महाराष्ट्र
मुंबई: संभाजी ब्रिगेड द्वारा यूबीटी शिवसेना की कुर्ला उम्मीदवार, पूर्व नगर पार्षद प्रवीण मोराजकर का विरोध करने पर विवाद खड़ा हो गया।
मुंबई में राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है, क्योंकि संभाजी ब्रिगेड ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट द्वारा कुर्ला निर्वाचन क्षेत्र के लिए पूर्व नगर पार्षद प्रवीण मोराजकर के नाम पर विचार किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है।
प्रवीण मोराजकर के खिलाफ संभाजी ब्रिगेड द्वारा लगाए गए आरोप
ब्रिगेड ने मोराजकर पर मराठा समुदाय के सदस्यों के खिलाफ निराधार शिकायतें दर्ज करने के लिए अत्याचार अधिनियम का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है, जिसके चलते उन्होंने औपचारिक रूप से शिवसेना नेतृत्व से उनकी उम्मीदवारी पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
संभाजी ब्रिगेड के मुंबई चैप्टर के अध्यक्ष ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित किया
उद्धव बालासाहेब ठाकरे को लिखे पत्र में संभाजी ब्रिगेड के मुंबई चैप्टर के अध्यक्ष ने मामले की गंभीरता को रेखांकित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने कार्यकाल के दौरान, मोराजकर ने मराठा समुदाय के 11 से अधिक व्यक्तियों पर अत्याचार का झूठा आरोप लगाया, जिसका उद्देश्य उन्हें परेशान करना और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना था।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, जिसका उद्देश्य हाशिए पर पड़े समुदायों की सुरक्षा करना है, इस बहस के केंद्र में है। संभाजी ब्रिगेड का दावा है कि मोराजकर ने मराठा व्यक्तियों को गलत तरीके से फंसाने के लिए इस कानून का दुरुपयोग किया है, जिससे समुदाय के भीतर काफी तनाव पैदा हो गया है।
ब्रिगेड ने शिवसेना (यूबीटी) से मोराजकर को नामित करने की योजना वापस लेने का आह्वान किया
इन आरोपों के मद्देनजर, ब्रिगेड ने शिवसेना (यूबीटी) से मोराजकर को नामित करने की किसी भी योजना को वापस लेने का आह्वान किया है, यह तर्क देते हुए कि एक उम्मीदवार जिस पर एक विशिष्ट समूह के खिलाफ कानूनी सुरक्षा का हथियार बनाने का आरोप है, उसे चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्हें डर है कि उनका समर्थन करने से मराठा समुदाय और भी अलग-थलग पड़ सकता है, जिसने सुरक्षात्मक कानूनों के दुरुपयोग पर चिंता जताई है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब महाराष्ट्र में आगामी चुनाव होने वाले हैं, जिससे कमजोर आबादी की रक्षा के लिए बनाए गए कानूनों के दुरुपयोग और सामुदायिक संबंधों पर इसके प्रभाव के बारे में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। राज्य में एक प्रमुख जनसांख्यिकी समुदाय, मराठा समुदाय मान्यता और अधिकारों की वकालत करता रहा है, और मोराजकर के खिलाफ आरोपों ने इन तनावों को और बढ़ा दिया है।
फिलहाल, शिवसेना (यूबीटी) ने संभाजी ब्रिगेड के पत्र या मोराजकर के खिलाफ आरोपों पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
महाराष्ट्र
घाटकोपर रोड चौड़ीकरण से प्रभावित 28 स्ट्रक्चर गिराए गए

मुंबई ; घाटकोपर (वेस्ट) में झुनझुनवाला कॉलेज और अंधेरी-घाटकोपर लिंक रोड के बीच सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित 28 स्ट्रक्चर को गिराने का अभियान कल (7 अक्टूबर, 2026) मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के ‘एन’ वार्ड (एन वार्ड) ऑफिस द्वारा चलाया गया। इस अभियान का नेतृत्व असिस्टेंट कमिश्नर (‘एन’ वार्ड) जयदीप मोरे ने किया। ऑपरेशन के दौरान म्युनिसिपल अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पर्याप्त पुलिस सुरक्षा भी तैनात की गई थी।
महाराष्ट्र
नासिक-अहमदाबाद मार्ग पर बस दुर्घटनाग्रस्त; 2 यात्रियों की मौत और 6 घायल

