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ईयर एंडर 2024 : शेयर बाजार से कंपनियों ने जमकर जुटाया फंड, बने कई नए रिकॉर्ड
मुंबई, 24 दिसंबर। भारतीय शेयर बाजार में तेजी के बीच कॉरपोरेट्स ने 2024 में आईपीओ, एफपीओ, क्यूआईपी और राइट्स इश्यू के जरिए निवेशकों से बंपर फंड जुटाया है और पिछले सभी रिकॉर्ड को तोड़ दिया है।
2024 में घरेलू कंपनियों ने 90 इनिशियल पब्लिक ऑफर (आईपीओ) के जरिए कुल 1.64 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। इस दौरान 1.39 लाख करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री संस्थागत निवेशकों को की गई है। यह पब्लिक इश्यू के जरिए पूंजी जुटाने का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
इससे पहले 2021 में आईपीओ ने जरिए कंपनियों ने सबसे अधिक 1.18 लाख करोड़ रुपये की राशि जुटाई थी। इस दौरान कंपनियों द्वारा संस्थागत निवेशकों को 41,997 करोड़ रुपये के शेयरों की बिक्री की गई थी।
इस साल अब तक 20 कंपनियों ने राइट्स इश्यू के जरिए करीब 18,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं। पिछले साल यह आंकड़ा 7,266 करोड़ रुपये और 2022 में यह 3,884 करोड़ रुपये था।
आईपीओ मार्केट में तेजी का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि 2024 के आखिरी महीने में करीब 15 कंपनियां करीब 25,500 करोड़ रुपये जुटाने जा रही हैं।
2024 का सबसे बड़ा आईपीओ हुंडई मोटर इंडिया द्वारा पेश किया गया। इसका साइज 27,870 करोड़ रुपये था। इससे पहले 2022 में आया एलआईसी का 21,008 करोड़ रुपये का पब्लिक इश्यू, देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ था।
2024 में सबसे ज्यादा 320 गुना का सब्सक्रिप्शन विभोर स्टील ट्यूब के आईपीओ को मिला है। इसके अलावा केआरएन हीट एक्सचेंजर एंड रेफ्रिजरेशन, मनबा फाइनेंस और गाला प्रिसिजन इंजीनियरिंग जैसे आईपीओ को 200 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिला।
क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) के जरिए इस साल कंपनियों ने 1.4 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं, यह 2020 के बाद अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
इस साल वेदांता और जोमैटो द्वारा प्रत्येक ने क्यूआईपी के जरिए 8,500 करोड़ रुपये की राशि जुटाई है। इसके अलावा अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस और वरुण बेवरेज ने क्रमश: 8,373 करोड़ रुपये और 7,500 करोड़ रुपये की राशि जुटाई है।
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने इस साल प्राथमिक बाजारों में 14 अरब डॉलर निवेश किए हैं, जो कि 2021 के पिछले रिकॉर्ड से अधिक है।
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भारतीय शेयर बाजार लगातार चौथे सत्र में लाल निशान में खुला, मेटल इंडेक्स में दिखा सबसे ज्यादा दबाव

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मुंबई, 8 जनवरी: वैश्विक बाजार के मिले-जुले संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख बेंचमार्क गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में लाल निशान में खुले। इस दौरान निफ्टी के अधिकतर इंडेक्स गिरावट के साथ ट्रेड करते नजर आए।
शुरुआती कारोबार में खबर लिखे जाने तक 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 71.73 अंक या 0.08 प्रतिशत गिरकर 84,889 के लेवल कारोबार कर रहा था, तो वहीं निफ्टी 26.95 अंक या 0.10 प्रतिशत गिरकर 26,114 पर था।
इस दौरान व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.1 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में हल्की 0.02 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली।
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी मेटल इंडेक्स सबसे ज्यादा दबाव में रहा और इसमें 1.16 प्रतिशत की गिरावट आई, निफ्टी आईटी और पीएसयू बैंक इंडेक्स में 0.5-0.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, तो वहीं निफ्टी फार्मा इंडेक्स 0.25 प्रतिशत गिर गया।
वैश्विक स्तर पर सभी की निगाहें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वेनेजुएला से जुड़ी गतिविधियों पर बनी हुई है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है।
