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Saturday,29-August-2026
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राज्य सरकार खाजगी बालवाड्याओं को अपने नियंत्रण में लाने की तैयारी में

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मुंबई प्रतिनिधी : राज्य के गली मोहल्लों में चलने वाली खाजगी बालवाड्याओं में शैक्षिक सुविधाएं, बच्चों के लिए दिया जाने वाला दोपहर का खाना, और सरकारी योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन न होने के कारण माता-पिता की चिंता बढ़ गई है। इस पर उपाय के रूप में, शालेय शिक्षा विभाग ने खाजगी बालवाड्याओं को सरकार के नियंत्रण में लाने के लिए एक नई नियमावली तैयार करने का काम शुरू किया है।

नई राष्ट्रीय शैक्षिक नीति के अनुसार, 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए पूर्वप्राथमिक शिक्षा को महत्वपूर्ण माना गया है, और इस नीति में खाजगी बालवाड्याओं को भी शामिल करने का प्रस्ताव है। वर्तमान में, गली-मोहल्लों में चलने वाली कई बालवाड्याएं बिना नियमावली के चल रही हैं और वे स्थानीय प्रशासन के नियंत्रण से बाहर हैं। शिक्षा विभाग के इस नए नियम के तहत बच्चों के लिए एक उपयुक्त शैक्षिक वातावरण तैयार किया जाएगा, ऐसा आश्वासन दिया गया है।

नवीन नियमावली के तहत, बालवाड्याओं में बच्चों के लिए शैक्षिक पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा, साथ ही दोपहर के भोजन और बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उपयुक्त योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा। इससे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने की उम्मीद है।

शालेय शिक्षा विभाग, महिला और बाल कल्याण विभाग, और एकीकृत बाल विकास सेवा विभाग में से किस विभाग के तहत इन बालवाड्याओं का नियंत्रण होगा, यह अभी तय नहीं हुआ है। हालांकि, इस निर्णय से माता-पिता की चिंता में कमी आएगी और बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार होगा, ऐसा विश्वास व्यक्त किया जा रहा है।

राष्ट्रीय समाचार

चीनी की एक्स-मिल कीमतों में 20 प्रतिशत की गिरावट, खुदरा बाजार में भी शुरू हुई नरमी: सरकार

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उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि देश में एक्स-मिल चीनी कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और अब खुदरा बाजार में भी चीनी के दाम नीचे आने लगे हैं। सरकार के अनुसार, आपूर्ति शृंखला में कीमतों का प्रभाव धीरे-धीरे पहुंचता है, इसलिए आने वाले दिनों में खुदरा स्तर पर भी कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है।

मंत्रालय ने बताया कि सरकार लगातार देशभर में चीनी की कीमतों, स्टॉक और आपूर्ति की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हाल के दिनों में कीमतों में आई तेज वृद्धि के बाद सरकार ने कई सक्रिय कदम उठाए, जिनका असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है।

मंत्रालय के अनुसार, एक्स-मिल और खुदरा दोनों स्तरों पर कीमतों में आई गिरावट यह संकेत देती है कि हालिया मूल्य वृद्धि का प्रमुख कारण वास्तविक कमी नहीं, बल्कि जमाखोरी और सट्टेबाजी थी।

सरकार द्वारा देशभर की चीनी मिलों में भंडार के भौतिक सत्यापन अभियान चलाए गए। जांच के दौरान कई मामलों में यह पाया गया कि कुछ मिलों के पास घोषित आंकड़ों से अधिक चीनी का भंडार मौजूद था। इस सत्यापन अभियान से यह स्पष्ट हुआ कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और घबराहट में खरीदारी या अतिरिक्त भंडारण का कोई औचित्य नहीं है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि कुछ मामलों में चीनी मिलें “शॉर्ट सेलिंग” का सहारा ले रही थीं, जिसका अर्थ है कि मासिक कोटा के तहत उन्हें जितनी चीनी बाजार में बेचनी चाहिए थी, उससे कम मात्रा जारी की जा रही थी। इस तरह की गतिविधियों से पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद बाजार में आपूर्ति प्रभावित होती है और कीमतों पर अनावश्यक दबाव बनता है।

सरकार ने यह भी देखा कि कई बार महीने की शुरुआत में चीनी की बिक्री होने के बावजूद खरीदार उसे मिलों से महीने के अंत तक नहीं उठाते थे, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बनता था। इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने सितंबर से मासिक कोटा प्रणाली की जगह पखवाड़ा-आधारित चीनी आवंटन प्रणाली लागू करने का फैसला किया है।

