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Monday,31-August-2026
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ईद अल-अधा: तिथि, समय, महत्व, और वह सब कुछ जो आपको जानना आवश्यक है

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ईद अल-अधा, जिसे “बकरीद” या “बलिदान का त्योहार” के रूप में भी जाना जाता है, एक महत्वपूर्ण इस्लामी अवकाश है जो इस्लामी चंद्र कैलेंडर के अंतिम महीने धू अल-हिज्जा के 10वें दिन पड़ता है। ईद अल-अधा की सटीक तारीख हर साल बदलती रहती है क्योंकि इस्लामी कैलेंडर चंद्र चक्र पर आधारित है, जो सौर वर्ष से थोड़ा छोटा होता है। यह मार्गदर्शिका ईद अल-अधा से जुड़ी तारीख, महत्व, इतिहास और परंपराओं के बारे में विस्तार से बताएगी।

ईद अल-अधा कब मनाया जाता है?

चूंकि इस्लामिक कैलेंडर चंद्रमा के चक्र का अनुसरण करता है, इसलिए ईद अल-अधा की तारीख साल-दर-साल बदलती रहती है। मुसलमान प्रत्येक चंद्र माह की शुरुआत अर्धचंद्र को देखकर निर्धारित करते हैं। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, ईद अल-अधा बारहवें और आखिरी महीने धू अल-हिज्जा के दसवें दिन मनाया जाता है। इसके बाद आने वाले तीन दिनों को तश्रीक दिन कहा जाता है, जिसके दौरान उत्सव पारंपरिक रूप से जारी रहते हैं।

ईद अल-अधा 2024 के लिए, उत्सव की तारीख 16 जून से 17 जून तक पड़ती है, जिसे भारत में सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता है। हालाँकि, सटीक तारीख की पुष्टि अर्धचंद्र के दर्शन के आधार पर समय के करीब की जाएगी।

ईद अल-अधा का महत्व: आस्था की परीक्षा

ईद अल-अधा इस्लाम में एक महत्वपूर्ण कहानी की याद दिलाता है जो विश्वास, आज्ञाकारिता और बलिदान के महत्व का उदाहरण देता है। इस्लामिक परंपरा के अनुसार, पैगंबर इब्राहिम (अब्राहम) को एक सपने में भगवान से एक आदेश मिला, जिसमें उन्हें अपने सबसे प्यारे बेटे इश्माएल (इश्माइल) की बलि देने का निर्देश दिया गया। इस कृत्य ने इब्राहिम की अटूट भक्ति और ईश्वर की इच्छा के प्रति समर्पित होने की इच्छा का परीक्षण किया।

पैगंबर इब्राहिम अंतिम बलिदान देने और ईश्वर की आज्ञा का पालन करने के लिए तैयार थे। हालाँकि, जैसे ही वह इसे अंजाम देने वाला था, भगवान ने इब्राहिम के अटूट विश्वास को पहचानने और उसकी सराहना करते हुए हस्तक्षेप किया। उसकी वफादारी के इनाम के रूप में, भगवान ने इश्माएल के स्थान पर बलि देने के लिए एक मेढ़ा प्रदान किया।

बलिदान की यह कहानी ईद अल-अधा के मूल में निहित है। यह अत्यधिक कठिनाई का सामना करने पर भी, ईश्वर की इच्छा के प्रति समर्पित होने के महत्व पर जोर देता है। अपने विश्वास और दूसरों की भलाई के लिए बलिदान देने की इच्छा इस छुट्टी का मुख्य विषय है।

ईद अल-अधा की परंपराएं और उत्सव

ईद अल-अधा कई परंपराओं और प्रथाओं द्वारा चिह्नित एक खुशी का अवसर है:

ईद की प्रार्थना: उत्सव की शुरुआत ईद अल-अधा की सुबह आयोजित एक विशेष ईद प्रार्थना से होती है। मुसलमान अपनी बेहतरीन पोशाक पहनते हैं और प्रार्थना करने और इमाम द्वारा दिए गए उपदेश को सुनने के लिए मस्जिदों या निर्दिष्ट प्रार्थना स्थलों पर इकट्ठा होते हैं।

बलिदान: ईद अल-अधा की एक प्रमुख परंपरा एक जानवर का बलिदान है, आमतौर पर भेड़, बकरी, गाय या ऊंट। बलि किए गए जानवर को फिर तीन भागों में विभाजित किया जाता है: एक तिहाई परिवार के लिए रखा जाता है, एक तिहाई रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ साझा किया जाता है, और शेष एक तिहाई गरीबों और जरूरतमंदों को वितरित किया जाता है।

साझा करना और दावतें: ईद अल-अधा परिवारों और समुदायों के एक साथ आने का समय है। ईद की नमाज़ और बलिदान के बाद, परिवार विस्तृत भोजन के लिए इकट्ठा होते हैं जिसमें बलिदान किए गए मांस से तैयार व्यंजन शामिल होते हैं। यह प्रियजनों के साथ साझा करने, हँसने और संबंधों को मजबूत करने का समय है।

