बॉलीवुड
देवदास से हीरामंडी तक: संजय लीला भंसाली ने कैसे गढ़ीं सबसे दमदार महिला किरदार
संजय लीला भंसाली इंडियन सिनेमा के सबसे बेहतरीन फिल्ममेकर्स में से एक हैं, जिनकी भव्य सोच और दमदार स्टोरीटेलिंग ने इंडस्ट्री को एक अलग ऊंचाई दी है। उनकी फिल्मों की खास बात सिर्फ उनकी भव्यता नहीं, बल्कि वो किरदार हैं जो सालों तक लोगों के दिलों में बसे रहते हैं।भंसाली की फिल्मों में जो सबसे खास चीज़ है, वो है उनकी महिला किरदारों की ताकत। उनकी फिल्मों की औरतें न सिर्फ खूबसूरत और ग्रेसफुल होती हैं, बल्कि मजबूत, साहसी और प्रेरणादायक भी होती हैं। उनके संघर्ष, उनकी मजबूती, उनकी भावनाएं—हर चीज़ को भंसाली अपने अलग अंदाज में पेश करते हैं, जिससे उनके किरदार हमेशा यादगार बन जाते हैं। इस विमेंस डे पर आइए, उनकी फिल्मों की सबसे दमदार और आइकॉनिक महिला किरदारों को सलाम करते हैं, जिन्होंने बड़े पर्दे पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है!
पद्मावत में पद्मावती
संजय लीला भंसाली की पद्मावत में रानी पद्मावती सिर्फ एक रानी नहीं, बल्कि सम्मान, हिम्मत और बलिदान की जीती-जागती मिसाल हैं। उन्होंने हर चुनौती का सामना बिना झुके, बिना डरे किया और साबित कर दिया कि इज्जत किसी भी डर से बड़ी होती है। भंसाली ने उनकी कहानी को शानदार विजुअल्स और गहरी भावनाओं के साथ पेश किया, जिससे वो सिर्फ एक किरदार नहीं, बल्कि हमेशा के लिए अमर आइकन बन गईं। उनका बलिदान अडिग हौसले की ताकत को दिखाता है, जो इतिहास में हमेशा जिंदा रहेगा।
राम लीला में लीला
राम-लीला की लीला सिर्फ एक आशिक नहीं, बल्कि जुनून और बगावत की मिसाल थी। भंसाली ने उसे बेखौफ, बिंदास और अपने उसूलों पर अडिग दिखाया—जो प्यार भी दिल खोलकर करती है और लड़ना भी जानती है। परंपराओं और दुश्मनी के बीच भी उसने अपने दिल की सुनी, प्यार और दर्द को बराबर शिद्दत से जिया। लीला बस मोहब्बत करने वाली नहीं, बल्कि दिल की जंगजू थी, जो अपनी मोहब्बत के लिए सब कुछ दांव पर लगाने को तैयार थी।
बाजीराव मस्तानी में काशीबाई
बाजीराव मस्तानी में संजय लीला भंसाली ने काशीबाई को सिर्फ एक दुखी पत्नी नहीं, बल्कि मजबूत, सशक्त और गरिमा से भरी औरत के रूप में दिखाया। उनका दर्द जितना गहरा था, उनका प्यार उतना ही सच्चा।काशीबाई का किरदार बदले की नहीं, बल्कि समर्पण और आत्मसम्मान की कहानी है। वो बाजीराव से बेइंतहा प्यार करती थीं, लेकिन खुद को कभी कमजोर नहीं बनने दिया। उनकी खामोश मजबूती ने उन्हें भंसाली की सबसे यादगार और दिल छू लेने वाली किरदारों में से एक बना दिया।
गंगुबाई काठियावाड़ी में गंगुबाई
गंगूबाई काठियावाड़ी में संजय लीला भंसाली ने अपनी अब तक की सबसे मजबूत और बेखौफ हीरोइन को गढ़ा। गंगूबाई सिर्फ हालात की मारी हुई औरत नहीं थी, बल्कि जिसने दर्द को ताकत में बदला और अपने हक के लिए लड़ी। हर सीन में उसकी दमदार मौजूदगी और जलते हुए तेवर दिखते हैं—चाहे वो उसकी आग उगलती स्पीच हो या समाज से इज्जत और इंसाफ छीन लेने का जज़्बा। भंसाली की नज़र ने इस कहानी को सिर्फ प्रेरणादायक नहीं, बल्कि आइकॉनिक बना दिया। गंगूबाई हमेशा याद रखी जाएगी—हौसले, हिम्मत और बगावत की पहचान बनकर।
देवदास में चंद्रमुखी
