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पीएलआई स्कीम से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में पैदा हुई 1.37 लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियां

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नई दिल्ली, 10 फरवरी। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम के कारण दिसंबर 2024 तक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 10,213 करोड़ रुपये का निवेश आया है और 1.37 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। यह जानकारी संसद में सरकार द्वारा दी गई।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा को बताया कि पीएलआई स्कीम के तहत 662,247 करोड़ रुपये का संचयी उत्पादन हुआ है। साथ ही 137,189 अतिरिक्त रोजगार (प्रत्यक्ष नौकरियां) के अवसर सृजित किए गए हैं।

लिखित जवाब में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पर सरकार का जोर होने के कारण भारत एक मोबाइल फोन आयातक से निर्यातक देश बन गया है।

उन्होंने आगे बताया कि पीएलआई स्कीम के कारण देश में मोबाइल फोन का उत्पादन 5 गुना बढ़कर 2023-24 में 33 करोड़ यूनिट्स पर पहुंच गया है, जो कि 2014-15 में 6 करोड़ यूनिट्स पर था।

बीते 10 वर्षों में देश में बनने वाले मोबाइल फोन की वैल्यू में भी बड़ा इजाफा देखने को मिला है। 2023-24 में देश में बने मोबाइल फोन की वैल्यू 4,22,000 करोड़ रुपये थी, जो कि 2014-15 में 19,000 करोड़ रुपये थी। इसमें सालाना आधार पर 41 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़त हुई है।

पीएलआई स्कीम के कारण देश में मोबाइल फोन का निर्यात भी तेजी से बढ़ा है। 2020-21 में देश से 22,868 करोड़ रुपये का मोबाइल फोन का निर्यात हुआ था, जो कि 2023-24 में बढ़कर 1,29,074 करोड़ रुपये हो गया है। इसमें सालाना आधार पर 78 प्रतिशत के सीएजीआर से वृद्धि हुई है।

2015 में देश में बिकने वाले 74 प्रतिशत मोबाइल फोन आयात किए जाते थे। वहीं, अब भारत में उपयोग होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन घरेलू स्तर पर मैन्युफैक्चर किए जा रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने मुताबिक, मोबाइल फोन के लिए बैटरी, चार्जर, पीसीबीए, कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल, एनक्लोजर, यूएसबी केबल, फेराइट और ग्लास कवर जैसे विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का भी निर्माण भारत में शुरू हो गया है।

राष्ट्रीय समाचार

बाजार की पाठशाला: इन लोगों के लिए 31 अगस्त है आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन, जानिए किसके लिए कौन-सा फॉर्म होगा सही

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अगर आप नौकरी के साथ कारोबार, पेशे या स्वतंत्र रूप से काम करके कमाई करते हैं, तो आपके लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख नजदीक आ गई है। बिना कर ऑडिट वाली कारोबारी या पेशेवर आय रखने वाले करदाताओं को 31 अगस्त 2026 तक अपना आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा। वहीं, जिन कारोबारियों और पेशेवरों के खातों का कर ऑडिट जरूरी है, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 है। ऐसे करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने से पहले यह समझना जरूरी है कि उनकी आय और वित्तीय स्थिति के आधार पर कौन-सा रिटर्न फॉर्म लागू होगा।

आयकर विभाग के अनुसार, 31 जुलाई की अंतिम तारीख तक 6.5 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके थे, जिनमें वेतनभोगी लोगों, पेंशनभोगियों, छात्रों की आय वाले करदाताओं और अलग-अलग स्रोतों से आय प्राप्त करने वाले लोगों के रिटर्न शामिल हैं। इनमें कारोबार (बिजनेस) और पेशे (प्रोफेशन) से आय वाले बड़ी संख्या में करदाता भी शामिल रहे। अब बिना कर ऑडिट वाले कारोबार या पेशे से आय रखने वाले बाकी करदाताओं के लिए 31 अगस्त की तारीख महत्वपूर्ण है।

बिजनेस या प्रोफेशन से आय होने पर आम तौर पर आईटीआर-3 या आईटीआर-4 में से किसी एक फॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है। सही फॉर्म का चुनाव करदाता की आय, कारोबार की प्रकृति और कर व्यवस्था पर निर्भर करता है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने से बाद में कर विभाग की ओर से परेशानी या स्पष्टीकरण की जरूरत पड़ सकती है।

