राजनीति
कांग्रेस प्रतिशोध की राजनीति करती है : प्रमोद सावंत
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने बुधवार को कहा कि जब कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई आवाज उठाता है, तो उसके खिलाफ प्रतिशोध की राजनीति कर उसे जेल भेज दिया जाता है।
पोंडा-दक्षिण गोवा में नमो नवमतदाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधा, जहां बीजेपी विधायक के कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र कार्यक्रम में शामिल हुए।
सावंंत ने स्टूडेंट कम्युनिटी को संबोधित करते हुए कहा, “कांग्रेस ने पिछले 10 सालों में आज तक एक भी कार्यक्रम युवाओं के लिए नहीं किया। ये लोग लोगों को जेल में डालने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस कई तरह के भ्रष्टाचार में लिप्त रह चुकी है। इसके अलावा जो लोग कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हें जेल में डाल दिया जाता है।”
सावंत ने कहा, “आज की तारीख में कांग्रेस का मतलब भ्रष्टाचार है, जबकि बीजेपी पूरे विश्व में सफलता की कहानी लिखने के लिए अपनी पहचान बना रही है। पहले यूपीए सरकार के कार्यकाल में 2जी और 3जी और कोयला घोटाला, खनन घोटाला और इस तरह के कई घोटाले होते थे। कांग्रेस ने घोटालों के अलावा कुछ नहीं किया। कांग्रेस के शासनकाल में हर दिन भ्रष्टाचार हुए।”
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 10 सालों मे लोगों ने सफलता की कहानियां और सफल परियोजनाओं को ही जमीन पर उतरते हुए देखा है।
सावंत ने आगे कहा, “हमें यह पता होना चाहिए कि पिछले 10 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बहुत कुछ किया गया है और 2014 से पहले देश की स्थिति क्या थी। 2004 से लेकर 2014 तक यूपीए की सरकार थी। उस वक्त मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विराजमान थे, जो कि आज भारत जोड़ने की बात कह रहे हैं। मुझे लगता है कि आज आपको कांग्रेस के पिछले 10 सालों के शासनकाल और मोदी सरकार के 10 सालों के शासनकाल पारस्परिक तुलना करना चाहिए। आपको यह पता करने की जरूरत है कि एनडीए सरकार में किस तरह के सुधार हुए हैं। हम यह पता होना चाहिए कि आधारिक संरचना और मानव संसाधन के मोर्चे पर पिछले कुछ वर्षों में किस तरह के परिवर्तन हुए हैं। अगर आप ऐसा करेंगे, तो आपको इसके बीच का फर्क खुद ब खुद मालूम पड़ जाएगा।”
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के शासनकाल में आज देश में हर क्षेत्र में प्रगति दखने को मिल रही है। आज जहां एम्स की संख्या में वृद्धि देखने को मिली है, तो वहीं दूसरी तरफ आईआईटी, आईआईएम और अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय जैसे शैक्षिक संस्थानों की संख्या में भी वृद्धि देखने को मिली है।”
राजनीति
सर्बिया संसदीय चुनाव: छात्र आंदोलन ने पलटी बाजी, अलेक्जेंडर वुसिच ने स्वीकारी हार

राष्ट्रपति पद छोड़कर संसदीय चुनाव के जरिए सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे अलेक्जेंडर वुसिच ने रविवार को अपनी हार स्वीकार कर ली। शुरुआती चुनावी अनुमानों के मुताबिक, छात्र समर्थित उम्मीदवारों के गठबंधन को संसद में बहुमत मिलने की संभावना है। यह चुनाव वुसिच की सर्बियाई प्रोग्रेसिव पार्टी (एसएनएस) और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकले छात्र समूह के बीच मुकाबले के रूप में देखा गया।
पोलिंग एजेंसियों इप्सोस और सीईएसआईडी (सीईएसआईडी) द्वारा जारी शुरुआती अनुमानों के अनुसार, “स्टूडेंट लिस्ट — स्टूडेंट्स विन” को 52 प्रतिशत वोट मिले हैं। यह आंकड़ा वुसिच के नेतृत्व वाले गठबंधन “अलेक्जेंडर वुसिच — यूनाइटेड सर्बिया” से काफी आगे है, जिसे 39.3 प्रतिशत वोट मिले हैं।
सिंहुआ न्यूज एजेंसी ने बताया कि वुसिच ने बेलग्रेड में अपनी पार्टी के मुख्यालय में समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि शुरुआती नतीजों के आधार पर यह स्पष्ट है कि उनकी पार्टी चुनाव हार गई है और ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने जीत हासिल की है। उन्होंने अनुमान जताया कि छात्र समर्थित सूची को संसद की 250 सीटों में से 135 से 140 सीटें मिल सकती हैं, जबकि उनकी पार्टी को लगभग 105 सीटें मिलने की उम्मीद है।
वुसिच ने कहा, “मैं आपको बताना चाहता हूं कि स्ट्रैटिफाइड सैंपल (स्तरीकृत नमूने) के आधार पर यह साफ है कि हम ये चुनाव हार गए हैं। स्टूडेंट लिस्ट जीत गया है। उनके पास 135 से 140 सीटें होंगी, और हमारे पास लगभग 105 सीटें होंगी।”
वुसिच के अनुमानों के अनुसार, छात्रों के समर्थन वाली सूची को लगभग 22 लाख (2.2 मिलियन) वोट मिले, जबकि उनके गठबंधन को लगभग 17.2 लाख (1.72 मिलियन) वोट मिले।
