महाराष्ट्र
मुंबई: क्या एफसीयू ऑनलाइन फर्जी खबरों की पहचान करने के लिए प्रिंट के लिए आवेदन करेगा, हाईकोर्ट ने विचार किया
बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को इस बात पर विचार किया कि क्या फर्जी खबरों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत फैक्ट चेक यूनिट (एफसीयू) को प्रिंट मीडिया पर भी लागू किया जाएगा। “क्या केंद्र ने प्रिंट और ऑनलाइन मीडिया के बीच अंतर किया है? यदि बिल्कुल वही सामग्री प्रिंट (मीडिया) और ऑनलाइन में है, तो क्या प्रिंट (मीडिया) एफसीयू के हस्तक्षेप के बिना रहेगा? क्या एफसीयू केवल ऑनलाइन सामग्री को हटाने के लिए कहेगा” न्यायमूर्ति गौतम पटेल और नीला गोखले की खंडपीठ ने पूछा। एचसी संशोधित आईटी नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें सरकार के व्यवसाय से संबंधित नकली या गलत या भ्रामक ऑनलाइन सामग्री को चिह्नित करने के लिए एफसीयू का प्रावधान भी शामिल था। स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन्स द्वारा दायर याचिकाओं में नियमों को “मनमाना, असंवैधानिक” बताते हुए उनके खिलाफ निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिकाओं में तर्क दिया गया है कि इसका नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर “डराने वाला प्रभाव” पड़ेगा।
गुरुवार को सुनवाई के दौरान पीठ ने पूछा कि केंद्र प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सूचना के बीच इस पुल को कैसे संबोधित करने का प्रस्ताव रखता है? कामरा के वकील नवरोज़ सीरवई ने जवाब दिया कि केंद्र एफसीयू के माध्यम से जानकारी को नियंत्रित करने की कोशिश करते समय सामग्री की “पहुंच, स्थायित्व और वायरलिटी” पर जोर दे रहा था। वकील ने बताया कि अधिकांश अखबारों में एक पदानुक्रम होता है जो यह तय करता है कि अंततः क्या छपेगा। हालाँकि, जहाँ तक ऑनलाइन सामग्री का सवाल है, कोई भी कुछ भी प्रकाशित कर सकता है। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजीआई) की ओर से पेश वकील शादान फरसाट ने तर्क दिया कि केंद्र ने इस द्वंद्व को संबोधित नहीं किया है। पीठ ने टिप्पणी की कि हर अखबार का एक ऑनलाइन संस्करण होता है। क्या उसे मध्यस्थ माना जाएगा और उस सामग्री को हटाने के लिए कहा जाएगा जो एफसीयू को “झूठी, नकली या भ्रामक” लगती है? पीठ ने पूछा। “अगर किसी अखबार में कोई राय छपी है और कोई उसकी फोटो खींचकर ट्विटर पर डाल देता है। वे (एफसीयू) ट्विटर से इसे हटाने के लिए कहते हैं, लेकिन प्रिंट के बारे में क्या? यह (राय) माध्यम (प्रिंट) के माध्यम से नहीं बोलता है और सामग्री के माध्यम से बोलता है, ”न्यायमूर्ति पटेल ने टिप्पणी की।
फरसाट ने कहा कि सरकार सर्कुलेशन के जरिए हिट करने की कोशिश कर रही है। यदि सामग्री को एक निश्चित माध्यम पर रोक दिया जाता है, तो प्रसार कम हो जाएगा। “अख़बारों में विज्ञापन आय का सबसे बड़ा माध्यम है। यदि उसमें कटौती की गई तो परिसंचरण प्रभावित होगा। सर्कुलेशन स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति का एक हिस्सा है,” फरसाट ने कहा। पीठ ने टिप्पणी की कि वोट देने के अधिकार के अलावा, लोकतंत्र में सूचित विकल्प का अधिकार भी शामिल है। इसने यह भी कहा कि संशोधन एक प्रकार का “आदेश” था क्योंकि यह सामग्री को उचित ठहराने या बचाव करने का अवसर नहीं देता है। न्यायमूर्ति पटेल ने आगे कहा कि “सबसे अधिक परेशान करने वाली” बात यह है कि सरकार ने केवल सरकारी व्यवसाय से संबंधित सामग्री के लिए ‘लोको पेरेंटिस’ (एक प्रशासनिक प्राधिकारी द्वारा विनियमन या पर्यवेक्षण) की भूमिका क्यों निभाई है, न कि सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई प्रत्येक जानकारी या सामग्री के लिए। मीडिया. “(केंद्र का) जवाब कहता है कि हमें ऐसा करने की ज़रूरत है क्योंकि हम ‘लोको पेरेंटिस’ में हैं। लेकिन सिर्फ सरकार के कामकाज के लिए ही क्यों? आपको हर चीज़ के लिए ‘लोको पेरेंटिस’ में रहना चाहिए। इंटरनेट धोखाधड़ी के लिए उपजाऊ ज़मीन है। यह हर चीज के लिए लोको पेरेंटिस होना चाहिए, ”न्यायमूर्ति पटेल ने टिप्पणी की। न्यायाधीश ने आगे कहा, “मुझे यह उल्लेखनीय लगता है कि नियमों का प्रभाव बिना किसी कारण बताओ नोटिस या सामग्री को उचित ठहराने या बचाव करने के अवसर के बिना ही शुरू हो जाता है। यह स्वयं प्रदान किए गए सुरक्षित बंदरगाह को हटा देता है। यह एक तरह का फरमान है।” न्यायमूर्ति पटेल ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “सरकार के पास एक मोबाइल ऐप कवच है जो नागरिकों को सुरक्षा कवर प्रदान करता है। यह (संशोधित आईटी नियम) आपके कवच को हटा रहा है… यही हो रहा है।” एचसी 14 जुलाई को मामले की सुनवाई जारी रखेगा।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र : एसटी बस में बुजुर्ग यात्री से जेवर और नकदी चोरी, 4 महिला चोर गिरफ्तार