आईटीआर-3 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) के लिए होता है, जिनकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से होती है और जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन यानी अनुमानित कर व्यवस्था का विकल्प नहीं चुनते हैं।

अगर टैक्सपेयर नियमित रूप से अकाउंट बुक्स मेंटेन करता है, उसकी कुल आय 50 लाख रुपये से अधिक है या वह फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी एफएंडओ ट्रेडिंग करता है, तो कई मामलों में आईटीआर-3 लागू हो सकता है।

आईटीआर-3 के जरिए वे टैक्सपेयर्स वेतन या पेंशन, हाउस प्रॉपर्टी, बिजनेस या प्रोफेशन, कैपिटल गेन्स और अन्य स्रोतों से होने वाली आय की जानकारी दे सकते हैं। आम तौर पर यह फॉर्म उन व्यक्तियों या एचयूएफ के लिए इस्तेमाल होता है, जो आईटीआर-1, आईटीआर-2 या आईटीआर-4 के तहत रिटर्न दाखिल करने के योग्य नहीं हैं।

वहीं, आईटीआर-4 यानी सुगम उन व्यक्तियों, एचयूएफ और फर्म के लिए है, जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम के तहत बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम घोषित करते हैं और जिनकी कुल आय निर्धारित सीमा के भीतर है। सामान्य तौर पर इसमें 50 लाख रूपये तक की कुल आय वाले पात्र टैक्सपेयर्स शामिल हो सकते हैं।

इसमें बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली आय के अलावा वेतन या पेंशन, अधिकतम दो हाउस प्रॉपर्टी से आय और ब्याज, फैमिली पेंशन तथा डिविडेंड जैसी अन्य स्रोतों से आय भी शामिल की जा सकती है। निर्धारित शर्तों के तहत कृषि आय 5,000 रूपये तक और सेक्शन 112ए के तहत आने वाले कुछ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स भी इसमें रिपोर्ट किए जा सकते हैं।

हालांकि, हर टैक्सपेयर आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं कर सकता। अगर सेक्शन 112ए के तहत शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स या निर्धारित सीमा से अधिक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स है, अनलिस्टेड इक्विटी शेयर हैं, विदेशी संपत्ति या विदेश से आय है, घाटे को आगे कैरी फॉरवर्ड करना है, या ऐसी आय है जिस पर विशेष दर से टैक्स लगता है, तो आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कंपनी के डायरेक्टर भी इस फॉर्म के जरिए रिटर्न दाखिल नहीं कर सकते।

विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर रिटर्न दाखिल करने से पहले करदाताओं को फॉर्म 26एएस, वार्षिक सूचना विवरण यानी एआईएस, करदाता सूचना सारांश यानी टीआईएस, फॉर्म 16 और फॉर्म 16ए की जानकारी जांच लेनी चाहिए।

साथ ही बैंक खाते और कर भुगतान से जुड़े चालान भी तैयार रखने चाहिए। कारोबारियों को बिक्री-खरीद का रिकॉर्ड, लाभ-हानि खाता, बैलेंस शीट, बिल और चालान, जीएसटी रिटर्न तथा भुगतान माध्यमों से मिले डिटेल्स का भी मिलान करना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर करदाता ने शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग की है, तो ब्रोकरेज स्टेटमेंट, कॉन्ट्रैक्ट नोट, डीमैट स्टेटमेंट और कैपिटल गेन्स से जुड़ी पूरी जानकारी तैयार रखनी चाहिए। इनका मिलान एआईएस और बैंक रिकॉर्ड से करना जरूरी है। इसी तरह, किराये से आय पाने वाले प्रॉपर्टी मालिकों को रेंट एग्रीमेंट, नगर निगम टैक्स की रसीद, प्रॉपर्टी के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज और होम लोन के ब्याज का सर्टिफिकेट संभालकर रखना चाहिए।

टैक्सपेयर्स को लागू होने पर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट, फॉर्म 10-आईईए की अनॉलेजमेंट और विभिन्न डिडक्शन का दावा करने के समर्थन में जरूरी दस्तावेज भी तैयार रखने चाहिए। रिटर्न दाखिल करते समय जल्दबाजी के बजाय एआईएस, टीआईएस, फॉर्म 26एएस , बैंक स्टेटमेंट और अन्य रिकॉर्ड को अच्छी तरह मिलाना जरूरी है।