देवदास में संजय लीला भंसाली ने चंद्रमुखी को सिर्फ एक तवायफ नहीं, बल्कि निस्वार्थ प्रेम और अदम्य गरिमा की मिसाल के रूप में पेश किया। वो चमकदार, रहमदिल और बेइंतहा वफादार थी—ऐसी जो प्यार में कुछ पाने के लिए नहीं, बल्कि बस देने के लिए जीती थी। भंसाली ने अपने भव्य विजुअल्स और दिल छू लेने वाले डांस सीक्वेंस के ज़रिए उसकी पीड़ा और गरिमा को संजोया। वो ना किसी की मंजूरी की मोहताज थी, ना किसी पहचान की, बल्कि उसका प्यार ही उसकी सबसे बड़ी ताकत थी। इस तरह से चंद्रमुखी भंसाली की सबसे खूबसूरत और यादगार किरदारों में से एक बनी रहेगी।
देवदास में पारो
देवदास में भंसाली ने पारो को सिर्फ एक प्यार में पड़ी औरत नहीं, बल्कि प्यार और त्याग की मिसाल बनाया। वो जुदा होकर भी देवदास को दिल से कभी अलग नहीं कर पाई। भव्य सेट, शानदार कॉस्ट्यूम और गहरे इमोशन्स के साथ भंसाली ने उसकी मासूम लड़की से जिम्मेदार औरत बनने की कहानी दिखाई। हालात ने उसे दूर कर दिया, लेकिन उसका प्यार कभी कम नहीं हुआ, ये साबित करते हुए कि सच्चा प्यार साथ रहने का मोहताज नहीं होता। पारो का खामोश दर्द और अटूट मोहब्बत उसे भंसाली की सबसे यादगार हीरोइनों में से एक बना देता है।
हीरामंडी में मल्लीकाजान
हीरामंडी में संजय लीला भंसाली ने मल्लिकाजान को सिर्फ एक तवायफों की मालकिन नहीं, बल्कि हिम्मत, समझदारी और ताकत की मिसाल दिखाया। वो अपनी दुनिया की हुक्मरान थी, लेकिन उससे भी ज़्यादा, उन औरतों की हिफाज़त करने वाली जो उस पर निर्भर थीं। भंसाली ने उसे शक्तिशाली और भावुक दोनों रूपों में दिखाया—जो रुतबे से राज करती है, लेकिन अपने त्याग का दर्द भी छुपाए रखती है। शानदार सेट, दमदार कहानी और गहरे इमोशन्स के साथ मल्लिकाजान सिर्फ एक मालकिन नहीं, बल्कि एक जिंदा जंग थी, जो हालात से कभी नहीं टूटी।
हीरामंडी में बिबोजान
हीरामंडी में संजय लीला भंसाली ने बिबोजान को नर्मी, मजबूती और अधूरे अरमानों का मेल दिखाया। सत्ता के खेल में फंसी हुई, लेकिन फिर भी अपनी इज्जत और हौसले के साथ खड़ी रही। भंसाली ने उसे त्याग और छुपे हुए दर्द की निशानी बनाया—जहां प्यार एक ख्वाब था और जज़्बात एक लग्जरी। उसकी खामोशी में भी एक गहरी कहानी थी, जो उसे हीरामंडी की सबसे खास और असरदार किरदारों में से एक बनाती है।
यही दिखाता है कि संजय लीला भंसाली कैसे अपनी महिला किरदारों को जान डालकर परदे पर उतारते हैं—निडर, दमदार और यादगार। वो सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, बल्कि असल ज़िंदगी में भी औरतों का सम्मान और समर्थन करते हैं। अपनी माँ के नाम को खुद से जोड़ना भी उनकी गहरी इज़्जत और शुक्रगुज़ारी का प्रतीक है।
फिल्मी खबरे
’36 साल से यही रूटीन’, अक्षय कुमार ने बताया क्यों नहीं लेना चाहते हैं रिटायरमेंट

मुंबई, 11 जून: अभिनेता अक्षय कुमार की फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ का ट्रेलर गुरुवार को रिलीज कर दिया गया है। ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम के दौरान अक्षय कुमार ने मीडिया से बातचीत के दौरान रवीना के प्रोफेशनलिज्म और मजबूत नैतिकता की भी तारीफ की। साथ ही, अपने रिटायरमेंट के प्लान पर मजेदार खुलासे किए।
ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम के दौरान जब मीडिया ने अक्षय से रिटायरमेंट प्लान को लेकर सवाल किए, तो अभिनेता ने अपने अंदाज में जवाब देते हुए बताया, “जब मैं रोज सुबह 4 बजे उठता हूं, तो सिर्फ 5 सेकंड के लिए मन में आता है कि अब रिटायरमेंट ले लूं, लेकिन अगले ही पल याद आता है कि मुझे शूटिंग पर जाना है। वहां पर पूरी टीम मेरी इंतजार कर रही होगी। बस, इसी ‘कश्मकश’ में जिंदगी चल रही है। अगले दिन फिर से वही रूटीन शुरू हो जाता है और ऐसा करते-करते मुझे 36 साल बीत चुके हैं।”
