राजनीति
साक्षी मलिक ने रेलवे ड्यूटी ज्वाइन करने के बावजूद पहलवानों के विरोध से हटने के दावों को खारिज किया
ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक ने रेलवे ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद खुद को स्पष्ट किया और सोमवार को पहलवानों के प्रदर्शन से हटने के दावों का खंडन किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मलिक ने उत्तर रेलवे में नौकरी ज्वाइन की है. विनेश पोघाट और बजरंग पुनिया भी कथित तौर पर अपने कर्तव्यों पर वापस आ गए हैं। कुछ दिनों पहले शीर्ष पहलवानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की थी। बैठक शनिवार को दिल्ली में अमित शाह के आवास पर देर से शुरू हुई और देर रात तक चली, क्योंकि पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की मांग की। शीर्ष पहलवान साक्षी मलिक के पति सत्यव्रत कादियान ने दावा किया कि गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक बेनतीजा रही क्योंकि पहलवानों को “गृह मंत्री से वह प्रतिक्रिया नहीं मिली जो वे चाहते थे।” शाह के साथ चर्चा केवल कुछ दिनों बाद हुई जब प्रदर्शनकारी पहलवानों ने हरिद्वार में गंगा नदी में अपने पदकों को त्यागने का प्रयास किया, लेकिन किसान कार्यकर्ता नरेश टिकैत ने उन्हें रोक दिया। उनकी रिहाई के बाद सरकार से मांग की गई कि भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह को 9 जून से पहले गिरफ्तार किया जाए। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमित शाह ने पहलवानों से कहा, “कानून को अपना काम करने दें।” इस बीच, मलिक भी सामने आए हैं, उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता, वे लड़ते रहेंगे। उन्होंने ट्विटर पर लोगों से गलत खबरें फैलाने से रोकने का आग्रह करते हुए लिखा, “यह गलत है कि मैंने अपनी शिकायत वापस ले ली है। न्याय की लड़ाई से कोई भी पीछे नहीं हटा है और न ही कोई जाएगा। मैं जिम्मेदारी से अपने कर्तव्य में शामिल हो रही हूं।” विरोध जारी है। हमारी लड़ाई तब तक जारी है जब तक हमें न्याय नहीं मिलता। आपसे अनुरोध है कि गलत खबरें न फैलाएं।” पहलवान बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ विरोध कर रहे हैं, उन्होंने एक नाबालिग सहित महिला पहलवानों का यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है। बृज भूषण के खिलाफ अब तक दो प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं और उन पर पोक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, पिछले हफ्ते चीजें बदतर हो गईं, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने अपने समर्थकों के साथ, नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह के दौरान मार्च करने का फैसला किया। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया और कुछ पहलवानों के साथ कथित तौर पर बदसलूकी की और हिरासत में ले लिया। पुलिस ने उनके खिलाफ कई धाराओं में प्राथमिकी भी दर्ज की है। उस उपचार के जवाब में एथलीट मंगलवार को गंगा नदी में अपने पदक त्यागने हरिद्वार पहुंचे। भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के अध्यक्ष नरेश टिकैत भी घटनास्थल पर पहुंचे और उनसे अपने फैसले में पांच दिन की देरी करने को कहा। उन्होंने कहा कि सरकार को उचित कार्रवाई के लिए 7 से 10 दिन का समय दिया जाना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ऑस्ट्रियाई विदेश मंत्री भारत दौरे पर, एस जयशंकर के साथ अहम बैठक आज

भारत दौरे पर आईं ऑस्ट्रिया की यूरोपीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों की संघीय मंत्री बीआटे माइनल-रीसिंगर बुधवार को अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर से मुलाकात करेंगी। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, यह बैठक नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में होगी।
भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से ये वार्ता अहम मानी जा रही है।