सेंसेक्स पैक में एशियन पेंट्स, टीसीएस, कोटक बैंक, मारुति सुजुकी, अल्ट्राटेक सीमेंट, सन फार्मा, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एमएंडएम और बजाज फिनसर्व में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली, जिनमें 1.2 फीसदी तक की कमजोरी दर्ज की गई।
वहीं दूसरी ओर, बीईएल, ट्रेंट, टाइटन कंपनी, अदाणी पोर्ट्स, इटरनल, एचयूएल, एचसीएल टेक, इंडिगो और आईसीआईसीआई बैंक टॉप गेनर्स वाले शेयरों में शामिल रहे।
चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह ने कहा कि कमजोर वैश्विक संकेतों से मिल रहे सतर्क संकेतों के चलते बाजार पर दबाव बने रहने की संभावना है। एशियाई बाजारों में कमजोर माहौल और हालिया कंसोलिडेशन के बाद मुनाफावसूली से शुरुआती कारोबार पर असर पड़ सकता है, हालांकि अहम सपोर्ट स्तरों के पास चुनिंदा खरीदारी देखने को मिल सकती है।
एक्सपर्ट ने कहा कि टेक्निकल नजरिए से निफ्टी 50 अभी भी एक बड़े कंसोलिडेशन दायरे में कारोबार कर रहा है, लेकिन निकट अवधि में रुख थोड़ा सतर्क दिखाई देता है। निफ्टी के लिए इमीडिएट सपोर्ट 26,000 से 26,050 के बीच है, जबकि 26,000 के पास मजबूत आधार माना जा रहा है। ऊपर की ओर 26,250 से 26,300 के बीच रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है।
एक्सपर्ट ने आगे कहा कि अगर निफ्टी सपोर्ट के नीचे फिसलता है तो आगे और दबाव बन सकता है। वहीं रेजिस्टेंस के ऊपर मजबूती से टिकने पर तेजी की वापसी हो सकती है। ट्रेडर्स को शुरुआती उतार-चढ़ाव में अग्रेसिव ट्रेड्स से बचने की सलाह दी जाती है।
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सेंसेक्स, निफ्टी हल्की गिरावट के साथ बंद, मिडकैप शेयरों में रही तेजी

मुंबई, 7 जनवरी: भारतीय शेयर बाजार के मुख्य सूचकांक बुधवार के कारोबारी सत्र में हल्की गिरावट के साथ बंद हुए। दिन के अंत में सेंसेक्स 102.20 अंक या 0.12 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 84,961.14 और निफ्टी 37.95 अंक या 0.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 26,140.75 पर था।
लार्जकैप में तो गिरावट रही, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 276.15 अंक या 0.45 प्रतिशत की तेजी के साथ 61,424.70 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 70.65 अंक या 0.40 प्रतिशत की मजबूती के साथ 17,958.50 पर बंद हुआ।
सेक्टोरल आधार पर निफ्टी आईटी (1.87 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.69 प्रतिशत), निफ्टी फार्मा (0.69 प्रतिशत), निफ्टी इंडिया डिफेंस ( 0.65 प्रतिशत) और निफ्टी मीडिया (0.07 प्रतिशत) की तेजी के साथ बंद हुआ।
दूसरी तरफ निफ्टी ऑटो (0.80 प्रतिशत), निफ्टी ऑयल एंड गैस (0.66 प्रतिशत), निफ्टी इन्फ्रा (0.50 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (0.33 प्रतिशत) और निफ्टी कमोडिटीज (0.31 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ बंद हुआ।
सेंसेक्स पैक में टाइटन, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, सन फार्मा, टीसीएस, आईसीआईसीआई बैंक, इटरनल, एलएंडटी, बीईएल और ट्रेंट गेनर्स थे। मारुति सुजुकी, पावर ग्रिड, एचडीएफसी बैंक, एशियन पेंट्स, टाटा स्टील, एचयूएल, एसबीआई, भारती एयरटेल, एमएंडएम, बजाज फाइनेंस, इंडिगो और बजाज फिनसर्व लूजर्स थे।
जियोजित इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा, “2026 की तीसरी तिमाही के नतीजों और अमेरिका के अहम रोजगार आंकड़ों से पहले जोखिम से बचने के संकेतों के चलते घरेलू बाजार का माहौल सतर्क बना हुआ है। तिमाही आधार पर कंपनियों के मुनाफे में सुधार की उम्मीद है, लेकिन वैश्विक व्यापार अनिश्चितता के बीच विदेशी निवेशक जोखिम से बचने की कोशिश कर रहे हैं। ऑटोमोबाइल और वित्तीय क्षेत्र में मुनाफावसूली से सूचकांकों पर दबाव बना हुआ है। हालांकि आईटी, फार्मा और मिड-कैप शेयरों में चुनिंदा खरीदारी से कुछ हद तक राहत मिली है।”
