व्यापार
भारतीय शेयर बाजार में तेजी, आईटी और फाइनेंस शेयरों में खरीदारी
मुंबई, 28 जनवरी। भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में तेजी के साथ खुला। बाजार के मुख्य सूचकांकों में खरीदारी का ट्रेंड देखा जा रहा है। सुबह 9:45 पर सेंसेक्स 384 अंक या 0.51 प्रतिशत की तेजी के साथ 75,750 और निफ्टी 78 अंक या 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,907 पर था।
लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली का ट्रेंड देखने को मिल रहा है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 661 अंक या 1.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 51,134 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 453 अंक या 2.78 प्रतिशत की गिरावट के साथ 15,850 पर था।
आईटी, पीएसयू बैंक, फाइनेंसियल सर्विस और रियल्टी इंडेक्स में तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। ऑटो, मेटल, फार्मा और एनर्जी इंडेक्स में बिकवाली बनी हुई है।
सेंसेक्स पैक में एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, इन्फोसिस, बजाज फाइनेंस, जोमैटो, बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील, एचसीएल टेक, इंडसइंड बैंक और टाटा स्टील टॉप गेनर्स हैं। सन फार्मा, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, एलएंडटी, एमएंडएम, अल्ट्राटेक सीमेंट और रिलायंस इंडस्ट्रीज टॉप लूजर्स हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, 23,000 और 23,050 के स्तर निफ्टी के लिए रुकावट के रूप में काम करेंगे, जबकि 22,800 और 22,750 समर्थन क्षेत्र के रूप में कार्य कर सकते हैं।
कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च प्रमुख श्रीकांत चौहान ने कहा, “यदि यह 22,750 से नीचे गिरता है, तो बिक्री दबाव बढ़ सकता है, जो बाजार को 22,600 के स्तर पर पहुंचा सकता है। रणनीति 23000-23050 के स्तर के आसपास कमजोर लॉन्ग पोजीशन को कम करने की होनी चाहिए। हालांकि, सप्ताह के दौरान, यदि यह 22600 तक गिरता है, तो हमें मध्यम से लंबी अवधि के दृष्टिकोण के साथ चुनिंदा स्टॉक खरीदने पर विचार करना चाहिए।”
एशिया के बाजार में मिलाजुला कारोबार हो रहा है। टोक्यो और बैंकॉक लाल निशान में हैं। वहीं, हांगकांग में तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। अमेरिकी बाजार सोमवार को मिलेजुले बंद हुए थे।
कच्चे तेल में तेजी देखी जा रही है। ब्रेंट क्रूड 0.39 प्रतिशत की तेजी के साथ 76.50 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73.48 डॉलर प्रति बैरल पर था।
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फुकेट-दिल्ली एयर इंडिया उड़ान में 4 सेकंड के लिए फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम ने काम करना बंद किया, विमान 300 फीट नीचे गिरा: रिपोर्ट

एयर इंडिया की फुकेट से नई दिल्ली आ रही फ्लाइट एआई2379 से जुड़े 4 अगस्त के घटनाक्रम में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एयरबस ए320नियो विमान ने उड़ान के दौरान लगभग चार सेकंड के लिए अपने प्रमुख फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम पर नियंत्रण खो दिया था, जिसके चलते विमान करीब 300 फीट नीचे आ गया और कम से कम 24 यात्री एवं चालक दल के सदस्य घायल हो गए।
एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, यह जानकारी विमान निर्माता एयरबस द्वारा विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर) के प्रारंभिक विश्लेषण से सामने आई है। घटना के समय विमान में 137 यात्री और 8 क्रू सदस्य, यानी कुल 145 लोग सवार थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में एक साथ असामान्यता आने के कारण विमान के महत्वपूर्ण नियंत्रण तंत्र प्रभावित हो गए। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि विमान के एलेवेटर और एलेरॉन, जो विमान की ऊंचाई और रोल नियंत्रित करते हैं, कुछ समय के लिए सामान्य हाइड्रोलिक नियंत्रण से बाहर हो गए थे। इसके अलावा स्पॉइलर सिस्टम के संचालन पर भी असर पड़ा।
