राजनीति
भारत दुनिया के विकास की दिशा कर रहा तय : पीएम मोदी
धानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत उन कुछ देशों में से है, जहां करोड़ों घरों को विद्युतीकृत कर 100 प्रतिशत बिजली कवरेज हासिल किया गया है और इस प्रकार विकास की दिशा तय कर रहा है।
पीएम मोदी ने साउथ-गोवा में ‘इंडिया एनर्जी वीक 2024’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर गोवा के राज्यपाल पीएस श्रीधरन पिल्लई, मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय पेट्रोलियम, तेल व प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री रामेश्वर तेली मौजूद थे।
इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि प्रतिकूल ग्लोबल कारकों के बावजूद, भारत उन कुछ देशों में से है जहां पेट्रोल की कीमतें कम हुई हैं। करोड़ों घरों को विद्युतीकृत कर 100 प्रतिशत बिजली कवरेज हासिल किया गया है। भारत न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि दुनिया के विकास की दिशा भी तय कर रहा है।
भारत ऊर्जा सप्ताह 2024 भारत की सबसे बड़ी और एकमात्र सर्वव्यापी ऊर्जा प्रदर्शनी और सम्मेलन है, जो भारत के ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों को उत्प्रेरित करने के लिए संपूर्ण ऊर्जा मूल्य चेन को एक साथ लाता है।
पीएम ने आगे कहा कि यह तब हो रहा है जब वित्तीय वर्ष के पहले छह महीनों में भारत की जीडीपी दर 7.5 प्रतिशत को पार कर गई है, जो विश्व विकास अनुमान से अधिक है, जिससे भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया है।
पीएम ने भविष्य में इसी तरह के विकास रुझानों की अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की भविष्यवाणी का भी उल्लेख किया। पीएम मोदी ने कहा, ”दुनिया भर के आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।”
पीएम ने कहा कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा, तेल और एलपीजी उपभोक्ता है। भारत चौथा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार होने के साथ-साथ चौथा सबसे बड़ा एलएनजी आयातक और रिफाइनर है।
पीएम ने देश में ईवी की बढ़ती मांग को भी रेखांकित किया और 2045 तक देश की ऊर्जा मांग दोगुनी होने के अनुमान के बारे में भी बात की।
प्रधानमंत्री ने सरकार के सुधारों और देश द्वारा प्राथमिक ऊर्जा मिश्रण में गैस का प्रतिशत 6 से 15 प्रतिशत तक ले जाने के प्रयासों के कारण घरेलू गैस के बढ़ते उत्पादन पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि अगले 5-6 साल में इसमें करीब 67 अरब डॉलर का निवेश आएगा।
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार की प्रतिबद्धता अपशिष्ट से धन प्रबंधन मॉडल के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को बदलने की है। हम भारत में 5,000 कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
विश्व पर्यावरण संबंधी चिंताओं को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया की 17 प्रतिशत आबादी का घर होने के बावजूद, भारत का कार्बन उत्सर्जन हिस्सा केवल 4 प्रतिशत है। भारत का लक्ष्य 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन हासिल करना है।
राष्ट्रीय समाचार
कैबिनेट ने ‘समुद्र मंथन’ योजना को दी मंजूरी, 84,084 करोड़ रुपए से बढ़ेगी भारत की ऑफशोर ऊर्जा क्षमता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘समुद्र मंथन’ (नेशनल ऑफशोर एक्सप्लोरेशन स्कीम) को मंजूरी दे दी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की इस केंद्रीय क्षेत्र की योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू करने के लिए 84,084 करोड़ रुपए के बजट को स्वीकृति दी गई है।
