महाराष्ट्र
ब्रेकिंग | ‘लड़कियों को उनकी मर्जी के मुताबिक काम करने दें’, सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के कॉलेज में हिजाब पर रोक लगाई
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मुंबई के एनजी आचार्य और डीके मराठे कॉलेज द्वारा लगाए गए हिजाब प्रतिबंध पर अंतरिम रोक लगाते हुए आदेश जारी किया है। यह फैसला कॉलेज के छात्रों द्वारा परिसर में हिजाब, टोपी और बैज पहनने पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान आया।
“ऐसा नियम न लागू करें”: सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आश्चर्य व्यक्त किया
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस संजीव खन्ना और संजय कुमार की पीठ ने कॉलेज के प्रतिबंध पर आश्चर्य व्यक्त किया, जस्टिस खन्ना ने सवाल किया कि अगर इरादा एक समान ड्रेस कोड लागू करने का था, तो कॉलेज ने तिलक और बिंदी जैसे धर्म के अन्य चिह्नों पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया।
लाइव लॉ के अनुसार, जस्टिस कुमार ने पूछा, “क्या आप कह सकते हैं कि तिलक लगाने वाले को अनुमति नहीं दी जाएगी? यह आपके निर्देशों का हिस्सा नहीं है?”
उन्होंने आगे पूछा, “यह क्या है? ऐसा नियम न लगाएं… यह क्या है? धर्म का खुलासा न करें?”
उन्होंने कॉलेज के तर्क की और जांच की, और पूछा, “क्या उनके नाम से धर्म का पता नहीं चलेगा? क्या आप उन्हें संख्याओं से पहचानने के लिए कहेंगे?” उन्होंने छात्रों को इस तरह के विभाजनकारी नियमों के बिना एक साथ अध्ययन करने की अनुमति देने के महत्व पर जोर दिया।
कॉलेज की स्वायत्तता बनाम छात्रों के अधिकार
कॉलेज का प्रतिनिधित्व करने वाली वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने तर्क दिया कि एक निजी संस्थान के रूप में, कॉलेज को अपने ड्रेस कोड को लागू करने की स्वायत्तता है। हालांकि, न्यायमूर्ति कुमार ने इस बात को चुनौती देते हुए कहा कि कॉलेज 2008 से इस तरह के प्रतिबंधों के बिना काम कर रहा है, और नए नियमों के समय और आवश्यकता पर सवाल उठाया।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध पर रोक लगाई, हिजाब, टोपी और बैज की अनुमति दी
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर सहमति जताई कि नकाब या बुर्का जैसे चेहरे को ढकने वाले घूंघट कक्षा में बातचीत में बाधा बन सकते हैं और इस तरह के परिधान पर प्रतिबंध को बरकरार रखा। हालांकि, इसने हिजाब, टोपी और बैज पर व्यापक प्रतिबंध पर रोक लगा दी, और छात्रों को अगले नोटिस तक परिसर में उन्हें पहनने की अनुमति दी।
पृष्ठभूमि: बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला
यह विवाद 1 मई को शुरू हुआ, जब एनजी आचार्य और डीके मराठे कॉलेज ने अपने आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप पर एक नोटिस जारी किया, जिसमें एक ड्रेस कोड की रूपरेखा दी गई थी, जिसमें कॉलेज परिसर में हिजाब, नकाब, बुर्का, टोपी, बैज और स्टोल पहनने पर प्रतिबंध लगाया गया था। इस निर्देश से प्रभावित छात्रों ने शुरू में कॉलेज प्रबंधन और प्रिंसिपल से संपर्क किया और हिजाब, नकाब और बुर्का पर प्रतिबंध हटाने का अनुरोध किया। उन्होंने अपने अनुरोध के कारण के रूप में कक्षा में अपनी पसंद, सम्मान और गोपनीयता के अधिकार का हवाला दिया।
