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अधूरी गारंटी को लेकर तेलंगाना में कांग्रेस की राह नहीं आसान !

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तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार है। सत्ता में आने के चार महीने बाद कांग्रेस लोकसभा चुनाव में राज्य की 17 में से 12 सीटें जीतने की कोशिश कर रही है। लेकिन कांग्रेस के लिए राहें आसान नहीं हैं। मतदाताओं के एक वर्ग को लगता है कि विधानसभा चुनाव में दी गई छह गारंटियों में से कई को पूरा करने में कांग्रेस की सरकार विफल रही है।

7 दिसंबर 2023 को कांग्रेस सरकार के सत्ता संभालने के 48 घंटों के भीतर महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की शुरुआत की गई। साथ ही कुछ अन्य योजनाओं के लॉन्च से कांग्रेस के लिए सकारात्मक माहौल बना, लेकिन बड़ी संख्या में छूटे हुए आवेदक नाखुश हैं। किसान विशेष रूप से दुखी हैं। उनसे किए गए किसी भी वादे पर अमल नहीं किया गया।

आईएएनएस ने मतदाताओं के जिस वर्ग से बात की, वे गारंटियों के लागू के बारे में अपनी राय में विभाजित थे। जबकि जिन लोगों को प्रति माह 200 यूनिट मुफ्त बिजली और 500 रुपये की रसोई गैस सिलेंडर योजना से लाभ हुआ, वे खुश हैं। उनका कहना है कि वे फिर से कांग्रेस को वोट देंगे। वहीं जो लोग वंचित रह गए, वे निराश महसूस कर रहे हैं। वे भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) का समर्थन करना चाहते हैं।

पिछले चार महीनों के अपने अनुभव को देखते हुए, ये मतदाता राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की नई गारंटियों पर संदेह जता रहे हैं। उनमें से कई इस पर दोबारा भरोसा करने के लिए तैयार नहीं हैं।

चार महीने किसी भी सरकार के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए बहुत कम समय है। कांग्रेस 100 दिनों के भीतर छह गारंटियों को लागू करने के अपने वादे पर कायम रहने में विफल रही है। कई लोगों का मानना है कि सरकार ने योजनाएं सिर्फ इसलिए शुरू कीं ताकि उनका लाभ सीमित संख्या तक पहुंच सके।

लाभार्थियों के चयन के लिए सफेद राशन कार्ड बुनियादी मानदंड थे, लेकिन जिनके पास यह नहीं है, वे छूट जाने से नाखुश हैं। यहां तक कि कई सफेद कार्ड धारकों की शिकायत है कि सरकार के ‘प्रजा पालन’ अभियान के दौरान आवेदन जमा करने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया।

घरेलू सहायिका टी नीलम ने कहा, “हमारे पास एक सफेद राशन कार्ड है। हमने बिजली, गैस, पेंशन और अन्य लाभों के लिए आवेदन किया था लेकिन हमें कुछ नहीं मिला।” जब कांग्रेस ने वादे किए तो उन्हें बहुत उम्मीदें थीं लेकिन अब वह निराश हैं।

नीलम का कहना है कि अब तक हमें जो एकमात्र लाभ मिला है वह टीएसआरटीसी बसों में मुफ्त यात्रा है।

हैदराबाद में एक निजी फर्म के कर्मचारी भूम्या नाइक ने कहा, “जब वे पूरा नहीं कर सकते तो उन्होंने वादे क्यों किए? यह स्पष्ट है कि वादे चुनाव जीतने के लिए किए गए थे लेकिन पार्टी ने लोगों का विश्वास खो दिया है। हमें कुछ नहीं मिला।”

उन्होंने कहा, “अब हमें लगता है कि बीआरएस सरकार बेहतर थी। हम लोकसभा चुनाव में बीआरएस को वोट देंगे। पहले जो भी समस्याएं रही हों, बीआरएस सरकार विभिन्न योजनाओं के तहत नियमित रूप से वित्तीय सहायता दे रही थी।”