नई व्यवस्था के तहत चीनी मिलों को आवंटित मात्रा का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा पहले सप्ताह में और शेष मात्रा अगले सप्ताह में बाजार में जारी करनी होगी। इसके अलावा, सरकार ने चीनी मिलों को निर्देश दिया है कि बिक्री के बाद चीनी को सात दिनों के भीतर मिल परिसर से भेजना अनिवार्य होगा।

सरकार का मानना है कि पखवाड़ा-आधारित कोटा और सात दिन के भीतर अनिवार्य आपूर्ति की व्यवस्था से चीनी की आवाजाही तेज होगी, जिससे चीनी सीधे मिलों से थोक विक्रेताओं और फिर उपभोक्ताओं तक जल्दी पहुंचेगी, जबकि जमाखोरी और सट्टेबाजी की संभावना कम होगी। साथ ही बड़े उपभोक्ताओं को भी उनकी वास्तविक आवश्यकता से अधिक स्टॉक न रखने की सलाह दी गई है।

मंत्रालय ने कहा कि नई पेराई सत्र की शुरुआत 15 अक्टूबर से होने जा रही है। अक्टूबर में ही 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक चीनी उत्पादन होने का अनुमान है। सरकार ने यह भी अनुमति दी है कि अक्टूबर में उत्पादित चीनी को मिलें बिना किसी अतिरिक्त प्रतिबंध के बेच सकें, ताकि नए सत्र की चीनी जल्द से जल्द घरेलू बाजार में उपलब्ध हो सके।

सरकार के अनुसार, नवंबर में लगभग 45 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन होने की संभावना है, जिससे बाजार में आपूर्ति और मजबूत होगी तथा कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।

मंत्रालय ने दोहराया कि देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता है और उपभोक्ताओं को घबराने या अतिरिक्त खरीदारी करने की आवश्यकता नहीं है। सरकार बाजार पर करीब से नजर रखे हुए है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी उचित हस्तक्षेप करती रहेगी।

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वित्त वर्ष 2026-27 के लिए दाखिल किए गए 7 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न

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आयकर विभाग ने शुक्रवार को बताया कि आकलन वर्ष (एवाई) 2026-27 के लिए अब तक 7 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल किए जा चुके हैं। विभाग ने व्यवसाय या पेशेवर आय वाले उन करदाताओं से रिटर्न जल्द दाखिल करने की अपील की है, जिन्हें अपने खातों का ऑडिट कराने की आवश्यकता नहीं है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किए एक पोस्ट में आयकर विभाग ने कहा कि 31 अगस्त 2026 ऐसे करदाताओं के लिए आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि है, जिनकी आय व्यवसाय या पेशे से है और जो ऑडिट के दायरे में नहीं आते।

विभाग ने कहा, “आकलन वर्ष 2026-27 के लिए 7 करोड़ से अधिक आईटीआर पहले ही दाखिल किए जा चुके हैं।” इसके साथ ही पात्र करदाताओं को अंतिम समय का इंतजार न करने और जल्द से जल्द रिटर्न दाखिल करने की सलाह दी गई है।

आयकर विभाग ने अपने पोस्ट में कहा, “31 अगस्त 2026 आकलन वर्ष 2026-27 के लिए उन करदाताओं की आईटीआर दाखिल करने की नियत तिथि है, जिनकी व्यवसाय या पेशेवर आय है और जिन पर ऑडिट लागू नहीं होता। अंतिम समय तक प्रतीक्षा न करें और अपना रिटर्न आज ही दाखिल करें।”

विभाग की यह अपील ऐसे समय में आई है जब गैर-ऑडिट श्रेणी के व्यवसायी और पेशेवर करदाताओं के लिए निर्धारित अंतिम तिथि नजदीक आ रही है।

आमतौर पर अंतिम दिनों में पोर्टल पर अधिक ट्रैफिक और तकनीकी दबाव देखने को मिलता है, इसलिए विभाग समय रहते रिटर्न दाखिल करने पर जोर दे रहा है।

इससे पहले जुलाई में आयकर विभाग ने जानकारी दी थी कि 31 जुलाई 2026 की समयसीमा तक 5.9 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए गए थे। उस समय विभाग ने करदाताओं का धन्यवाद करते हुए कहा था कि समय पर अनुपालन और करदाताओं का भरोसा देश के विकास को गति प्रदान करता है।

विभाग के अनुसार, 31 जुलाई की अंतिम तिथि वाले दिन ही 40 लाख से अधिक रिटर्न दाखिल किए गए थे। यह उन व्यक्तिगत करदाताओं और संस्थाओं के लिए निर्धारित समयसीमा थी, जिन्हें खातों का ऑडिट कराने की आवश्यकता नहीं थी।

