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आरबीआई ब्याज दरों में कर सकता है कटौती, मुद्रास्फीति में कमी का दिखेगा असर : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 8 मार्च। भारत की मुद्रास्फीति जनवरी में 5.22 प्रतिशत से घटकर 4.31 प्रतिशत हो गई। लगातार चार महीने तक मुद्रास्फीति 5 प्रतिशत से ऊपर रहने के बाद, यह आरबीआई के 4 प्रतिशत लक्ष्य के करीब पहुंच गई। यह ट्रेंड संभावित दरों में कटौती की संभावना को मजबूत करता है, जिसमें रेपो रेट 6.25 प्रतिशत पर है। शनिवार को आई एक लेटेस्ट रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
मोतीलाल ओसवाल म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट के अनुसार, बाजार की स्थिति निवेशकों के बीच सतर्कता की भावना को दर्शाती है, जो आर्थिक स्थितियों, सेक्टर-स्पेसिफिक विकास और ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट के रुझानों से जुड़ी है।
फरवरी में निफ्टी 500 इंडेक्स में 7.88 प्रतिशत की गिरावट आई। फैक्टर-बेस्ड रणनीतियों ने बाजार मूवमेंट को दर्शाया, जबकि निफ्टी 5 ईयर बेंचमार्क जी-सेक (+0.53 प्रतिशत) सहित निश्चित आय वाले साधनों ने स्थिरता प्रदर्शित की।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक स्तर पर विकसित बाजारों में मिश्रित गतिविधियां देखने को मिलीं, जहां स्विट्जरलैंड ने 3.47 प्रतिशत और यूनाइटेड किंगडम ने 3.08 प्रतिशत बढ़त दर्ज की, जबकि जापान ने 1.38 प्रतिशत गिरावट दर्ज की।
अमेरिका में सीपीआई मुद्रास्फीति 3 प्रतिशत रही, जो पिछले महीने के 2.90 प्रतिशत से मामूली वृद्धि को दर्शाती है।
एचएसबीसी की एक दूसरी रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत का लॉन्ग-टर्म आउटलुक मजबूत बना हुआ है और इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग में सरकारी निवेश, निजी निवेश में तेजी और रियल एस्टेट साइकल में सुधार के कारण निवेश साइकल मध्यम अवधि में तेजी की ओर बढ़ने का अनुमान है।
एचएसबीसी म्यूचुअल फंड की ‘मार्केट आउटलुक रिपोर्ट 2025’ में रिन्यूएबल एनर्जी और इससे जुड़े सप्लाई चेन में ज्यादा निजी निवेश, हाई-एंड टेक्नोलॉजी कंपोनेंट्स का स्थानीयकरण और भारत के तेजी से विकास का सपोर्ट करने के लिए ग्लोबल सप्लाई चेन का सार्थक हिस्सा बनने की उम्मीद है।
अभी तक वास्तविक अर्थव्यवस्था ने वैश्विक विकास के प्रति लचीलापन दिखाया है।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है, “विकास-मुद्रास्फीति के आंकड़ों, एमपीसी की पिछली नीति कार्रवाई और एमपीसी के मिनटों के आधार पर, हमारा मानना है कि आरबीआई-एमपीसी अपनी अप्रैल नीति में एक और 25 बीपीएस कटौती करेगा, जबकि अपनी लिक्विडिटी रणनीति पर चुस्त और लचीला बने रहना जारी रखेगा।”
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दिवाली पर दें भारत का सबसे अनोखा ‘गोल्ड’, कश्मीरी केसर और खास गोल्ड फिल्ट्रेशन से तैयार है जैसलमेर गोल्ड

दिवाली पर कश्मीरी केसर, अनोखी गोल्ड-फिल्ट्रेशन प्रक्रिया और भारत की समृद्ध वनस्पति विरासत का उत्सव मनाने वाली प्रीमियम जिन जैसलमेर गोल्ड अपनी विशिष्ट पहचान के कारण चर्चा में है। कश्मीरी केसर इसकी कहानी की शुरुआत भर है। जैसलमेर गोल्ड का नाम उस विशेष फिल्ट्रेशन प्रक्रिया से भी जुड़ा है, जिसमें जिन को सुनहरे रेशमी तंतुओं से बने आपस में गुंथे फिल्टर से गुजारा जाता है। ब्रांड का दावा है कि यह प्रक्रिया पेय को स्वर्ण आयनों से समृद्ध बनाती है। इसमें 18 बॉटैनिकल्स का उपयोग किया गया है, जिनमें 14 भारत से प्राप्त किए गए हैं। यही संयोजन इसे दुर्लभ सामग्री, शिल्प कौशल और अनूठी निर्माण प्रक्रिया वाला उत्पाद बनाता है।
जब ‘गोल्ड’ केवल नाम नहीं होता