माइनल-रीसिंगर 27 अक्टूबर से 2 नवंबर तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। नई दिल्ली में अपने कार्यक्रम पूरे करने के बाद वह 29 अक्टूबर से 2 नवंबर तक जयपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी।
दोनों देश व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार और लोगों के बीच संपर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। दोनों देशों ने हाल के वर्षों में उच्चस्तरीय संपर्कों के जरिए अपने संबंधों को आगे बढ़ाया है।
भारत और ऑस्ट्रिया के द्विपक्षीय संबंध वर्तमान में ‘उन्नत साझेदारी’ के रूप में लगातार मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों ने कूटनीतिक संबंधों के 75 साल पूरे कर लिए हैं। संबंधों को मजबूत बनाने की खातिर जुलाई 2024 में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वियना का दौरा किया था। यह 41 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली ऑस्ट्रिया यात्रा थी।
अप्रैल 2026 में ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर भारत यात्रा पर आए। इस दौरान भी द्विपक्षीय सहयोग को व्यापक बनाने पर सहमति बनी थी। दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा संवाद शुरू करने और कंपनियों तथा निवेशकों के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था स्थापित करने की घोषणा की थी।
भारत और ऑस्ट्रिया के बीच 2025 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 3.47 अरब डॉलर रहा था। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगातार समृद्ध हो रहे हैं। भारत मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक सामान, वस्त्र और मशीनरी का निर्यात करता है, जबकि ऑस्ट्रिया से भारी मशीनरी, इस्पात और वाहन आयात किए जाते हैं।
राष्ट्रीय समाचार
उमेश पाटिल बने एनसीपी के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता, जीशान सिद्दीकी बने मुंबई इकाई के क्षेत्रीय अध्यक्ष

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया गया है। उमेश पाटिल को पार्टी का राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया गया है जबकि पार्टी एमएलसी जीशान सिद्दीकी को मुंबई क्षेत्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी।
जीशान सिद्दीकी जो 2024 के विधानसभा चुनाव में बांद्रा पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से हार गए थे, दिवंगत वरिष्ठ राजनेता बाबा सिद्दीकी के बेटे हैं। एनसीपी नेतृत्व ने पूरा भरोसा जताया है कि जीशान सिद्दीकी के मार्गदर्शन, ऊर्जा और समर्पण से मुंबई में पार्टी संगठन काफी मजबूत, अधिक प्रभावी और पूरी तरह से जन-केंद्रित बनेगा।
पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा अजित पवार ने इस संबंध में नियुक्ति पत्र जारी किया है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि अजित पवार के विचारों और आदर्शों की विरासत, उनकी जनसेवा की परंपरा और आम लोगों के प्रति प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उमेश पाटिल को यह जिम्मेदारी दी जा रही है। सुनेत्रा पवार ने उम्मीद जताई है कि उमेश पाटिल पूरी निष्ठा, उत्साह और समर्पण के साथ पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करेंगे। उन्होंने अपनी शुभकामनाएं भी दी हैं।
बता दें कि सुनेत्रा पवार 31 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम बनीं। उनके पति और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार का 28 जनवरी को विमान हादसे में निधन हो गया था।
अजीत पवार के निधन के बाद खाली हुए पद और राजनीतिक निरंतरता को बनाए रखने के लिए 31 जनवरी को एनसीपी विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में सुनेत्रा पवार को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुना गया। इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र सरकार में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई।
अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी महाराष्ट्र में सत्ताधारी महायुति गठबंधन का हिस्सा है। इस गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना भी शामिल है। राष्ट्रीय स्तर पर यह पार्टी एनडीए का हिस्सा है।
उमेश पाटिल की नियुक्ति को पार्टी के संचार और मीडिया रणनीति को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में संगठन में और भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पार्टी अब अजित पवार की विरासत को आगे ले जाने की कोशिश में है और इसी कड़ी में अनुभवी और सक्रिय नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।
राजनीति
तमिलनाडु सरकार ने माल ढोने वाले वाहनों की मनमानी जांच पर रोक लगाई

तमिलनाडु के वाणिज्यिक कर आयुक्त ने एक सर्कुलर जारी कर अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे बिना किसी ठोस कारण के माल ढोने वाले वाहनों को न रोकें और न ही उनकी जांच करें। इस कदम का उद्देश्य सड़क किनारे होने वाली जांच को कम करना और ट्रक ड्राइवरों तथा व्यापारियों को हो रही परेशानियों को आसान बनाना है।
सर्कुलर के अनुसार, प्रवर्तन टीमों (एनफोर्समेंट टीमों) को कार्रवाई करने की अनुमति तभी मिलेगी, जब विभाग को कोई विश्वसनीय और ठोस जानकारी मिले कि कोई वाहन वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानूनों का उल्लंघन करके सामान ले जा रहा है।
इन निर्देशों से विभाग की वाहन जांच व्यवस्था में बदलाव आया है। मौजूदा “रोविंग स्क्वॉड” को हटाकर उनकी जगह “फ्लाइंग स्क्वॉड” बनाए गए हैं। ये स्क्वॉड नियमित गश्त के बजाय, नियमों के उल्लंघन की आशंका वाली जानकारी के आधार पर काम करेंगे।
नई व्यवस्था के तहत फ्लाइंग स्क्वॉड के कर्मचारी कमर्शियल टैक्स जॉइंट कमिश्नर के कार्यालय में तैनात रहेंगे। अब वे सड़कों पर घूम-घूमकर माल ले जाने वाले वाहनों को मनमाने ढंग से नहीं रोकेंगे।
इसके बजाय, किसी विशेष वाहन और उसमें लदे सामान के बारे में ठोस जानकारी मिलने पर ही कार्रवाई की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य बिना सोचे-समझे की जाने वाली जांच को रोकना है ताकि विभाग केवल उन्हीं मामलों में कार्रवाई कर सके जहां कर नियमों के उल्लंघन का संदेह हो।
बार-बार होने वाली जांच ट्रक ड्राइवरों के लिए एक बड़ी परेशानी बन गई है क्योंकि उन्हें अपनी यात्रा के दौरान कई जगहों पर रोककर पूछताछ का सामना करना पड़ सकता है।
भले ही सभी जरूरी दस्तावेज पूरे हों, फिर भी इस तरह रोके जाने से ड्राइवरों और व्यापारियों को काफी तनाव का सामना करना पड़ सकता है। इसमें बार-बार पूछताछ किए जाने से होने वाली परेशानी का भी जिक्र है। साथ ही, यह सर्कुलर एक बेहतर और सटीक प्रवर्तन प्रणाली के जरिए इन चिंताओं को दूर करने की कोशिश करता है।
बिना किसी ठोस कारण के वाहनों को रोके जाने के विरोध में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) का हवाला दिया गया है। यह अनुच्छेद नागरिकों को अपनी पसंद का पेशा अपनाने या कोई भी व्यापार या व्यवसाय करने की आज़ादी देता है। बताया गया है कि ये निर्देश पूरे तमिलनाडु में तुरंत लागू हो गए हैं।
इस फैसले को व्यापारियों, लॉरी मालिकों और ड्राइवरों के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्हें जरूरी कागजात होने के बावजूद अक्सर रास्ते में रोककर जांच का सामना करना पड़ता था।
प्रवर्तन अधिकारियों के लिए नई व्यवस्था के तहत किसी वाहन को रोकने का एक स्पष्ट आधार तय किया गया है। किसी विशिष्ट वाहन से जुड़े जीएसटी उल्लंघन के बारे में विश्वसनीय जानकारी या इनपुट होना।
इस बदलाव का मकसद जांच-पड़ताल को और अधिक सटीक बनाना है, ताकि माल ढुलाई में बेवजह की रुकावटें न आएं। साथ ही, विभाग के पास यह अधिकार बना रहेगा कि अगर उसे किसी उल्लंघन के बारे में कोई पुख्ता जानकारी मिलती है, तो वह उसकी जांच कर सके।
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