राष्ट्रीय समाचार
भारत की गौरवशाली अंतरिक्ष यात्रा चंद्रयान 3 पर आज राज्यसभा में चर्चा होगी
नई दिल्ली, 20 सितंबर: इसरो के सफल चंद्र लैंडिंग मिशन ‘चंद्रयान -3’, जिसने भारत को अमेरिका, रूस और चीन के बाद ऐसा करने वाला चौथा देश बना दिया, पर बुधवार को राज्यसभा में पहली छमाही के दौरान चर्चा की जाएगी। श्रम, कपड़ा और कौशल विकास पर स्थायी समिति की रिपोर्टों के साथ-साथ सार्वजनिक खातों पर समिति की रिपोर्टों के कागजात और पटल पर रखे जाने के तुरंत बाद चर्चा होगी। राज्यसभा के कामकाज की सूची में आइटम नंबर 5 के रूप में “चंद्रयान -3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग द्वारा चिह्नित भारत की गौरवशाली अंतरिक्ष यात्रा” पर चर्चा का उल्लेख किया गया है। ‘चंद्रयान -3’ की सफलता के साथ, भारत ऐसा करने वाला पहला देश भी बन गया है। चंद्रमा के अब तक अनछुए दक्षिणी ध्रुव पर एक लैंडर रखा है। 23 अगस्त को अपनी सफल सॉफ्ट लैंडिंग के बाद से चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान वर्तमान में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास है। चंद्रयान-3 लैंडर मॉड्यूल चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरते ही भारत ने एक बड़ी छलांग लगाई, जिससे वह यह उपलब्धि हासिल करने वाला पहला देश बन गया। ऐतिहासिक उपलब्धि और चार साल पहले चंद्रयान-2 की क्रैश लैंडिंग पर निराशा का अंत।
अमेरिका, चीन और रूस के बाद भारत चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरने वाला चौथा देश बन गया है। उतरने के बाद, विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर ने चंद्र सतह पर अलग-अलग कार्य किए, जिसमें सल्फर और अन्य छोटे तत्वों की उपस्थिति का पता लगाना, सापेक्ष तापमान रिकॉर्ड करना और इसके चारों ओर की गतिविधियों को सुनना शामिल था। भारत के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 के घोषित उद्देश्य सुरक्षित और सॉफ्ट लैंडिंग, चंद्रमा की सतह पर रोवर का घूमना और यथास्थान वैज्ञानिक प्रयोग थे। इस बीच, विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर “स्लीप मोड” में हैं, जिसके 22 सितंबर के आसपास जागने की उम्मीद है। नवीनतम अपडेट में, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने चंद्रयान -3 विक्रम लैंडर की एक त्रि-आयामी ‘एनाग्लिफ़’ छवि जारी की है। चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव. संसद का पांच दिवसीय विशेष सत्र सोमवार को शुरू हुआ और शुक्रवार को समाप्त होगा।
राजनीति
वाराणसी स्नातक सीट पर सपा की जीत तय, भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने मानी हार

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी ताकत का सेमीफाइनल माने जा रहे विधान परिषद चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को वाराणसी स्नातक सीट पर बड़ा झटका लगता दिख रहा है।
मतगणना के तीसरे दिन गुरुवार को भी इस सीट पर नतीजा घोषित नहीं हो सका लेकिन समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा की लगातार मजबूत होती बढ़त के बीच भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर जनादेश स्वीकार करते हुए अपनी हार मान ली है। नौवें चक्र की मतगणना तक आशुतोष सिन्हा काफी आगे चल रहे थे। ऐसे में उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। केदारनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में वाराणसी खंड के स्नातक मतदाताओं के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन्हें चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी है।
उन्होंने लिखा कि वह जनादेश को पूर्ण विनम्रता और लोकतांत्रिक मर्यादा के साथ स्वीकार करते हैं। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, समर्थकों और शुभचिंतकों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चुनाव में सफलता और असफलता लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं लेकिन जनसेवा का संकल्प किसी परिणाम का मोहताज नहीं होता। उनके इस संदेश के बाद वाराणसी स्नातक सीट पर भाजपा की हार और सपा की संभावित जीत को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अंतिम परिणाम और जीत का आधिकारिक प्रमाणपत्र जारी होने तक चुनावी प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाएगी। मतगणना मंगलवार सुबह आठ बजे शुरू हुई थी। बुधवार शाम तक 11 में से 10 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके थे लेकिन वाराणसी स्नातक सीट पर गिनती पूरी नहीं हो सकी।
