खेल
टी20 विश्व कप पर आतंकी हमले का खतरा, आईसीसी और मेजबान देश अलर्ट।
नई दिल्ली, 6 मई। आईपीएल 2024 के तुरंत बाद यूएसए और वेस्टइंडीज में 1 जून से टी20 विश्व कप का आयोजन होना है। हालांकि, इस बीच टूर्नामेंट पर आतंकी हमले का साया आ गया है।
वर्ल्ड कप के लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं, लेकिन इस बीच आतंकी साजिश की खबर जो सामने निकल कर आई है उसने सबकी टेंशन बढ़ा दी है।
हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने कहा है कि वह टी20 विश्व कप के मेजबान देश- वेस्टइंडीज और यूएसए के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस मेगा-इवेंट पर आतंकी खतरे से निपटने के लिए पुख्ता तैयारी हो।
पुरुषों का टी20 विश्व कप 1-29 जून तक वेस्टइंडीज और यूएसए में होने वाला है। कैरेबियाई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड को उत्तरी पाकिस्तान से वर्ल्ड कप मैचों के दौरान आतंकी हमले का अलर्ट प्राप्त हुआ है।
पुरुष टी20 विश्व कप पर आतंकी खतरे के बारे में पूछे जाने पर आईसीसी के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, “आईसीसी उचित योजनाएं सुनिश्चित करने के लिए मेजबान देशों के साथ मिलकर काम कर रही है। रिपोर्ट सामने आते ही हमने तुरंत अधिकारियों से बात की और क्रिकेट वेस्टइंडीज ने सभी को आश्वासन दिया है कि किसी भी जोखिम से निपटने के लिए एक मजबूत सुरक्षा योजना बनाई गई है।”
त्रिनिदाद के स्थानीय डेली एक्सप्रेस अखबार ने पीएम प्रधानमंत्री डॉ. कीथ रोवले के हवाले से लिखा, ‘सुरक्षा एजेंसियां विश्व कप पर खतरे से निपटने के लिए काम कर रही हैं।”
“यह दुर्भाग्य की बात है कि 21वीं सदी में भी दुनिया में आतंकवाद का खतरा अलग-अलग रूपों में बना हुआ है। हालांकि, इन खतरों को कम करने के लिए, हम स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर हर खतरों के प्रति सतर्क रहे हैं और हमारी खुफिया और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरे टूर्नामेंट के दौरान देशों और स्थानों पर सबकी सुरक्षा के लिए काम कर रही हैं।”
वेस्टइंडीज में टी20 विश्व कप के मैच एंटीगा एंड बारबुडा, बारबाडोस, गुयाना, सेंट लूसिया, सेंट विंसेंट एंड ग्रेनेडाइंस के अलावा त्रिनिदाद एंड टोबैगो में होंगे।
अमेरिका के फ्लोरिडा, न्यूयॉर्क और डलास में भी मैच निर्धारित है, लेकिन वहां इन खेलों पर किसी खतरे का कोई संकेत नहीं है। सेमीफाइनल मुकाबले त्रिनिदाद और गुयाना में खेले जाएंगे, वहीं फाइनल बारबाडोस में खेला जाना है।
दुनिया की टॉप- 20 टीमों को पांच-पांच के चार समूहों में बांटा जाएगा। प्रत्येक समूह से शीर्ष दो टीमें सुपर 8 चरण के लिए क्वालीफाई करेंगी।
सुपर आठ के दो समूहों से शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल के लिए आगे बढ़ेंगी। सेमीफाइनल मुकाबले 26 और 27 जून को त्रिनिदाद और गुयाना में खेले जाएंगे, वहीं फाइनल 29 जून को बारबाडोस में खेला जाना है।सेमीफाइनल और फाइनल दोनों के लिए रिजर्व दिन रखे गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय
इस्लामाबाद में सन्नाटा, बातचीत की आहट! लेकिन भरोसे पर सवाल बरकरार

war
नई दिल्ली, 9 अप्रैल : “ईरान की सभ्यता को पूरी तरह से खत्म करने” की डेडलाइन से कुछ घंटे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी मध्यस्थता का जिक्र करते हुए सीजफायर का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि ये संघर्ष विराम अगले 2 हफ्तों तक जारी रहेगा।
इसके बाद लगा कि हालात सामान्य होंगे। पूरी दुनिया ने प्रसन्नता जाहिर की। पाकिस्तान फूला नहीं समाया, लेकिन इसके बाद इजरायल की ओर से जो किया गया और अमेरिका की ओर से जो कहा गया, उसने वर्तमान स्थिति के भरोसे को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बयान में ऐसा बहुत कुछ था जो ईरान सीजफायर के भविष्य पर सवाल खड़े करता है। इजरायल का लेबनान पर हमला, एक ही दिन में सैकड़ों को मारने का दावा और फिर खुद ट्रंप का कहना कि हिज्बुल्लाह को लेकर समझौते में कोई जिक्र नहीं है, इस समझौते पर सवाल खड़े करता है। हालांकि पाकिस्तान का कहना था कि हिज्बुल्लाह इसका अंग था।
इस सबके बीच, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इन दिनों एक असामान्य खामोशी में डूबी हुई है। सड़कों पर सामान्य चहल-पहल की जगह सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने ले ली है और कई इलाकों में आवागमन सीमित कर दिया गया है। वजह है ईरान के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का आगमन, जो एक बेहद संवेदनशील और अहम कूटनीतिक वार्ता के लिए यहां पहुंचने वाला है।
