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Thursday,24-September-2026
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अदाणी पावर का वित्तीय प्रदर्शन दूसरी तिमाही में मजबूत रहा, बिजली की बिक्री 7.4 प्रतिशत बढ़ी

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अहमदाबाद, 30 अक्टूबर: अदाणी पावर लिमिटेड (एपीएल) ने गुरुवार को वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी किए। कंपनी की आय इस साल की जुलाई-सितंबर अवधि में 13,106.34 करोड़ रुपए रही है, जो कि पिछले साल की समान अवधि में 12,949.12 करोड़ रुपए थी। इसकी वजह बिजली की बिक्री की मात्रा में इजाफा होना था।

कंपनी के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कंपनी की कंसोलिडेटेड बिजली बिक्री की मात्रा 7.4 प्रतिशत बढ़कर 23.7 अरब यूनिट्स हो गई है।

कंपनी ने बताया कि बिक्री की मात्रा में वृद्धि उच्च आधार और मानसून जल्दी आने और लंबे समय तक मांग में व्यवधान बने रहने के बावजूद हुई है।

अदाणी पावर का कंसोलिडेटेड ईबीआईटीडीए दूसरी तिमाही में 6,001 करोड़ रुपए रहा है, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 6,000 करोड़ रुपए था।

जुलाई-सितंबर अवधि में, कंपनी ने बिहार डिस्कॉम के साथ 2,400 मेगावाट, मध्य प्रदेश के डिस्कॉम के साथ 1,600 मेगावाट और कर्नाटक डिस्कॉम के साथ 570 मेगावाट (अक्टूबर 2025 तक) का लंबी अवधि का पावर परचेस एग्रीमेंट (पीपीए) साइन किया है।

दूसरी तिमाही में अदाणी पावर ने कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिसॉल्यूशन प्रोसेस के तहत 600 मेगावाट की क्षमता वाली विदर्भ इंडस्ट्रीज पावर लिमिटेड का अधिग्रहण किया है, जिससे कंपनी की क्षमता 18,150 मेगावाट हो गई है।

अदाणी पावर लिमिटेड के सीईओ एसबी ख्यालिया ने कहा, “मौसम संबंधी उतार-चढ़ाव के बावजूद, अदाणी पावर ने इस तिमाही में एक बार फिर मजबूत और स्थिर वित्तीय प्रदर्शन किया है, जो हमारी परिचालन दक्षता और प्रतिस्पर्धी लाभों को दर्शाता है। हम शक्ति स्कीम के तहत 4.5 गीगावाट के नए लंबी अवधि के पीपीए हासिल करके बाजार में अपनी उपस्थिति का लगातार विस्तार कर रहे हैं।”

उन्होंने बताया, “मजबूत मुनाफा और लिक्विडिटी, हमें 2031-32 तक 42 गीगावाट के अपने क्षमता विस्तार लक्ष्य को प्राप्त करने की स्थिति में ला खड़ा करती है। हमने पूरे 23.7 गीगावाट विस्तार के लिए जमीन और उपकरण के ऑर्डर पहले ही दे दिए हैं और परियोजना का कार्यान्वयन तेजी से आगे बढ़ रहा है।”

वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में मर्चेंट और शॉर्ट-टर्म सेल्स वॉल्यूम 12.9 प्रतिशत बढ़कर 5.7 बिलियन यूनिट रही, जबकि वित्त वर्ष 25 की दूसरी तिमाही में यह 5.0 बिलियन यूनिट थी। इसी प्रकार, वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में मर्चेंट वॉल्यूम 10.5 प्रतिशत बढ़कर 11.4 बिलियन यूनिट रही, जबकि वित्त वर्ष 25 की पहली छमाही में यह 10.3 बिलियन यूनिट थी।

राष्ट्रीय समाचार

असम के नगांव में स्ट्रीट लाइट के खंभे से टकराई गाड़ी, तीन लोग जिंदा जले, दो की हालत गंभीर

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असम के नगांव जिले में एक गाड़ी के स्ट्रीट लाइट के खंभे से टकराने के बाद आग लगने से तीन लोगों की जलकर मौत हो गई। इस दुर्घटना में दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

एक स्ट्रीट लाइट पोल से टकराने के बाद जिस वाहन में वे यात्रा कर रहे थे उसमें आग लग गई, जिससे तीन लोगों की जलकर मौत हो गई और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

यह हादसा पुरानेगुदाम इलाके के पास केनापट्टी में हुआ। गाड़ी अरुणाचल प्रदेश से गुवाहाटी की ओर जा रही थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, चालक ने कथित तौर पर वाहन से नियंत्रण खो दिया और सड़क के बीच में लगे एक स्ट्रीटलाइट पोल से टकरा गया।

