राजनीति
2025 के 15 दिन, जब पीएम मोदी ने अपने विजन को हकीकत में बदल दिया
नई दिल्ली, 16 जनवरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई परिवर्तनकारी पहलों के साथ साल 2025 की शुरुआत की है। यह एक प्रगतिशील, आत्मनिर्भर और एकजुट भारत के लिए उनके दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है। बुनियादी ढांचे और वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने से लेकर युवाओं को सशक्त बनाने और भारत की सांस्कृतिक विविधता का जश्न मनाने तक, उनके नेतृत्व ने आने वाले एक उल्लेखनीय वर्ष के लिए माहौल तैयार किया है।
साल की पहली कैबिनेट बैठक के दौरान किसानों के कल्याण पर जोर देने के साथ 2025 की शुरुआत हुई। सरकार ने किसानों के लिए किफायती उर्वरक मूल्य सुनिश्चित करते हुए डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) के लिए एकमुश्त विशेष पैकेज के विस्तार को मंजूरी दी। यह निर्णय भारत की कृषि और किसानों को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने उसी दिन गायक-अभिनेता दिलजीत दोसांझ और शतरंज ग्रैंडमास्टर कोनेरू हम्पी जैसे सांस्कृतिक आइकन से मुलाकात की, जो कला, खेल और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने पर उनके ध्यान को रेखांकित करता है।
3 जनवरी को पीएम मोदी ने दिल्ली में इन-सीटू स्लम रिहैबिलिटेशन प्रोजेक्ट के तहत 1,675 नवनिर्मित फ्लैट लाभार्थियों को सौंपे। इससे हजारों परिवारों के लिए रहन-सहन की बेहतर स्थिति सुनिश्चित हुई। उन्होंने 600 करोड़ रुपये से ज्यादा की तीन परिवर्तनकारी शैक्षणिक परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। इनमें सूरजमल विहार में पूर्वी परिसर, द्वारका में पश्चिमी परिसर और नजफगढ़ में वीर सावरकर कॉलेज शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शैक्षणिक बुनियादी ढांचे को बढ़ाना और भावी पीढ़ियों को प्रेरित करना है।
4 जनवरी को ग्रामीण भारत महोत्सव के दौरान ग्रामीण विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता केंद्र में रही। इसमें जीआई-प्रमाणित ग्रामीण उत्पादों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया गया। यह पहल ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने और इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में एकीकृत करने के लक्ष्य के अनुरूप है। इस बीच, पीएम मोदी ने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला सहित वैश्विक तकनीकी नेताओं के साथ बातचीत की, जिन्होंने भारत में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में 3 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की। ये चर्चाएं स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देने और एक आत्मनिर्भर तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर केंद्रित थीं।
5 जनवरी को साहिबाबाद को अशोक नगर से जोड़ने वाले नमो भारत ट्रेन कॉरिडोर के उद्घाटन और ओडिशा, तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर में कई रेल बुनियादी ढांचे के विकास के साथ बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं ने गति पकड़ी। ये परियोजनाएं पीएम मोदी के नेतृत्व में परिवहन नेटवर्क के आधुनिकीकरण में भारत की तेजी से प्रगति का प्रतीक हैं।
7 जनवरी को पीएम मोदी ने आंध्र प्रदेश में दो ऐतिहासिक परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इनमें आयातित दवा सामग्री पर निर्भरता कम करने के लिए 1,877 करोड़ रुपये की पहल बल्क ड्रग पार्क और ग्रीन हाइड्रोजन हब शामिल है। ग्रीन हाइड्रोजन हब का उद्देश्य प्रतिदिन 1,500 टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है। ये प्रयास भारत को अक्षय ऊर्जा और दवा निर्माण में अग्रणी बनाते हैं।
9 जनवरी को जीनोम इंडिया परियोजना के उद्घाटन के साथ विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया गया। यह कदम भारतीयों की आनुवंशिक विविधता का मानचित्रण करेगा और आनुवंशिक विकारों के लिए उन्नत स्वास्थ्य सेवा समाधान प्रदान करेगा। उसी दिन, प्रधानमंत्री मोदी ने भुवनेश्वर में प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन को संबोधित किया, जिसमें भारतीय प्रवासियों की उपलब्धियों और वैश्विक मंच पर उनके योगदान का जश्न मनाया गया।
