथ्वी पर वापस लौटेगा जिसका हिस्सा सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर था।
प्रक्षेपण की योजना मूल रूप से 13 मार्च के लिए बनाई गई थी, लेकिन रॉकेट पर ग्राउंड सपोर्ट क्लैंप आर्म के साथ हाइड्रोलिक सिस्टम की समस्या के कारण एक घंटे से भी कम समय पहले लॉन्च रद्द करना पड़ा।
विलियम्स और उनके सहयोगी बुच विल्मोर, जो जून 2024 से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर फंसे हुए हैं। दोनों जून बोइंग के स्टारलाइनर पर सवार होकर आईएसएस के लिए आठ दिवसीय मिशन पर गए थे। हालांकि, तकनीकी समस्याओं के चलते स्टारलाइनर उनकी वापसी के लिए असुरक्षित बन गया।
नासा ने कहा कि विल्मोर और विलियम्स अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ आईएसएस पर शोध और रखरखाव में लगे हुए हैं और सुरक्षित हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप का बड़ा संकेत, मतदाता पहचान के लिए लगा सकते हैं राष्ट्रीय आपातकाल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह संकेत दिया है कि वह अमेरिका के मध्यावधि चुनावों से पहले मतदाता पहचान और नागरिकता सत्यापन को अनिवार्य बनाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा आपातकाल घोषित करने की संभावना पर विचार कर सकते हैं।
ट्रंप ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके इस बयान ने चुनावी नियमों, मतदाता अधिकारों और संघीय सरकार की शक्तियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
ट्रंप ने ‘रियल अमेरिकाज वॉयस’ पर वेन एलिन रूट को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “इससे भी ज्यादा असामान्य चीजें पहले हो चुकी हैं। फिलहाल मैं इतना ही कहूंगा।”
रूट ने ट्रंप से कहा कि अगर सीनेट ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को मंजूरी नहीं देती, तो उन्हें आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए। रूट ने सुझाव दिया कि ऐसी शक्तियों के जरिए फोटो पहचान पत्र, नागरिकता का प्रमाण अनिवार्य किया जा सकता है और डाक के जरिए भेजे जाने वाले मेल-इन बैलेट पर भी सीमाएं लगाई जा सकती हैं।
ट्रंप ने इस प्रस्ताव का साफ तौर पर समर्थन नहीं किया, लेकिन उन्होंने बार-बार कहा कि मध्यावधि चुनावों से पहले चुनावी नियमों पर सीनेट को कार्रवाई करनी चाहिए।
ट्रंप ने कहा, “सीनेट को ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पर आगे बढ़ना होगा। मुझे सच में लगता है कि ऐसा होना चाहिए, क्योंकि लोग इसकी उम्मीद कर रहे हैं और यह जरूरी भी है।”
उन्होंने आगे कहा कि हम चाहते हैं कि नागरिकता का प्रमाण हो। और मतदाता पहचान पत्र भी होना चाहिए।
ट्रंप ने दावा किया कि कुछ रिपब्लिकन सीनेटर इन उपायों का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने हाउस स्पीकर माइक जॉनसन की तारीफ की और कहा कि प्रतिनिधि सभा इस कानून को पांच बार मंजूर कर चुकी है, लेकिन यह हर बार सीनेट में जाकर अटक जाता है।
राष्ट्रपति ने डाक से मतदान की व्यवस्था की भी फिर से आलोचना की। उन्होंने बिना कोई सबूत दिए दावा किया कि यह प्रणाली धोखाधड़ी के लिए संवेदनशील है और खास तौर पर कैलिफोर्निया की चुनावी व्यवस्था पर निशाना साधा। ट्रंप ने कहा कि मेल-इन बैलेट्स बहुत भ्रष्ट हैं।
उन्होंने कहा कि कैलिफोर्निया चुनावों के मामले में सबसे भ्रष्ट जगहों में से एक है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कुछ क्षेत्रों में रिपब्लिकन मतदाताओं को मतपत्र प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
रूट ने ट्रंप से कहा कि चुनाव संबंधी यह कानून शायद सीनेट से मंजूरी न पा सके। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस इसे पारित कर भी दे, तब भी इसे तुरंत कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
इसके बाद रूट ने ट्रंप से आग्रह किया कि वे अगले एक महीने के भीतर राष्ट्रीय सुरक्षा आपातकाल घोषित करें। रूट का दावा था कि इससे प्रशासन सीनेट की मंजूरी का इंतजार किए बिना फोटो पहचान पत्र, नागरिकता प्रमाण की अनिवार्यता और मेल-इन वोटिंग पर सीमाएं लागू कर सकेगा।