टक्कर के बाद वाहन में आग लग गई और देखते ही देखते वाहन पूरी तरह से जल गया। वाहन में सवार तीन लोग अंदर फंस गए और जलते हुए वाहन से बाहर नहीं निकल सके। गंभीर रूप से झुलसने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने गाड़ी से मृतकों के शव बाहर निकाले और पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजे।

इस हादसे में विकास कुमार और सोनू कुमार समेत दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें पहले चिकित्सा उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जिसके बाद उन्हें गुवाहाटी स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि वाहन में सवार लोग कथित तौर पर बिहार के रहने वाले थे और गुवाहाटी की ओर जा रहे थे, तभी यह दुर्घटना हुई। जानकारी से पता चला है कि मरने वाले तीनों लोग रास्ते में ही गाड़ी में सवार हुए थे। अधिकारी उनकी पहचान करने और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे किन हालात में यात्रा कर रहे थे।

पुलिस ने बताया कि गाड़ी विकास कुमार की थी, जबकि हादसे के समय सोनू कुमार गाड़ी चला रहा था।

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राष्ट्रीय समाचार

‘चुनाव आयोग में बगावत’: शिवसेना (यूबीटी) ने सर्वसम्मति से फैसले लेने के ईसीआई के दावे पर उठाए सवाल

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शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे-यूबीटी) ने गुरुवार को भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला किया। पार्टी ने चुनाव आयोग पर ‘घर के नौकर’ की तरह काम करने और संवैधानिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कम करने का आरोप लगाया।

मीडिया की जांच रिपोर्टों का हवाला देते हुए ठाकरे गुट ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के एक संपादकीय में चुनाव आयोग के भीतर गंभीर आंतरिक मतभेदों को उजागर किया। इसमें बताया गया कि साथी चुनाव आयुक्त सुखबीर संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के मनमाने और ‘माफिया-जैसे’ कामकाज के तरीके पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी।

संपादकीय में आरोप लगाया गया कि सीईसी ज्ञानेश कुमार ने बार-बार इन आपत्तियों को नजरअंदाज किया और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए एकतरफा तरीके से मतदाताओं के नाम जोड़ते या हटाते रहे। कोई विकल्प न बचने पर, असहमति रखने वाले दोनों आयुक्तों ने कथित तौर पर यह मामला सीधे कैबिनेट सचिवालय तक पहुंचाया, जिससे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को चुनाव निकाय के भीतर चल रहे आंतरिक संकट के बारे में पता चला।

संपादकीय में ‘विशेष सारांश संशोधन’ (एसएसआर) प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए और इसे एक ‘सिस्टमैटिक स्कैम’ (व्यवस्थागत घोटाला) करार दिया गया। “एसएसआर प्रक्रिया की आड़ में पूरे भारत में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं को मताधिकार से वंचित कर दिया गया है, जिनमें प्रमुख नागरिक और जानी-मानी हस्तियां भी शामिल हैं। महाराष्ट्र की मतदाता सूची से कथित तौर पर दो करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए।”

संपादकीय में बताया गया कि हाल ही में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान वोटों की संख्या में अचानक 42 लाख की बढ़ोतरी हुई, जिससे भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत का रास्ता साफ हो गया।

संपादकीय में यह भी कहा गया कि पश्चिम बंगाल और बिहार में विधानसभा चुनावों के दौरान भी लाखों मतदाताओं के नाम इसी तरह जानबूझकर हटाए गए थे। केंद्रीय गृह मंत्री पर सीधा निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने अमित शाह को संवैधानिक गिरावट के पीछे का मुख्य ‘मास्टरमाइंड’ बताया जबकि पूर्व सीईसी राजीव कुमार और मौजूदा सीईसी ज्ञानेश कुमार को ‘संवैधानिक माफिया’ और ‘लोकतंत्र का हत्यारा’ करार दिया।

इसमें ईसीआई नेतृत्व पर पार्टियों में फूट को बढ़ावा देने और पार्टी के असली नाम व चुनाव चिह्न अलग हुए गुटों को सौंपकर लोकतंत्र को कमजोर करने का भी आरोप लगाया गया।

संपादकीय में जोर देकर कहा गया कि जनता का सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं से पूरी तरह भरोसा उठ गया है। प्रधानमंत्री मोदी से तुरंत दखल देने की मांग करते हुए संपादकीय में कहा गया, “जब तक अमित शाह और ज्ञानेश कुमार जैसे लोग सत्ता में हैं, भारत के संविधान का कोई मतलब नहीं है। प्रधानमंत्री को उन्हें तुरंत हटा देना चाहिए – तभी देश को बचाया जा सकता है। चूंकि शाह और कुमार खुद इस्तीफा नहीं देंगे, इसलिए उन्हें हटाना ही पीएम मोदी के पास एकमात्र विकल्प बचा है।”

