राजनीति
कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार ने अपने 6 महीने किए पूरे, कर्नाटक को एक मॉडल राज्य बनाने का किया वादा
कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार ने सोमवार को सफलतापूर्वक अपने छह महीने पूरे कर लिए हैं। इसको लेकर सीएम सिद्दारमैया ने कर्नाटक के लोगों को धन्यवाद दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के धुआंधार प्रचार के बीच कांग्रेस पार्टी ने राज्य में विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत दर्ज की थी।
गारंटी योजनाओं के कार्यान्वयन ने भाजपा को देश के विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों में चुनावी सफलता के लिए मुफ्त की राह पर चलने के लिए मजबूर कर दिया है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने कर्नाटक के लोगों को धन्यवाद देते हुए कहा, “हमने अग्रणी गारंटी योजनाएं पेश की हैं, जिन्होंने सीधे जीवन को प्रभावित किया है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में, हमारी सरकार के कार्यकाल के छह महीने पूरे होने पर मुझे बहुत गर्व हो रहा है। इस छोटी सी अवधि में हम कर्नाटक के लोगों को सशक्त बनाने और अपने राज्य के लिए एक स्थायी और प्रगतिशील भविष्य तैयार करने की अपनी प्रतिबद्धता पर दृढ़ रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “हमारा शासन मॉडल, ‘न्यू कर्नाटक मॉडल’, इस प्रतिबद्धता का एक प्रमाण है। यह एक ऐसा मॉडल है, जो लोगों के कल्याण को समग्र विकास के साथ जोड़ता है।
महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा प्रदान करने वाली शक्ति योजना सिर्फ एक यात्रा सब्सिडी नहीं है, यह महिला सशक्तिकरण और गतिशीलता में एक निवेश है। इसी तरह, ‘गृह ज्योति’ और ‘अन्न भाग्य’ योजनाओं ने अनगिनत परिवारों के वित्तीय बोझ को कम कर दिया है, यह सुनिश्चित किया है कि बिजली और भोजन जैसी बुनियादी जरूरतें एक विलासिता नहीं बल्कि एक अधिकार हैं।”
सीएम ने आगे कहा, “गृह लक्ष्मी योजना उन महिलाओं का समर्थन करने में एक महत्वपूर्ण कदम रही है, जो बीपीएल परिवारों की मुखिया हैं, यह सुनिश्चित करती हैं कि उनके पास अपने परिवार को सम्मान के साथ चलाने के लिए वित्तीय संसाधन हों।”
उन्होंने कहा, ”बेरोजगारी भत्ते की पेशकश करने वाली ‘युवा निधि’ योजना हमारे युवाओं के लिए एक सुरक्षा कवच है, जो चुनौतीपूर्ण समय के दौरान उनके सपनों और महत्वाकांक्षाओं को बनाए रखती है।”
आगे कहा, “हमारे शासन का केंद्र बिंदु भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारा अटूट रुख है। हमने भ्रष्टाचार को कम करने के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं और विभिन्न मामलों में गहन जांच शुरू की है।
पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति यह प्रतिबद्धता अपने लोगों के साथ सरकार के संबंधों को नया आकार दे रही है, साथ ही विश्वास-भरोसे को बढ़ावा दे रही है।”
सीएम ने कहा, “जैसे-जैसे हम भविष्य में कदम रख रहे हैं, हमारा ध्यान एक ऐसा कर्नाटक बनाने पर केंद्रित है जो समावेशी, प्रगतिशील और विकास का प्रतीक हो।”
उन्होंने कहा कि हम एक ऐसा राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो न केवल अपने लोगों की तत्काल जरूरतों को पूरा करेगा बल्कि एक समृद्ध भविष्य की नींव भी रखेगा।
उन्होंने कहा, “मैं कर्नाटक के लोगों को हमारे दृष्टिकोण में उनके अटूट विश्वास के लिए धन्यवाद देता हूं और कर्नाटक को भारत में एक मॉडल राज्य बनाने के लिए अथक प्रयास जारी रखने का वादा करता हूं।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
वर्ल्ड उइगर कांग्रेस ने मार्को रुबियो से उठाई उइगरों की सुरक्षा की मांग

