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Thursday,26-March-2026
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व्यापार

शेयर बाजार में सपाट कारोबार, सेंसेक्स 77,000 के करीब

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मुंबई, 21 जनवरी। भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत मंगलवार को सपाट हुई। बाजार के बड़े सूचकांकों में मिलाजुला कारोबार हो रहा है। सुबह 9:33 पर सेंसेक्स 116 अंक या 0.19 प्रतिशत गिरकर 76,957 और निफ्टी 18 अंक अंक या 0.08 प्रतिशथ बढ़कर 23,363 पर था।

बाजार के सपाट होने की वजह अमेरिका नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तत्काल प्रभाव से ट्रेड टैरिफ को न लागू करने को माना जा रहा है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि ट्रेड टैरिफ में देरी करने से डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड दोनों गिरेंगी। यह भारत जैसे बाजारों से लिए अच्छा है।

व्यापक बाजार का रुझान सकारात्मक बना हुआ है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर 1,694 शेयर हरे निशान में और 599 शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मिलाजुला कारोबार हो रहा है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 154 अंक या 0.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 54,952 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 7 अंक या 0.02 प्रतिशत की बढ़त के साथ 17,868 पर बना हुआ है।

सेंसेक्स पैक में अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा मोटर्स, आईटीसी, सन फार्मा, एलएंडटी, इन्फोसिस, टाटा स्टील, नेस्ले, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक और टीसीएस टॉप गेनर्स हैं। जोमैटो, कोटक महिंद्रा, एनटीपीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एसबीआई, बजाज फाइनेंस और भारती एयरटेल टॉप लूजर्स हैं।

ऑटो, आईटी, फार्मा, एफएमसीजी, मेटल, मीडिया, एनर्जी और इन्फ्रा सबसे ज्यादा बढ़ने वाले इंडेक्स हैं। पीएसयू बैंक, रियल्टी और प्राइवेट बैंक इंडेक्स पर दबाव देखा जा रहा है।

जानकारों के अनुसार, निफ्टी को 23,250 पर और उसके बाद 23,100 और 23,000 पर सपोर्ट मिल सकता है। तेजी की स्थिति में 23,400 एक रुकावट का स्तर हो सकता है। अगर यह टूटता है तो 23,500 और फिर 23,700 रुकावट के स्तर होंगे।

सोमवार को मार्टिन लूथर किंग जूनियर डे के कारण अमेरिकी शेयर बाजार बंद थे। वहीं, एशिया के ज्यादातर बाजारों में हरे निशान में कारोबार हो रहा है।

राजनीति

भारत के पास 60 दिनों का कच्चे तेल का भंडार, एलपीजी की एक महीने की पूरी व्यवस्था: सरकार

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नई दिल्ली, 26 मार्च : सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट कहा कि भारत में पेट्रोलियम और एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे ‘जानबूझकर अफवाह और गलत जानकारी फैलाने वाले अभियान’ से गुमराह न हों, जिनका उद्देश्य बेवजह डर पैदा करना है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि भारत के पास कुल 74 दिनों की भंडारण क्षमता है और फिलहाल करीब 60 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। इसमें कच्चा तेल, पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पाद और रणनीतिक भंडारण शामिल हैं, जबकि ‘हम मध्य पूर्व संकट के 27 वें दिन में हैं’। इसके साथ ही मंत्रालय ने कहा कि देश के सभी खुदरा ईंधन आउटलेट्स के पास पर्याप्त मात्रा में ईंधन मौजूद है।

सरकार ने एक बयान में कहा कि देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है। हर नागरिक के लिए लगभग दो महीने तक की सप्लाई सुनिश्चित है, चाहे वैश्विक हालात कैसे भी हों।

इसके अलावा, अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की खरीद भी पहले से तय कर ली गई है। सरकार ने कहा कि भारत आने वाले कई महीनों तक पूरी तरह सुरक्षित है और भंडार कम होने जैसी बातें पूरी तरह गलत हैं।

दुनिया के कई देशों में जहां ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं, राशनिंग लागू की जा रही है और पेट्रोल पंप बंद हो रहे हैं, वहीं भारत में ऐसी कोई स्थिति नहीं है। सरकार ने कहा कि कुछ जगहों पर घबराहट में खरीदारी सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाहों के कारण हुई है।

सरकार ने यह भी बताया कि तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंपों को मिलने वाला क्रेडिट बढ़ाकर 3 दिन कर दिया है, ताकि किसी भी पंप पर कामकाजी पूंजी की कमी के कारण ईंधन की कमी न हो।

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद भारत अब 41 से ज्यादा देशों से कच्चा तेल मंगा रहा है और पहले से ज्यादा सप्लाई मिल रही है। देश की सभी रिफाइनरी 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं और अगले 60 दिनों की सप्लाई पहले से तय है।

एलपीजी को लेकर भी सरकार ने कहा कि कोई कमी नहीं है। घरेलू उत्पादन 40 प्रतिशत बढ़ाकर रोजाना 50 टीएमटी कर दिया गया है, जबकि कुल जरूरत लगभग 80 टीएमटी है। यानी अब आयात की जरूरत कम होकर सिर्फ 30 टीएमटी रह गई है।

इसके अलावा, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से 800 टीएमटी एलपीजी पहले ही भारत के लिए भेजा जा चुका है, जो देश के 22 आयात टर्मिनलों पर पहुंचेगा। सरकार के अनुसार, कम से कम एक महीने की एलपीजी सप्लाई पूरी तरह सुनिश्चित है और आगे भी लगातार व्यवस्था की जा रही है।