ट्रंप की प्रतिक्रिया ने इस संभावना को जिंदा रखा, लेकिन उन्होंने अपनी सरकार की ओर से इस रास्ते को अपनाने की कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस इस कानून को पारित कर देती है तो इसे अदालत में चुनौती देना ज्यादा मुश्किल हो जाएगा।
इंटरव्यू में जिस चुनावी प्रस्ताव पर चर्चा हुई, वह रिपब्लिकन पार्टी के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत संघीय चुनावों में वोटर पंजीकरण करवाते समय अमेरिकी नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण देना अनिवार्य किया जाए।
समर्थकों का कहना है कि इससे चुनावी सुरक्षा और मजबूत होगी। वहीं विरोधियों का तर्क है कि जिन योग्य नागरिकों के पास जरूरी दस्तावेज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें वोटर पंजीकरण कराने में परेशानी हो सकती है।
अमेरिकी संघीय कानून पहले से ही गैर-नागरिकों को संघीय चुनावों में मतदान करने से रोकता है। अमेरिका में चुनाव मुख्य रूप से राज्य और स्थानीय प्रशासन की ओर से कराए जाते हैं, जो अमेरिकी संविधान और संघीय कानूनों द्वारा तय ढांचे के तहत काम करते हैं।
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बांग्लादेश चुनावों में ज्यादातर हिंसा के लिए बीएनपी से जुड़े गुट जिम्मेदार: मानवाधिकार संगठन

बांग्लादेश में आगामी राष्ट्रीय चुनाव से पहले हिंसा नियंत्रण एक बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है। इसकी वजह कुछ महीने पहले संपन्न हुए चुनावों के दौरान या फिर बाद में हुई हिंसक गतिविधियां हैं। स्थानीय मीडिया ने मानवाधिकार संगठन के हवाले से बताया कि चुनावी हिंसा में सबसे ज्यादा सक्रिय वो गुट रहे हैं जो सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) जुड़े रहे।
ढाका के ह्यूमन राइट्स ग्रुप ‘ओधिकार’ ने अपनी मॉनिटरिंग रिपोर्ट में बताया कि बीएनपी और उसके सहयोगी चुनाव से पहले 52 फीसदी, पोलिंग के दिन 53 फीसदी और चुनाव के बाद 75 फीसदी हिंसक गतिविधियों में लिप्त पाए गए।
बांग्लादेश के जाने-माने अखबार द डेली स्टार ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी चुनाव से पहले दर्ज 15 फीसदी, चुनाव के दिन 13 फीसदी और चुनाव के बाद 9 फीसदी गतिविधियों में शामिल थे।
ये नतीजे सोमवार को ढाका में सेंटर ऑन इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (सीआईआरडीएपी) में हुई चर्चा के दौरान पेश किए गए।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 के चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय तौर पर हिंसक और डराने-धमकाने की घटनाएं जारी रहीं।
बांग्लादेश के सभी जिलों में से चटगांव, कॉक्स बाजार, भोला, मैमनसिंह और ढाका मुख्य हॉटस्पॉट के तौर पर उभरे। यहां मुख्य तौर पर लोगों को डराया-धमकाया गया था। वहीं पोस्ट-इलेक्शन मारपीट, संपत्ति को नुकसान और हत्या जैसी वारदातें ज्यादा दर्ज की गईं। चुनाव से पहले 62 घटनाएं दर्ज की गईं।
चटगांव में सबसे ज्यादा 11 घटनाएं दर्ज की गईं, उसके बाद कॉक्स बाजार में आठ घटनाएं हुईं। ढाका और मैमनसिंह में पांच-पांच घटनाएं जबकि सिराजगंज में चार घटनाएं दर्ज की गईं। चुनाव से पहले हुई 34 घटनाओं में अधिकारियों ने किसी न किसी तरह की कार्रवाई की, जबकि 28 मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ओधिकार ने वोटिंग के दिन 19 चुनाव क्षेत्रों में 32 घटनाएं रिकॉर्ड की, जिसमें मैमनसिंह में सात और भोला में छह वारदातें अंजाम दी गईं। द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, चटगांव में चार जबकि कॉक्स बाजार और फेनी में तीन-तीन मामले संज्ञान में आए।
32 घटनाओं में से 17 में बीएनपी और उसके सहयोगी शामिल थे, जबकि चार में जमात और उसके सहयोगी। दो में इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश के कार्यकर्ता शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक 11 मामलों में कोई पुलिसिया कार्रवाई नहीं हुई, जबकि सात मामलों में क्या कार्रवाई हुई, यह पता नहीं चल सका।