दिवाली और सोने का रिश्ता सदियों पुराना है। यह हमारे दीपों, उपहारों और उत्सवों की चमक में दिखाई देता है। सोना दुर्लभता, मूल्य और उत्कृष्ट शिल्प का प्रतीक भी माना जाता है। लेकिन जैसलमेर गोल्ड के लिए यह केवल प्रतीकात्मक संबंध नहीं है, बल्कि इसकी निर्माण प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा है।
इस नाम के पीछे दो प्रमुख तत्व हैं। पहला, कश्मीरी केसर, जिसे दुनिया के सबसे मूल्यवान मसालों में गिना जाता है और जिसे अक्सर “मसालों का सोना” कहा जाता है। दूसरा, विशेष गोल्ड-फिल्ट्रेशन प्रक्रिया, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि यह जिन को स्वर्ण आयनों से समृद्ध बनाती है। यही वजह है कि ‘गोल्ड’ शब्द केवल लेबल की सजावट नहीं बल्कि उत्पाद की वास्तविक पहचान का हिस्सा है।
आज के समय में उपभोक्ता किसी पेय के स्रोत, निर्माण प्रक्रिया और उसकी मौलिकता में अधिक रुचि रखते हैं। ऐसे में जैसलमेर गोल्ड एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करती है जो केवल बॉटैनिकल्स तक सीमित नहीं है, बल्कि दुर्लभ भारतीय सामग्री, विशेष फिल्ट्रेशन तकनीक और पूरे देश से चुने गए स्वादों को एक साथ जोड़ती है।
केसर का संबंध: सोने जैसा मूल्यवान मसाला
दुनिया के सबसे मूल्यवान मसालों में से एक, केसर अपने रंग, सुगंध और इसे प्राप्त करने में लगने वाली मेहनत के लिए प्रसिद्ध है। नाजुक लाल धागों की क्रोकस फूल से निकाले जाने वाले बारीक लाल रेशों को हाथों से चुना जाता है, जो बेहद श्रमसाध्य प्रक्रिया है। आमतौर पर माना जाता है कि एक किलोग्राम केसर प्राप्त करने के लिए लगभग 1.5 लाख से 2.5 लाख फूलों की आवश्यकता पड़ सकती है।
केसर की यही दुर्लभता उसे सोने जैसे कीमती धातुओं के बराबर प्रतिष्ठा दिलाती है। जैसलमेर गोल्ड में कश्मीरी केसर केवल एक प्रीमियम सामग्री नहीं है, बल्कि भारत की विशिष्ट कृषि और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतिनिधित्व भी करता है। कश्मीर के केसर खेतों का लंबा इतिहास है और हर रेशा धैर्य, कौशल और पीढ़ियों से चली आ रही विशेषज्ञता की कहानी कहता है।
गोल्ड में छिपा ‘गोल्ड’ की असली कहानी
जिन के आसवन के बाद उसकी सबसे विशिष्ट प्रक्रिया शुरू होती है। जैसलमेर गोल्ड को एक विशेष फिल्टर से गुजारा जाता है, जो सुनहरे रेशमी तंतुओं से बना होता है। ब्रांड के अनुसार यह गोल्ड फिल्ट्रेशन प्रक्रिया जिन को स्वर्ण आयनों से समृद्ध बनाती है और इसके स्वाद को अधिक संतुलित और मुलायम बनाती है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह प्रक्रिया तैयार जिन में सोने की पत्ती या सोने के कण मिलाने जैसी नहीं है। इसे एक विशिष्ट उत्पादन तकनीक के रूप में समझा जाना चाहिए, न कि सजावटी तत्व के रूप में।
जिन की दुनिया में जहां डिस्टिलेशन, बॉटैनिकल चयन और फिल्ट्रेशन अंतिम स्वाद को प्रभावित करते हैं, वहीं यह विशेष प्रक्रिया जैसलमेर गोल्ड को अलग पहचान देती है। यही कारण है कि इसके नाम में “गोल्ड” शब्द का वास्तविक महत्व है।
18 बॉटैनिकल्स, 14 भारतीय कहानियां
जैसलमेर गोल्ड की विशेषता इसके विस्तृत बॉटैनिकल मिश्रण में भी छिपी है, जिसमें कुल 18 बॉटैनिकल्स का उपयोग किया गया है, जिनमें 14 भारत के अलग-अलग क्षेत्रों से लाए गए हैं।
भारतीय बॉटैनिकल्स में कश्मीर का केसर, रामपुर डिस्टिलरी गार्डन की गुलाब की पंखुड़ियां और तेजपत्ता, दार्जिलिंग की ग्रीन टी, पूर्णिया का गंधराज नींबू छिलका, जैसलमेर का धनिया, नागपुर के संतरे का छिलका, कर्नाटक की काली मिर्च, दालचीनी, गुलाबी मिर्च, जायफल, मुलेठी, खस और लेमनग्रास शामिल हैं। इसके अलावा जुनिपर बेरी, एंजेलिका रूट, कैरावे बीज और क्यूबेब मिर्च का भी उपयोग किया गया है।
ये सभी सामग्री मिलकर भारत के विविध स्वादों और जलवायु क्षेत्रों का एक विस्तृत मानचित्र तैयार करती हैं। गुलाब की खुशबू, नींबू और संतरे की ताजगी, मसालों की गर्माहट तथा केसर और चाय की विशिष्टता इसे एक अनूठा भारतीय स्वाद प्रदान करती है, जबकि जुनिपर इसका पारंपरिक जिन स्वरूप बनाए रखता है।
