राष्ट्रीय समाचार
यूपी में बारिश: पिछले 24 घंटों में 6 की मौत, कई जिलों में स्कूल बंद
लखनऊ: लौटते मानसून के दौरान लगातार बारिश ने उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तबाही मचा दी है. जहां पहले सूखे जैसे हालात का सामना कर रहे यूपी के आधे से ज्यादा जिलों पर अब बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, वहीं बिजली गिरने और घर गिरने की घटनाओं के कारण पिछले 24 घंटों में छह लोगों की मौत हो गई है। कई शहरों के रिहायशी इलाकों में जलजमाव से जनजीवन बदतर हो गया है और ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है क्योंकि नदियां उफनने लगी हैं. मौसम विभाग ने आने वाले सात दिनों में भारी से मध्यम बारिश की भविष्यवाणी की है। राज्य की राजधानी लखनऊ में अकेले सोमवार को 93.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिससे कई हाउसिंग कॉलोनियों में जलभराव हो गया और सड़कों पर ट्रैफिक जाम हो गया। इससे पहले रविवार को लखनऊ, बाराबंकी, मेरठ, मुरादाबाद, कानपुर, गाजियाबाद और अयोध्या समेत कई जिलों में भारी बारिश दर्ज की गई. केंद्रीय रक्षा मंत्री और स्थानीय सांसद राजनाथ सिंह ने सोमवार को लखनऊ के जिलाधिकारी को फोन कर भारी बारिश से शहर में हुए नुकसान की जानकारी ली और लोगों को जल्द राहत पहुंचाने के निर्देश दिये. लखनऊ के डीएम ने अपील जारी कर लोगों से अपने घरों में ही रहने और बाहर न निकलने को कहा है.
लखनऊ की मंडलायुक्त रोशन जैकब ने सोमवार को कई इलाकों का दौरा कर हालात का जायजा लिया. भारी बारिश के चलते लखनऊ, मुरादाबाद, बाराबंकी समेत कई जिलों के प्रशासन ने सोमवार को स्कूलों में छुट्टियों की घोषणा कर दी है. सोमवार को मुरादाबाद में रेलवे ट्रैक अस्त-व्यस्त हो गया और नौ ट्रेनों का संचालन रद्द कर दिया गया। कानपुर में एक व्यक्ति, लखनऊ में एक महिला और बाराबंकी में दो बच्चों की मौत हो गई। ये सभी मौतें बारिश के दौरान ठनका गिरने से हुईं। मिर्ज़ापुर में आकाशीय बिजली गिरने से सात छात्र घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. राज्य में कई जगहों पर सड़कें ध्वस्त हो गयी हैं. मौसम विभाग ने इसके पीछे बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात को कारण बताते हुए अगले सात दिनों में भारी से मध्यम बारिश की चेतावनी जारी की है। सोमवार शाम को लखनऊ और आसपास के इलाकों में मध्यम से भारी बारिश की भविष्यवाणी की गई है। इस बीच कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लौटते मानसून की बारिश धान की फसल के लिए वरदान साबित हो सकती है. उन्होंने कहा कि सितंबर में होने वाली बारिश से लंबे समय तक नमी बनाए रखने में मदद मिलेगी जो रबी की फसल के लिए भी फायदेमंद है।
अपराध
झारखंड की मुखर आदिवासी नेत्री निशा भगत ने फेसबुक लाइव के दौरान लगाई फांसी, इलाज के दौरान मौत

झारखंड में आदिवासी अधिकारों और सरना धर्म के मुद्दों पर मुखर रहने वाली रांची के पिठोरिया निवासी आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत हो गई है। उन्होंने शुक्रवार को फेसबुक पर लाइव आने के दौरान कथित तौर पर फांसी लगा ली। गंभीर हालत में उन्हें रिम्स में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना से पहले निशा भगत ने फेसबुक पर लाइव वीडियो बनाया था, जो अब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वह काफी भावुक और परेशान नजर आ रही हैं। उन्होंने जमीन माफिया के खिलाफ अपने संघर्ष, खुद को बदनाम किए जाने और व्यवस्था से जुड़े कई सवाल उठाए हैं। जानकारी के अनुसार, फांसी लगाने से पहले निशा भगत ने पिठोरिया थाना प्रभारी को फोन किया था। फेसबुक लाइव में उन्होंने कहा कि उनके साथ कोई नहीं है और वह लंबे समय से अकेले संघर्ष कर रही हैं।