शुभकामनाएँ और उपहार: मुसलमान पूरे दिन “ईद मुबारक” (धन्य ईद) की शुभकामनाएँ देते हैं। बच्चों को अक्सर पैसे या नए कपड़े उपहार में मिलते हैं।

प्रियजनों से मिलना: रिश्तेदारों, दोस्तों और विशेष रूप से बुजुर्गों या बीमारों से मिलना उत्सव का एक महत्वपूर्ण पहलू है। यह टूटे हुए रिश्तों को सुधारने, करुणा दिखाने और खुशी फैलाने का समय है।

बलिदान से परे: सामाजिक उत्तरदायित्व और दान

ईद अल-अधा का एक अनिवार्य पहलू सामाजिक जिम्मेदारी और दान पर जोर देना है। बलिदान किए गए मांस का एक हिस्सा कम भाग्यशाली लोगों को वितरित करना यह सुनिश्चित करता है कि समुदाय के सभी लोग उत्सव में भाग ले सकें। यह मुसलमानों के लिए एक अनुस्मारक है कि वे जरूरतमंद लोगों के साथ अपना आशीर्वाद साझा करें और करुणा और उदारता की भावना को बढ़ावा दें।

ईद अल-अधा की वैश्विक पहुंच

ईद अल-अधा एक विश्व स्तर पर मनाया जाने वाला अवकाश है जो दुनिया भर में इस्लाम के अनुयायियों द्वारा मनाया जाता है। हालाँकि परंपराएँ क्षेत्र के आधार पर थोड़ी भिन्न हो सकती हैं, बलिदान, साझाकरण और धर्मपरायणता के मूल विषय स्थिर रहते हैं। यह उत्सव भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर मुसलमानों को आस्था, कृतज्ञता और समुदाय के साझा अनुभव में एकजुट करता है।

ईद अल-अधा सिर्फ एक खुशी का उत्सव नहीं है; यह आस्था, त्याग और सामाजिक जिम्मेदारी की गहरी याद दिलाता है। यह इस्लाम का पालन करने वाले लोगों के लिए ईश्वर की आज्ञाकारिता के महत्व पर विचार करने, पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने और जरूरतमंद लोगों के साथ आशीर्वाद साझा करने का समय है।

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ओडिशा में अगले 48 घंटे बेहद भारी बारिश का अलर्ट, दिल्ली-एनसीआर में फिलहाल राहत

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भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने ओडिशा में अगले 48 घंटों के दौरान बेहद भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं, पश्चिम बंगाल और हिमालयी इलाकों में भी भारी से बहुत भारी बारिश होने के अनुमान हैं।

दूसरी ओर, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर के लोगों को फिलहाल भारी बारिश से राहत मिलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में अगले दो से तीन दिनों तक मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने की उम्मीद है और इस दौरान भारी बारिश की संभावनाएं नहीं है।

आईएमडी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार ने बातचीत में देश में मौजूदा मौसम की स्थिति को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस समय ओडिशा और पश्चिम बंगाल के ऊपर निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इस मौसम प्रणाली के प्रभाव से पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। खास तौर पर ओडिशा में अगले 48 घंटों के दौरान अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है, जिसे देखते हुए मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी भारत के अलावा हिमालयी क्षेत्रों में भी आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रह सकता है।

डॉ. नरेश कुमार ने विशेष रूप से उत्तराखंड का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमालयी इलाकों में अगले छह से सात दिनों तक अत्यधिक बारिश होने की संभावना है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में लंबे समय तक भारी बारिश होने से भूस्खलन, अचानक बाढ़ और सड़क संपर्क प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है।

वहीं, दिल्ली-एनसीआर के लिए फिलहाल स्थिति अपेक्षाकृत राहत भरी रहने की उम्मीद है। डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अगले दो से तीन दिनों तक भारी बारिश की संभावना नहीं है। ऐसे में दिल्ली और आसपास के इलाकों में मौसम ज्यादातर शुष्क रहने का अनुमान है।

डॉ. नरेश कुमार ने बताया कि ओडिशा में अगले 48 घंटों के दौरान भारी बारिश होने का अनुमान है।

पश्चिम बंगाल में भी मौसम की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। आईएमडी ने राज्य के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यहां भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण राज्य के कई जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

अलीपुर मौसम विभाग के मौसम विज्ञानी सौरिश बंद्योपाध्याय ने बताया कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है और इसके प्रभाव से कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि रविवार को बहुत ज्यादा बारिश होने की चेतावनी दी गई है।

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लाल किला ब्लास्ट केसः एनआईए की चार्जशीट पर कोर्ट ने लिया संज्ञान, 9 सितंबर को अगली सुनवाई