किसान सबसे ज्यादा नाखुश हैं। कांग्रेस ने कई वादों के साथ उनकी उम्मीदें जगाई थीं। लेकिन वे अब मांग कर रहे हैं कि सरकार कम से कम पिछले बीआरएस शासन द्वारा शुरू की गई योजनाओं जैसे रायतु बंधु को लागू करे।

कांग्रेस ने रायतु भरोसा के तहत हर साल 15 हजार रुपये प्रति एकड़ देने का वादा किया था। लेकिन आरोप है कि वह पिछली सरकार द्वारा भुगतान किए गए 10 हजार रुपये भी देने में विफल रही।

पार्टी ने बटाईदार किसानों को भी वित्तीय सहायता देने के साथ-साथ खेतिहर मजदूरों को 12 हजार रुपये की वार्षिक वित्तीय सहायता देने का वादा कर बड़ी उम्मीदें जगाई थीं।

किसानों ने कांग्रेस के उस वादे को भी याद किया, जब 9 दिसंबर को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के जन्मदिन पर नई सरकार के सत्ता संभालने के तुरंत बाद कहा गया कि 2 लाख रुपये तक के कृषि ऋण माफ कर दिए जाएंगे। हालांकि, चार महीने बाद भी वादा अधूरा है।

मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने अब घोषणा की है कि 15 अगस्त तक कृषि ऋण माफ कर दिए जाएंगे। उनका कहना है कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ लागू हुई आदर्श आचार संहिता के कारण इस योजना को लागू नहीं किया जा सका।

किसानों को धान पर 500 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी नहीं मिला, जबकि मुख्यमंत्री ने अगली फसल से इसका भुगतान करने का वादा किया था। सूखे जैसी स्थिति के कारण राज्य के कुछ हिस्सों में फसलों का सूखना, किसानों को सिंचाई के पानी की आपूर्ति करने और उन्हें 24 घंटे बिजली सुनिश्चित करने में कथित विफलता ने भी उन्हें परेशान कर दिया है।

नवंबर 2023 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने छह गारंटियों के हिस्से के रूप में 13 वादे किए थे। छह गारंटियों — ‘महालक्ष्मी’, ‘रायतु भरोसा’, ‘गृह ज्योति’, ‘इंदिरम्मा इंदलू’, ‘युवा विकासम’ और ‘चेयुथा’ के तहत महिलाओं, किसानों, युवाओं, बेघरों और बुजुर्गों जैसे विभिन्न वर्गों के लिए वादे किए गए थे। सोनिया गांधी ने 17 सितंबर 2023 को हैदराबाद के पास तुक्कुगुडा में एक जनसभा में गारंटियों का अनावरण किया था।

उसी स्थान पर, कांग्रेस ने 6 अप्रैल को राहुल गांधी की उपस्थिति में आगामी लोकसभा चुनावों के लिए अपनी राष्ट्रीय गारंटी का तेलुगु वर्जन जारी किया।

सत्ता संभालने के दो दिन बाद 9 दिसंबर को रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार ने तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीएसआरटीसी) की बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा प्रदान करने के लिए महालक्ष्मी योजना शुरू की और राजीव आरोग्यश्री (गरीबों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना) के तहत कवरेज को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया।

अन्य गारंटियों को लागू करने में देरी हुई क्योंकि सरकार ने छह में से पांच गारंटियों के लिए पात्र लाभार्थियों से आवेदन प्राप्त करने के लिए बड़े पैमाने पर कवायद शुरू की। 28 दिसंबर से 6 जनवरी तक राज्य भर में आयोजित ‘प्रजा पालन’ कार्यक्रम के दौरान 1.28 करोड़ से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिसमें कुल 1,11,46,293 परिवार शामिल थे।

जिनके पास सफेद राशन कार्ड नहीं थे उनसे भी आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 1.05 करोड़ से अधिक आवेदन पांच गारंटियों के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए थे, जबकि शेष आवेदन अन्य जरूरतों के लिए थे।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 27 फरवरी को प्रत्येक घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली और 500 रुपये में एक रसोई गैस सिलेंडर की गारंटी की शुरुआत की। उन्होंने 11 मार्च को गरीबों के लिए आवास योजना इंदिरम्मा इंदलू लॉन्च की, जिसके तहत महिलाओं के नाम पर घर की जगहें वितरित की जानी थी और घर निर्माण के लिए 5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता। सरकार ने 22,500 करोड़ रुपये की लागत से 4.50 लाख इंदिराम्मा घरों को मंजूरी दी है।