वर्ल्ड उइगर कांग्रेस (डब्ल्यूयूसी) ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से अपील की है कि अगले सप्ताह उज्बेकिस्तान की यात्रा के दौरान वह मध्य एशिया में रह रहे उइगर समुदाय की बढ़ती असुरक्षा और चीन की सीमाओं के बाहर होने वाले दबाव और दमन के मुद्दे को उठाएं।
डब्ल्यूयूसी के अनुसार, मध्य एशिया एक तरफ उन उइगरों के लिए शरणस्थली बनी है, जो चीन के शिनजियांग क्षेत्र में कथित उत्पीड़न से बचकर आए हैं, लेकिन दूसरी तरफ यहां भी वे निगरानी, धमकी, मनमानी हिरासत और चीन वापस भेजे जाने जैसे खतरों का सामना कर रहे हैं।
संगठन ने कहा कि उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और मध्य एशिया के अन्य देशों में रहने वाले उइगर लंबे समय से दबाव झेल रहे हैं। उनका कहना है कि बीजिंग इन देशों से उइगरों की राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों के खिलाफ सहयोग की मांग करता रहा है।
डब्ल्यूयूसी ने याद दिलाया कि अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने 2019 में मध्य एशियाई नेताओं के साथ बैठक के दौरान सार्वजनिक रूप से उइगरों का मुद्दा उठाया था और उनसे उइगरों को चीन वापस न भेजने की अपील की थी। उन्होंने 2020 में कजाकिस्तान की यात्रा के दौरान भी यही चिंता दोहराई थी।
संगठन का कहना है कि अब मार्को रुबियो के पास भी एक महत्वपूर्ण मौका है कि वह इसी तरह उइगरों के अधिकारों के समर्थन में अमेरिका की प्रतिबद्धता को दोहराएं।
डब्ल्यूयूसी ने रुबियो से मांग की कि वह मध्य एशियाई सरकारों से कहें कि उइगरों को जबरन चीन न भेजा जाए। संगठन का कहना है कि चीन लौटाए जाने पर उन्हें उत्पीड़न, मनमानी हिरासत, यातना और अन्य गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना करना पड़ सकता है।
संगठन ने आग्रह किया कि अमेरिका मध्य एशिया के देशों पर दबाव डाले कि वे उइगरों की निगरानी करने, उन्हें डराने-धमकाने, हिरासत में लेने या उनकी आवाज दबाने से जुड़े चीनी अनुरोधों को स्वीकार न करें। खासकर तब, जब वे सिर्फ अपने राजनीतिक विचार, शांतिपूर्ण सामाजिक गतिविधियां, धार्मिक आस्था या विदेश में रह रहे रिश्तेदारों से संपर्क बनाए रखते हों।
पिछले महीने डब्ल्यूयूसी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन से भी अपील की थी कि 24 सितंबर को राष्ट्रपति शी चिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान शिनजियांग में उइगरों के कथित नरसंहार और विदेशों में रह रहे उइगर समुदाय पर चीनी अधिकारियों के दबाव का मुद्दा उठाया जाए।
डब्ल्यूयूसी के अध्यक्ष तुर्गुनजान अलाउडुन ने कहा, “शी चिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा केवल उइगर नरसंहार की निंदा करने तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने का एक अहम अवसर है। अमेरिका लंबे समय से उइगर लोगों का मजबूत और मुखर समर्थक रहा है, और डोनाल्ड ट्रंप को इस अवसर का उपयोग कर यह समर्थन जारी रखना चाहिए।”
राजनीति
दिल्ली की कोर्ट ने यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ जारी किया जमानती वारंट, मानहानि केस में कार्रवाई

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ 2018 के मानहानि केस में जमानती वारंट जारी किया है। यह केस विकास सांकृत्यायन उर्फ विकास पांडे ने दायर किया था।
शिकायतकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि नोटिस तामील करने गए प्रोसेस सर्वर की रिपोर्ट के अनुसार ध्रुव राठी का घर बंद मिला। इसके बाद कोर्ट ने वारंट जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को तय की है।
इससे पहले 12 अक्टूबर को भी दिल्ली की कोर्ट ने ध्रुव राठी को फ्रेश और दस्ती (हाथों-हाथ दिए जाने वाले) समन जारी किए थे। यह मामला केस नंबर 5786/2018 से जुड़ा है। इसकी शुरुआत मई 2018 में ध्रुव राठी द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो “भाजपा आईटी सेल पार्ट-2” से हुई थी।