एक आधिकारिक बयान में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि यह योजना देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
मंत्रालय के अनुसार, यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस 2025 पर लाल किले से दिए गए उस विजन को साकार करेगी, जिसमें उन्होंने भारत की विशाल समुद्री ऊर्जा क्षमता का दोहन करने के लिए आधुनिक दौर के ‘समुद्र मंथन’ की आवश्यकता पर जोर दिया था। इस योजना के माध्यम से समुद्र में मौजूद तेल और गैस संसाधनों की खोज और उत्पादन को नई गति मिलेगी।
‘समुद्र मंथन’ योजना के तहत ऑफशोर ऊर्जा खोज से जुड़े पूरे वैल्यू चेन को मजबूत किया जाएगा, जिसके अंतर्गत बड़े पैमाने पर उच्च गुणवत्ता वाले सीस्मिक डेटा का संग्रह, प्रोसेसिंग और विश्लेषण, गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेजी से खोजी ड्रिलिंग, फ्रंटियर बेसिन में वैज्ञानिक ड्रिलिंग, साझा ऑफशोर उत्पादन और परिवहन अवसंरचना का विकास तथा एकीकृत ऑयल एंड गैस मैन्युफैक्चरिंग एंड सर्विसेज जोन की स्थापना की जाएगी।
इसके अलावा, योजना में डिजिटल प्रोग्राम मैनेजमेंट, क्षमता निर्माण, नई तकनीकों को अपनाने, हितधारकों के साथ समन्वय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे पहलुओं को भी शामिल किया गया है, ताकि देश में ऑफशोर तेल एवं गैस क्षेत्र के लिए एक मजबूत और आधुनिक इकोसिस्टम तैयार किया जा सके।
सरकार का अनुमान है कि इस योजना के जरिए 600 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट (एमएमटीओई) से अधिक नए तेल एवं गैस भंडार खोजे जा सकेंगे। इससे देश में ऑफशोर एक्सप्लोरेशन गतिविधियों में तेजी आएगी और घरेलू स्तर पर तेल एवं गैस उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
‘समुद्र मंथन’ योजना से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती मिलेगी। सरकार का मानना है कि इस योजना से ऑफशोर ऊर्जा क्षेत्र में स्वदेशी विनिर्माण, आधुनिक तकनीक और सेवाओं का विकास होगा, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।
इसके अलावा, तेल एवं गैस खोज और उत्पादन से जुड़े पूरे वैल्यू चेन में बड़े निवेश आकर्षित होंगे, जिससे उद्योग, नवाचार और आर्थिक विकास को दीर्घकालिक गति मिलेगी।
सरकार ने कहा कि पिछले एक दशक में अपस्ट्रीम सेक्टर में कई बड़े सुधार किए गए हैं। इनमें लगभग पूरे ऑफशोर क्षेत्र को एक्सप्लोरेशन के लिए खोलना, कानूनी और अनुबंध संबंधी ढांचे का आधुनिकीकरण तथा राष्ट्रीय डेटा रिपॉजिटरी को मजबूत करना शामिल है।
इन सुधारों के आधार पर अब ‘समुद्र मंथन’ योजना रणनीतिक सरकारी निवेश, अत्याधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के जरिए भारत में ऑफशोर तेल एवं गैस खोज के नए दौर की शुरुआत करेगी।
महाराष्ट्र
बॉम्बे हाई कोर्ट: वानखेड़े के खिलाफ डिपार्टमेंटल जांच पर रोक, एनसीबी ने जवाब मांगा, आरोपी की शिकायत पर अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई गलत