शिल्प से तैयार एक विशेष जिन
किसी जिन का निर्माण कई चरणों का परिणाम होता है, जिसमें स्पिरिट बेस का चयन, बॉटैनिकल्स का संतुलन, डिस्टिलेशन की तकनीक और बोतलबंदी से पहले की जाने वाली प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। जैसलमेर गोल्ड की पहचान इसकी 18-बॉटैनिकल रेसिपी और विशेष गोल्ड-फिल्ट्रेशन प्रक्रिया से बनती है।
ब्रांड के अनुसार गोल्ड एडिशन को डबल-डिस्टिल किया जाता है और फिर विशेष गोल्ड फिल्ट्रेशन प्रक्रिया से गुजारा जाता है। जहां बॉटैनिकल्स इसके स्वाद की बुनियाद तैयार करते हैं, वहीं फिल्ट्रेशन इसकी पहचान को अंतिम रूप देता है।
भारतीय उत्सवों के लिए एक खास विकल्प
दिवाली पर उपहार चुनते समय लोग ऐसी चीजों की तलाश करते हैं जिनमें एक कहानी हो और जो अलग पहचान रखती हो। जैसलमेर गोल्ड कश्मीरी केसर की दुर्लभता, 18 बॉटैनिकल्स की विविधता, 14 भारतीय सामग्री और खास गोल्ड-फिल्ट्रेशन प्रक्रिया को एक साथ जोड़ती है।
यह भारतीय प्रीमियम स्पिरिट्स उद्योग के बढ़ते आत्मविश्वास की भी कहानी है। भारत की क्षेत्रीय परंपराएं और प्राकृतिक सामग्री आधुनिक डिस्टिलरी उद्योग को एक समृद्ध आधार प्रदान करती हैं और जैसलमेर गोल्ड उसी विविधता को एक विशिष्ट भारतीय दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करती है।
इस दिवाली, सोने का अर्थ केवल धातु या रंग नहीं रह जाता। जैसलमेर गोल्ड के लिए यह केसर, निर्माण प्रक्रिया, गोल्ड फिल्ट्रेशन और भारतीय शिल्प कौशल से जुड़ी एक पूरी कहानी है, जो इसके नाम को वास्तविक अर्थ प्रदान करती है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत की केमिकल और पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री 2030 तक 300 अरब डॉलर और 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है: सरकार

भारत का रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग, जिसका वर्तमान आकार लगभग 220 अरब डॉलर है, वर्ष 2030 तक 300 अरब डॉलर और 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। सरकार द्वारा शनिवार को जारी एक फैक्टशीट के अनुसार, भारत वैश्विक रसायन उद्योग में लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और यह क्षेत्र देश की औद्योगिक एवं विनिर्माण वृद्धि का महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है।
फैक्टशीट में कहा गया है कि भारत वर्तमान में दुनिया का छठा सबसे बड़ा रसायन उत्पादक और एशिया का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है। इस क्षेत्र के उत्पादों का उपयोग औषधि, वस्त्र, निर्माण, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता वस्तुओं सहित अनेक उद्योगों में किया जाता है।
सरकार ने अधिकांश रसायन क्षेत्रों में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को स्वचालित मार्ग के तहत अनुमति दे रखी है, जिसके तहत विदेश से आने वाले निवेश को सरकार की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होती। इसी का परिणाम है कि 2014 से 2026 के बीच इस क्षेत्र में 1,04,895 करोड़ रुपए का एफडीआई आया, जो 2004 से 2014 के दौरान प्राप्त 45,240 करोड़ रुपए के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है।
फैक्टशीट के अनुसार, प्रमुख रसायनों और पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन 2015-16 के 45,638 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 58,617 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया। यह वृद्धि उत्पादन क्षमता विस्तार, विशेषीकृत विनिर्माण हब के विकास और बुनियादी ढांचे में सुधार का परिणाम मानी जा रही है।