ARREST
महाराष्ट्र के वाशिम जिले में एक स्टेट ट्रांसपोर्ट (एसटी) बस में यात्रा कर रही 70 वर्षीय महिला से 1.5 लाख रुपये के सोने के गहने और 28,000 रुपये नकद चुराने के आरोप में चार महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बुधवार को इस बारे में जानकारी दी।
पुलिस ने चोरी हुए गहने और नकदी बरामद कर बुजुर्ग महिला, जिनकी पहचान चंद्रकला बोडखे के रूप में हुई है, को वापस कर दिए।
यह घटना मंगरुलपीर से अकोला जा रही एसटी बस में हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, चारों आरोपियों ने यात्रा के दौरान बुजुर्ग यात्री के उस बैग को निशाना बनाया जिसमें सोने के गहने और नकदी थी।
जब बस शेलू बाजार पहुंची, तो चारों महिलाएं उतर गईं। अन्य यात्रियों को शक हुआ, जिसके बाद बोडखे ने अपना बैग चेक किया और पाया कि उनके सोने के गहने और 28,000 रुपये नकद वाला बैग गायब था। बुजुर्ग महिला ने शोर मचाया और अन्य यात्रियों से मदद मांगी।
घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि चारों महिलाएं ऑटो-रिक्शा से उस इलाके से चली गई थीं।
तेजी से कार्रवाई करते हुए पुलिस ने संदिग्धों का पीछा किया और चारों महिलाओं को पकड़ लिया। उनके पास से चोरी हुए सोने के गहने और नकदी बरामद की गई और बाद में बुजुर्ग महिला को वापस सौंप दी गई।
यह घटना भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक परिवहन में यात्रा करने वाले यात्रियों, खासकर कीमती सामान ले जाने वाले बुजुर्ग यात्रियों के लिए सतर्क रहने की जरूरत को उजागर करती है।
एक अलग घटना में, पुणे पुलिस ने शहर में दर्ज चोरी के नौ मामलों के सिलसिले में हरियाणा के तीन लोगों को गिरफ्तार किया। कई राज्यों में लगभग 4,600 किलोमीटर की यात्रा वाली जांच के बाद पुलिस ने लगभग 23 लाख रुपये का कीमती सामान जब्त किया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने गणेशोत्सव समारोह और गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान भीड़-भाड़ वाली जगहों पर लोगों को निशाना बनाया था। इन मामलों की जांच विश्रामबाग पुलिस ने की, जिसने संदिग्धों की पहचान हरियाणा के पलवल के रहने वालों के तौर पर की।
इस बीच, गुजरात की अरावली पुलिस ने एक अन्य मामले के सिलसिले में उन्हीं तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। गुजरात पुलिस की मदद से पुणे पुलिस की एक टीम ने आरोपियों को हिरासत में लिया। उनकी पहचान अजय शमशेर विनोद कुमार रूपसिंह कोली (20), अमन शमशेर अनिल कुमार नारायणसिंह कोली (24) और दीपक शमशेर राजूभाई सापसिंह (21) के तौर पर हुई।
महाराष्ट्र
राहुल गांधी का खुद को भगवान शिव से जोड़ना बदतमीजी है : एकनाथ शिंदे

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने इंडिया ब्लॉक के आंदोलन की तुलना शिव तांडव और शिव बारात से करने पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब शिव का तीसरी आंख खुलेगी तो इंडिया ब्लॉक और सभी देशद्रोही भस्म हो जाएंगे।
आईएएनएस से बातचीत में एकनाथ शिंदे ने कहा कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं, लेकिन अब वे खुद को भगवान शिव के रूप में पेश करने और अपनी तुलना महादेव से करने लगे हैं। यह बच्चों जैसी जिद और बदतमीजी भरा व्यवहार है। यह कोई दिव्य तांडव नहीं, बल्कि सिर्फ बदतमीजी है। मेरा कहना है कि जो लोग खुद की तुलना भगवान शंकर से करते हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि जब भगवान शिव अपनी तीसरी आंख खोलेंगे, तो इंडी गठबंधन और देश के खिलाफ काम करने वाले लोग डलकर राख हो जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट तक इंडिया ब्लॉक के मार्च को लेकर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम ने कहा कि सोमवार का दिन देश के इतिहास में एक काले दिन के तौर पर याद किया जाएगा, क्योंकि लोकतंत्र और भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था का अपमान किया गया। भारत के इतिहास में सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ कभी कोई विरोध मार्च नहीं निकाला गया। यह देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था पर हमला है। वे देश में अशांति और अराजकता फैलाना चाहते हैं। यह एक बड़ी और सुनियोजित साजिश है।
उन्होंने कहा, “मैं कहूंगा कि यह एक अंतरराष्ट्रीय साजिश है। उनके साथ विरोध करना देशद्रोह है। विपक्ष के नेता कठपुतली की तरह काम करते हैं। यह शर्मनाक है कि वे देश की प्रगति में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं।”