मुंबई; बॉम्बे हाई कोर्ट ने आईआरएस ऑफिसर समीर वानखेड़े के खिलाफ डिपार्टमेंटल और इंटर-डिपार्टमेंटल पूछताछ और हैरेसमेंट पर रोक लगाने का आदेश दिया है। समीर वानखेड़े ने एनसीबी की जांच को चुनौती दी थी, जिस पर कोर्ट ने चिंता जताई कि एक गुमनाम लेटर के आधार पर एक ऑफिसर के खिलाफ कई जांच शुरू की गई हैं, जिससे ऑफिसर का हौसला टूटेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने वानखेड़े को राहत दी है और जांच पर रोक लगाकर प्रोटेक्शन भी दिया है। एक अहम डेवलपमेंट में, बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस ए.एस. गडकरी और कमल खता ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने अपने ही पूर्व जोनल डायरेक्टर समीर दुनियादेव वानखेड़े के खिलाफ गुमनाम शिकायतों के आधार पर कई जांच शुरू की हैं। सुनवाई के दौरान, बेंच ने वानखेड़े के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई के आधार पर एनसीबी से काफी सवाल किए। कोर्ट ने सवाल किया कि एक इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर पर सिर्फ़ एक आरोपी के लगाए गए आरोपों और गुमनाम शिकायतों के आधार पर केस कैसे चलाया जा सकता है, खासकर तब जब ऐसी कार्रवाइयों से लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों के काम करने के तरीके पर असर पड़ता है और इंस्टीट्यूशन पर भी असर पड़ सकता है। रिट पिटीशन में वानखेड़े के खिलाफ गुमनाम शिकायतों के आधार पर जारी कई शुरुआती इन्वेस्टिगेशन नोटिस को चुनौती दी गई है। बेंच ने एनसीबी से यह भी ज़रूरी सवाल पूछा कि क्या आरोपी ने ये आरोप अपनी शुरुआती गिरफ्तारी के समय या इन्वेस्टिगेशन के दौरान लगाए थे। कोर्ट ने सवाल किया कि ऐसे आरोप बाद में क्यों सामने आए और यह भी पूछा कि उन पर आखिरी मिनट में क्यों विचार किया गया। कोर्ट ने आगे कहा कि अगर आरोपी को इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर के खिलाफ आरोप लगाने दिए जाते हैं और डिपार्टमेंट ऐसे आरोपों पर आसानी से कार्रवाई करता है, तो इससे क्रिमिनल जस्टिस के एडमिनिस्ट्रेशन में गड़बड़ी पैदा होगी। बेंच ने कहा कि ऐसा करने से ईमानदार ऑफिसर अपने ऑफिशियल कामों को करने में डिमोरलाइज़ होंगे और एक खतरनाक और पूरी तरह से अनचाही मिसाल कायम होगी, जिससे आरोपी सिर्फ़ इसलिए इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर को टारगेट कर पाएंगे क्योंकि उन्होंने अपने कानूनी काम किए थे। बेंच ने एनसीबी के वानखेड़े के खिलाफ बार-बार कार्रवाई शुरू करने पर भी सवाल उठाया, जबकि गुमनाम शिकायतों पर नियम मौजूद थे और एजेंसी अपने ही एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई कैसे कर सकती थी। कोर्ट ने ऐसे आरोपों पर अफसोस जताया और कार्रवाई करने में प्रतिवादी एजेंसी के व्यवहार से नाखुशी जताई। सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने देखा कि समीर वानखेड़े के खिलाफ बार-बार की गई कार्रवाई याचिकाकर्ता को सीधे तौर पर परेशान करने के बराबर है और ऐसी शिकायतों के आधार पर उनसे लगातार पूछताछ करने के सही होने पर सवाल उठाया। पार्टियों को विस्तार से सुनने के बाद, बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि रिट याचिका को आखिरी सुनवाई के लिए स्वीकार किया जाता है और याचिका पर आखिरी फैसला होने तक वानखेड़े को अंतरिम राहत और सुरक्षा दी जाती है।
आज की कार्रवाई ईमानदार सरकारी कर्मचारियों को मनमानी और परेशान करने वाली कार्रवाइयों से बचाने की दिशा में एक अहम कदम है। कोर्ट की टिप्पणियां इस बात को बड़े पैमाने पर सार्वजनिक महत्व देती हैं कि यह पक्का किया जाए कि जांच अधिकारी बिना किसी डर या पक्षपात के, गुमनाम आरोपों के आधार पर शुरू की गई देरी या बदले की कार्रवाई के जोखिम के बिना अपने कानूनी काम कर सकें। समीर वानखेड़े लगातार कहते रहे हैं कि उनके खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई मनमानी, गलत, कानूनी तौर पर टिकने लायक नहीं और एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेस का गलत इस्तेमाल है। याचिका में गुमनाम शिकायतों के आधार पर उनके खिलाफ जारी शुरुआती जांच नोटिस को रद्द करने की मांग की गई है।