एक अस्थायी संघर्षविराम के बाद शुरू हो रही इस वार्ता से उम्मीद तो है, लेकिन उसके सफल होने को लेकर संशय भी उतना ही गहरा है। पाकिस्तान ने इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने में अहम भूमिका निभाई है, जिसे उसकी कूटनीतिक सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा है।
शहर में लागू सुरक्षा इंतजाम इस बात का संकेत हैं कि इस वार्ता को कितना संवेदनशील माना जा रहा है। खासकर डिप्लोमैटिक एन्क्लेव और सरकारी परिसरों के आसपास कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन किसी भी संभावित खतरे या विरोध को रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क है।
हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया के पीछे एक बड़ी चुनौती भरोसे की कमी है। ईरान के भीतर ही इस बात को लेकर शंका जताई जा रही है कि क्या यह वार्ता वास्तव में किसी ठोस समाधान तक पहुंच पाएगी या यह केवल तनाव को अस्थायी रूप से टालने का एक प्रयास भर है। पिछले अनुभवों और बार-बार संघर्षविराम उल्लंघनों के आरोप ने इस अविश्वास को और गहरा किया है।
बातचीत का दायरा केवल द्विपक्षीय मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है। यही कारण है कि दुनिया की निगाहें इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां बंद सड़कों और कड़ी सुरक्षा के बीच शांति की एक मुश्किल कोशिश जारी है।
आशंका इसलिए भी क्योंकि ईरानी संसद के स्पीकर एमबी घालिबाफ ने 10 में से तीन शर्तों के हनन का आरोप यूएस पर लगाया, तो दूसरी ओर पाकिस्तान में ईरान के एम्बेसडर, रेजा अमीरी मोगादम, ने एक्स पर एक पोस्ट डिलीट कर दी, जिसमें कहा था कि ईरान का एक डेलीगेशन गुरुवार रात यूएस के साथ बातचीत के लिए इस्लामाबाद आने वाला है।
मोगादम ने पोस्ट किया था: “इजरायली सरकार द्वारा बार-बार सीजफायर तोड़ने की वजह से ईरानी पब्लिक ओपिनियन पर शक के बावजूद… ईरान के बताए 10 पॉइंट्स पर सीरियस बातचीत के लिए ईरानी डेलीगेशन आज रात इस्लामाबाद आ रहा है।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में आधार को लेकर पीआईएल, केवल छह साल तक के बच्चों का आधार बनाने की मांग

नई दिल्ली, 9 अप्रैल : सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की है। जिसमें उन्होंने मांग की है कि भारत में आधार बनवाने की प्रक्रिया केवल छह साल तक के बच्चों तक ही सीमित हो। उनका कहना है कि अब बड़ों का आधार बनाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि भारत में पहले ही 144 करोड़ यानी 99 प्रतिशत लोगों के आधार बन चुके हैं।
याचिका में यह भी बताया गया है कि अब जो बड़ों का आधार बन रहा है, उसका फायदा कुछ विदेशी लोग उठा रहे हैं। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और रोहिंग्या घुसपैठिए कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर जाकर पैसे देकर फर्जी आधार बनवा रहे हैं। इसके चलते देश में फर्जी दस्तावेजों की संख्या बढ़ रही है और यह सुरक्षा व जनसंख्या संतुलन के लिए भी खतरा है।
अश्विनी उपाध्याय ने यह भी कहा कि छह साल से ऊपर के लोगों के आधार के लिए अब तहसीलदार या एसडीएम के ऑफिस में ही आवेदन किया जाए। इससे सभी फर्जी आधार बनाने वालों पर नियंत्रण रखा जा सकेगा। पहले भारत में आधार केवल तहसील पर बनता था, लेकिन अब सीएससी पर आधार बनवाने से इस प्रक्रिया में ढील और घुसपैठियों का फायदा हुआ है।
इसके अलावा, याचिका में मांग की गई है कि सीएससी या तहसील में जहां भी आधार बनता है, वहां स्पष्ट रूप से डिस्प्ले बोर्ड लगाया जाए। बोर्ड पर लिखा होना चाहिए कि फर्जी आधार बनाना और बनवाना गंभीर अपराध है और पकड़े जाने पर पांच साल की सजा हो सकती है। यह नियम राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और जन्म प्रमाण पत्र जैसे अन्य दस्तावेजों पर भी लागू किया जाए।
याचिका में यह भी कहा गया है कि आधार, राशन कार्ड या अन्य दस्तावेज के लिए आवेदन करते समय व्यक्ति से एक अंडरटेकिंग ली जाए। इसमें व्यक्ति को लिखित रूप से कहना होगा कि उसने जो जानकारी दी है वह सही है और वह जानता है कि फर्जी दस्तावेज बनाना गंभीर अपराध है। इससे भविष्य में धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आएगी।