इसके अलावा, इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले सबसे महत्वपूर्ण बात सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव करना है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने पर बाद में परेशानी हो सकती है। इसलिए अपनी आय के स्रोत, बिजनेस या प्रोफेशन की प्रकृति, कैपिटल गेन्स, विदेशी संपत्ति, शेयर बाजार की ट्रेडिंग और लागू टैक्स व्यवस्था को ध्यान में रखकर ही आईटीआर-3 या आईटीआर-4 का चुनाव करें।

इसके साथ ही विशेषज्ञों का कहना हैं कि आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर कई जानकारियां पहले से भरी हुई मिलती हैं, लेकिन उन्हें बिना जांचे स्वीकार नहीं करना चाहिए। रिटर्न जमा करने के बाद ई-सत्यापन पूरा करना भी जरूरी है।

जटिल आय या कई स्रोतों से कमाई होने की स्थिति में रिटर्न दाखिल करने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट या योग्य टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना भी उपयोगी हो सकता है।

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राष्ट्रीय समाचार

चीनी की एक्स-मिल कीमतों में 20 प्रतिशत की गिरावट, खुदरा बाजार में भी शुरू हुई नरमी: सरकार

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उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि देश में एक्स-मिल चीनी कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और अब खुदरा बाजार में भी चीनी के दाम नीचे आने लगे हैं। सरकार के अनुसार, आपूर्ति शृंखला में कीमतों का प्रभाव धीरे-धीरे पहुंचता है, इसलिए आने वाले दिनों में खुदरा स्तर पर भी कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है।

मंत्रालय ने बताया कि सरकार लगातार देशभर में चीनी की कीमतों, स्टॉक और आपूर्ति की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हाल के दिनों में कीमतों में आई तेज वृद्धि के बाद सरकार ने कई सक्रिय कदम उठाए, जिनका असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है।

मंत्रालय के अनुसार, एक्स-मिल और खुदरा दोनों स्तरों पर कीमतों में आई गिरावट यह संकेत देती है कि हालिया मूल्य वृद्धि का प्रमुख कारण वास्तविक कमी नहीं, बल्कि जमाखोरी और सट्टेबाजी थी।

सरकार द्वारा देशभर की चीनी मिलों में भंडार के भौतिक सत्यापन अभियान चलाए गए। जांच के दौरान कई मामलों में यह पाया गया कि कुछ मिलों के पास घोषित आंकड़ों से अधिक चीनी का भंडार मौजूद था। इस सत्यापन अभियान से यह स्पष्ट हुआ कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और घबराहट में खरीदारी या अतिरिक्त भंडारण का कोई औचित्य नहीं है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि कुछ मामलों में चीनी मिलें “शॉर्ट सेलिंग” का सहारा ले रही थीं, जिसका अर्थ है कि मासिक कोटा के तहत उन्हें जितनी चीनी बाजार में बेचनी चाहिए थी, उससे कम मात्रा जारी की जा रही थी। इस तरह की गतिविधियों से पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद बाजार में आपूर्ति प्रभावित होती है और कीमतों पर अनावश्यक दबाव बनता है।

सरकार ने यह भी देखा कि कई बार महीने की शुरुआत में चीनी की बिक्री होने के बावजूद खरीदार उसे मिलों से महीने के अंत तक नहीं उठाते थे, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बनता था। इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने सितंबर से मासिक कोटा प्रणाली की जगह पखवाड़ा-आधारित चीनी आवंटन प्रणाली लागू करने का फैसला किया है।

नई व्यवस्था के तहत चीनी मिलों को आवंटित मात्रा का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा पहले सप्ताह में और शेष मात्रा अगले सप्ताह में बाजार में जारी करनी होगी। इसके अलावा, सरकार ने चीनी मिलों को निर्देश दिया है कि बिक्री के बाद चीनी को सात दिनों के भीतर मिल परिसर से भेजना अनिवार्य होगा।

सरकार का मानना है कि पखवाड़ा-आधारित कोटा और सात दिन के भीतर अनिवार्य आपूर्ति की व्यवस्था से चीनी की आवाजाही तेज होगी, जिससे चीनी सीधे मिलों से थोक विक्रेताओं और फिर उपभोक्ताओं तक जल्दी पहुंचेगी, जबकि जमाखोरी और सट्टेबाजी की संभावना कम होगी। साथ ही बड़े उपभोक्ताओं को भी उनकी वास्तविक आवश्यकता से अधिक स्टॉक न रखने की सलाह दी गई है।