एयरबस के डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक, लगभग चार सेकंड तक एलेवेटर और एलेरॉन बिना पायलट के निर्देश के स्वतः विचलित होते रहे। इस दौरान विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में गड़बड़ी दर्ज की गई।
घटना के दौरान विमान का ऑटोपायलट सिस्टम स्वतः डिस्कनेक्ट हो गया। इसके बाद विमान उड़ा रहे सह-पायलट ने स्टॉल वार्निंग मिलने पर नियंत्रण संभालते हुए साइड-स्टिक को आगे की ओर दबाया। हालांकि उस समय हाइड्रोलिक शक्ति उपलब्ध नहीं होने के कारण नियंत्रण संबंधी इनपुट का अपेक्षित प्रभाव तुरंत नहीं पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही कुछ सेकंड बाद हाइड्रोलिक सिस्टम दोबारा सक्रिय हुए, पायलट द्वारा दिए गए नियंत्रण इनपुट प्रभावी हो गए। इसके परिणामस्वरूप विमान अचानक नीचे की ओर झुक गया, जिससे केबिन के भीतर कई यात्री और क्रू सदस्य अपनी सीटों से उछल गए और कई लोग घायल हो गए।
घटना के बाद विमान के फ्लाइट डेटा को विश्लेषण के लिए एयरबस के फ्रांस स्थित टूलूज में मौजूद तकनीकी सहायता केंद्र एआईआरटीएसी को भेजा गया। मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है।
इस बीच, एयर इंडिया ने सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने के लिए 13 अगस्त से समूह के सभी पायलटों की अनिवार्य ड्रग स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। यह कदम हालिया घटना के बाद उठाया गया है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि एआई2379 के पायलट-इन-कमांड ने बाद में किए गए पुष्टिकरण परीक्षण में मारिजुआना के लिए सकारात्मक परिणाम दिया। हालांकि इस संबंध में एयर इंडिया या नियामक अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत टिप्पणी सामने नहीं आई है।
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भारत में स्थापित ऊर्जा क्षमता 552 गीगावाट हुई, गैर-जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी करीब 54 प्रतिशत

भारत की कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता बढ़कर जुलाई 2026 तक 552 गीगावाट हो गई है, जो कि 2014 में 249 गीगावाट थी। इसमें गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा की हिस्सेदारी 300.50 गीगावाट (31 जुलाई, 2026 तक) हो गई है, जो कि कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता का 54 प्रतिशत से अधिक है। वैश्विक स्तर पर स्थापित रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में भारत तीसरे स्थान पर है और भारत में स्थापित सोलर एनर्जी क्षमता 164.59 गीगावाट (31 जुलाई, 2026) है, जो कि 2014 में 2.8 गीगावाट थी।
फैक्टशीट के अनुसार, “सोलर अब भारत की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता का सबसे बड़ा हिस्सा है। 2025 में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर ग्रोथ मार्केट बन गया। इसने 37 गीगावाट से ज्यादा सोलर क्षमता जोड़ी, जबकि अमेरिका ने 34 गीगावाट क्षमता जोड़ी थी।” फरवरी 2024 में 1 करोड़ घरों के लिए कुल 75,021 करोड़ रुपए के बजट के साथ शुरू की गई पीएम-सूर्या घर मुफ्त बिजली योजना के तहत, देश भर में 51.58 लाख घरों (12 अगस्त, 2026 तक) को रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन का फायदा मिला है।
लाभार्थियों को लगभग 28,024 करोड़ रुपए की सब्सिडी ट्रांसफर की गई है। अब लगभग 19 लाख घरों का बिजली बिल जीरो आ रहा है। फैक्टशीट के अनुसार, इस स्कीम के तहत अब तक कुल 14.8 गीगावाट की रूफटॉप सोलर क्षमता लगाई जा चुकी है। 58.14 गीगावाट की स्थापित क्षमता (31 जुलाई तक) के साथ, विंड एनर्जी भारत के रिन्यूएबल एनर्जी विस्तार का एक अहम हिस्सा बनी हुई है। स्थापित विंड पावर क्षमता के मामले में भारत दुनिया में चौथे स्थान पर है। इस सेक्टर में सालाना बढ़ोतरी और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग में भी तेजी देखी जा रही है।
