राष्ट्रीय समाचार
कश्मीर में आतंकी धमकी मिलने के बाद पांच स्थानीय पत्रकारों ने दिया इस्तीफा
कश्मीर में एक स्थानीय समाचार पत्र के लिए काम करने वाले पांच पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर आतंकी धमकी मिलने के बाद इस्तीफा दे दिया है। आतंकवादियों ने हाल ही में एक दर्जन से अधिक पत्रकारों की सूची जारी की जिन पर सुरक्षा एजेंसियों के लिए काम करने का आरोप लगाया गया था। सूची में नामों में स्थानीय समाचार पत्रों के दो संपादक शामिल हैं।
मंगलवार को इस्तीफा देने वाले पांच पत्रकारों में से तीन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अपना इस्तीफा प्रकाशित किया।
पुलिस के मुताबिक, इन धमकियों के पीछे लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आतंकी समूह द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) का हाथ है।
पुलिस ने कहा, धमकियों की सामग्री आतंकवादियों और राष्ट्र-विरोधी तत्वों के इरादे को दर्शाती है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से भ्रष्ट कहकर और सीधे धमकी देकर लोगों, विशेष रूप से मीडियाकर्मियों के जीवन को खतरे में डाल दिया है।
पुलिस ने कहा कि इस मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है और लगभग एक दर्जन संदिग्धों को उठाया गया है, जिनसे पूछताछ की जा ही है।
राष्ट्रीय समाचार
‘महिला सुरक्षा के लिए कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं’, नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या मामले पर बोलीं प्रियंका

दिल्ली में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और हत्या के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में महिला सुरक्षा के लिए कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार ही नहीं है।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “दिल्ली में एक 17 साल की बच्ची के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं और उसके बाद उसे बर्बरता से मार डाला गया।”
उन्होंने कहा कि कुछ ही दिनों पहले एक और नाबालिग लड़की का बलात्कार किया गया। देश में महिला सुरक्षा के लिए कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार ही नहीं है। महिलाओं के विकास की सिर्फ खोखली बातें की जाती हैं। सैकड़ों महिलाओं पर अत्याचार होते हैं और हिंसा होती है, मगर अपराधियों पर ठोस कार्रवाई की वे उम्मीद नहीं कर सकतीं। एफआईआर दर्ज तक नहीं होते।
साथ ही, प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि समाज और सरकार दोनों, महिलाओं को सुरक्षा, स्वतंत्रता और समानता का अधिकार देने में पूरी तरह से विफल हैं।
इससे पहले, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली की घटना को लेकर कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के बिना भारत आगे नहीं बढ़ सकता।
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “दिल्ली में 17 साल की युवती के साथ गैंगरेप हुआ, उसकी हत्या कर शव खुले मैदान में फेंक दिया गया। राजधानी में इतनी बड़ी दरिंदगी और पुलिस को कई दिनों तक भनक नहीं लगती। दुर्भाग्य है कि दिल्ली आज राजधानी नहीं, महिलाओं के लिए हर दिन की खौफनाक कहानी बनकर रह गई है।”
कांग्रेस सांसद ने लिखा, “अमित शाह जी, दिल्ली पुलिस आपके अधीन है। महिला सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? या दिल्ली पुलिस का काम सिर्फ आम नागरिकों को डराना-धमकाना रह गया है? क्योंकि अपराधी तो बेखौफ घूम रहे हैं। दरिंदों की तत्काल गिरफ्तारी हो, कड़ी कार्रवाई और सजा मिले, और इस आपराधिक गैर-जिम्मेदारी की जवाबदेही तय हो।”
यह मामला 13 सितंबर को सामने आया, जब उत्तरी दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके में कुशक रोड पर जयपाल राणा के खेत के पास एक बुरी तरह सड़ी-गली लाश मिली। हालत ऐसी थी कि पुलिस शुरू में यह भी तय नहीं कर पाई कि शव लड़के का है या लड़की का।
जांच में पीड़िता की पहचान की गई। बाद में पता चला कि इस वारदात को चार लोगों ने अंजाम दिया, जिनमें तीन नाबालिग हैं। आरोपियों ने बाद में लड़की के शव को खुले इलाके में फेंक दिया था। पुलिस के अनुसार, पीड़िता आरोपियों को जानती थी और उनके साथ टेंपो में सफर कर रही थी। सफर के दौरान सभी ने शराब पी और फिर लड़की के साथ दुष्कर्म किया गया। इसके बाद चाकू से गोदकर उसकी हत्या कर दी गई और शव को खुले खेत में फेंक दिया गया।
राजनीति
प्रधानमंत्री मोदी 19 सितंबर को ग्लोबल एनवायरनमेंट कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 सितंबर को ‘पर्यावरण और जलवायु की गतिशीलता का भविष्य’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इस सम्मेलन में पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी अहम चुनौतियों और न्यायिक दृष्टिकोणों पर चर्चा की शुरुआत होगी।
आधिकारिक बयान के अनुसार, दिल्ली में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में 17 देशों के जज और न्यायिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। वे पॉलिसी बनाने, उसे लागू करने और उसके पालन में आने वाली कमियों जैसी चुनौतियों पर चर्चा करेंगे और पर्यावरण से जुड़े कामकाज (गवर्नेंस) और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर विचार करेंगे।
बयान में कहा गया है कि इस सम्मेलन में पर्यावरण विशेषज्ञ, भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज, डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज, विभिन्न मंत्रालयों के सचिव, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, राज्य न्यायिक अकादमियों, राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों, राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समितियों (एसईएसी), राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरणों (एसईआईएए), राज्य वेटलैंड प्राधिकरणों और अन्य संबंधित पक्षों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