संपादकीय में राहुल गांधी, ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे और तेजस्वी यादव जैसे विपक्षी नेताओं की चुनावी गड़बड़ियों के खिलाफ लगातार आवाज उठाने के लिए तारीफ की गई, साथ ही अंदरूनी गड़बड़ियों को सामने लाने के लिए कमिश्नर संधू और जोशी की भी सराहना की गई।

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राष्ट्रीय समाचार

भारत-श्रीलंका ने समुद्र में परखा तालमेल, ‘स्लिनेक्स-26’ को दिया अंजाम

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भारत और श्रीलंका की नौसेनाओं ने समुद्र में एक संयुक्त युद्धाभ्यास मिशन पूरा किया है। इस युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देशों की नौसेना ने अपनी ऑपरेशनल क्षमताओं और आपसी तालमेल को परखा। इस नौसैनिक अभ्यास को ‘स्लिनेक्स-26’ नाम दिया गया। ‘स्लिनेक्स-26’ में दोनों देशों के युद्धपोतों ने समुद्री युद्धाभ्यास, हवाई अभियान, रात में समुद्र में रसद आपूर्ति और विशेष बलों के अभियानों का अभ्यास किया।

भारत और श्रीलंका की नौसेनाओं ने संयुक्त समुद्री अभ्यास के दौरान समुद्र में विभिन्न तरह के अभियानों का अभ्यास किया। दोनों देशों के युद्धपोतों ने समन्वित समुद्री युद्धाभ्यास में हिस्सा लिया। हवाई अभियानों से लेकर रात में समुद्र के बीच रसद की आपूर्ति तक का अभ्यास किया गया। विशेष बलों ने भी कई महत्वपूर्ण गतिविधियों में हिस्सा लिया। पांच दिन चले इस अभ्यास का विशाखापत्तनम में समापन किया गया है।

भारत और श्रीलंका की नौसेनाओं के बीच ‘स्लिनेक्स-26’ का 13वां संस्करण 17 सितंबर से शुरू किया गया था। भारतीय नौसेना के मुताबिक, इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी समझ, परिचालन तालमेल और संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता को और मजबूत करना था। इस दौरान दोनों पक्षों ने अपने अनुभव साझा किए और समुद्री अभियानों में अपनाई जाने वाली बेहतर कार्यप्रणालियों पर संवाद किया। अभ्यास का पहला चरण बंदरगाह पर आयोजित हुआ। इसमें दोनों नौसेनाओं के अधिकारियों और जवानों के बीच पेशेवर बातचीत हुई।

दोनों पक्षों के नौसैनिकों ने एक-दूसरे के युद्धपोतों का दौरा किया। खेल गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। इससे दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी संपर्क और सहयोग को बढ़ाने का अवसर मिला। इसके बाद अभ्यास का समुद्री चरण शुरू हुआ। इसमें दोनों नौसेनाओं ने एक साथ कई समुद्री युद्धाभ्यास किए। हवाई अभियानों के दौरान समुद्री और हवाई संसाधनों के बीच तालमेल का अभ्यास किया गया। रात के समय समुद्र में एक-दूसरे को जरूरी रसद और आपूर्ति उपलब्ध कराने की कार्रवाई भी की गई। इससे कठिन परिस्थितियों में संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता को परखा गया।

विशेष बलों ने भी अभ्यास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने जहाज पर चढ़ने, तलाशी लेने और कब्जे में लेने की कार्रवाई का अभ्यास किया। इसके अलावा हेलीकॉप्टर से रस्सी के सहारे तेजी से नीचे उतरने की कार्रवाई भी की गई। इन अभ्यासों से समुद्री अभियानों के दौरान दोनों नौसेनाओं के बीच बेहतर समन्वय बनाने का मौका मिला। ‘स्लिनेक्स-26’ के दौरान हुए अभ्यासों ने दोनों देशों की नौसेनाओं को एक-दूसरे की परिचालन प्रक्रियाओं को समझने और साथ मिलकर काम करने की क्षमता को मजबूत करने का अवसर दिया।

नियमित द्विपक्षीय अभ्यासों से दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग और आपसी तालमेल को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता से भी जुड़ी है।‘स्लिनेक्स-26’ इसी साझा प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाता है। यह समुद्री अभ्यास भारत के ‘महासागर’ विजन और ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के अनुरूप दोनों देशों के रक्षा संबंधों को और मजबूत करने में योगदान भी देता है।

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