उन्होंने अपने माता-पिता को होने वाले दुख का भी जिक्र किया। खुद को दलाल बताए जाने पर उन्होंने नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि उन्हें बदनाम करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने सरना और सनातन से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने के कारण पैदा हुई परिस्थितियों पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। हालांकि, वीडियो में लगाए गए आरोपों और घटना के पीछे के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। निशा भगत की पहचान आदिवासी अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली एक मुखर नेत्री के रूप में रही हैं।
वह सरना धर्म और आदिवासी पहचान से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाती रही थीं। पिछले वर्ष सरना धर्म के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने अपना सिर भी मुंडवाया था। उनके इस कदम की उस समय काफी चर्चा हुई थी।
उन्होंने 2024 में गुमला विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा था। निशा भगत की मौत से आदिवासी सामाजिक और राजनीतिक हलकों में शोक है। उनके फेसबुक लाइव में उठाए गए मुद्दों और घटना के पीछे की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत और इटली की नौसेनाओं के बीच पहली बार हुई स्टाफ वार्ता

भारत और इटली की नौसेनाओं ने आपसी समुद्री सहयोग को नई दिशा देने की पहल की है। दोनों देशों के बीच पहली बार नौसेना स्तर की स्टाफ वार्ता आयोजित की गई है। इस दौरान समुद्री क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने, सूचनाओं के आदान-प्रदान और सैन्य प्रशिक्षण से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। वार्ता भारतीय नौसेना और इतालवी नौसेना के प्रमुखों की ओर से तय किए गए दिशा-निर्देशों के आधार पर आयोजित की गई।
इसका मुख्य उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच साझा सोच को व्यावहारिक सहयोग में बदलना और आपसी संपर्क को संस्थागत रूप देना है। वार्ता में दोनों देशों ने नौसेनाओं के बीच नियमित ऑपरेशनल गतिविधियों को व्यवस्थित करने के तरीकों पर चर्चा की। इसके साथ ही समुद्री क्षेत्र के कुछ विशेष क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर भी विचार किया गया। इनमें समुद्र के भीतर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने और उनकी जानकारी जुटाने से जुड़ा क्षेत्र भी शामिल है।
इसे समुद्र के भीतर की गतिविधियों की जानकारी और निगरानी से जुड़े सहयोग के रूप में देखा जाता है। दोनों पक्षों ने समुद्री क्षेत्र से जुड़ी सूचनाओं को साझा करने की व्यवस्था मजबूत करने और प्रशिक्षण तथा पेशेवर अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की। इस पहली स्टाफ वार्ता को भारत और इटली की नौसेनाओं के बीच संस्थागत सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा सकता है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री संबंधों को मजबूत करना और भविष्य में सहयोग के नए अवसर तलाशना है।
गौरतलब है कि इसी वर्ष नई दिल्ली में भारत और इटली के बीच रक्षा मंत्रियों की द्विपक्षीय वार्ता हुई थी। इस महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता का उद्देश्य रक्षा सहयोग को नई मजबूती देना था। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ नौसेना प्रमुख, वायुसेना प्रमुख, थलसेना प्रमुख व अन्य अधिकारी मौजूद थे। इटली के रक्षा मंत्री के साथ यह वार्ता दिल्ली के मानेकशॉ केंद्र में हुई थी।