महाराष्ट्र के नासिक जिले के पेठ तालुका में करंजाली के निकट सावलघाट क्षेत्र में नासिक-अहमदाबाद मार्ग पर एक बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में दो यात्रियों की मौत हो गई जबकि छह यात्री घायल हुए हैं।
जिला नियंत्रण कक्ष को दुर्घटना की सूचना 6 अक्टूबर की रात 11 बजे प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल इमरजेंसी सेवाओं ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घटना के समन्वय के लिए दो पुलिस निरीक्षक और एक अनुविभागीय पुलिस अधिकारी तत्काल घटनास्थल की ओर रवाना हुए। बस में सवार सभी यात्रियों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया और घायलों को अलग-अलग एम्बुलेंस के माध्यम से उपचार के लिए नाशिक लाया गया।
रात 00:30 बजे से 02:15 बजे के बीच नासिक सिविल अस्पताल में आठ लोगों को लाया गया। इनमें सात व्यक्ति जीवित थे जबकि एक व्यक्ति को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया। इसके अलावा दुर्घटना में एक अन्य व्यक्ति की भी मौत हुई है। वर्तमान में दो घायल मरीज सिविल अस्पताल में भर्ती हैं जबकि अन्य घायलों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें अस्पताल में भर्ती किए बिना छुट्टी दे दी गई।
हादसे में घायल प्रमिला राउत (53) को गंभीर चोट के कारण सिविल अस्पताल के ई-वार्ड में भर्ती किया गया है। वहीं, बाल विमल जगदीश (65) के बाएं हाथ की ह्यूमरस हड्डी में फ्रैक्चर होने के कारण उन्हें एमओडब्ल्यू वार्ड में भर्ती किया गया है। अन्य घायलों में यश देसाई, आरती देसाई, नयन वासोने तथा स्वाति सुरेश बडाणे शामिल हैं।
दुर्घटना में राहुल ओझा और महेंद्र पाल (48) की मौत हुई है। महेंद्र पाल को सिविल अस्पताल, नासिक में मृत अवस्था में लाया गया था। मृतकों के परिजनों से संपर्क कर आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पेठ तालुका के सावलघाट क्षेत्र में हादसे के समय बादल और कोहरे की स्थिति के कारण दृश्यता काफी कम थी। प्रशासन की प्राथमिक जांच में कम दृश्यता को दुर्घटना का प्रमुख कारण माना गया है। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों को लेकर संबंधित एजेंसियों की जांच जारी है।
महाराष्ट्र
‘विद्यार्थियों की मांग नहीं मानी तो पूरा महाराष्ट्र बंद करेंगे,’ मनोज जरांगे पाटिल की सरकार को चेतावनी

महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर पुणे में छात्रों का एक बड़ा आंदोलन चल रहा है। इस आंदोलन का जमीनी नेतृत्व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार कर रहे हैं। इस बीच मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरंगे पाटिल भी आंदोलन में शामिल हुए। उन्होंने छात्रों से बातचीत की और उनकी मांगों को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
मनोज जरांगे पाटिल ने कहा, “बच्चों, अगर इन लोगों ने आपकी बात नहीं सुनी तो यहां बैठे सभी नेताओं से भी कहता हूं और आपसे भी कहता हूं, आपके लिए पूरा महाराष्ट्र बंद कर देंगे। इन्हें क्या हो गया है, इन्हें घमंड हो गया है।”
उन्होंने छात्रों से कहा, “आपके साथ हुआ अन्याय जाति से परे है। अगर मैं जातिवादी होता तो यहां नहीं आता। यहां महाराष्ट्र के किसानों के बच्चे बैठे हैं और मैं किसान का बेटा बनकर आया हूं, जाति के नाम पर नहीं।”
जरांगे पाटिल ने कहा कि आरक्षण की मांग करने का मतलब यह नहीं है कि वे छात्रों को उनके हाल पर छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि मेहनतकश माता-पिता की उम्मीद है कि उनके बेटे और बेटियां भी अधिकारी बनें और सरकार को इस भावना को समझना चाहिए।
छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने को राजनीति बताने पर भी जरांगे पाटिल ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि क्या सरकार चाहती है कि छात्रों के पीछे कोई खड़ा न हो और उन्हें कोई ताकत न मिले।
उन्होंने पूछा, “रोहित दादा राजनीतिक नेतृत्व करते हैं, इस पर किसी को संदेह है तो राज्य सरकार मुझे इसका जवाब दे। इससे पहले एमपीएससी में दो साल की अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन हुआ था। क्या वह राजनीतिक था? फिर यह आंदोलन राजनीतिक कैसे हुआ? आज बच्चे अनशन पर बैठे हैं। उनकी जान का क्या? उनके सवालों का क्या? आप हर बात को राजनीतिक रंग क्यों देंगे?”
पत्रकारों से बातचीत में जरांगे पाटिल ने कहा कि छात्रों को न्याय मिलना चाहिए और सीएम फडणवीस को जवाब देना चाहिए। गृहमंत्री के तौर पर उन्हें विद्यार्थियों का दिल जीतने का काम करना चाहिए।
छात्रों के बीच तीन गुटों में आंदोलन होने के सवाल पर उन्होंने कहा, “न कांग्रेस आपकी है, न राष्ट्रवादी आपकी है, न भाजपा आपकी है, न शिवसेना आपकी है, न महायुति आपकी है, न महाविकास आघाड़ी आपकी है। हमारे असली हीरो हमारे माता-पिता हैं। वे मेहनत करके हमें पढ़ाते हैं।”
उन्होंने कहा कि आंदोलन तीन जगह हो या एक जगह, न्याय छात्रों को ही चाहिए। मुख्यमंत्री को सभी आंदोलनों पर तत्काल ध्यान देकर उनकी मांगें पूरी करनी चाहिए और उनका विश्वास जीतना चाहिए। उन्होंने छात्रों से एकजुट रहने की अपील भी की।
सरकार के मंत्री और विधायक एक आंदोलन की ओर जा रहे हैं जबकि दूसरे आंदोलन की ओर सरकार का प्रतिनिधिमंडल नहीं आया है, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार को सभी जगह जाना चाहिए और छात्रों की राय सुननी चाहिए।
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