पिछले महीने, ओधिकार ने बताया कि इस साल अप्रैल और जून के बीच बांग्लादेश में मॉब लिंचिंग में 33 लोग मारे गए, जबकि पूरे देश में राजनीतिक हिंसा में 41 लोगों की जान चली गई और 970 घायल हुए।
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यूक्रेन पर रूसी मिसाइल हमलों में 6 लोगों की मौत, जेलेंस्की ने की कड़े प्रतिबंधों की मांग

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूसी हमलों की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि रूस जानबूझकर नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचाने की अधिकतम कोशिश कर रहा है। सोमवार रात रूस के मिसाइल हमलों में छह लोगों की मौत हो गई और 19 लोग घायल हुए हैं।
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ”जापोरिज्जिया में रूसी हमले के बाद से रात भर राहत और बचाव कार्य जारी हैं। शहर पर उत्तर कोरियाई बैलिस्टिक मिसाइलों, ‘जिरकॉन’ मिसाइलों और ग्लाइड बमों से हमला किया गया। यह एक बेहद गंभीर हमला था, जिसे नागरिक ढांचे को अधिकतम नुकसान पहुंचाने के इरादे से अंजाम दिया गया।”
जेलेंस्की ने बताया कि इस हमले में शहर में छह लोगों की मौत हुई है और 19 लोग घायल हुए हैं। मैं पीड़ित परिवारों और उनके करीबियों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। बचावकर्मी अभीी हमले वाली एक जगह पर लगी आग बुझाने में जुटे हुए हैं।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने बताया कि कीव में मिसाइल हमले से एक संक्रामक रोग अस्पताल की इमारत और एक औद्योगिक इकाई को नुकसान पहुंचा है। वहीं, अग्रिम मोर्चे के करीब रहने वाले समुदायों पर ड्रोन हमलों का सिलसिला रोज जारी है।
उन्होंने बताया कि खेरसोन और खार्किव में रात के दौरान बिजली सब-स्टेशनों पर हमले हुए, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। सभी संबंधित सेवाएं परिवारों तक दोबारा बिजली पहुंचाने के लिए काम कर रही हैं।
इसके अलावा डोनेट्स्क, द्नीप्रोपेत्रोव्स्क और मिकोलाइव क्षेत्रों पर भी हमले किए गए। मिसाइलों के साथ-साथ पूरे यूक्रेन में 120 से ज्यादा ड्रोन इस्तेमाल किए गए, जिनमें अधिकांश जेट इंजन वाले ‘शाहेद’ ड्रोन थे।
जेलेंस्की ने कहा कि रूस के हर कदम, चाहे वह बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाना हो, उत्तर कोरियाई हथियारों का इस्तेमाल करना हो या नई सैन्य लामबंदी की तैयारी करना हो, यह साफ दिखाता है कि मॉस्को शांति की दिशा में नहीं बल्कि संघर्ष को और बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
उन्होंने कहा कि दुनिया को इसका जवाब अभी देना होगा, इंतजार नहीं करना चाहिए। रूस के युद्ध प्रयासों को समर्थन देने वाले उद्योगों और संस्थानों पर और अधिक प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए। साथ ही यूक्रेन को वायु रक्षा (एयर डिफेंस) के क्षेत्र में और मदद की जरूरत है। शांति के लिए अवसर बनाने के लिए ये सभी कदम जरूरी हैं। मदद करने वाले सभी देशों और लोगों का धन्यवाद।
यूक्रेन की फर्स्ट लेडी ओलेना जेलेंस्का ने रूसी हमलों की निंदा करते हुए जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
ओलेना जेलेंस्का ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट पर लिखा, ”रूस लगातार यूक्रेनियों की जान ले रहा है। बीती रात दुश्मन ने कीव, कीव क्षेत्र, जापोरिज्जिया क्षेत्र, निप्रॉपेट्रोव्स्क क्षेत्र, खार्किव क्षेत्र और कई अन्य इलाकों पर गोलाबारी की। मैं सभी पीड़ितों और जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं।”
उन्होंने कहा कि हम दुनिया को इस स्थिति का आदी नहीं होने दे सकते। यूक्रेनियों की मौतों, तबाह हुए घरों और हर नए हमले की खबर को सामान्य बात नहीं माना जाना चाहिए। ये वो लोग हैं, जिनसे रूस हर दिन उनके घर, उनके अपनों और उनकी जिंदगी छीन रहा है।
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