राष्ट्रीय समाचार
आईबीएम और सर्वम ने किया साझेदारी का ऐलान, भारत में एआई इकोसिस्टम को मिलेगी मजबूती

दिग्गज अमेरिकी टेक कंपनी आईबीएम और भारतीय एआई स्टार्टअप सर्वम ने भारत में सॉवरेन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीकों के विकास और अपनाने में तेजी लाने के लिए शुक्रवार को साझेदारी का ऐलान किया। यह विशेष रूप से सरकारी एजेंसियों, सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों और विनियमित उद्यमों पर केंद्रित होगी।
इस साझेदारी के तहत दोनों कंपनियां नागरिक सेवाओं, शिकायत निवारण, दस्तावेज प्रसंस्करण और प्रशासनिक कार्यप्रवाह (वर्कफ्लो) जैसे उपयोग मामलों के लिए सॉवरेन एआई तकनीकों को संयुक्त रूप से पेश करेंगी और पायलट परियोजनाएं संचालित करेंगी।
यह सहयोग आईबीएम के विशेष रूप से सॉवरेन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किए गए एआई सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म ‘आईबीएम सॉवरेन कोर’ को सर्वम के ‘इंडिया-फर्स्ट’ सॉवरेन एआई स्टैक के साथ जोड़ेगा। सर्वम के इस एआई स्टैक में भारत में विकसित और प्रशिक्षित रीजनिंग मॉडल, बहुभाषी भाषा मॉडल और वॉयस एआई तकनीक शामिल हैं।
दोनों कंपनियों का संयुक्त समाधान संगठनों को डेटा, गवर्नेंस, सुरक्षा और अनुपालन पर अधिक नियंत्रण बनाए रखते हुए भारत की नियामकीय और परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप एआई लागू करने में मदद करेगा।
इसके अलावा, इस पहल का उद्देश्य इनोवेशन पायलट, सॉल्यूशन एक्सेलरेटर, तकनीकी सलाहकार सेवाओं और ज्ञान-साझाकरण कार्यक्रमों के माध्यम से सॉवरेन एआई को तेजी से अपनाने को बढ़ावा देना है।
लखनऊ स्थित आईबीएम गॉवटेक एआई इनोवेशन सेंटर संयुक्त इनक्यूबेशन और डेमोंस्ट्रेशन हब के रूप में कार्य करेगा। यहां सरकारी विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के संगठन और उद्यम बड़े पैमाने पर तैनाती से पहले सॉवरेन एआई के व्यावहारिक उपयोग, तकनीकी, परिचालन और गवर्नेंस संबंधी आवश्यकताओं का मूल्यांकन कर सकेंगे।
आईबीएम सॉफ्टवेयर इंडिया और सॉफ्टवेयर इनोवेशन लैब के जनरल मैनेजर श्रीराम राघवन ने कहा, “सॉवरेन एआई केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि एआई कहां संचालित होता है। इसका उद्देश्य संगठनों को यह नियंत्रण देना है कि एआई का संचालन, प्रबंधन और तैनाती कैसे की जाए।”
उन्होंने कहा कि आईबीएम सॉवरेन कोर एक एंटरप्राइज-ग्रेड प्लेटफॉर्म है, जिसे सरकारों और विनियमित उद्यमों को गवर्नेंस, सुरक्षा और अनुपालन आवश्यकताओं को पूरा करते हुए बड़े पैमाने पर एआई लागू करने में सहायता के लिए तैयार किया गया है।
सर्वम के सह-संस्थापक प्रत्युष कुमार ने कहा कि सॉवरेन एआई को उन प्रणालियों के भीतर काम करना चाहिए, जिन पर सरकारें और उद्यम पहले से निर्भर हैं, साथ ही बड़े पैमाने पर संचालन का भी समर्थन करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हमारा एआई स्टैक इन प्रणालियों के ऊपर मॉडल, वॉयस और भाषा तकनीक उपलब्ध कराता है, ताकि कोई भी नागरिक अपनी मातृभाषा में फोन कॉल के जरिए सरकारी लाभ प्राप्त कर सके या अपनी शिकायत का समाधान कर सके।”
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