12 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय युवा दिवस और स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर विकसित भारत युवा नेता संवाद में भाग लिया। इस पहल ने युवा नवोन्मेषकों और सफल व्यक्तियों को विचारों का आदान-प्रदान करने और एक विकसित भारत की कल्पना करने के लिए एकजुट किया, जिससे युवाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि हुई।
13 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर में सोनमर्ग सुरंग का उद्घाटन किया, जिससे कनेक्टिविटी में सुधार हुआ और पर्यटन को बढ़ावा मिला, साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा भी बढ़ी। उन्होंने श्रमिकों और इंजीनियरों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और उनके प्रयासों के लिए आभार जताया। उस शाम उन्होंने विभिन्न समुदायों के साथ लोहड़ी, पोंगल और मकर संक्रांति मनाई, जिसमें भारत की सांस्कृतिक एकता और विरासत पर जोर दिया गया।
15 जनवरी को पीएम मोदी ने नौसेना में नए जहाजों और पनडुब्बियों सहित उन्नत नौसैनिक लड़ाकू जहाजों को शामिल करके एक और मील का पत्थर हासिल किया, जो भारत की बढ़ती समुद्री क्षमताओं को दर्शाता है। ये कदम हिंद महासागर में एक प्रमुख शक्ति के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करते हैं और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं।
16 जनवरी को, भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण इसरो द्वारा उपग्रहों की अंतरिक्ष डॉकिंग के सफल प्रदर्शन के साथ एक और मील का पत्थर साबित हुआ। यह आने वाले वर्षों में भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशनों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
सिर्फ 15 दिनों में, पीएम मोदी के नेतृत्व ने वर्ष 2025 के लिए एक परिवर्तनकारी शुरुआत की है। वैज्ञानिक सफलताओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से लेकर युवा सशक्तीकरण और सांस्कृतिक उत्सव तक, उनके कार्य एक विकसित भारत के दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। जैसा कि पीएम मोदी ने कहा, “हम सब मिलकर एक विकसित भारत का निर्माण कर रहे हैं, जहां हर नागरिक एक उज्जवल कल के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”
राजनीति
जंतर-मंतर जा रहे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत इंडिया ब्लॉक के नेता हिरासत में लिए गए

इंडिया ब्लॉक के नेताओं को बुधवार को जंतर-मंतर जाते समय पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हैं। विपक्षी नेता लगातार दूसरे दिन मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर जा रहे थे।
हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी ने कहा, “गृह मंत्री अमित शाह, पीएम नरेंद्र मोदी, सीईसी ज्ञानेश कुमार और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ये सब कुछ कर सकते हैं, लेकिन हम उन्हें न्याय के कटघरे में लाएंगे। यह मेरी गारंटी है कि इन चारों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। यह सब घबराहट में की गई प्रतिक्रिया है। यह सब डर है।”
पुलिस ने राहुल गांधी समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को धक्का देते हुए बसों में बैठाया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कस्तूरबा गांधी मार्ग पर हिरासत में लिए गए राहुल गांधी और अन्य नेताओं को ले जा रही बस का टायर कथित तौर पर पंक्चर कर दिया।
इससे पहले प्रियंका गांधी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों की भारी मौजूदगी के बीच सड़क पर लेट गईं और विपक्षी नेताओं को चुनाव आयोग से मिलने की अनुमति दिए जाने तक वहां से हटने से इनकार कर दिया।
प्रियंका गांधी ने पत्रकारों से कहा, “यह है कि वे सांसदों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, जो सिर्फ चुनाव आयुक्त से मिलने की मांग कर रहे हैं।”