वाराणसी में मतगणना के दौरान बुधवार शाम से शुरू हुआ विवाद देर रात तक जारी रहा। भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह धरने पर बैठ गए और उन्होंने मतगणना पर्यवेक्षक प्रांजल यादव पर धांधली कराने के आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग की। हालांकि, ये आरोप भाजपा प्रत्याशी की ओर से लगाए गए थे। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं से मतगणना केंद्र पर डटे रहने की अपील की। इसके बाद सपा के 500 से अधिक कार्यकर्ता रातभर मतगणना स्थल पर मौजूद रहे।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कार्यकर्ताओं से भोजन, पानी, छतरी और तौलिये की व्यवस्था करने तथा मतगणना केंद्र से नहीं हटने की अपील की। उन्होंने लिखा, ”सब डटे रहें और जीत का प्रमाणपत्र लेकर ही उठें।” उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपने साथियों की मदद करने और हौसला बनाए रखने का भी आह्वान किया।
अखिलेश ने मतगणना की निगरानी को लेकर कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने का संदेश देते हुए लिखा, ”नजर हटी, दुर्घटना घटी!” समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुजीत यादव ने कहा कि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मेहनत करके मतदाताओं का समर्थन हासिल किया है। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए दावा किया कि यदि यही रुझान आगे भी बना रहा तो 2027 में प्रदेश में सपा की सरकार बनेगी। सुजीत यादव ने भाजपा प्रत्याशी पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव में हार के बाद बहाने तलाशे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा किसी के स्तर पर उतरकर जवाब नहीं देना चाहती क्योंकि पार्टी का लक्ष्य प्रदेश में सरकार बनाना है।
गौरतलब है कि वाराणसी खंड की दोनों विधान परिषद सीटों पर पहले भी समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा है। स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा की बढ़त ने भाजपा के लिए राजनीतिक चुनौती बढ़ा दी है। विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के छह उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है जबकि घोषित परिणामों में समाजवादी पार्टी को चार सीटें मिली हैं। उन्होंने कहा कि सपा को इन नतीजों से बहुत उत्साहित नहीं होना चाहिए क्योंकि कई सीटों पर उम्मीदवारों के व्यक्तिगत प्रभाव और मेहनत की अहम भूमिका रही है।
वहीं, कांग्रेस नेता अजय राय ने चुनाव परिणामों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में यह चुनाव लड़ा ही नहीं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक प्रभाव में गिरावट आने वाली है। उधर, कौशांबी से समाजवादी पार्टी के नवनिर्वाचित एमएलसी मान सिंह यादव ने अपनी जीत का श्रेय मतदाताओं और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की नीतियों को दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान कई स्तरों पर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिशें हुईं और कुछ स्थानों पर सपा समर्थकों को परेशान किया गया।
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने भी आरोप लगाया कि बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा और कुछ स्थानों पर प्रशासन का दुरुपयोग कर परिणाम प्रभावित करने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। वाराणसी स्नातक सीट पर मतगणना पूरी होने और आधिकारिक परिणाम घोषित होने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल, भाजपा प्रत्याशी के सोशल मीडिया संदेश और सपा उम्मीदवार की बड़ी बढ़त ने इस चुनाव को प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना दिया है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ब्रिक्स संसदीय मंच से वैश्विक व्यवस्था को दिशा देने में संसद की भूमिका पर जोर, ओम बिरला ने बताई अहमियत

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच से संसद की जिम्मेदारी और उसकी अहमियत पर बात की। संसद भवन परिसर स्थित संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिरला ने कहा कि इस वर्ष ब्रिक्स संसदीय मंच की स्थापना के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। संगठन का तेजी से विस्तार हो रहा है और इसके साथ ही वैश्विक घटनाक्रमों को प्रभावित करने की इसकी क्षमता भी बढ़ रही है।
ओम बिरला ने सदस्य देशों का स्वागत करते हुए कहा, “भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स को समाधानों का इको सिस्टम मानने की आवश्यकता पर बल दिया है। हमारी सफलता सिर्फ चर्चाओं पर नहीं बल्कि उसके परिणामों पर मापी जाएगी। हमें साझा एजेंडे को तैयार करने का संकल्प लेना चाहिए, हमारी राष्ट्रीय परिस्थितियां और दृष्टिकोण भिन्न हो सकते हैं लेकिन आक्षांए समान है। जो शांति, सुरक्षा, परस्पर सम्मान, समान अवसर और अपने नागरिकों के लिए बेहतर जीवन है।”
उन्होंने आगे कहा, “मुझे विश्वास है कि ब्रिक्स संसदीय मंच हमारी साझेदारी को सुदृढ़ करेगा। अधिक समावेशी और शांतिपूर्ण और सतत विश्व के निर्माण में सार्थक योगदान देगा।”
बिरला ने आगे कहा,”दुनिया की लगभग आधी आबादी और पृथ्वी के करीब एक-तिहाई भूभाग का प्रतिनिधित्व करने वाले ब्रिक्स देशों की वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका है।”