एकनाथ शिंदे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ की और कहा कि देश 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी देश को नई ऊंचाइयों पर ले गए हैं। वह देश को 2047 तक ‘विकसित भारत’ की ओर ले जा रहे हैं। ऐसे समय में जब कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं चरमरा गई हैं, वह भारत को ‘फ्रैजाइल फाइव’ से निकालकर शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल कर रहे हैं। 140 करोड़ भारतीय प्रधानमंत्री के साथ खड़े हैं।
उन्होंने विपक्ष के नेताओं पर बार-बार चुनाव हारने के बावजूद सत्ता में लौटने के लिए बेताब होने का आरोप भी लगाया।
शिंदे ने कहा कि पानी के बिन जैसे मछली तड़पती है, वैसे सत्ता के बिना इंडिया ब्लॉक तड़प रहा है। यह सिर्फ देश को बदनाम करके कैसे भी सत्ता हासिल करना चाहते हैं। जनता ने तीन बार नकार दिया, हार की हैट्रिक हो गई है। फिर भी अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं।
इसी बीच एकनाथ शिंदे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सोमवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार से जुड़ी कथित घटना को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की आलोचना की।
एक महिला पत्रकार ने दावा किया था कि वह तीन महीने की गर्भवती है और आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन की कवरेज के दौरान गांधी ने उसका हाथ पकड़ा और उसे आगे खींचा, जिसके बाद उनके सुरक्षाकर्मियों ने उसे दूर धकेल दिया।
गांधी के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए शिंदे ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता का इस तरह का व्यवहार अनुचित है और उन पर पब्लिसिटी पाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने नागरिकों से इस बात पर विचार करने का आग्रह किया कि क्या विपक्ष के नेता देश को एकजुट करने के लिए काम कर रहे हैं या बांटने के लिए। यह देश जोड़ने वाले नहीं, तोड़ने वाले हैं। जिस तरह इंडिया ब्लॉक देश की प्रगति को रोकने की कोशिश कर रहा है, हमें उन्हें विफल करना होगा।
देश के खिलाफ काम करने के आरोपी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपनी मांग को दोहराते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि सिर्फ एफआईआर ही नहीं, अगर वे देश के खिलाफ बोल रहे हैं या देशद्रोह जैसी गतिविधियों में शामिल हैं, तो उन्हें जेल में डाल दिया जाना चाहिए।
आपातकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब लोग सुप्रीम कोर्ट जाने, विरोध प्रदर्शन आयोजित करने और अपनी राय व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र हैं, जबकि उस समय मीडिया पर प्रतिबंध लगाए गए थे।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में मतदाता सूची पर दावे-आपत्तियों की समय सीमा बढ़ी, अब 26 अक्टूबर तक कर सकते हैं आवेदन : सीएम फडणवीस

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर जानकारी दी है कि मतदाता सूची के मसौदे पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने की समय सीमा बढ़ा दी गई है। चुनाव आयोग ने यह समय सीमा 26 अक्टूबर तक बढ़ा दी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत मसौदा मतदाता सूची पर दावे-आपत्तियां दर्ज करने की अवधि बढ़ाई गई है। यह प्रक्रिया मतदाता सूची को सटीक और अपडेट रखने के लिए की जा रही है।
सीएम फडणवीस द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार नए शेड्यूल में दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि 31 अगस्त से 26 अक्टूबर तक है। दावे और आपत्तियों के निपटान की प्रक्रिया 31 अगस्त से 10 नवंबर तक है। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 16 नवंबर को किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने पात्र मतदाताओं से अपील की है कि वे मसौदा मतदाता सूची में अपना नाम और विवरण जांच लें। अगर किसी का नाम छूट गया है तो उसे जोड़ने के लिए आवेदन करें, अगर जानकारी में कोई गलती है तो सुधार के लिए आवेदन करें और जरूरत होने पर 26 अक्टूबर से पहले आपत्ति दर्ज कराएं।
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया हर पात्र नागरिक के वोट देने के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए की जा रही है, इसलिए पात्र नागरिकों को इस बढ़ाई गई समय सीमा का लाभ उठाना चाहिए। बता दें कि इसी बीच दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को लेकर इंडिया ब्लॉक का प्रदर्शन जारी है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस प्रदर्शन को ‘संविधान बचाने की लड़ाई’ बताया है और चुनाव आयोग पर सरकार के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है, जबकि चुनाव आयोग मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया में जुटा है।
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