उन्होंने आगे हंसते हुए कहा, “अगर मैं रिटायर हो भी गया, तो घर पर बैठकर ज्यादा से ज्यादा क्या करूंगा। इलेक्ट्रिशियन का काम हाथ आ जाएगा, या फिर कुत्तों घुमाने चला जाऊंगा। ऐसे ही घर के सारे काम मेरे हिस्से आ जाएंगे। मुझे लगता है कि उन सब कामों को करने से बेहतर है कि मैं फिल्मों में एक्टिंग करता रहूं।”
अभिनेता ने अपनी बात को रखते हुए बताया कि उन्हें रिटायरमेंट शब्द से नफरत हैं। उन्होंने कहा, “अगर आपको एक लंबी और सेहतमंद जिंदगी जीनी है, तो कभी काम करना बंद मत कीजिए और हमेशा एक्टिव रहिए।”
अभिनेता अक्षय कुमार ने आगे पुराने दिनों को याद करते हुए अभिनेत्री रवीना टंडन की जमकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि समय कैसे बदल गया है; उनकी पुरानी साथी कभी बॉलीवुड में हीरोइन के तौर पर राज करती थीं, लेकिन अब वह हीरोइन की मां बन गई हैं। अक्षय कुमार ने रवीना की बेटी राशा थडानी की ओर इशारा किया।
एक्टर ने रवीना के प्रोफेशनलिज्म और मजबूत नैतिकता की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, “मैं आपको रवीना के बारे में बताना चाहता हूं कि वह हमेशा से बहुत प्रोफेशनल रही हैं। मुझे आज भी याद है, मैं एक फिल्म की शूटिंग कर रहा था और सूरज डूबने वाला था। सूरज डूबने में बस 25-30 मिनट बचे थे। ग्रीन रूम बहुत दूर था और उन्हें जल्दी से कपड़े बदलकर आना था। यह नामुमकिन लग रहा था। लेकिन मुझे याद है, वह जनरेटर वैन में गईं और जल्दी से कपड़े बदलकर वापस आ गईं।”
दिवंगत अभिनेता पंकज धीर को याद करते हुए अक्षय कुमार ने कहा कि जैसा सभी जानते हैं, फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ पंकज धीर की आखिरी फिल्म थी। आज इस खास मौके पर पूरी टीम उन्हें बहुत मिस कर रही है।
फिल्मी खबरे
‘वेलकम टू द जंगल’ का धमाकेदार ट्रेलर रिलीज, अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी की जोड़ी ने फिर मचाया धमाल

मुंबई, 11 जून: अक्षय कुमार की बहुप्रतीक्षित कॉमेडी ड्रामा फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ का ट्रेलर मेकर्स ने गुरुवार को रिलीज कर दिया गया है। एक्शन, कॉमेडी, रोमांस, ड्रामा और सस्पेंस से भरपूर ट्रेलर की सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है।
4 मिनट 10 सेकंड के इस ट्रेलर में बेहतरीन कलाकारों की बड़ी टोली नजर आती है, जो दर्शकों को हंसी और रोमांच का डबल डोज देने वाली है। ट्रेलर की शुरुआत परेश रावल से होती है, जो एक फिल्म बनाना चाहते हैं। इसके बाद फिल्म के सभी कलाकारों का परिचय कराया जाता है और फिर जंगल में शूटिंग शुरू होती है।
इसके बाद परेश रावल अपनी टीम को समझाते हैं कि उनकी फिल्म आर्मी पर आधारित है, जिसके लिए उन्हें पहले इसकी ट्रेनिंग करवाई जाएगी। इसी दौरान लारा दत्ता की एंट्री होती है और प्रशिक्षण के बीच कलाकारों की मजेदार नोकझोंक देखने को मिलती है।
पूरा ट्रेलर काफी मनोरंजक नजर आता है। इसमें भरपूर कॉमेडी और मजेदार उथल-पुथल देखने को मिल रही है। अपने दमदार एक्शन और शानदार कॉमिक टाइमिंग के साथ अक्षय कुमार प्रभाव छोड़ते नजर आते हैं। वहीं, सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, तुषार कपूर और जैकी श्रॉफ भी अपने-अपने किरदारों में बेहद मजेदार दिखाई देते हैं।