इस दौरान दोनों देशों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया, जो शांति, स्थिरता, स्वतंत्रता और आपसी सम्मान जैसे साझा मूल्यों पर आधारित है। बैठक में दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। खासतौर पर पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में सहयोग बढ़ाने और इटली के साथ मिलकर रक्षा क्षेत्र में नई संभावनाओं को विकसित करने पर भी सहमति बनी थी। यह पहल दोनों देशों की सैन्य और औद्योगिक क्षमता को भविष्य में और मजबूत बनाने में मदद कर रही है।
राजनीति
पीएम मोदी ने शरद पवार को फोन कर जाना हाल, स्वास्थ्य पर चर्चा से महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को एनसीपी(एसपी) अध्यक्ष शरद पवार को फोन किया और उनका हालचाल पूछा। इस बात की पुष्टि शरद पवार के पारिवारिक मित्र और करीबी सहयोगी विट्ठल मनियार ने की है। हालांकि, प्रधानमंत्री के इस फोन कॉल ने महाराष्ट्र में राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है।
अस्पताल के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए मनियार ने बताया कि पीएम मोदी ने वरिष्ठ नेता से आग्रह किया कि वे अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और आराम करें।
पीएम मोदी ने शरद पवार से कहा, “सुप्रिया और हम देश संभाल लेंगे। आप अपनी सेहत का ध्यान रखें और आराम करें। अपना आशीर्वाद हम पर बनाए रखें।”
पीएम मोदी के फोन कॉल के बाद पवार के अस्पताल में भर्ती होने की खबर ने राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे दिया। पीएम मोदी ने सुबह-सुबह फोन करके शरद पवार का हाल-चाल पूछा था।
पवार ने फोन करने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया और उन्हें भरोसा दिलाया कि वे आराम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “आप सभी के रहते मुझे देश की कोई चिंता नहीं है।”
दोनों नेताओं के बीच हुई इस बातचीत ने महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरणों को लेकर मीडिया में फिर से अटकलें तेज कर दी हैं। हालांकि उनके करीबी सहयोगियों का कहना है कि यह केवल पवार की सेहत के बारे में पूछा गया एक शिष्टाचार भरा कॉल था।
मनियार ने पुष्टि की कि वरिष्ठ नेता की हालत स्थिर है और कोई गंभीर समस्या नहीं है। “उनकी सेहत काफी अच्छी है; कोई गंभीर बात नहीं है। दो दिन पहले उन्हें खांसी और सीने में जकड़न (कंजेशन) की शिकायत थी, जिसके चलते उन्हें यहां भर्ती कराया गया था। वे अपनी सेहत को लेकर हमेशा बहुत सतर्क रहते हैं, इसलिए वे रूटीन चेक-अप के लिए आए थे।”
पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक में रूटीन मेडिकल चेक-अप और सीने की जकड़न व थकान के इलाज के बाद पवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। वे आराम करने के लिए मुंबई स्थित अपने आवास ‘सिल्वर ओक’ चले गए हैं। डॉक्टरों ने उन्हें अपनी यात्राओं को सीमित करने, ज्यादा भागदौड़ न करने और खान-पान के सख्त नियमों का पालन करने की सलाह दी है।
डॉक्टरों ने उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों में फिर से शामिल होने से पहले कम से कम 2 से 4 दिन तक पूरा आराम करने की सलाह दी है। शरद पवार अपनी बेटी और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले के साथ सीधे दक्षिण मुंबई स्थित अपने घर चले गए। आराम करने के दौरान वे अपनी निजी मेडिकल टीम की देखरेख में रहेंगे।
इससे पहले, सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “बाबा अब काफी बेहतर हैं और हम मुंबई जा रहे हैं। रूबी हॉल की पूरी टीम का बहुत-बहुत धन्यवाद, जिन्होंने उनका इतना अच्छा ख्याल रखा। आप सभी की शुभकामनाओं के लिए मैं तहे दिल से आभारी हूं।”
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