भारत ने वित्त वर्ष 2025–26 में 6.05 गीगावाट क्षमता जोड़ी, जो अब तक की सबसे ज्यादा सालाना विंड क्षमता बढ़ोतरी है और वित्त वर्ष 2024–25 की तुलना में 46 प्रतिशत ज्यादा है। लगभग 28 गीगावाट की अतिरिक्त विंड क्षमता पर काम चल रहा है। खास बात यह है कि विंड टरबाइन मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 2014 में 10 गीगावाट से बढ़कर लगभग 24 गीगावाट (मार्च 2026) हो गई है। इस सेक्टर ने मुख्य कंपोनेंट्स में 70–80 प्रतिशत स्वदेशीकरण हासिल कर लिया है। इस बीच, भारत की एनर्जी सिक्योरिटी और बिजली सप्लाई में कोयला अहम भूमिका निभाता आ रहा है। यह देश की प्राथमिक ऊर्जा जरूरतों का लगभग 55 प्रतिशत पूरा करता है और बिजली उत्पादन में 70 प्रतिशत से ज्यादा योगदान देता है।
भारत के पास लगभग 4,00,715 मिलियन टन कोयले का भंडार है और यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक और उपभोक्ता देश है। देश ने वित्त वर्ष 2024-25 में 1,047.52 मिलियन टन और वित्त वर्ष 2025-26 में 1,040.08 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया, जबकि वित्त वर्ष 2014-15 में यह उत्पादन 609.18 मिलियन टन था।
राष्ट्रीय समाचार
कमजोर वैश्विक संकेतों से गिरावट के साथ खुला शेयर बाजार, फाइनेंशियल स्टॉक्स पर दबाव

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ खुला। सुबह 9:28 पर सेंसेक्स 267 अंक या 0.34 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 78,686 और निफ्टी 34 अंक या 0.14 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,603 पर था।
शुरुआती कारोबार में बिकवाली का दबाव फाइनेंशियल स्टॉक्स में देखा जा रहा है। सूचकांकों में निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज टॉप लूजर्स था। निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी फार्मा और निफ्टी इन्फ्रा भी हरे निशान में थे। दूसरी तरफ निफ्टी आईटी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी ऑयल एंड गैस लाल निशान में थे।
सेंसेक्स पैक में टीसीएस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इन्फोसिस,एमएंडएम, एनटीपीसी, बीईएल, सन फार्मा, एसबीआई, एलएंडटी, पावर ग्रिड, टाइटन और आईटीसी हरे निशान में थे। बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, इटरनल और अल्ट्राटेक सीमेंट लाल निशान में थे।
मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हो रहा है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 122 अंक या 0.19 प्रतिशत की मजबूती के साथ 63,446 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 38 अंक या 0.19 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,839 पर था।
जानकारों ने कहा, “मार्केट में स्थिरता आ रही है और यह धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ रहा है। निकट भविष्य में यह ट्रेंड जारी रहने की संभावना है, जिससे आगे ब्रेकआउट आ सकता है। पहली के नतीजों से कुछ अहम बातें सामने आई हैं, जिन्हें निवेशकों को ध्यान में रखना चाहिए, जिसमें पहली बात, फाइनेंशियल, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स और टेलीकॉम जैसे सेक्टर की अधिकतर कंपनियों ने आय और मुनाफे में दोहरे अंकों की ग्रोथ दर्ज की है। इससे उनके स्टॉक की कीमतों को मजबूती मिली है। दूसरा, आईटी सेक्टर को धीमी ग्रोथ और एआई के असर को लेकर चिंताओं का सामना करना पड़ा रहा है। तीसरा, मेटल्स और ऑयल जैसी कमोडिटीज के मामले में मिली-जुली स्थिति रही है।”
ज्यादातर एशियाई बाजारों में भी मिलाजुला कारोबार हो रहा था। टोक्यो, बैंकॉक और सोल लाल निशान में थे। शंघाई, हांगकांग और जकार्ता हरे निशान में थे। अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को लाल निशान में बंद हुआ था, जिसमें डाओ जोन्स 0.85 प्रतिशत की कमजोरी के साथ और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 0.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ सपाट बंद हुआ।
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