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दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट मामले में जांच अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गई है। स्पेशल एनआईए कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया है। कोर्ट के इस कदम के बाद मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी।

एनआईए ने अपनी जांच के आधार पर कुल 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में उमर उन नबी (मृतक), आमिर राशिद अली, जासिर बिलाल वानी, मुजम्मिल, आदिल अहमद राथर, मुफ्ती इरफान अहमद, शाहीन, सोयाब, बिलाल और यासिर अहमद डार समेत 13 आरोपी शामिल हैं। एजेंसी ने जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और जुटाए गए सबूतों के आधार पर आरोपियों की कथित भूमिका का विवरण चार्जशीट में दर्ज किया है।

जांच के मुताबिक, उमर-उन-नबी की ब्लास्ट में मौत हो चुकी है, जबकि मामले से जुड़ा एक अन्य आरोपी फरार बताया जा रहा है। एनआईए ने इस पूरे मामले की जांच दिल्ली तक सीमित नहीं रखी। एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों और इलाकों में जांच की। इस दौरान आरोपियों के संभावित संपर्कों और कथित साजिश की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की गई।

जांच के दौरान 588 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा 395 से ज्यादा दस्तावेज और 200 से अधिक जब्त किए गए सामान को भी केस का हिस्सा बनाया गया है। इन सबूतों के आधार पर एनआईए ने ब्लास्ट से जुड़े घटनाक्रम, आरोपियों की कथित भूमिका और उनके बीच संभावित संपर्क को अदालत के सामने रखा है।

इससे पहले अदालत ने अहलमद को मुख्य और सप्लीमेंट्री चार्जशीट की जांच कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। मौजूदा अदालत ने उसी आदेश का पालन करने को कहा है। साथ ही विशेष लोक अभियोजक को निर्देश दिया है कि वह एक संक्षिप्त सारणी तैयार करें, जिसमें हर आरोपी की भूमिका और उसके खिलाफ जुटाए गए सबूतों का जिक्र हो, ताकि अदालत को चार्जशीट पर संज्ञान लेने में आसानी हो।

अदालत ने यह भी नोट किया कि उकाशा, फैजल, आशिम और उस्मान के खिलाफ आगे की जांच लंबित है। एनआईए को रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है कि इस लंबित जांच के बावजूद मामले में आगे की कार्यवाही की जा सकती है या नहीं।

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बाजार की पाठशाला: इन लोगों के लिए 31 अगस्त है आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन, जानिए किसके लिए कौन-सा फॉर्म होगा सही

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अगर आप नौकरी के साथ कारोबार, पेशे या स्वतंत्र रूप से काम करके कमाई करते हैं, तो आपके लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख नजदीक आ गई है। बिना कर ऑडिट वाली कारोबारी या पेशेवर आय रखने वाले करदाताओं को 31 अगस्त 2026 तक अपना आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा। वहीं, जिन कारोबारियों और पेशेवरों के खातों का कर ऑडिट जरूरी है, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 है। ऐसे करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने से पहले यह समझना जरूरी है कि उनकी आय और वित्तीय स्थिति के आधार पर कौन-सा रिटर्न फॉर्म लागू होगा।

आयकर विभाग के अनुसार, 31 जुलाई की अंतिम तारीख तक 6.5 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके थे, जिनमें वेतनभोगी लोगों, पेंशनभोगियों, छात्रों की आय वाले करदाताओं और अलग-अलग स्रोतों से आय प्राप्त करने वाले लोगों के रिटर्न शामिल हैं। इनमें कारोबार (बिजनेस) और पेशे (प्रोफेशन) से आय वाले बड़ी संख्या में करदाता भी शामिल रहे। अब बिना कर ऑडिट वाले कारोबार या पेशे से आय रखने वाले बाकी करदाताओं के लिए 31 अगस्त की तारीख महत्वपूर्ण है।

बिजनेस या प्रोफेशन से आय होने पर आम तौर पर आईटीआर-3 या आईटीआर-4 में से किसी एक फॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है। सही फॉर्म का चुनाव करदाता की आय, कारोबार की प्रकृति और कर व्यवस्था पर निर्भर करता है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने से बाद में कर विभाग की ओर से परेशानी या स्पष्टीकरण की जरूरत पड़ सकती है।

आईटीआर-3 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) के लिए होता है, जिनकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से होती है और जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन यानी अनुमानित कर व्यवस्था का विकल्प नहीं चुनते हैं।

अगर टैक्सपेयर नियमित रूप से अकाउंट बुक्स मेंटेन करता है, उसकी कुल आय 50 लाख रुपये से अधिक है या वह फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी एफएंडओ ट्रेडिंग करता है, तो कई मामलों में आईटीआर-3 लागू हो सकता है।