हालांकि, जब उनके अनुरोधों को नजरअंदाज कर दिया गया, तो छात्रों ने मामले को उच्च अधिकारियों, मुंबई विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और कुलपति के साथ-साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तक बढ़ा दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप की मांग की कि बिना भेदभाव के शिक्षा प्रदान की जाए। उनके प्रयासों के बावजूद, उन्हें कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिसके कारण उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता अल्ताफ खान ने कुरान की आयतें प्रस्तुत कर तर्क दिया कि हिजाब पहनना इस्लाम का एक अनिवार्य अंग है। याचिका में कहा गया कि कॉलेज की कार्रवाई “मनमाना, अनुचित, कानून के विरुद्ध और विकृत” थी। दूसरी ओर, कॉलेज प्रबंधन ने प्रतिबंध का बचाव एक समान ड्रेस कोड लागू करने और अनुशासन बनाए रखने के उपाय के रूप में किया, मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भेदभाव करने के किसी भी इरादे से इनकार किया। कॉलेज का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील अनिल अंतुरकर ने तर्क दिया कि ड्रेस कोड सभी धर्मों और जातियों के छात्रों पर लागू होता है।
महाराष्ट्र
घाटकोपर रोड चौड़ीकरण से प्रभावित 28 स्ट्रक्चर गिराए गए

मुंबई ; घाटकोपर (वेस्ट) में झुनझुनवाला कॉलेज और अंधेरी-घाटकोपर लिंक रोड के बीच सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित 28 स्ट्रक्चर को गिराने का अभियान कल (7 अक्टूबर, 2026) मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के ‘एन’ वार्ड (एन वार्ड) ऑफिस द्वारा चलाया गया। इस अभियान का नेतृत्व असिस्टेंट कमिश्नर (‘एन’ वार्ड) जयदीप मोरे ने किया। ऑपरेशन के दौरान म्युनिसिपल अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पर्याप्त पुलिस सुरक्षा भी तैनात की गई थी।
महाराष्ट्र
नासिक-अहमदाबाद मार्ग पर बस दुर्घटनाग्रस्त; 2 यात्रियों की मौत और 6 घायल

महाराष्ट्र के नासिक जिले के पेठ तालुका में करंजाली के निकट सावलघाट क्षेत्र में नासिक-अहमदाबाद मार्ग पर एक बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में दो यात्रियों की मौत हो गई जबकि छह यात्री घायल हुए हैं।
जिला नियंत्रण कक्ष को दुर्घटना की सूचना 6 अक्टूबर की रात 11 बजे प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल इमरजेंसी सेवाओं ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घटना के समन्वय के लिए दो पुलिस निरीक्षक और एक अनुविभागीय पुलिस अधिकारी तत्काल घटनास्थल की ओर रवाना हुए। बस में सवार सभी यात्रियों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया और घायलों को अलग-अलग एम्बुलेंस के माध्यम से उपचार के लिए नाशिक लाया गया।
रात 00:30 बजे से 02:15 बजे के बीच नासिक सिविल अस्पताल में आठ लोगों को लाया गया। इनमें सात व्यक्ति जीवित थे जबकि एक व्यक्ति को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया। इसके अलावा दुर्घटना में एक अन्य व्यक्ति की भी मौत हुई है। वर्तमान में दो घायल मरीज सिविल अस्पताल में भर्ती हैं जबकि अन्य घायलों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें अस्पताल में भर्ती किए बिना छुट्टी दे दी गई।
हादसे में घायल प्रमिला राउत (53) को गंभीर चोट के कारण सिविल अस्पताल के ई-वार्ड में भर्ती किया गया है। वहीं, बाल विमल जगदीश (65) के बाएं हाथ की ह्यूमरस हड्डी में फ्रैक्चर होने के कारण उन्हें एमओडब्ल्यू वार्ड में भर्ती किया गया है। अन्य घायलों में यश देसाई, आरती देसाई, नयन वासोने तथा स्वाति सुरेश बडाणे शामिल हैं।