शिकायतकर्ता विकास संकृत्यायन ‘आई सपोर्ट नरेंद्र मोदी’ नामक सोशल मीडिया पेज के फाउंडर हैं। वीडियो में ध्रुव राठी ने आरोप लगाया था कि विकास पांडे भाजपा आईटी सेल में सीनियर पद पर हैं और उन्होंने महावीर प्रसाद नामक एक व्यक्ति को फेक न्यूज फैलाने से जुड़े बयानों को वापस लेने के लिए 50 लाख रुपए की पेशकश की थी।
इस मामले में ध्रुव राठी को पहली बार जुलाई 2019 में साकेत कोर्ट ने समन भेजा था लेकिन नोटिस कई सालों तक तामील नहीं हो पाए क्योंकि ध्रुव राठी मुख्य रूप से विदेश में रहते हैं। हालिया आदेश में साकेत जिला कोर्ट के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने फ्रेश समन तब जारी किया जब शिकायतकर्ता के वकील ने अर्ली हियरिंग के लिए अर्जी दी। वकील ने बताया था कि ध्रुव राठी फिलहाल भारत आए हुए हैं और हरियाणा के गुरुग्राम में एक घर में रह रहे हैं।
मौजूदा समय में ध्रुव राठी लंदन में हैं। इस बात की जानकारी शनिवार को यूट्यूबर ध्रुव राठी ने एक्स पर पोस्ट के जरिए दी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
जी-20 बैठक में शामिल होना चाहता है रूस, पुतिन का स्वागत करूंगा : ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस ने इस साल अमेरिका की मेजबानी में होने वाली जी20 बैठकों में शामिल होने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि अगर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आते हैं, तो उनका स्वागत किया जाएगा।
व्हाइट हाउस से रवाना होने से पहले पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि क्या पुतिन जी20 बैठक में शामिल होने वाले हैं। इस पर ट्रंप ने कहा, “नहीं, उन्होंने सिर्फ शामिल होने इच्छा जताई है। मुझे नहीं पता कि पुतिन खुद आएंगे या नहीं लेकिन अगर वे आते हैं तो मैं जरूर उनका स्वागत करूंगा।”
ईंधन की कीमतों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए ट्रंप ने खुद जी20 का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जी20 बैठकों में रूस के प्रतिनिधि पहले भी शामिल होते रहे हैं।
अमेरिका 2026 में जी20 की अध्यक्षता कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 30 और 31 अक्टूबर को जॉर्जिया के अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेंगे। इसके बाद 14 और 15 दिसंबर को ट्रंप फ्लोरिडा के मियामी स्थित ट्रंप नेशनल डोरल में जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे।
रूस और भारत दोनों जी20 के सदस्य हैं। इससे पहले भारत ने सितंबर 2023 में नई दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी।
ट्रंप ने कहा कि वह चीन और रूस दोनों के साथ परमाणु समझौता करना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने माना कि उन्हें नहीं लगता कि ऐसा इस साल हो पाएगा।
यूक्रेन युद्ध को लेकर जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह भूल गए हैं कि युद्ध की शुरुआत पुतिन ने की थी, तो उन्होंने कहा, “देखिए, मुझे सभी बातें पता हैं। किसी समय मैं सारी जानकारी सार्वजनिक करूंगा। मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह युद्ध खत्म होना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “औसतन हर महीने करीब 25,000 सैनिक मारे जा रहे हैं। पिछले महीने यह संख्या 32,000 थी। मैं दोनों पक्षों से बात करता हूं। मुझे लगता है कि दोनों इस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं और मेरा पूरा ध्यान इसी पर है कि यह युद्ध समाप्त हो।”
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका ने यूक्रेन की ओर से ‘स्टारशील्ड’ के इस्तेमाल पर कोई प्रतिबंध लगाया है, तो उन्होंने साफ कहा, “नहीं, हमने ऐसा बिल्कुल नहीं किया है।”
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