राष्ट्रीय समाचार
पुडुचेरी में भी एचएमपीवी की दस्तक, 5 वर्षीय बच्ची संक्रमित
नई दिल्ली, 11 जनवरी। पुडुचेरी में एचएमपीवी ने दस्तक दे दी है। 5 साल की बच्ची संक्रमित पाई गई है जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है।
5 वर्षीय बच्ची को बुखार के लक्षणों के साथ जिपमेर अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिपमेर अस्पताल प्रशासन ने बताया, संदेह के आधार पर डॉक्टरों ने बच्ची का एचएमपीवी परीक्षण किया और बच्ची के एचएमपीवी से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक बच्ची स्वस्थ है।
गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही लोगों को एचएमपीवी वायरस को लेकर घबराने की सलाह नहीं दी थी।
भारत के विभिन्न राज्यों में इस वायरस से संक्रमित होने की रफ्तार धीमी है पर कई मामले सामने आने लगे हैं। एचएमपीवी अन्य वायरस की तरह ही है जो सांस संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है, लेकिन भारत में नागपुर, बेंगलुरू, अहमदाबाद, चेन्नई और सलेम में इस वायरस के मामले सामने आए हैं।
सरकार ने भी इसके लिए कमर कस ली है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार ने इस वायरस को लेकर सभी राज्यों से सावधानी और सतर्कता बरतने को कहा है। इस वायरस को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों ने अलर्ट जारी किया है।
देश में शुक्रवार (10 जनवरी) तक कर्नाटक (2), गुजरात (1) और तमिलनाडु (2) समेत एचएमपीवी के सात मामले सामने आए हैं। सभी मामले 3 महीने से 13 साल की उम्र के बच्चों में पाए गए।
भारत में एचएमपीवी के मामले सबसे पहले कर्नाटक में मिले थे। इसके बाद से भारत में अहमदाबाद, चेन्नई और सलेम में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस के मामले सामने आए हैं।
मौसमी वायरस कहे जाने वाले एचएमपीवी को लेकर पूरी दुनिया अलर्ट मोड में है। हालांकि कहा जा रहा है यह सिर्फ एक मौसमी वायरस है। चीन में इस वायरस के कई केस आने के चलते भारत में स्वास्थ्य मंत्रालय को गाइडलाइंस तक जारी करनी पड़ी हैं।
यह वायरस हल्के से लेकर गंभीर लक्षण पैदा कर सकता है।
राष्ट्रीय समाचार
यूपीएससी भर्ती 2026: जूनियर टेक्निकल ऑफिसर सहित कई पदों पर आवेदन शुरू, जानें योग्यता और सैलरी

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने विभिन्न विभागों और मंत्रालयों में अलग-अलग कुल 13 पदों पर नियुक्ति के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी कर आवेदन मांगे हैं।
यूपीएससी की ओर से जारी 13 रिक्तियों में नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट, कानपुर (खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय) में जूनियर टेक्निकल ऑफिसर (शुगर टेक्नोलॉजी) का 1; विधि और न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग में असिस्टेंट लेजिस्लेटिव काउंसिल (भारतीय कानूनी सेवा का ग्रेड IV) के 8; दिल्ली सरकार के लैंड एंड बिल्डिंग डिपार्टमेंट में लॉ ऑफिसर के 3; और नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) में स्पेशलिस्ट ग्रेड-II (जूनियर स्केल)-कार्डियोलॉजी का 1 पद शामिल है।
इन सभी पोस्ट के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 26 सितंबर से शुरू हो गई। अप्लाई करने की अंतिम तिथि 16 अक्टूबर तक तय की गई है। ऐसे में जो पात्र और इच्छुक उम्मीदवार इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरना चाहते हैं, वे आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि की शाम 6 बजे तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से पद से जूनियर टेक्निकल ऑफिसर के लिए साइंस या इंजीनियरिंग में डिग्री, असिस्टेंट लेजिस्लेटिव काउंसिल के लिए कानून में डिग्री और स्पेशलिस्ट ग्रेड-II (जूनियर स्केल)-कार्डियोलॉजी के लिए कार्डियोलॉजी में पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री (डीएम कार्डियोलॉजी) या इसके समकक्ष योग्यता होनी चाहिए। इसके अलावा, कैंडिडेट्स के पास पद के अनुसार प्रासंगिक क्षेत्र में निर्धारित 2 से 7 वर्षों का अनुभव होना भी अनिवार्य है।