आईटीआर-3 के जरिए वे टैक्सपेयर्स वेतन या पेंशन, हाउस प्रॉपर्टी, बिजनेस या प्रोफेशन, कैपिटल गेन्स और अन्य स्रोतों से होने वाली आय की जानकारी दे सकते हैं। आम तौर पर यह फॉर्म उन व्यक्तियों या एचयूएफ के लिए इस्तेमाल होता है, जो आईटीआर-1, आईटीआर-2 या आईटीआर-4 के तहत रिटर्न दाखिल करने के योग्य नहीं हैं।

वहीं, आईटीआर-4 यानी सुगम उन व्यक्तियों, एचयूएफ और फर्म के लिए है, जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम के तहत बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम घोषित करते हैं और जिनकी कुल आय निर्धारित सीमा के भीतर है। सामान्य तौर पर इसमें 50 लाख रूपये तक की कुल आय वाले पात्र टैक्सपेयर्स शामिल हो सकते हैं।

इसमें बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली आय के अलावा वेतन या पेंशन, अधिकतम दो हाउस प्रॉपर्टी से आय और ब्याज, फैमिली पेंशन तथा डिविडेंड जैसी अन्य स्रोतों से आय भी शामिल की जा सकती है। निर्धारित शर्तों के तहत कृषि आय 5,000 रूपये तक और सेक्शन 112ए के तहत आने वाले कुछ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स भी इसमें रिपोर्ट किए जा सकते हैं।

हालांकि, हर टैक्सपेयर आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं कर सकता। अगर सेक्शन 112ए के तहत शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स या निर्धारित सीमा से अधिक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स है, अनलिस्टेड इक्विटी शेयर हैं, विदेशी संपत्ति या विदेश से आय है, घाटे को आगे कैरी फॉरवर्ड करना है, या ऐसी आय है जिस पर विशेष दर से टैक्स लगता है, तो आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कंपनी के डायरेक्टर भी इस फॉर्म के जरिए रिटर्न दाखिल नहीं कर सकते।

विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर रिटर्न दाखिल करने से पहले करदाताओं को फॉर्म 26एएस, वार्षिक सूचना विवरण यानी एआईएस, करदाता सूचना सारांश यानी टीआईएस, फॉर्म 16 और फॉर्म 16ए की जानकारी जांच लेनी चाहिए।

साथ ही बैंक खाते और कर भुगतान से जुड़े चालान भी तैयार रखने चाहिए। कारोबारियों को बिक्री-खरीद का रिकॉर्ड, लाभ-हानि खाता, बैलेंस शीट, बिल और चालान, जीएसटी रिटर्न तथा भुगतान माध्यमों से मिले डिटेल्स का भी मिलान करना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर करदाता ने शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग की है, तो ब्रोकरेज स्टेटमेंट, कॉन्ट्रैक्ट नोट, डीमैट स्टेटमेंट और कैपिटल गेन्स से जुड़ी पूरी जानकारी तैयार रखनी चाहिए। इनका मिलान एआईएस और बैंक रिकॉर्ड से करना जरूरी है। इसी तरह, किराये से आय पाने वाले प्रॉपर्टी मालिकों को रेंट एग्रीमेंट, नगर निगम टैक्स की रसीद, प्रॉपर्टी के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज और होम लोन के ब्याज का सर्टिफिकेट संभालकर रखना चाहिए।

टैक्सपेयर्स को लागू होने पर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट, फॉर्म 10-आईईए की अनॉलेजमेंट और विभिन्न डिडक्शन का दावा करने के समर्थन में जरूरी दस्तावेज भी तैयार रखने चाहिए। रिटर्न दाखिल करते समय जल्दबाजी के बजाय एआईएस, टीआईएस, फॉर्म 26एएस , बैंक स्टेटमेंट और अन्य रिकॉर्ड को अच्छी तरह मिलाना जरूरी है।

इसके अलावा, इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले सबसे महत्वपूर्ण बात सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव करना है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने पर बाद में परेशानी हो सकती है। इसलिए अपनी आय के स्रोत, बिजनेस या प्रोफेशन की प्रकृति, कैपिटल गेन्स, विदेशी संपत्ति, शेयर बाजार की ट्रेडिंग और लागू टैक्स व्यवस्था को ध्यान में रखकर ही आईटीआर-3 या आईटीआर-4 का चुनाव करें।

इसके साथ ही विशेषज्ञों का कहना हैं कि आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर कई जानकारियां पहले से भरी हुई मिलती हैं, लेकिन उन्हें बिना जांचे स्वीकार नहीं करना चाहिए। रिटर्न जमा करने के बाद ई-सत्यापन पूरा करना भी जरूरी है।

जटिल आय या कई स्रोतों से कमाई होने की स्थिति में रिटर्न दाखिल करने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट या योग्य टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना भी उपयोगी हो सकता है।

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