बयान में आगे कहा गया है कि विशेष रसायनों के क्षेत्र में भी भारत की वैश्विक उपस्थिति मजबूत है। देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डाई निर्माता और निर्यातक है, जबकि कृषि रसायनों के निर्यात में तीसरे स्थान पर है। वर्तमान में इस क्षेत्र में लगभग 13,000 बड़े उद्योग और 4.45 लाख सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) कार्यरत हैं।
सरकार इस क्षेत्र को और गति देने के लिए कई नई पहलें लागू कर रही है, जिनमें समर्पित केमिकल पार्क, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने वाली योजनाएं तथा गुणवत्ता और निवेश को प्रोत्साहित करने वाले कदम शामिल हैं। इनका उद्देश्य भारत की वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भागीदारी को मजबूत करना है।
जुलाई 2026 में मंजूर की गई भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन) के तहत देश में तीन विशेष केमिकल पार्क स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक पार्क का क्षेत्रफल कम से कम 8 वर्ग किलोमीटर (करीब 2,000 एकड़) होगा। केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के लिए 1,000 करोड़ रुपए तक की सहायता देगी, जबकि संबंधित राज्य सरकार को कम से कम 500 करोड़ रुपए का योगदान देना होगा।
इस योजना का कुल वित्तीय प्रावधान 3,030 करोड़ रुपए है, जिसमें 3,000 करोड़ रुपए बुनियादी ढांचे और सामान्य सुविधाओं के विकास के लिए तथा 30 करोड़ रुपए प्रशासनिक खर्चों के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू रहेगी।
इसके अलावा, नवंबर 2025 में शुरू की गई अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का कोष बनाया गया है, जिसका उद्देश्य निजी क्षेत्र के अनुसंधान और नवाचार निवेश को बढ़ावा देना है। यह योजना दीर्घकालिक वित्तपोषण और पुनर्वित्त सुविधा प्रदान करती है, जिससे उन्नत तकनीकों को अपनाने, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और महत्वपूर्ण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय समाचार
दिवाली पर कारोबार में उछाल, दिल्ली का व्यापार 80,000 करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद: सीटीआई

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने शनिवार को बताया कि दिवाली के त्योहारी सीजन के दौरान देशभर में कारोबार लगभग 5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है। जबकि अकेले दिल्ली में लगभग 80,000 करोड़ रुपए का कारोबार दर्ज होने की संभावना है।
सीटीआई के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने कहा कि त्योहारी सीजन ने देशभर के व्यापारियों के लिए कारोबार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा किए हैं, क्योंकि स्वदेशी उत्पादों की उपभोक्ताओं के बीच मजबूत मांग देखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के जिन व्यापारियों को पिछले महीने रैलियों और विरोध प्रदर्शनों के कारण कारोबार में बाधाओं का सामना करना पड़ा था, अब दिवाली की खरीदारी के बंपर सीजन से अपने नुकसान की भरपाई करने की उम्मीद कर रहे हैं।
गोयल के अनुसार, अनुमानित 5 लाख करोड़ रुपए के देशभर के कारोबार में दिवाली की खरीदारी और विभिन्न संबंधित सेवाओं से उत्पन्न कारोबार शामिल है।
ऑटोमोबाइल उद्योग की सर्वोच्च संस्था द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में खुदरा ऑटोमोबाइल बिक्री में 55 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। दोपहिया, तिपहिया, वाणिज्यिक वाहन, यात्री वाहन और ट्रैक्टरों की बिक्री में क्रमशः 52 प्रतिशत, 110 प्रतिशत, 48 प्रतिशत, 70 प्रतिशत और 58 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि ये आंकड़े मजबूत उपभोक्ता मांग को दर्शाते हैं और त्योहारी सीजन के दौरान सकारात्मक व्यावसायिक दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करते हैं।