दुर्घटना में राहुल ओझा और महेंद्र पाल (48) की मौत हुई है। महेंद्र पाल को सिविल अस्पताल, नासिक में मृत अवस्था में लाया गया था। मृतकों के परिजनों से संपर्क कर आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पेठ तालुका के सावलघाट क्षेत्र में हादसे के समय बादल और कोहरे की स्थिति के कारण दृश्यता काफी कम थी। प्रशासन की प्राथमिक जांच में कम दृश्यता को दुर्घटना का प्रमुख कारण माना गया है। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों को लेकर संबंधित एजेंसियों की जांच जारी है।
महाराष्ट्र
‘विद्यार्थियों की मांग नहीं मानी तो पूरा महाराष्ट्र बंद करेंगे,’ मनोज जरांगे पाटिल की सरकार को चेतावनी

महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर पुणे में छात्रों का एक बड़ा आंदोलन चल रहा है। इस आंदोलन का जमीनी नेतृत्व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार कर रहे हैं। इस बीच मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरंगे पाटिल भी आंदोलन में शामिल हुए। उन्होंने छात्रों से बातचीत की और उनकी मांगों को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
मनोज जरांगे पाटिल ने कहा, “बच्चों, अगर इन लोगों ने आपकी बात नहीं सुनी तो यहां बैठे सभी नेताओं से भी कहता हूं और आपसे भी कहता हूं, आपके लिए पूरा महाराष्ट्र बंद कर देंगे। इन्हें क्या हो गया है, इन्हें घमंड हो गया है।”
उन्होंने छात्रों से कहा, “आपके साथ हुआ अन्याय जाति से परे है। अगर मैं जातिवादी होता तो यहां नहीं आता। यहां महाराष्ट्र के किसानों के बच्चे बैठे हैं और मैं किसान का बेटा बनकर आया हूं, जाति के नाम पर नहीं।”
जरांगे पाटिल ने कहा कि आरक्षण की मांग करने का मतलब यह नहीं है कि वे छात्रों को उनके हाल पर छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि मेहनतकश माता-पिता की उम्मीद है कि उनके बेटे और बेटियां भी अधिकारी बनें और सरकार को इस भावना को समझना चाहिए।
छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने को राजनीति बताने पर भी जरांगे पाटिल ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि क्या सरकार चाहती है कि छात्रों के पीछे कोई खड़ा न हो और उन्हें कोई ताकत न मिले।
उन्होंने पूछा, “रोहित दादा राजनीतिक नेतृत्व करते हैं, इस पर किसी को संदेह है तो राज्य सरकार मुझे इसका जवाब दे। इससे पहले एमपीएससी में दो साल की अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन हुआ था। क्या वह राजनीतिक था? फिर यह आंदोलन राजनीतिक कैसे हुआ? आज बच्चे अनशन पर बैठे हैं। उनकी जान का क्या? उनके सवालों का क्या? आप हर बात को राजनीतिक रंग क्यों देंगे?”
पत्रकारों से बातचीत में जरांगे पाटिल ने कहा कि छात्रों को न्याय मिलना चाहिए और सीएम फडणवीस को जवाब देना चाहिए। गृहमंत्री के तौर पर उन्हें विद्यार्थियों का दिल जीतने का काम करना चाहिए।
छात्रों के बीच तीन गुटों में आंदोलन होने के सवाल पर उन्होंने कहा, “न कांग्रेस आपकी है, न राष्ट्रवादी आपकी है, न भाजपा आपकी है, न शिवसेना आपकी है, न महायुति आपकी है, न महाविकास आघाड़ी आपकी है। हमारे असली हीरो हमारे माता-पिता हैं। वे मेहनत करके हमें पढ़ाते हैं।”
उन्होंने कहा कि आंदोलन तीन जगह हो या एक जगह, न्याय छात्रों को ही चाहिए। मुख्यमंत्री को सभी आंदोलनों पर तत्काल ध्यान देकर उनकी मांगें पूरी करनी चाहिए और उनका विश्वास जीतना चाहिए। उन्होंने छात्रों से एकजुट रहने की अपील भी की।
सरकार के मंत्री और विधायक एक आंदोलन की ओर जा रहे हैं जबकि दूसरे आंदोलन की ओर सरकार का प्रतिनिधिमंडल नहीं आया है, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार को सभी जगह जाना चाहिए और छात्रों की राय सुननी चाहिए।
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