उन्होंने सुरक्षाकर्मियों पर सांसदों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए कहा, “पुलिसकर्मियों ने मुझे पूरी तरह खरोंच दिया है। उन्होंने हमें जमीन पर गिरा दिया। अब हम यहां से नहीं हटेंगे। उन्हें अपनी फोर्स वापस बुलाने दीजिए। मैं यहां से नहीं हटूंगी।”
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सुरक्षाकर्मियों पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हम कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज बर्दाश्त नहीं करेंगे। राहुल जी और मैं बस में थे। जब राहुल जी बस से नीचे उतरे तो राहुल जी और प्रियंका जी के साथ धक्का-मुक्की शुरू हो गई। उन्होंने गुंडागर्दी की है और गुंडों की तरह व्यवहार कर रहे हैं।”
कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा, “जब तक हमें अपने सवालों के जवाब नहीं मिलते, हमारी आवाज मजबूत बनी रहेगी।”
वहीं, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ पुलिस के कथित व्यवहार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि नेताओं को बसों में भरकर पुलिस थानों ले जाया गया और दुर्भाग्य से सुबह उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या सार्वजनिक स्थानों पर जाना, धरना देना, विरोध प्रदर्शन करना या मार्च निकालना देश में गैरकानूनी है।
इससे पहले जंतर-मंतर के लिए रवाना होने से पहले राहुल गांधी ने मंगलवार को आकाशवाणी भवन के बाहर नौ घंटे से अधिक समय तक धरना देने के मामले में अपने खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पहले से ही 45 मामले हैं और उनका “लक्ष्य 100 प्राथमिकी” का है।
मंगलवार को इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने चुनाव आयोग के समक्ष अपनी मांगें रखने के लिए प्रदर्शन किया था। बुधवार को भी विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी रखा।
राजनीति
पिंक पास को लेकर सौरभ भारद्वाज बोले- जनता को परेशान करना इनकी आदत

दिल्ली की बसों में महिलाओं के मुफ्त सफर के लिए पिंक पास को अनिवार्य किए जाने के बाद आम आदमी पार्टी ने सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि पिंक पास बनवाने के लिए महिलाओं को घंटों लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। उनका दावा है कि दिनभर लाइन में लगने के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाओं के पास नहीं बन पा रहे हैं, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जनता को परेशान करना इस सरकार की आदत बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले से आसानी से मिल रही सुविधाओं को भी जटिल बना दिया गया है और आम लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए सड़कों पर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मुख्यमंत्री ने हर आसान काम और पहले से चल रही सुविधा के लिए लोगों को लाइनों में खड़ा कर दिया है।
उन्होंने नोटबंदी, एसआईआर और पिंक पास के साथ-साथ एलपीजी सिलेंडर से जुड़ी परेशानियों का भी उल्लेख किया। उनका आरोप है कि लोगों को इतना परेशान कर दिया जाए कि वे सरकार से किसी नई सुविधा की मांग ही न करें और अपनी रोजमर्रा की परेशानियों में उलझे रहें। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में पहले सभी महिलाएं बसों में मुफ्त सफर करती थीं और इसके लिए किसी विशेष पास की जरूरत नहीं होती थी।
उनके मुताबिक, अब पिंक पास को अनिवार्य किए जाने से महिलाओं को पास बनवाने के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में बड़ी संख्या में महिलाओं के वोट काटे गए हैं और ऐसे में उन्हें पिंक पास की सुविधा से वंचित किया जा रहा है। वहीं, जिन महिलाओं को पास मिलने की उम्मीद है, उन्हें भी इसे बनवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
