व्यापार
अडाणी ग्रीन एनर्जी ने गुजरात में 300 मेगावाट की पवन ऊर्जा परियोजना पूरी की
अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) ने गुरुवार को बताया कि उसने गुजरात में और 126 मेगावाट की पवन ऊर्जा क्षमता का संचालन शुरू किया है। इसके साथ ही राज्य में 300 मेगावाट की परियोजना पूरी हो गई है। शेष 174 मेगावाट क्षमता का संचालन पहले ही शुरू हो चुका था।
कुल 300 मेगावाट की पवन ऊर्जा परियोजना में सालाना लगभग 109.1 करोड़ बिजली इकाई का उत्पादन होगा। इससे लगभग आठ लाख टन सीओ2 (कार्बन डाइऑक्साइड) उत्सर्जन से बचा जा सकेगा।
कंपनी ने एक बयान में कहा, “परियोजना के संचालन के साथ, एजीईएल ने देश भर में 9,604 मेगावाट के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो का संचालन करते हुए अपने बाजार नेतृत्व को और मजबूत किया है।”
इसमें कहा गया है, “कंपनी की परिचालन परिसंपत्तियों की रखरखाव और निगरानी इसके क्लाउड-आधारित प्लेटफॉर्म ‘एनर्जी नेटवर्क ऑपरेशंस सेंटर’ (ईएनओसी) द्वारा की जाती है, जो रियल टाइम निगरानी को सक्षम बनाता है और एनालिटिक्स तथा मशीन लर्निंग का लाभ उठाते हुए उद्योग में अग्रणी प्रदर्शन के लिए मानक स्थापित करता है।”
कंपनी के अनुसार, ग्रिड संतुलन के लिए देश के ऊर्जा मिश्रण में पवन ऊर्जा महत्वपूर्ण है। पवन ऊर्जा की पूरक प्रकृति, सौर तथा अन्य स्रोतों के साथ एकीकृत होकर ग्रिड की स्थिरता को मजबूत करती है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, भारत दुनिया में चौथी सबसे अधिक स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता वाला देश है। राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान ने देश की कुल पवन ऊर्जा क्षमता भूतल से 120 मीटर की ऊँचाई पर 695.5 गीगावॉट और 150 मीटर की ऊँचाई पर 1163.9 गीगावॉट होने का अनुमान लगाया है।
एजीईएल यूटिलिटी-स्केल के ग्रिड से जुड़े सौर, पवन और हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों के विकास, स्वामित्व और संचालन में काम करता है। कंपनी का लक्ष्य 21.8 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। वर्तमान में 12 राज्यों में इसकी 9.5 गीगावॉट से अधिक की स्थापित क्षमता ऑपरेशनल है जो देश में सर्वाधिक है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिका और ईरान शांति समझौते से कीमती धातुओं में भारी उछाल, सोना और चांदी 3 प्रतिशत तक चढ़े

अमेरिका और ईरान द्वारा शांति समझौते की पुष्टि के बाद, भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं में कमी आने से हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को शेयर बाजार के साथ ही कीमती धातुओं में भी भारी उछाल देखने को मिली।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एमसीएक्स) पर अगस्त वायदा सोना अपने पिछले बंद 1,50,528 रुपए से 3,301 रुपए की भारी उछाल के साथ 1,53,829 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला, जो खबर लिखे जाने तक दिन का उच्चतम स्तर रहा।
वहीं, एमसीएक्स सिल्वर जुलाई वायदा अपने पिछले बंद 2,46,186 रुपए से 5,377 रुपए की जबरदस्त तेजी के साथ 2,51,563 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुला और शुरुआती कारोबार में ही 3 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर 2,53,345 रुपए के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
वहीं, खबर लिखे जाने तक (दोपहर 12.09 बजे के करीब) एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1.48 प्रतिशत यानी 2,222 रुपए की उछाल के साथ 1,52,750 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, तो वहीं जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 2.20 प्रतिशत यानी 5,414 रुपए की तेजी के साथ 2,51,600 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई।
वहीं, इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के सुबह के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को 999 प्यूरिटी वाला सोना 1,50,169 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था, जबकि 999 प्यूरिटी वाली चांदी की कीमत 2,51,011 रुपए प्रति किलोग्राम थी।
सोने-चांदी की कीमतों में यह उछाल ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पुष्टि की है कि ईरान के साथ शांति समझौता हो गया है और होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा, जिससे चार महीने से चल रहे संघर्ष का अंत हो गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने इस महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग से नाकाबंदी हटा ली है, जो विश्व ऊर्जा व्यापार के लिए एक प्रमुख समुद्री मार्ग है और दोनों देशों के बीच तनाव के कारण काफी हद तक बाधित रहा था।
इस बीच, एक कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट ने बताया कि एमसीएक्स गोल्ड फिलहाल 1.54-1.55 लाख रुपए के महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस जोन के नीचे ट्रेड कर रहा है। भू-राजनीतिक तनावों में कुछ नरमी आने से सोने में मजबूती देखने को मिल रही है और कीमतों में रिकवरी के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
एक्सपर्ट का मानना है कि यदि सोना 1.55 लाख रुपए के स्तर के ऊपर लगातार बना रहता है, तो इसमें और तेजी आ सकती है तथा भाव 1.58 लाख रुपए से 1.60 लाख रुपए के दायरे तक पहुंच सकते हैं। दूसरी ओर, यदि कीमत 1.53-1.52 लाख रुपए के सपोर्ट जोन के नीचे फिसलती है, तो सोना फिर से 1.50 लाख रुपए के स्तर तक गिर सकता है।
वहीं, एक्सपर्ट ने आगे बताया कि एमसीएक्स सिल्वर ने भी 2.50 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर लिया। इससे बाजार की धारणा में सुधार और कीमतों में धीरे-धीरे रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं।
एक्सपर्ट के मुताबिक, यदि चांदी 2.54-2.55 लाख रुपए के रेजिस्टेंस जोन को पार कर लेती है, तो इसमें और तेजी आ सकती है और भाव 2.58-2.60 लाख रुपए तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, यदि कीमत 2.50 लाख के नीचे फिसलती है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और भाव 2.42-2.40 लाख रुपए के सपोर्ट क्षेत्र तक आ सकते हैं।
एक्सपर्ट ने बताया कि निकट अवधि में चांदी का रुझान सकारात्मक बना हुआ है। बाजार की धारणा को और मजबूत करने के लिए कीमतों का मौजूदा रेजिस्टेंस स्तरों के ऊपर टिकना जरूरी होगा। भू-राजनीतिक घटनाक्रम, सुरक्षित निवेश की मांग और वैश्विक बाजारों की अस्थिरता आगे भी चांदी की चाल को प्रभावित कर सकती है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिका-ईरान समझौते से कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, ब्रेंट क्रूड करीब 5 प्रतिशत टूटा

अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की घोषणा के बाद सोमवार को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आने की आशंकाएं काफी हद तक कम हो गई हैं।
अंतरराष्ट्रीय तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड शुरुआती कारोबार में 4.90 प्रतिशत तक गिरकर 83.05 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 5.74 प्रतिशत टूटकर करीब 80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की दिशा में हुई प्रगति से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, जिसके चलते सप्ताह की शुरुआत में एशियाई शेयर बाजारों में जोरदार तेजी देखने को मिली। वहीं अमेरिकी फ्यूचर्स भी मजबूती के साथ कारोबार करते नजर आए।
विशेषज्ञों ने कहा, “इस बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल 4 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 83 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के करीब पहुंच गया है, जिससे महंगाई को लेकर चिंताएं कम हुई हैं और बाजार की धारणा को अतिरिक्त समर्थन मिला है।”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर घोषणा की कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो चुका है। उन्होंने लिखा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो चुका है।”
इसके साथ ही उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की भी घोषणा की। यह एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के कच्चे तेल की आपूर्ति होती है।
ट्रंप ने लिखा, “मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के पूरी तरह खोलने और साथ ही अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाने की अनुमति देता हूं। दुनिया के जहाज अपने इंजन चालू करें। तेल को बहने दें!”
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
इस सकारात्मक घटनाक्रम का असर वैश्विक शेयर बाजारों पर भी दिखा। जापान के निक्केई, हांगकांग के हैंग सेंग, दक्षिण कोरिया के कोस्पी और इंडोनेशिया के जकार्ता कंपोजिट जैसे प्रमुख एशियाई सूचकांक तेजी के साथ कारोबार करते नजर आए। इनमें से कुछ बाजारों में 5 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई।
घरेलू बाजार में भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों शुरुआती कारोबार में 1 प्रतिशत से अधिक की मजबूती के साथ खुले।
राष्ट्रीय समाचार
दुनिया का इनोवेशन पार्टनर बनना भारत का लक्ष्य, उभरती हुई ग्लोबल टेक्नोलॉजी में साझेदारी पर जोर: पीयूष गोयल

भारत उभरती हुई ग्लोबल टेक्नोलॉजी में साझेदारी को गहरा करने और स्वयं को दुनिया का इनोवेशन पार्टनर में बदलने के लिए काम कर रहा है। यह जानकारी केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की ओर से रविवार को दी गई।
फ्रांस के नीस में भारत इनोवेट्स समिट के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए गोयल ने कहा कि ‘भारत इनोवेट्स’ का मकसद भारत के इनोवेशन इकोसिस्टम के लिए एक ग्लोबल एक्सेलेरेटर के तौर पर काम करना है और भारत को दुनिया के लिए एक भरोसेमंद इनोवेशन पार्टनर के तौर पर स्थापित करना है।
गोयल ने कहा, “साल 2026 को भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर के तौर पर मनाया जा रहा है, जो इस पहल के लिए एक सही माहौल देता है। हम एक ऐसे अनिश्चित समय में मिल रहे हैं जब भू-राजनीतिक स्तर पर बड़े हो रहे बदलाव, नई टेक्नोलॉजी में हो रहे बदलावों से मिल रहे हैं।”
भारत और फ्रांस के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का जिक्र करते हुए, गोयल ने कहा कि इस साल दोनों देशों ने आपसी संबंधों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा है।
उन्होंने कहा कि इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े वैश्विक चिंतन को आकार देने के लिए दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2025 में पेरिस में एआई एक्शन समिट की सह-अध्यक्षता की थी, जबकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों फरवरी 2026 में एआई इम्पैक्ट समिट के लिए भारत के साथ शामिल हुए थे।
गोयल ने कहा, “मैं अपने फ्रांसीस सहयोगियों से अपील करता हूं कि वे इस मौके का इस्तेमाल सार्थक साझेदारी बनाने के लिए करें। साथ ही, मैं अपने फ्रांसीसी दोस्तों को भारत आने, यहां निवेश करने, डिजाइन करने, इनोवेशन करने और मैन्युफैक्चरिंग करने के लिए आमंत्रित करता हूं, ताकि वे भारत के बड़े घरेलू बाजार और यहां से बाकी दुनिया में निर्यात, दोनों के लिए काम कर सकें।”
‘भारत इनोवेट्स’ समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने संयुक्त रूप से किया।
इस कार्यक्रम में भारत, फ्रांस और अन्य देशों के स्टार्टअप, निवेशक, उद्यमी, टेक्नोलॉजी लीडर और नीति-निर्माता एक साथ आते हैं ताकि इनोवेशन, निवेश और आपसी सहयोग के नए अवसर तलाशे जा सकें।
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