आवेदकों की अधिकतम आयु पद के अनुसार 30 से 48 वर्ष के बीच तय की गई है, जिसकी गणना आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
योग्य अभ्यर्थियों का चयन आवेदनों की स्क्रीनिंग, भर्ती परीक्षा (आरटी)/संयुक्त भर्ती परीक्षा (सीआरटी) और साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी पोस्ट के अनुसार वेतन स्तर (7वां सीपीसी) के तहत लेवल 7 से 11 के बीच प्रतिमाह होगी। इसके अलावा कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे।
आवेदन पत्र भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो जनरल/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस के लिए 25 रुपए तय किया गया है। वहीं, महिलाएं/एससी/एसटी/बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को रजिस्ट्रेशन फीस में छूट दी गई है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत का बॉन्ड बाजार मजबूत, आर्थिक बुनियाद के दम पर शेयर बाजार में फिर से लौटेगी तेजी: आरबीआई डिप्टी गवर्नर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा है कि हाल के वर्षों में भारत के बॉन्ड बाजार का प्रदर्शन न केवल अपने पिछले रिकॉर्ड की तुलना में बेहतर रहा है, बल्कि दुनिया के अधिकांश देशों की तुलना में भी अधिक मजबूत रहा है। उनका कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद अंततः शेयर बाजार में भी दिखाई देगी और भारतीय इक्विटी दोबारा निवेशकों के लिए आकर्षक बनेगी।
आरबीआई के सितंबर बुलेटिन में पूनम गुप्ता ने कहा कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड 22 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बावजूद भारतीय बॉन्ड बाजार ने मजबूती दिखाई है। उन्होंने इसके पीछे केंद्र सरकार की राजकोषीय अनुशासन के प्रति प्रतिबद्धता और आने वाले वर्षों में उच्च आर्थिक विकास दर की संभावनाओं को प्रमुख कारण बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार की वित्तीय स्थिति में सुधार और भविष्य में बेहतर राजकोषीय परिणामों की उम्मीदों ने भारतीय बॉन्ड बाजार को मजबूती प्रदान की है। इसके अलावा मौद्रिक नीति की विश्वसनीयता और मुद्रास्फीति से जुड़े संरचनात्मक दबावों में आई कमी ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।
पूनम गुप्ता ने उल्लेख किया कि भारत के सुव्यवस्थित बॉन्ड बाजार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हुई है। उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित पत्रिका द इकोनॉमिस्ट ने टिप्पणी की थी कि भारत का अनुभव यह दिखाता है कि सार्वजनिक वित्त को मजबूत रखना और केंद्रीय बैंकरों को स्वतंत्र रूप से महंगाई नियंत्रित करने देना कितना महत्वपूर्ण है।
हालांकि उन्होंने कहा कि भारतीय शेयर बाजार ने अभी तक उसी स्तर का आशावाद नहीं दिखाया है, जैसा बॉन्ड बाजार में देखने को मिला है।
उन्होंने बताया कि इसका एक कारण यह हो सकता है कि कुछ अन्य अर्थव्यवस्थाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित विकास की कहानी फिलहाल अधिक आकर्षक दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि भारतीय शेयर बाजार ने जून 2022 से सितंबर 2024 के बीच असाधारण प्रदर्शन किया था, लेकिन वर्तमान में कुछ अन्य देशों के बाजार उस तरह की तेजी का अनुभव कर रहे हैं। इसके बावजूद उनका मानना है कि आखिरकार वास्तविक अर्थव्यवस्था की मजबूती अपना प्रभाव दिखाएगी और भारतीय शेयर फिर अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक नजर आएंगे।