आप नेता ने दिल्ली में रहने वाली दूसरे राज्यों की महिलाओं को लेकर भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित आसपास के राज्यों से दिल्ली आने वाली महिलाएं, जिनमें नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम और सोनीपत से आने वाली महिलाएं शामिल हैं, उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में रोजगार, शिक्षा और अन्य जरूरी कामों के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं पड़ोसी शहरों से आती-जाती हैं। ऐसे में मुफ्त बस यात्रा की सुविधा से जुड़ी किसी भी नई व्यवस्था का सीधा असर इन महिलाओं पर पड़ता है। उन्होंने सरकार से व्यवस्था को सरल बनाने और महिलाओं की परेशानियों को तत्काल दूर करने की मांग की।
आम आदमी पार्टी का कहना है कि पहले से उपलब्ध मुफ्त बस यात्रा की सुविधा को आसान बनाए रखने के बजाय पिंक पास की अनिवार्यता से महिलाओं के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार को महिलाओं को राहत देने के लिए व्यवस्था को सरल करना चाहिए, न कि उन्हें पास बनवाने के लिए लंबी कतारों में खड़ा करना चाहिए।
राष्ट्रीय समाचार
पुलिस और आरएएफ के लिए बॉडी कैमरों की एसओपी पर सरकार छह महीने में ले फैसला : दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को सरकार को निर्देश दिया कि वह भीड़ को नियंत्रित करने और विरोध-प्रदर्शनों को संभालने के काम में तैनात दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों के लिए बॉडी कैमरों का इस्तेमाल अनिवार्य करने की मांग वाली जनहित याचिका (पीआईएल) को एक ‘रिप्रेजेंटेशन’ (यानी सरकार के सामने रखी गई मांग) के तौर पर ले।
एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस अरुण भारद्वाज की बेंच ने सरकार को निर्देश दिया कि वह विरोध-प्रदर्शनों और भीड़ को काबू करने के ऑपरेशन के दौरान पुलिस और आरएएफ कर्मियों द्वारा बॉडी कैमरों के इस्तेमाल के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) बनाने पर छह महीने के भीतर फैसला ले।
हाई कोर्ट ने यह आदेश वकील चाहत राघव द्वारा दायर एक पीआईएल का निपटारा करते हुए दिया। यह पीआईएल जंतर-मंतर पर जुलाई 2026 में हुए प्रदर्शनों के बाद दायर की गई थी, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक शामिल थे।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर वकील अखिल सिबल ने कहा कि दिल्ली पुलिस का मौजूदा सिस्टम बाहरी वीडियोग्राफरों पर निर्भर है, जो घेरे के बाहर तैनात होते हैं और इसमें भीड़ को काबू करने के लिए तैनात कर्मियों की गतिविधियों की साथ-साथ रिकॉर्डिंग का कोई सही तरीका नहीं है।
उन्होंने तर्क दिया कि बॉडी कैमरों के लिए टेक्नोलॉजी की उपलब्धता भीड़ को काबू करने के ऑपरेशन के दौरान पारदर्शिता सुनिश्चित करने और जवाबदेही तय करने में बहुत मददगार साबित हो सकती है।
सीनियर वकील ने तर्क दिया, “अगर टेक्नोलॉजी उपलब्ध है, तो जरूरत पड़ने पर जवाबदेही तय करने में यह बहुत काम आ सकती है। यह फेशियल रिकग्निशन से अलग है, जिसमें निगरानी (सर्विलांस) को लेकर चिंताएं होती हैं।”
केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि याचिका को एक रिप्रेजेंटेशन (अनुरोध) के तौर पर माना जा सकता है और छह महीने के भीतर फैसला बता दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले और दिल्ली हाई कोर्ट के नियमों का हवाला देते हुए एएसजी शर्मा ने कहा कि पीआईएल अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने से पहले संबंधित अधिकारियों के सामने एक रिप्रेजेंटेशन देना जरूरी था।
केंद्र ने यह भी कहा कि विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए पहले से ही गाइडलाइंस मौजूद हैं और मौजूदा सिस्टम में वीडियोग्राफी भी शामिल है। याचिकाकर्ता बॉडी कैमरों के इस्तेमाल के लिए एसओपी बनाने की मांग करते हुए एक रिप्रेजेंटेशन दे सकता है, जिस पर कानून के अनुसार विचार किया जा सकता है।
सरकार द्वारा इस मुद्दे पर रिप्रेजेंटेशन के तौर पर विचार करने और छह महीने के भीतर अपना फैसला बताने पर सहमत होने के बाद, हाई कोर्ट ने पीआईएल का निपटारा कर दिया।
यह याचिका जंतर-मंतर पर जुलाई में हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों के बाद दायर की गई थी, जिसमें छात्र प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ 50 से ज्यादा पुलिस और पैरामिलिट्री कर्मी घायल हो गए थे।
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