प्रति माह 200 यूनिट तक बिजली की खपत करने वाले और सफेद राशन कार्ड रखने वाले परिवारों को मार्च से ‘शून्य बिल’ मिलना शुरू हो गया। बिजली वितरण कंपनियों ने कहा कि 10 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को ‘शून्य बिल’ जारी किए गए। हालांकि, कई आवेदकों ने शिकायत की कि पात्र होने के बावजूद उन्हें योजना के तहत लाभ से वंचित कर दिया गया।

इसी तरह केवल सफेद राशन कार्ड धारकों को ही 500 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर मिल रहा है। जबकि सरकार ने कहा है कि कुल 40 लाख परिवारों को फायदा होगा, सिलेंडर की संख्या पिछले तीन वर्षों की उनकी औसत खपत तक सीमित है।

तीनों योजनाओं का लाभ उठा रहे लोग सरकार से खुश हैं।

आदिलाबाद शहर के एक निजी कर्मचारी ई. प्रवीण ने आईएएनएस को बताया, “उन्हें पिछले दो महीनों से शून्य बिजली बिल मिल रहा है। मुझे रसोई गैस सिलेंडर भी केवल 500 रुपये में मिल रहा है। इन दो लाभों के अलावा, हमारे परिवार की महिला सदस्य टीएसआरटीसी बसों में भी मुफ्त यात्रा कर रही हैं।”

आदिलाबाद के एक व्यवसायी हाफिज अहमद भी तीन योजनाओं के तहत लाभ मिलने से खुश हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का समर्थन करने का फैसला किया है।

हालांकि, रंगारेड्डी जिले में एक छोटा स्टेशनरी व्यवसाय चलाने वाले सैयद आमेर इकबाल लाभ से वंचित हैं क्योंकि उनके पास कोई सफेद राशन कार्ड नहीं है। उनका कहना है कि उन्होंने आवेदन नहीं किया क्योंकि हमारे जैसे लोगों को लाभ नहीं मिलता।

कुछ लोग आदर्श आचार संहिता लागू होने से सरकार के बचाव में विश्वास करते हैं।

आंगनवाड़ी टीचर पी. वसंता ने कहा, “हम न केवल टीएसआरटीसी बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा का लाभ उठा रहे हैं, बल्कि मुफ्त बिजली के लिए हमारा आवेदन भी स्वीकार कर लिया गया है। हमारा मानना है कि आदर्श आचार संहिता के कारण शून्य बिल जारी करने में सच में कठिनाइयां हैं और उम्मीद है कि सरकार लोकसभा चुनाव के बाद अपनी बात रखेगी।”

हालांकि, सरकार को अभी भी किसानों से किए वादों के अलावा प्रत्येक महिला के लिए 2,500 रुपये की मासिक वित्तीय सहायता, बुजुर्गों के लिए 4,000 रुपये की मासिक पेंशन, छात्रों के लिए 5 लाख रुपये के विद्या भरोसा कार्ड और सभी मंडलों में तेलंगाना अंतर्राष्ट्रीय स्कूलों जैसे वादों को लागू करना बाकी है।

चेवेल्ला निर्वाचन क्षेत्र की एक गृहिणी टी. मनिअम्मा ने कहा, “हमें उम्मीद है कि सरकार लोकसभा चुनाव के बाद अन्य वादों का लागू करना सुनिश्चित करेगी। इस सरकार ने छह महीने भी पूरे नहीं किए हैं, इसलिए हमें इसे अपनी बात रखने के लिए कुछ और समय देना चाहिए।”

राजनीति

टीवीके ने तमिलनाडु उपचुनाव के लिए 40 स्टार प्रचारकों के नामों की घोषणा की

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मदुरंतकम और धारापुरम की आरक्षित विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों की अंतिम सूची शनिवार को जारी की जाएगी। इसके साथ ही 6 अक्टूबर को होने वाले मतदान के लिए जोरदार प्रचार अभियान औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगा।