उन्होंने आगे कहा, “वैश्विक अस्थिरता के बीच चीन द्वारा दुर्लभ धातुओं के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों से आपूर्ति श्रृंखला के जोखिम बढ़ गए हैं। इससे शेयर बाजार के सीमित दायरे में रहने की संभावना है।”
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भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे सत्र में लाल निशान में खुला, सेंसेक्स करीब 200 अंक फिसला

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मुंबई, 7 जनवरी: वैश्विक बाजार के मिले-जुले संकेतों के बीच भारती शेयर बाजार के प्रमुख बेंचमार्क बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ खुले।
शुरुआती कारोबार में खबर लिखे जाने तक 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 199 अंक या 0.23 प्रतिशत गिरकर 84,864 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 54 अंक या 0.2 प्रतिशत गिरकर 26,125 पर था।
व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.28 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।
वहीं सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जिसमें 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई, इसके बाद निफ्टी ऑटो इंडेक्स में 0.3 प्रतिशत की गिरावट और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.2 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।
इसके अलावा, निफ्टी आईटी में 1 प्रतिशत, निफ्टी मेटल में 0.7 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी में 0.16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 18 शेयर लाल निशान में ट्रेड करते नजर आए। इनमें एचडीएफसी बैंक में सबसे ज्यादा 1.3 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसके बाद बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, मारुति सुजुकी, एचयूएल, एनटीपीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, सन फार्मा, एलएंडटी और एमएंडएम प्रमुख थे।
इसके विपरीत, टाइटन कंपनी में सबसे ज्यादा 3.7 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके बाद एचसीएल टेक, इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा, इटरनल और टाटा स्टील में बढ़त देखने को मिली।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा कि हाल के दिनों में शेयर बाजार की चाल में कोई साफ रुझान या दिशा नजर नहीं आ रही है। कुछ गिने-चुने बड़े शेयरों में हो रही गतिविधियां पूरे बाजार को जरूरत से ज्यादा प्रभावित कर रही हैं।
उन्होंने कि उदाहरण के तौर पर, कल संस्थागत निवेशकों की खरीदारी सकारात्मक रहने के बावजूद निफ्टी 71 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। इसकी मुख्य वजह सिर्फ दो शेयरों-रिलायंस और एचडीएफसी बैंक-में आई तेज गिरावट रही। इन दोनों शेयरों में डेरिवेटिव और कैश मार्केट में भारी वॉल्यूम देखने को मिला, जो सेटलमेंट डे से जुड़ी गतिविधियों का संकेत देता है। यानी इन शेयरों में आई तेज गिरावट का उनके मूल कारोबार (फंडामेंटल्स) से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह तकनीकी कारणों से हुई है।
एक्सपर्ट ने कहा कि आगे की बात करें तो बाजार में घटनाओं और खबरों के कारण तेज उतार-चढ़ाव (हाई वोलैटिलिटी) की संभावना बनी हुई है। डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट और उनके फैसले कभी भी बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, एक अहम घटनाक्रम जिस पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए, वह है ट्रंप के टैरिफ से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट का संभावित फैसला, जो जल्द आ सकता है। अगर यह फैसला रेसिप्रोकल टैरिफ के खिलाफ जाता है, तो शेयर बाजारों में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
पिछले कारोबारी सत्र यानी मंगलवार को भी भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था। दिन के अंत में सेंसेक्स 376.28 अंक या 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 85,063.34 पर और निफ्टी 71.60 अंक या 0.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 26, 178.70 पर था।
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