तेल कंपनियां रोजाना 50 लाख से ज्यादा सिलेंडर की डिलीवरी कर रही हैं। साथ ही, ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई 50 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है।

सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को भी बढ़ावा दे रही है, क्योंकि यह सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण के लिए बेहतर है। भारत रोजाना 92 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति माह (एमएमएससीएमडी) गैस खुद पैदा करता है, जबकि कुल जरूरत 191 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति माह है, जिससे भारत एलपीजी की तुलना में गैस पर आयात के मामले में काफी कम निर्भर है।

देश में पीएनजी नेटवर्क भी तेजी से बढ़ा है। 2014 में जहां 57 क्षेत्र थे, वहीं अब 300 से ज्यादा क्षेत्रों में यह सुविधा पहुंच चुकी है। वहीं घरेलू पीएनजी कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ से ज्यादा हो गए हैं।

सरकार ने साफ किया है कि पीएनजी को बढ़ावा एलपीजी की कमी के कारण नहीं दिया जा रहा है, बल्कि यह एक बेहतर और सस्ता विकल्प है। एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है।

मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे ईंधन और गैस से जुड़ी जानकारी के लिए सिर्फ सरकारी आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।

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व्यापार

मध्य पूर्व तनाव का असर: निजी ईंधन विक्रेता नायरा एनर्जी ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम, पेट्रोल 5 रुपए और डीजल 3 रुपए महंगा

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नई दिल्ली, 26 मार्च : निजी ईंधन विक्रेता नायरा एनर्जी ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने पेट्रोल के दाम 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल के दाम 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ाए हैं।

इस फैसले के साथ नायरा एनर्जी उन शुरुआती कंपनियों में शामिल हो गई है, जिन्होंने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करके वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया है।

हालांकि, अलग-अलग राज्यों में वैट (वीएटी) जैसे स्थानीय टैक्स के कारण कीमतों में थोड़ा फर्क हो सकता है। कुछ जगहों पर पेट्रोल की कीमत 5.30 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ गई है।

यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेज उछाल आया है। फरवरी के आखिर से अब तक कच्चे तेल की कीमतें करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं।

इस दौरान इजरायल द्वारा ईरान पर हमले और उसके जवाबी कदमों के चलते तेल सप्लाई में बाधा की आशंका बढ़ गई थी। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल करीब 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जो बाद में घटकर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

इसके बावजूद सरकारी तेल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने अभी तक पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया है।

ये सरकारी कंपनियां देश के लगभग 90 प्रतिशत फ्यूल रिटेल मार्केट को नियंत्रित करती हैं और अप्रैल 2022 से कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है और करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आता है। इसमें से बड़ी मात्रा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है, जो इस समय तनाव के कारण प्रभावित हो रहा है।

इस बीच सरकार ने कहा है कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सभी पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।

सरकार ने यह भी बताया कि देश भर में पीएनजी कनेक्शन तेजी से बढ़ाए जा रहे हैं और सभी रिफाइनरी उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं।

कुछ क्षेत्रों में अफवाहों के कारण घबराहट में खरीदारी देखी गई, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि किसी तरह की कमी नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

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राष्ट्रीय

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच वैश्विक तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार

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मुंबई, 26 मार्च : ईरान ने युद्ध को जारी रखने और अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है। इस घटनाक्रम का असर तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। गुरुवार को वैश्विक तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।

ब्रेंट क्रूड वायदा 1.21 प्रतिशत बढ़कर 103.46 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 1.35 प्रतिशत उछलकर 91.54 डॉलर प्रति बैरल हो गया। इसका कारण मध्य पूर्व में लगातार तनाव बढ़ना है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार, तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थों के जरिए होने वाले संपर्क को बातचीत के तौर पर नहीं समझा जाना चाहिए। तेहरान की ओर से अमेरिका समर्थित संघर्ष-विराम प्रस्ताव को भी खारिज किए जाने की संभावना थी।

इससे पहले, बुधवार को पश्चिम एशिया क्षेत्र में संघर्ष-विराम की बढ़ती उम्मीदों के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई थी।

विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट से भारत के महंगाई और चालू खाता घाटा (सीएडी) जैसे मैक्रोइकोनॉमिक संकेतकों को कुछ राहत मिल सकती है, हालांकि तकनीकी संकेतक बताते हैं कि प्रमुख समर्थन स्तरों की जांच की जा रही है।

भारत के लिए कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल का हर बदलाव आमतौर पर जीडीपी के 0.3–0.5 प्रतिशत अंकों तक चालू खाता घाटे को प्रभावित करता है और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति को 20–30 आधार अंकों तक बढ़ाता है, जो कि कीमतों के आगे बढ़ने पर निर्भर करता है।

इसी बीच, ईरान ने घोषणा की है कि वह भारत समेत पांच ‘मित्र’ देशों के जहाजों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाएगा, जिससे उन्हें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलमार्ग से गुजरने की अनुमति होगी, जबकि दूसरों के लिए पहुंच सीमित रहेगी।

भारत के साथ-साथ रूस, चीन, पाकिस्तान और इराक के जहाजों को इस क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के बावजूद इस प्रमुख समुद्री मार्ग से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी गई है। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि जिन देशों को विरोधी माना जाता है, या जो चल रहे संघर्ष में शामिल हैं, उनसे जुड़े जहाजों को गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका, इजरायल और कुछ खाड़ी देशों के जहाजों को, जो मौजूदा संकट में भूमिका निभा रहे हैं, इस जलमार्ग से गुजरने के लिए मंजूरी नहीं दी जाएगी।

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