शनिवार उम्मीदवारों के लिए अपना नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख है। नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव अधिकारी अंतिम सूची जारी करेंगे और निर्दलीय उम्मीदवारों तथा गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों के उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न आवंटित करेंगे।

चेंगलपट्टू जिले में स्थित मदुरंतकम सीट के लिए 48 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए थे। जांच के बाद 28 उम्मीदवारों के नामांकन स्वीकार किए गए, जिससे नामांकन वापसी की समय-सीमा से पहले मैदान में काफी उम्मीदवार बने हुए हैं।

प्रमुख उम्मीदवारों में टीएमसी की मरगथम कुमारवेल, डीएमके के परंथमन, एआईए़डीएमके की गनिथा संपत, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) की सुगंधि और नाम तमिलर काची के जानकीरमन शामिल हैं। चुनाव मैदान में बचे उम्मीदवारों की सही संख्या शनिवार को अधिकारियों द्वारा नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

धारापुरम निर्वाचन क्षेत्र में, चुनाव अधिकारियों ने जांच के बाद 22 नामांकन पत्र स्वीकार किए। यहां भी, अंतिम मुकाबले की तस्वीर तभी साफ होगी जब जो उम्मीदवार दौड़ में बने नहीं रहना चाहते, वे औपचारिक रूप से अपना नामांकन वापस ले लेंगे।

इन उपचुनावों ने काफी राजनीतिक ध्यान खींचा है, क्योंकि पार्टियां इन मुकाबलों को अपनी संगठनात्मक ताकत और जनता के समर्थन की एक अहम परीक्षा मान रही हैं। कई उम्मीदवार पहले ही मतदाताओं से मिलना, नुक्कड़ सभाएं करना और स्थानीय स्तर के कार्यकर्ताओं को एकजुट करना शुरू कर चुके हैं। उम्मीद है कि उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी होने के बाद चुनाव प्रचार में तेजी आएगी।

राजनीतिक पार्टियां प्रचार के बचे हुए समय में जनसभाएं, घर-घर जाकर लोगों से संपर्क करने के कार्यक्रम और वरिष्ठ नेताओं की रैलियां आयोजित करने की तैयारी कर रही हैं।

इस बीच, टीवीके ने दो उपचुनावों के लिए 40 स्टार प्रचारकों के नामों की घोषणा की है। पार्टी द्वारा घोषित प्रमुख प्रचारकों में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय भी शामिल हैं। स्टार प्रचारकों की सूची में कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर, वीसीके अध्यक्ष थोल. थिरुमावलवन, एमडीएमके महासचिव वाइको, दुरई वाइको और कादर मोहिदीन के नाम भी शामिल हैं।

चुनाव अधिकारी दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में वोटिंग और वोटों की गिनती बिना किसी रुकावट के, सुचारू और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए पोलिंग स्टेशन तैयार करने, स्टाफ तैनात करने और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करने जैसे काम कर रहे हैं।

दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में गठबंधन के बड़े नेताओं की भागीदारी से राजनीतिक मुकाबला और तेज होने की उम्मीद है। वोटिंग के दिन से पहले मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की कोशिश में पार्टियां अपने प्रचार अभियान को स्थानीय विकास के मुद्दों और राज्य-स्तर के बड़े राजनीतिक मुद्दों पर केंद्रित कर सकती हैं।

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राष्ट्रीय समाचार

लिस्टिंग से पहले ठंडी पड़ी एनएसई आईपोओ की ग्रे मार्केट चमक, जीएमपी 60 प्रतिशत से ज्यादा टूटा

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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) का ग्रे मार्केट प्रीमियम (जीएमपी) लिस्टिंग से पहले तेज गिरावट का शिकार हुआ है।

ग्रे मार्केट को कवर करने वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, शनिवार को 218 रुपए के उच्चतम स्तर पर पहुंचा जीएमपी शुक्रवार दोपहर तक घटकर 84 रुपए रह गया, जो अपने उच्चतम स्तर से करीब 61.46 प्रतिशत कम है।