नवीनतम आंकड़े दिखाते हैं कि जुलाई की समयसीमा के बाद भी बड़ी संख्या में व्यवसाय और पेशेवर आय वाले करदाताओं ने अपने रिटर्न दाखिल किए हैं, जिससे कुल संख्या बढ़कर 7 करोड़ के पार पहुंच गई है। आयकर विभाग का मानना है कि डिजिटल प्रणाली और ऑनलाइन फाइलिंग सुविधाओं के विस्तार से कर अनुपालन में लगातार सुधार हो रहा है।

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भारत और कनाडा आर्थिक पूरकताओं के आधार पर मजबूत वित्तीय साझेदारी का निर्माण कर सकते हैं: वित्त मंत्री सीतारमण

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि भारत और कनाडा के पास वित्तीय क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाई तक ले जाने और दीर्घकालिक निवेश साझेदारियां विकसित करने का बड़ा अवसर है। उन्होंने दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच मौजूद पूरकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत और कनाडा मिलकर अधिक व्यापक और भविष्य उन्मुख आर्थिक संबंध स्थापित कर सकते हैं।

टोरंटो में आयोजित उच्चस्तरीय भारत-कनाडा बिजनेस राउंडटेबल को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि भारत अपनी विशाल बाजार क्षमता, तेज आर्थिक वृद्धि और निवेश अवसर प्रदान करता है, जबकि कनाडा के पास दीर्घकालिक पूंजी, मजबूत संस्थागत ढांचा और वित्तीय विशेषज्ञता है। कार्यक्रम में कनाडा के वित्त एवं राष्ट्रीय राजस्व मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन भी उपस्थित थे।

वित्त मंत्रालय ने बताया कि सीतारमण ने कहा कि भारत और कनाडा के आर्थिक संबंधों में हाल के समय में नई गति देखने को मिली है और अब इस सकारात्मक माहौल को वित्तीय क्षेत्र में गहरे सहयोग तथा मजबूत निवेश साझेदारियों में परिवर्तित करने की आवश्यकता है।

वित्त मंत्री ने पिछले एक दशक में भारत में हुए व्यापक आर्थिक और वित्तीय सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एसेट क्वालिटी रिव्यू, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 4आर रणनीति और ईएएसई सुधारों जैसे कदमों ने भारतीय बैंकिंग प्रणाली को पहले की तुलना में अधिक मजबूत और स्थिर बनाया है।

सीतारमण ने कहा, “भारत और कनाडा अब यह तलाश रहे हैं कि डिजिटल प्रौद्योगिकियों के माध्यम से वित्तीय सहयोग को और कैसे मजबूत किया जा सकता है, जिसमें आसान भुगतान व्यवस्था, सीमा-पार धन हस्तांतरण और नागरिकों के लिए अधिक डिजिटल भुगतान विकल्प शामिल हैं।”

उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल दोनों देशों के बीच अधिक गहरी और जन-केंद्रित साझेदारी की मजबूत नींव रख सकती है।

वित्त मंत्री ने भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती का उल्लेख करते हुए बताया कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात मार्च 2018 के 11.18 प्रतिशत से घटकर मार्च 2025 में 2.31 प्रतिशत रह गया, जो पिछले दो दशकों का सबसे निचला स्तर है।

उन्होंने भारत के वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में आए बदलावों को भी रेखांकित किया। सीतारमण ने कहा कि पूंजी बाजारों की गहराई बढ़ी है, बीमा क्षेत्र का विस्तार हुआ है, फिनटेक नवाचारों को गति मिली है और जैम, यूपीआई, अकाउंट एग्रीगेटर तथा इंडिया स्टैक जैसे डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना प्लेटफॉर्म ने वित्तीय समावेशन और डिजिटल लेनदेन को नई दिशा दी है।

वित्त मंत्री ने कनाडाई वित्तीय संस्थानों को गिफ्ट इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (गिफ्ट आईएफएससी) में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का भी आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि बैंकिंग, फंड प्रबंधन, पुनर्बीमा, सतत वित्त, वैश्विक क्षमता केंद्र, विमान एवं जहाज लीजिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश और सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

सीतारमण ने बताया कि दोनों देशों के बीच हुई चर्चाओं का केंद्र तीन प्रमुख विषय रहे। पहला, वैश्विक और घरेलू व्यापक आर्थिक विकास तथा दोनों देशों की नीति प्राथमिकताओं का आकलन। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारत ने चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बीच भी उल्लेखनीय आर्थिक मजबूती का प्रदर्शन किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत और कनाडा की अर्थव्यवस्थाएं कई क्षेत्रों में एक-दूसरे की पूरक हैं और निवेश तथा आर्थिक सहयोग को और गहरा करने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक विकास, वित्तीय नवाचार और निवेश विस्तार का आधार बन सकती है।

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