अश्विनी उपाध्याय ने यह भी मांग की है कि फर्जी दस्तावेज बनाने वालों को कॉन्करेंट सजा नहीं, बल्कि लगातार सजा दी जाए। भारत में वर्तमान में कनकरेन्ट सजा होती है, मतलब एक साथ सभी धाराओं की सजा शुरू हो जाती है और कुल सजा कम हो जाती है। उन्होंने सुझाव दिया है कि अगर पांच धाराएं हों, तो एक पूरी होने के बाद दूसरी शुरू हो, ताकि सजा का प्रभाव और डर लोगों में हो।
उनका तर्क है कि फर्जी दस्तावेज जैसे आधार, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, जन्म प्रमाण पत्र आदि से देश की आंतरिक सुरक्षा, संस्कृति, भाईचारा और जनसंख्या संतुलन पर खतरा है। इसलिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से तुरंत कार्रवाई की मांग की है कि छह साल से बड़े बच्चों का आधार बनाना रोका जाए। केवल उन बच्चों का आधार बने जिनके माता-पिता या दादा-दादी का आधार पहले से मौजूद हो। इससे फर्जीवाड़ा रोकने और देश की सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिलेगी।
याचिका में कहा गया है कि अब केवल छह साल तक के बच्चों का ही आधार बने और बाकी सभी वयस्कों के लिए तहसील या एसडीएम ऑफिस में ही प्रक्रिया हो। इससे फर्जी आधार की समस्या कम होगी और देश में सुरक्षा, कानून-व्यवस्था मजबूत बनेगी।
राजनीति
बिहार में 13 अप्रैल के बाद नई सरकार गठन की सारी प्रक्रिया शुरू होगी : संजय झा

पटना, 9 अप्रैल : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित होने और विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिए जाने के बाद से ही प्रदेश में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर चर्चा का बाजार गर्म है।
इस बीच, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले और पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने गुरुवार को साफ कर दिया कि 13 अप्रैल के बाद बिहार में नई सरकार बनने की सारी प्रक्रिया शुरू होगी। दरअसल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को दिल्ली रवाना हो गए। उनके साथ सांसद संजय झा भी नजर आए।
इस बीच, संजय झा ने साफ कहा कि मुख्यमंत्री आज दिल्ली जा रहे हैं। शुक्रवार को यानी 10 अप्रैल को लगभग 12:15 तक सीएम नीतीश कुमार राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे। इसके बाद वे पटना लौट आएंगे। इसके बाद 13 अप्रैल के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। वैसे पहले से ही इसके कयास लगाए जा रहे थे कि खरमास यानी 14 अप्रैल के बाद बिहार में नई सरकार का गठन होगा।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के बाद उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की चर्चा है। नई सरकार में इस बार भाजपा का मुख्यमंत्री बनने जबकि जदयू के कोटे में उप मुख्यमंत्री पद के जाने को लेकर भी बात कही जा रही है। अगर ऐसा हुआ तो बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बनेगा। भाजपा में भी मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर कई लोगों के नामों की चर्चा है।
उधर, गुरुवार को पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय के बाहर सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने की मांग को लेकर एक पोस्टर लगाए जाने से नया विवाद खड़ा हो गया। इस पोस्टर में “बाल्मीकि समाज संघ” के नाम से अपील करते हुए ‘बिहार में हो सम्राट की सरकार’ की मांग की गई थी। हालांकि पोस्टर लगने के कुछ ही देर बाद वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उसे फाड़कर हटा दिया। भाजपा की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह पोस्टर पार्टी द्वारा नहीं लगाया गया था और इसका पार्टी से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है।
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
महाराष्ट्र9 months agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
-
अनन्य3 years agoउत्तराखंड में फायर सीजन शुरू होने से पहले वन विभाग हुआ सतर्क
-
न्याय2 years agoमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ हाईकोर्ट में मामला दायर
-
अपराध4 years agoबिल्डर पे लापरवाही का आरोप, सात दिनों के अंदर बिल्डिंग खाली करने का आदेश, दारुल फैज बिल्डिंग के टेंट आ सकते हैं सड़कों पे
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