हालांकि ग्रे मार्केट में उत्साह कमजोर पड़ा है, इसके बावजूद 22,569 करोड़ रुपए के एनएसई आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला। शुक्रवार को बोली के दूसरे दिन यह इश्यू पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले 10.28 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां प्राप्त हुईं।

यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) आधारित है, जिसके तहत मौजूदा शेयरधारक 12.64 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री कर रहे हैं। इसका मतलब है कि शेयर बिक्री से प्राप्त राशि सीधे एनएसई के पास नहीं जाएगी।

कंपनी ने आईपीओ के लिए 1,700 रुपए से 1,785 रुपए प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ऊपरी प्राइस बैंड पर एनएसई का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) लगभग 4.42 लाख करोड़ रुपए बैठता है।

यह सार्वजनिक निर्गम 21 सितंबर को बंद होगा, जबकि कंपनी के शेयरों के 24 सितंबर को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की उम्मीद है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल एक अनौपचारिक संकेतक होता है, जो यह दर्शाता है कि निवेशक सूचीबद्ध होने से पहले इश्यू मूल्य के ऊपर कितनी अतिरिक्त कीमत चुकाने को तैयार हैं। जीएमपी किसी भी तरह से यह सुनिश्चित नहीं करता कि शेयर प्रीमियम पर ही सूचीबद्ध होगा।

वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो एनएसई का वित्त वर्ष 2025-26 में संचालन से राजस्व 16,601.31 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के 17,140.67 करोड़ रुपए की तुलना में तीन प्रतिशत से अधिक कम है।

इसी अवधि में एक्सचेंज की आय का प्रमुख स्रोत माने जाने वाले ट्रांजैक्शन शुल्क से राजस्व में भी गिरावट दर्ज की गई। यह वित्त वर्ष 2024-25 के 13,635.76 करोड़ रुपए से घटकर वित्त वर्ष 2025-26 में 13,057.01 करोड़ रुपए रह गया, जो लगभग 4 प्रतिशत की सालाना कमी को दर्शाता है।

बाजार की नजर अब आईपीओ के अंतिम सब्सक्रिप्शन आंकड़ों और 24 सितंबर को होने वाली संभावित लिस्टिंग पर रहेगी, जहां निवेशकों की वास्तविक प्रतिक्रिया एनएसई के शेयर के प्रदर्शन को तय करेगी।

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अपराध

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में खाली घर से मिला नाबालिग लड़की का शव, परिवार ने जताया हत्या का शक

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पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में शनिवार सुबह एक खाली घर से 16 साल की लड़की का शव मिला है। परिवार का आरोप है कि उसकी हत्या एक नाबालिग लड़के और उसके परिवार वालों ने की है। बताया जा रहा है कि लड़की उस लड़के के साथ रिलेशनशिप में थी। लड़की के परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

लड़की का शव पुरुलिया मुफस्सिल पुलिस स्टेशन इलाके में एक खाली घर से मिला। लड़की के जीजा ने स्थानीय मीडिया को बताया कि वह शुक्रवार रात से लापता थी। हमने पूरी रात उसे ढूंढा लेकिन वह नहीं मिली। आज सुबह वह मृत पाई गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि हमें पता चला कि लड़की का एक स्थानीय लड़के के साथ संबंध था। वह ट्यूशन के लिए उनके घर जाती थी लेकिन बाद में उसने वहां ट्यूशन जाने से मना कर दिया। हमें शक है कि लड़की की हत्या की गई है। हमने सरकार से अपील की है कि उसे उचित न्याय मिले।

शनिवार सुबह लड़की का शव परिवार के ही एक खाली घर के अंदर मिला। उसके गले पर उसका स्कार्फ बंधा हुआ था।पुरुलिया मुफस्सिल पुलिस स्टेशन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और शव को पुरुलिया मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भेज दिया।

पुलिस ने कहा कि मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही पता चलेगा। अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया गया है। पुरुलिया जिला पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि शव बरामद कर लिया गया है और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। लड़की के परिवार ने शिकायत दर्ज कराई है। परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

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