मंत्रालय ने कहा कि नई पेराई सत्र की शुरुआत 15 अक्टूबर से होने जा रही है। अक्टूबर में ही 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक चीनी उत्पादन होने का अनुमान है। सरकार ने यह भी अनुमति दी है कि अक्टूबर में उत्पादित चीनी को मिलें बिना किसी अतिरिक्त प्रतिबंध के बेच सकें, ताकि नए सत्र की चीनी जल्द से जल्द घरेलू बाजार में उपलब्ध हो सके।

सरकार के अनुसार, नवंबर में लगभग 45 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन होने की संभावना है, जिससे बाजार में आपूर्ति और मजबूत होगी तथा कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।

मंत्रालय ने दोहराया कि देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है और उपभोक्ताओं को घबराने या अतिरिक्त खरीदारी करने की आवश्यकता नहीं है। सरकार बाजार पर करीब से नजर रखे हुए है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी उचित हस्तक्षेप करती रहेगी।

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व्यापार

घरेलू बाजार ने लगातार दो दिन की गिरावट का सिलसिला तोड़ा, सेंसेक्स 331 अंक उछला; आईटी शेयर चमके

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वैश्विक बाजारों के मिले अच्छे संकेतों के चलते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार दो दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए तेजी के साथ हरे निशान में बंद होने में सफल रहा। इस बीच आईटी, फार्मा और मेटल शेयरों में तेजी के चलते घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क निफ्टी और सेंसेक्स में 0.43 प्रतिशत तक की उछाल देखने को मिली।

30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 330.92 अंक यानी 0.43 प्रतिशत चढ़कर 77,264.51 पर बंद हुआ, तो वहीं एनएसई निफ्टी 50 84.80 अंक यानी 0.35 प्रतिशत बढ़कर 24,175.65 पर बंद हुआ।

दिन के सत्र में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,933.59 से 194.46 अंक यानी 0.25 प्रतिशत उछलकर 77,128.05 पर खुला और एक समय यह 424.38 अंक यानी 0.55 प्रतिशत की उछाल के साथ 77,357.97 के इंट्रा-डे हाई पर पहुंच गया, जबकि 76,988.22 का स्तर दिन का लो रहा।

वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,090.85 से 31.75 अंक यानी 0.13 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 24,122.60 पर खुला और दिन के कारोबार में एक समय यह 0.40 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,188.30 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि 24,076.85 का स्तर दिन का निम्नतम स्तर रहा।

व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.05 प्रतिशत और 0.20 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली।

वहीं सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी आईटी शीर्ष प्रदर्शन करने वाला सेक्टर बनकर उभरा, जिसमें 3.51 प्रतिशत की शानदार तेजी देखने को मिली। इसके अलावा, निफ्टी मेटल, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा, निफ्टी मीडिया और निफ्टी पीएसयू बैंक में भी तेजी दर्ज की गई। वहीं इसके विपरीत, निफ्टी केमिकल्स, निफ्टी सीमेंट, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी ऑटो में गिरावट दर्ज की गई।

निफ्टी50 इंडेक्स में टीसीएस, टेक महिंद्रा, इंफोसिस, एचसीएल टेक और विप्रो के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की गई और ये दिन के टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे। वहीं आईसीआईसीआई बैंक, श्रीराम फाइनेंस, आईटीसी और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर सबसे ज्यादा गिरावट के साथ बंद हुए।

एक मार्केट एक्सपर्ट ने बताया कि लगातार दो दिनों की गिरावट के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी दिखी। आईटी शेयरों में खरीदारी और ग्लोबल बाजार से मिले कुछ अच्छे संकेतों के चलते सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे हैं।

हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, यूएस बॉन्ड यील्ड और जैक्सन होल में फेडरल रिजर्व के भाषण से पहले उसकी पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता के कारण बाजार का मूड अभी भी सतर्क बना हुआ है।

एक्सपर्ट ने आगे कहा कि गुरुवार को मंथली एक्सपायरी के दिन क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) के दौरान दिखी जबरदस्त उतार-चढ़ाव ने भी निवेशकों को दिन के आखिर में होने वाली हलचल पर ज्यादा नजर रखने के लिए मजबूर किया है।

एक्सपर्ट ने कहा कि आगे भी बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। ग्लोबल संकेत, कच्चे तेल की कीमतें और इंस्टीट्यूशनल फ्लो बाजार की अगली चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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