फिल्म में बड़ा मोड़ तब आता है, जब परेश रावल की पूरी टीम एक गांव पहुंच जाती है। गांव के लोगों को लगता है कि सेना के जवान उन्हें बचाने आए हैं। इसी दौरान रवीना टंडन की एंट्री होती है।
ट्रेलर की खास बात यह है कि इसमें मुख्य कलाकारों की वास्तविक जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प और मजेदार संदर्भ भी शामिल किए गए हैं। साथ ही, अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी को लंबे समय बाद पर्दे पर एक साथ देखना दर्शकों के लिए खास आकर्षण माना जा रहा है।
यह लोकप्रिय ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी की तीसरी किस्त है, जिसका निर्देशन अहमद खान ने किया है। फिल्म में अक्षय कुमार के अलावा सुनील शेट्टी, परेश रावल, राजपाल यादव, जॉनी लीवर, जैकलीन फर्नांडिस, दिशा पाटनी, कृष्णा अभिषेक, तुषार कपूर, जैकी श्रॉफ, अरशद वारसी और रवीना टंडन समेत कई कलाकार नजर आएंगे।
यह फिल्म 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है।
फिल्मी खबरे
‘ आयुष्मान खुराना ने फैमिली संग नेपाल की वादियों का उठाया लुत्फ, पत्नी ताहिरा ने शेयर कीं खूबसूरत तस्वीरें

मुंबई, 10 जून: अभिनेता आयुष्मान खुराना इन दिनों अपने परिवार के साथ नेपाल में छुट्टियों का आनंद ले रहे हैं। बुधवार को उनकी पत्नी ताहिरा कश्यप ने इंस्टाग्राम पर इस खूबसूरत ट्रिप की कुछ तस्वीरें शेयर की। इन तस्वीरों में आयुष्मान, ताहिरा और उनके बच्चे प्रकृति के सुंदर नजारों के बीच मस्ती करते हुए नजर आ रहे हैं।
पहली तस्वीर में आयुष्मान और ताहिरा नजर आ रहे हैं, जबकि कुछ तस्वीरों में ताहिरा हरे-भरे नजारों में आनंद लेती नजर आ रही हैं, तो कुछ में वे अपने आयुष्मान बच्चों के साथ लुत्फ उठा रहे हैं।
ताहिरा ने पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “कैरोसेल की आखिरी तस्वीर वही है, जिसे हर कोई सबसे ज्यादा पसंद कर रहा है और नौवीं तस्वीर लेने से पहले कैमरे के लेंस को साफ करने की जरूरत थी।”
ताहिरा और आयुष्मान की वैकेशन की तस्वीरें फैंस समेत सेलेब्स भी खूब पसंद कर रहे हैं। अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती ने कमेंट सेक्शन पर लिखा, “खूबसूरत नारी।” अभिनेत्री ऐश्वर्या सुष्मिता ने लिखा, “फिर भी धुंधली तस्वीर ही सबसे खूबसूरत लगती है।”
ताहिरा कश्यप भले ही आयुष्मान खुराना की पत्नी के नाम से पहचानी जाती हैं, लेकिन वे एक भारतीय लेखिका, फिल्म निर्माता और स्तन कैंसर जागरूकता पैरोकार भी हैं। उन्होंने कई किताबें लिखी हैं, जिनमें ‘क्रैकिंग द कोड: माय जर्नी इन बॉलीवुड’ और ‘द 12 कमांडमेंट्स ऑफ बीइंग ए वुमन’ शामिल हैं। इसके अलावा ताहिरा ने शॉर्ट फिल्में जैसे ‘टॉफी’ (2018) और ‘पिन्नी’ (2020) बनाई हैं। उन्होंने फीचर फिल्म ‘शर्मा जी की बेटी’ (2024) का भी निर्देशन किया है।
फीचर फिल्म ‘शर्मा जी की बेटी’ एक कॉमेडी-ड्रामा फिल्म है, जो मध्यमवर्गीय महिलाओं और किशोरियों के सपनों, चुनौतियों और जीवन के अनुभवों को दर्शाती है। इसमें साक्षी तंवर, दिव्या दत्ता और सैयामी खेर मुख्य भूमिकाओं में हैं। इसमें टीनेज लड़कियों के पीयर प्रेशर, करियर-ओरिएंटेड महिलाओं की उलझनों और पितृसत्तात्मक समाज की रूढ़ियों को रेखांकित किया गया है। फिल्म में सभी मुख्य महिला पात्रों का उपनाम ‘शर्मा’ है, जो अलग-अलग उम्र और पृष्ठभूमि से आती हैं।
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