यह सम्मेलन न्यायिक दृष्टिकोण और पर्यावरण से जुड़े कामकाज के तरीकों के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करेगा। सम्मेलन पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी अहम चुनौतियों जैसे पॉलिसी बनाने, उसे लागू करने और उसके पालन में कमियों पर बातचीत को बढ़ावा देगा और पर्यावरण से जुड़े कामकाज और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर विचार करेगा।
इससे पहले, ‘नीले आसमान के लिए स्वच्छ हवा के अंतरराष्ट्रीय दिवस’ के मौके पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के चेयरपर्सन जस्टिस (रिटायर्ड) प्रकाश श्रीवास्तव ने स्वच्छ हवा को विलासिता की चीज नहीं बल्कि एक बुनियादी जरूरत बताया था। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण एक जटिल चुनौती है क्योंकि यह राजनीतिक सीमाओं को नहीं मानता।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा ‘स्वच्छ वायु दिवस 2026’ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए जस्टिस श्रीवास्तव ने कहा, “विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं बल्कि नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता बनाए रखते हुए साथ-साथ चल सकते हैं।”
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के चेयरपर्सन ने इस बात पर जोर दिया कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि आने वाली पीढ़ियां स्वच्छ पर्यावरण में रह सकें।
जस्टिस श्रीवास्तव ने कहा, “स्थानीय निकायों को नागरिकों को जागरूक करके प्रदूषण को उसके स्रोत पर ही रोकने की कोशिश करनी चाहिए; समस्या से निपटने के लिए नवीनतम तकनीकों को अपनाना चाहिए और समस्या के समाधान के लिए सभी को शामिल करने वाले और ‘पूरे समाज’ के दृष्टिकोण को अपनाना चाहिए।”
पर्यावरण सचिव तन्मय कुमार ने कहा कि सरकार प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुसार वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कई स्तरों वाले, समन्वित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपना रही है। इस कार्यक्रम के दौरान, पर्यावरण मंत्रालय ने ‘नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’ (एनसीएपी) के तहत सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले शहरों और वार्डों को भी सम्मानित किया। इन्हें 5वें ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण’ के तहत रैंकिंग दी गई थी।
राष्ट्रीय समाचार
भारत का प्रत्यक्ष कर संग्रह 13 प्रतिशत बढ़कर 12.12 लाख करोड़ रुपए पहुंचा

भारत का प्रत्यक्ष कर संग्रह चालू वित्त वर्ष में अब तक (1 अप्रैल से 17 सितंबर तक) सालाना आधार पर 13 प्रतिशत बढ़कर 12.12 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। यह जानकारी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की ओर से शुक्रवार को दी गई।
सरकारी डेटा के मुताबिक, सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 15 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 14.3 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
कॉर्पोरेट कर संग्रह 19.48 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5.56 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जबकि व्यक्तिगत आयकर और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) से होने वाला कर संग्रह 6 प्रतिशत बढ़कर 6.16 लाख करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गया है।। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में, 1 अप्रैल से 17 सितंबर के बीच सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) संग्रह 53 प्रतिशत बढ़कर 40,214 करोड़ रुपए हो गया है।
आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान रिफंड जारी करने में 29 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई और यह 2.2 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर गया।
17 सितंबर तक एडवांस टैक्स संग्रह 16.18 प्रतिशत बढ़कर 5.22 लाख करोड़ रुपए हो गया। इसमें एडवांस कॉर्पोरेट टैक्स संग्रह 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 4.16 लाख करोड़ रुपए और नॉन-कॉर्पोरेट एडवांस टैक्स संग्रह 9.24 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1.06 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।
पिछले महीने के आखिर में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में भारत का राजकोषीय घाटा 4.55 लाख करोड़ रुपए रहा, जो पूरे वित्त वर्ष के लिए तय लक्ष्य का 26.8 प्रतिशत है।
यह पिछले साल इसी अवधि के राजकोषीय घाटा से कम है, जो 4.7 लाख करोड़ रुपए था और पूरे वित्त वर्ष के अनुमान का 29.9 प्रतिशत था।
वित्त वर्ष 2027 के लिए, केंद्र सरकार ने 16.96 लाख करोड़ रुपए के राजकोषीय घाटे का बजट रखा है, जो देश की जीडीपी का 4.3 प्रतिशत है। सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में 4.4 प्रतिशत का राजकोषीय घाटे लक्ष्य हासिल किया था और राजकोषीय समेकन के तहत मौजूदा वित्त वर्ष के लिए इसे घटाकर जीडीपी का 4.3 प्रतिशत कर दिया है।
राजकोषीय घाटे में कमी आने से अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत होती है और कीमतों में स्थिरता के साथ विकास का रास्ता खुलता है। इससे सरकार की उधारी कम होती है, जिससे बैंकिंग सेक्टर में कॉर्पोरेट्स और उपभोक्ताओं को कर्ज देने के लिए ज्यादा फंड बचता है, और इससे आर्थिक विकास में तेजी आती है।
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