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच भौगोलिक स्थिति, संस्कृति, भाषा और सामाजिक संरचना के स्तर पर भिन्नताएं हो सकती हैं, लेकिन साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवता के प्रति समान जिम्मेदारी उन्हें एकजुट करती है।
जिम्मेदारियों का जिक्र करते हुए उन्होंने आगे कहा,” ब्रिक्स देशों की सामूहिक ताकत के साथ वैश्विक जिम्मेदारियां भी जुड़ी हुई हैं। ऐसे में सदस्य देशों के बीच सहयोग, संवाद और साझा उद्देश्यों के आधार पर आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है।”
लोकसभा स्पीकर ने कहा,” हमें साथ मिलकर संसदीय सहयोग के जरिए एक ऐसी कार्ययोजना का निर्माण करना होगा जिससे सदस्य देशों के बीच विश्वास बढ़े हमारी सामरिक शक्ति से वैश्विक संस्थाओं में सुधार हो।न्यायसंगत और मानवता के प्रति हमारी संस्थाएं ज्यादा उत्तरदायी हों।”
अपनी बातों को विराम देते हुए उन्होंने आगे कहा, “मुझे विश्वास है कि इस मंच पर होने वाले विचार विमर्श आपसी विश्वास और सहयोग को नई दिशा देंगे और जन केंद्रित विकास के हमारे साझे संकल्प को सुदृढ़ करेंगे। हम मिलकर संसदीय साझेदारी का निर्माण कर पाएंगे। हमारी जनता के सपनों को शांति, समृद्धि और सतत विकास के अवसर प्रदान करेगा। हमारी जनता के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करेगा।”
राजनीति
‘सीएम नायडू की ‘कठपुतली’ बन गया आंध्र प्रदेश निर्वाचन आयोग’, वाईएसआरसीपी के अंबाती रामबाबू ने लगाया आरोप

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के गुंटूर जिला अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अंबाती रामबाबू ने शनिवार को आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के हाथों की ‘कठपुतली’ बन गया है और हिंसा तथा डर के माहौल के जरिए निर्विरोध चुनाव कराने में मदद कर रहा है।
गुंटूर स्थित अपने कैंप कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए रामबाबू ने आरोप लगाया कि स्थानीय निकाय चुनावों से पहले सत्तारूढ़ टीडीपी नीत गठबंधन, पुलिस और निर्वाचन आयोग की मिलीभगत से लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया, “सुप्रीम कोर्ट के उम्मीदवारों को सुरक्षा देने संबंधी निर्देशों के बावजूद वाईएसआरसीपी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया। पुलिस की मौजूदगी में उनके नामांकन पत्र फाड़ दिए गए और टीडीपी नेताओं की कथित ज्यादतियों को छिपाने के लिए मीडिया को नामांकन केंद्रों से दूर रखा गया। पुलिस ने विपक्षी नेताओं को नजरबंद कर दिया, जबकि सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवारों को सुविधा दी गई।”
रामबाबू ने पूर्व मंत्री विदादला रजनी के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि एक उम्मीदवार की मदद कर रही रजनी को कथित तौर पर पुलिस ने धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया। शुक्रवार को वाईएसआरसीपी ने इस घटना की राज्य निर्वाचन आयोग से स्वतंत्र जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
उन्होंने कहा कि इस कथित घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ, जिसे विपक्ष ने स्थानीय निकाय चुनावों की नामांकन प्रक्रिया के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती का एक और उदाहरण बताया।
रामबाबू ने आरोप लगाया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता पिन्नेली रामकृष्ण रेड्डी, बोला ब्रह्मा नायडू और नंबूरी शंकरा राव को घरों में नजरबंद कर दिया गया, जिससे वे उम्मीदवारों को बी-फॉर्म वितरित नहीं कर सके और उनकी मदद भी नहीं कर पाए।
वाईएसआरसीपी नेता ने यह भी दावा किया कि कथित हमले केवल उनकी पार्टी तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि जन सेना पार्टी के नेता बेल्लमकोंडा श्रीनिवास के परिवार और कडप्पा में भाजपा उम्मीदवार सुरेश पर भी हमले हुए।
उन्होंने कहा, “पुलिस ने फोन पर सुरक्षा देने का भरोसा दिया, लेकिन उम्मीदवारों, यहां तक कि महिला उम्मीदवारों पर हुए हमलों के दौरान मूकदर्शक बनी रही।”
अंबाती रामबाबू ने यह भी दावा किया कि वाईएसआरसीपी ने चुनावी अनियमितताओं में कथित संलिप्तता के आरोप में 54 पुलिस अधिकारियों की पहचान की है, जिनमें कुछ आईपीएस अधिकारी और सत्तेनापल्ली डीएसपी हनुमंता राव भी शामिल हैं।
उन्होंने इन अधिकारियों के खिलाफ हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस तंत्र का इस्तेमाल मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उनके पुत्र तथा कैबिनेट मंत्री नारा लोकेश के राजनीतिक हितों के लिए किया जा रहा है।
रामबाबू ने मतदाताओं से कथित ‘अलोकतांत्रिक तरीकों’ को खारिज करने की अपील की। उन्होंने गुंटूर में पार्टी की मेयर उम्मीदवार श्रीदेवी और कॉरपोरेटर उम्मीदवारों के समर्थन में मतदान करने तथा ‘पंखा’ चुनाव चिह्न पर वोट देकर सत्तारूढ़ गठबंधन की ‘डराने-धमकाने की राजनीति’ को हराने की अपील की।
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