‘स्टूडेंट लिस्ट’ के मुख्यालय में जीत का जश्न शुरू होते ही, प्रमुख उम्मीदवार रादोमिर साइचिक (बेलग्रेड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और सर्बियाई एकेडमी ऑफ साइंसेज एंड आर्ट्स के सदस्य) ने इसे सर्बियाई नागरिकों के लिए एक ऐतिहासिक जीत करार दिया।
साइचिक ने कहा, “आज रात लोगों की आवाज सुनी गई है।” उन्होंने बताया कि शुरुआती नतीजों से पता चलता है कि ‘स्टूडेंट लिस्ट’ सभी मतदान केंद्रों पर स्पष्ट रूप से आगे चल रही है।
उन्होंने कहा, “यह डर पर साहस की जीत है, उदासीनता पर उम्मीद की जीत है, और इस विश्वास की जीत है कि सर्बिया के विचार अलग हो सकते हैं और उसे अलग होना ही चाहिए… यह जीत किसी एक व्यक्ति की निजी उपलब्धि नहीं है, बल्कि हम सबकी है।”
इस बात पर जोर देते हुए कि जनता के चुनावी फैसले का “हर हाल में सम्मान किया जाना चाहिए,” साइचिक ने अपने समर्थकों से शांति और गरिमा के साथ जश्न मनाने की अपील की। उन्होंने नागरिकों से यह भी कहा कि वे किसी उकसावे में न आएं और न ही किसी तरह के विवाद में पड़ें।
रविवार को हुए मतदान से सर्बिया की संसद (जो एक-सदनीय है) की सभी 250 सीटों के नतीजे तय हुए, जिनमें बहुमत के लिए 126 सीटों की जरूरत थी।
करीब 64.5 लाख मतदाता 8,392 मतदान केंद्रों पर वोट डालने के पात्र थे, और इस चुनाव में 18 चुनावी सूचियां (पार्टियां/गठबंधन) मैदान में थीं। मतदान केंद्र रात 8 बजे (1900 जीएमटी) बंद हो गए, हालांकि जो मतदाता उस समय तक कतार में लग चुके थे, उन्हें वोट डालने की अनुमति दी गई।
यह नतीजा सर्बिया की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है, जहां 2012 से वुसिच और उनकी पार्टी एसएनएस का दबदबा रहा है। संसदीय चुनाव में हिस्सा लेने के लिए वुसिच ने 27 सितंबर को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था, और अब दिसंबर के अंत तक नए राष्ट्रपति के लिए चुनाव होना जरूरी है।
इस चुनाव की पृष्ठभूमि नवंबर 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन पर हुई एक दर्दनाक दुर्घटना से जुड़ी है। स्टेशन पर कंक्रीट की छतरी गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जो धीरे-धीरे सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन में बदल गया। प्रदर्शनकारियों ने निर्माण कार्य में कथित लापरवाही, भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी को लेकर सवाल उठाए।
समय के साथ आंदोलन को छात्रों के अलावा समाज के अन्य वर्गों का भी समर्थन मिलने लगा। छात्र समूह ने संसद की सभी 250 सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची तैयार की, जिसमें शिक्षाविदों, खिलाड़ियों और किसानों सहित अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों को शामिल किया गया। आंदोलन का उद्देश्य भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने, अर्थव्यवस्था में सुधार और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने का था।
अपनी हार स्वीकार करते वुसिच ने कहा कि उन्होंने आधिकारिक नतीजे आने से पहले ही अनुमानित परिणामों की घोषणा करने का फैसला किया, ताकि उनके समर्थकों को किसी तरह की अनिश्चितता न रहे और उन दावों को भी गलत साबित किया जा सके जिनमें कहा जा रहा था कि वे अपनी चुनावी हार मानने से इनकार कर देंगे।
उन्होंने अपने गुट की संभावित हार के लिए विरोध प्रदर्शनों को मिल रहे विदेशी समर्थन को जिम्मेदार ठहराया और इस नतीजे को “एक क्रांति की पुष्टि” करार दिया।
वुसिच ने अपने समर्थकों का धन्यवाद किया और वादा किया कि उनका राजनीतिक आंदोलन एकजुट रहेगा और विपक्ष में रहकर अपना काम जारी रखेगा।
ये अनुमान 2012 में सत्ता में आने के बाद से एसएनएस के लिए सबसे बड़ा चुनावी झटका हैं। साथ ही, ये नतीजे छात्रों के समर्थन वाले इस आंदोलन को ऐसी स्थिति में लाते हैं जहां वे संसद में अकेले अपने दम पर बहुमत हासिल कर सकते हैं।
राजनीति
यूपी के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर राहुल गांधी के काफिले की गाड़ियां आपस में टकराईं, कई घायल

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के काफिले में शामिल गाड़ियां आपस में टकरा गईं, जिससे कई लोग घायल हो गए। हालांकि, राहुल गांधी पूरी तरह सुरक्षित हैं।
बताया जा रहा है कि यह हादसा हलियापुर इलाके में 91वें किलोमीटर के माइलस्टोन के पास हुआ, जहां काफिले की पांच गाड़ियां और एक एंबुलेंस आपस में टकरा गईं। इस घटना में घायल होने वालों में पार्टी कार्यकर्ता, अधिकारी और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। घायलों की संख्या और उन्हें कितनी चोटें आई हैं, अभी तक यह नहीं पता चला है।