गोयल ने आगे कहा कि दिवाली के त्योहार के दौरान किफायती वस्तुओं से लेकर प्रीमियम उत्पादों तक लगभग पांच करोड़ उपहारों का आदान-प्रदान हुआ, जिससे त्योहारी बिक्री में काफी योगदान मिला।
सीटीआई ने कहा कि उसने होटल और बैंक्वेट एसोसिएशन, रेस्तरां और मॉल एसोसिएशन, सिनेमा एसोसिएशन, शॉपिंग सेंटर एसोसिएशन, ऑटोमोबाइल डीलर एसोसिएशन, मेकअप और सैलून एसोसिएशन, टूर एंड ट्रैवल एसोसिएशन, मार्केट एसोसिएशन और उद्योग निकायों के प्रतिनिधियों से परामर्श के बाद अपने अनुमानित व्यावसायिक अनुमान तैयार किए हैं।
व्यापारियों के संगठन ने एक बयान में कहा कि इस साल दिवाली के मौसम में स्वदेशी उत्पादों की खरीद-बिक्री पर विशेष जोर दिया जा रहा है और भारतीय निर्मित वस्तुओं की लोकप्रियता उपभोक्ताओं के बीच बढ़ रही है।
संगठन ने यह भी कहा कि जीएसटी सुधारों से भारतीय उत्पादों को अधिक मान्यता मिली है और स्थानीय स्तर पर निर्मित वस्तुओं की मांग मजबूत हुई है।
घर की सजावट के सामान, दिवाली पूजा की सामग्री, मिट्टी के दीये, देवी-देवताओं की मूर्तियां, दीवार पर टांगने वाली वस्तुएं, हस्तशिल्प और शुभ-लाभ और ओम जैसे पारंपरिक शुभ प्रतीक, और उन उत्पादों में शामिल हैं जिनकी मांग देखी जा रही है। देवी-लक्ष्मीो और भगवान गणेश की पूजा से संबंधित वस्तुएं, साथ ही स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और कुशल श्रमिकों द्वारा निर्मित सजावटी उत्पाद भी त्योहारी बिक्री में महत्वपूर्ण योगदान देने की उम्मीद है।
इनके अलावा, कई अन्य क्षेत्रों (एफएमसीजी, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं, खिलौने, इलेक्ट्रॉनिक्स, बिजली के उपकरण, रसोई के बर्तन, उपहार वस्तुएं, मिठाई, स्नैक्स, घरेलू साज-सज्जा, वस्त्र, रेडीमेड कपड़े, फैशन परिधान, जूते, घड़ियां, फर्नीचर, सौंदर्य प्रसाधन, सौंदर्य उत्पाद, मोबाइल फोन और सहायक उपकरण शामिल) में भी अच्छी बिक्री होने की उम्मीद है।
त्योहारी मांग पैदा करने वाले अन्य क्षेत्रों में बर्तन, निर्माण सामग्री, लकड़ी और प्लाईवुड, पेंट और कांच, दूध और डेयरी उत्पाद, किराना, अनाज, खाद्य तेल, दालें, साइकिल और सहायक उपकरण, दीवार घड़ियां, गोटा-जरी, साड़ियाँ और पोशाक सामग्री शामिल हैं।
सीटीआई ने कहा कि दिल्ली के व्यापारी त्योहारी सीजन में लगभग 80,000 करोड़ रुपए के कारोबार की उम्मीद कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 1 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच रैलियां और विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रीय राजधानी के व्यापारियों को लगभग 14,000 करोड़ रुपए का अनुमानित व्यापारिक नुकसान हुआ।
गोयल ने कहा कि अब व्यावसायिक गतिविधियां गति पकड़ रही हैं और त्योहारी खरीदारी के लिए दिल्ली भर के बाजारों में भारी भीड़ उमड़ रही है।
उन्होंने बताया कि चांदनी चौक, दरीबा कलां, मालीवाड़ा, सदर बाजार, कमला नगर, अशोक विहार, मॉडल टाउन, शालीमार बाग, वज़ीरपुर, पीतमपुरा, राजौरी गार्डन, साउथ एक्सटेंशन, ग्रेटर कैलाश, ग्रीन पार्क, यूसुफ सराय, लाजपत नगर, प्रीत विहार, शाहदरा और लक्ष्मी नगर जैसे बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही में वृद्धि देखी जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि विभिन्न कंपनियों के ऑटोमोबाइल शोरूम भी त्योहारी अवधि के दौरान अच्छी बिक्री दर्ज कर रहे हैं।
ग्राहक मोबाइल फोन, उपहार, सजावटी सामान, सूखे मेवे, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू साज-सज्जा सहित कई तरह के उत्पाद खरीद रहे हैं, जो राष्ट्रीय राजधानी में खरीदारी गतिविधियों में सुधार का संकेत है।
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