गुप्ता ने भारत के भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स – बीओपी) और रुपए की दिशा पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या भुगतान संतुलन और विनिमय दर देश की वास्तविक आर्थिक ताकत को सही ढंग से दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत पारंपरिक रूप से सीमित चालू खाता घाटा (करंट अकाउंट डेफिसिट – सीएडी) और अपेक्षाकृत बड़े पूंजी खाते के अधिशेष की स्थिति में रहा है, जिसके चलते देश का भुगतान संतुलन सकारात्मक बना रहता है। समय के साथ चालू खाता घाटा जीडीपी के अनुपात में घटा है, जिससे बाहरी क्षेत्र की मजबूती बढ़ी है।
आरबीआई डिप्टी गवर्नर ने कहा, “भारत का चालू खाता घाटा उन स्तरों से काफी नीचे है जिन्हें आमतौर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए सुरक्षित माना जाता है। शुद्ध सेवा निर्यात और प्रवासी भारतीयों से मिलने वाला रेमिटेंस भारत की सबसे बड़ी संरचनात्मक ताकतें बनी हुई हैं।”
उन्होंने कहा कि सेवाओं से होने वाली आय और रेमिटेंस इतने मजबूत और स्थिर हैं कि वे वस्तुओं के व्यापार घाटे की भरपाई करने में सक्षम हैं। यही वजह है कि भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी के 1 प्रतिशत से नीचे नियंत्रित रहने में सफल रहा है।
राजनीति
कांग्रेस-सपा में टकराव बढ़ा, इकरा हसन के बयान पर इमरान बोले- ‘न करें गठबंधन, हम क्या भीख मांग रहे’

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच घमासान है। इसी कड़ी में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सपा सांसद इकरा हसन के बयान ‘बिना गठबंधन कांग्रेस कुछ नहीं पाएगी’ पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि अगर गठबंधन नहीं करना है तो न करें। हम अपने काम पर लगे हुए हैं।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में सांसद इमरान मसूद ने कहा, “न करें गठबंधन, कौन कह रहा है? हम क्या किसी से भीख मांग रहे हैं? जिसको जो करना है, वह करे। जब बारात चढ़ती है, तो बहुत सारे ढोल बजाने वाले भी होते हैं, नाचने-गाने वाले भी होते हैं। इन नाचने-गाने वालों को नाचने-गाने दीजिए। हम अपने काम पर लगे हुए हैं।”
सपा विधायक शिवपाल यादव के बयान पर इमरान ने कहा, “यह उनकी सोच हो सकती है, कांग्रेस अपने काम पर लगी हुई है। शिवपाल यादव जो बात कह रहे हैं, वह पार्टी के अंदर ही अप्रासंगिक हो गए हैं। वह अपने नेता से यह बात अगर वह कहेंगे, तब तो उसके ऊपर कोई मायने होंगे, इसके अलावा कोई मायने नहीं हैं।”
कांग्रेस सांसद ने कहा कि बहुत सारे लोग बहुत सारी बातें बोलते रहते हैं, इससे फर्क नहीं पड़ता है। हमारे यहां भी बहुत सारे लोग इधर-उधर की बातें करते रहते हैं, तो जब बारात चढ़ती है ना, बहुत सारे ढोल बजाने वाले आते हैं, तो ढोल बजाने वालों से कोई फर्क नहीं पड़ता है।
इससे पहले, शिवपाल सिंह यादव ने एक बयान में कहा था कि कांग्रेस को वोट नहीं मिलना है।
उधर, समाजवादी पार्टी के सांसद रमाशंकर राजभर ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के कुछ नेताओं के बयानों से ‘इंडिया गठबंधन’ आहत होता है। “कांग्रेस के कुछ नेता जो ऐसे बयान देते हैं, जिससे इंडिया गठबंधन आहत होता है और भारतीय जनता पार्टी को लाभ देने वाले बयान कांग्रेस की ओर से आते रहे हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पार्टी का गठबंधन राहुल गांधी और अखिलेश यादव तय करेंगे, लेकिन जो कांग्रेस पार्टी के नेताओं के बेतुके बयान आ रहे हैं, यह केवल दबाव बनाने के लिए आते हैं। कांग्रेस यूपी-बिहार में कितना पानी में है, यह जगजाहिर है।”
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