राहुल गांधी सोमवार को उत्तर प्रदेश के दौरे पर हैं। उन्हें सुल्तानपुर की एक विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश होना है। यह मामला मानहानि से जुड़ा है, जिसमें तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और मौजूदा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है। ये कथित टिप्पणियां 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों से पहले बेंगलुरु में एक चुनावी रैली के दौरान की गई थीं।
सुल्तानपुर जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता विजय मिश्रा ने अमित शाह के बारे में राहुल गांधी की कथित टिप्पणियों को लेकर उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। तब से इस मामले की सुनवाई सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत में चल रही है।
इस मामले में सोमवार को अदालत अपना फैसला सुनाने वाली है। शिकायतकर्ता के वकील संतोष कुमार पांडे ने बताया कि फैसला सुनाए जाने के दौरान राहुल गांधी को खुद अदालत में मौजूद रहना होगा। इससे पहले, अतिरिक्त सिविल जज शुभम वर्मा ने फैसला सुनाने के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की थी।
सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल के अनुसार, राहुल गांधी के अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक लखनऊ से सुल्तानपुर तक सड़क मार्ग से यात्रा करने और सुबह 10 बजे तक पहुंचने की उम्मीद थी।
पुलिस ने अदालत परिसर के अंदर और आसपास सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। कोर्ट की कार्यवाही के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘डियर फ्रेंड’ लूला को ब्राजील का राष्ट्रपति चुनाव जीतने पर दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्राजील राष्ट्रपति चुनाव में शानदार जीत हासिल करने पर लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा को बधाई दी है। पीएम ने उन्होंने अपना ‘डियर फ्रेंड’ बताते हुए उम्मीद जताई की दोनों देश मिलकर ‘ग्लोबल साउथ’ की उन्नति के लिए मिलकर काम करेंगे।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी भावनाएं व्यक्त की। उन्होंने लिखा, ” मेरे प्रिय मित्र, राष्ट्रपति लूला को शानदार पुनर्निर्वाचन पर हार्दिक बधाई। मैं भारत-ब्राजील की बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा तथा व्यापक बनाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने को तत्पर हूं।”
उन्होंने आगे कहा, “हम साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों में अपने सहयोग को मजबूत करना जारी रखेंगे, ‘ग्लोबल साउथ’ की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाएंगे, और एक अधिक समावेशी, न्यायसंगत तथा टिकाऊ दुनिया के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।”
राष्ट्रपति लूला फरवरी 2026 में भारत आए थे, जहां हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता हुई थी। दोनों नेताओं ने तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, कृषि और ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों को लेकर आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था।
रविवार को ब्राजील में दूसरे दौर की वोटिंग हुई। इसके बाद परिणामों का ऐलान किया गया। 80 साल के लूला दा सिल्वा ने चौथी बार जीत हासिल की। वे पहले दौर की वोटिंग में फ्लावियो बोल्सोनारो से पिछड़ गए थे, लेकिन दूसरे और अंतिम दौर में बाजी पलट गई।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 99.89 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने पर, लूला को कुल वैध वोटों का 51.78 प्रतिशत हिस्सा मिला। वहीं, लिबरल पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे, फ्लेवियो बोल्सोनारो को 48.23 प्रतिशत वोट मिले। पहले दौर में लूला पिछड़ गए थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी की।
लूला 5 जनवरी 2027 को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। यह चौथी बार होगा जब वे ब्राजील के राष्ट्रपति बनेंगे।
1989 में ब्राजील में सीधे राष्ट्रपति चुनाव शुरू हुए थे। उसके बाद यह पहली बार हुआ, जब पहले दौर में दूसरे पायदान पर रहने वाला उम्मीदवार आखिरी दौर में जीत गया।
बोल्सोनारो परिवार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का करीबी माना जाता है। उन्हें पहले चरण में 47 फीसदी वोट मिले थे। वहीं लूला को 45.16 फीसदी वोट मिले थे।
लूला ने 2022 के चुनाव में फ्लावियो के पिता और ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को भी हराया था। उस चुनाव में लूला को दूसरे चरण में 50.90 फीसदी वोट मिले थे, जबकि जायर बोल्सोनारो को 49.10 फीसदी वोट मिले थे।
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