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Monday,12-October-2026
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एलजी ने ‘रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ’ फाइल वापस भेजी, पुनर्विचार करने की सलाह दी

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दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने ‘रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ’ अभियान से संबंधित फाइल मुख्यमंत्री को भेजी है और फाइल पर उनके (एलजी) द्वारा की गई टिप्पणियों के आलोक में प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने और फिर से जमा करने की सलाह दी है। अत्यधिक प्रदूषित यातायात चौराहों और साइटों पर नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों (सीडीवी) के उपयोग को रेखांकित करते हुए, एलजी ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि अभियान का मूल आधार जो ‘बहुतों के स्वास्थ्य’ की रक्षा करने की धारणा पर ‘कुछ व्यक्तियों’ के स्वास्थ्य को जोखिम में डालने का प्रयास करता है, दोषपूर्ण है और किसी अन्य सभ्य महानगरीय शहर में इसका कोई समानांतर नहीं दिखता है।

उन्होंने आगे कहा- इस बात का कोई सबूत नहीं कि इस तरीके से कैंपेन चलाने से वायु प्रदूषण पर नियंत्रण किया जा सकता है। ये कैंपेन सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। साल दर साल और लंबे समय में ऐसे उपायों को लागू करने के लिए तकनीकी समाधान खोजने की जरूरत है, न कि मनुष्यों को तैनात करने और उन्हें जोखिम में डालने की।

एलजी ने कहा- यह अच्छी तरह से प्रलेखित है कि यद्यपि वायु प्रदूषण से हम सभी को खतरा है, लेकिन समाज के गरीब और हाशिए के वर्गों में प्रदूषण का अधिक और अधिक प्रभाव पड़ता है, जो अक्सर संपन्न लोगों द्वारा निर्मित होता है। प्रस्तावित अभियान के तहत स्वयंसेवकों की तैनाती उसी असमानता को सु²ढ़ और कायम रखने के लिए प्रतीत होती है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है और जीवन और समानता के मूल अधिकार का उल्लंघन है।

पिछले अभियानों के परिणाम प्रस्ताव में परिलक्षित नहीं हैं और शहर में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए पहले के अभियानों की प्रभावशीलता का समर्थन करने के लिए कोई प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट प्रदान नहीं की गई है। साथ ही, अभियान के तहत ट्रैफिक क्रॉस सेक्शन में तैनात किए जाने के लिए प्रस्तावित स्वयंसेवकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए कई जोखिम गंभीर ध्यान देने योग्य हैं।

उन्होंने कहा, दिल्ली के लोग जो वायु प्रदूषण के कारण सबसे अधिक पीड़ित हैं, वह जागरूक और सतर्क नागरिक हैं जो अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक हैं और इस तरह के प्रदूषण को कम करने के लिए अपने दम पर कोई भी उपाय करेंगे। एलजी ने प्रस्तावित अभियान के लिए स्वयंसेवकों की नियुक्ति की अनुमति देने के प्रस्ताव की कानूनी वैधता को रेखांकित करते हुए कानून विभाग और राजस्व विभाग के परामर्श से इसकी जांच करने का निर्देश दिया है।

उन्होंने यह भी कहा, यह प्रस्ताव माननीय मुख्यमंत्री के स्तर पर 11 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक 10 दिनों से अधिक समय से लंबित था और फाइल मेरे कार्यालय में 21 अक्टूबर को ही प्राप्त हुई थी। दिल्ली के मंत्री गोपाल राय के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कि एलजी को दिल्ली में लोगों के जीवन के साथ राजनीति नहीं करनी चाहिए, एलजी ने कहा, मैं यह उल्लेख करने के लिए विवश हूं कि एक मंत्री की ओर से निराधार आरोपों, झूठे आरोपों और राजनीतिक आक्षेपों को शामिल करने वाला ऐसा तुच्छ व्यवहार कहने के लिए अनुचित है। यह एक संवैधानिक प्राधिकरण के खिलाफ किया गया था, केवल राजनीतिक एकता और प्रचार के लिए अत्यंत अनुचित और दुर्भाग्यपूर्ण है। इस प्रकार के प्रचार से बचना चाहिए और माननीय मंत्री जी को सार्वजनिक महत्व के ऐसे मुद्दों में सतर्क रहने की सलाह दी जानी चाहिए।

इस तरह की हरकतों से बचने के लिए सीएम और उनके मंत्रियों को सलाह देते हुए, एलजी ने कहा, जैसा कि एक अन्य प्रस्ताव में बताया गया है, जैसा कि एक अन्य प्रस्ताव में बताया गया है, माननीय मुख्यमंत्री और माननीय मंत्रियों की ओर से मुद्दों को समय से पहले प्रचारित करने और मेरे पास मामला प्रस्तुत करने से पहले या मेरे विचाराधीन होने पर राजनीतिक आरोप लगाने के ऐसे कृत्य, मूल का उल्लंघन करते हैं शासन के सिद्धांत और साथ ही विषय पर एक स्वतंत्र राय तैयार करने के मेरे संवैधानिक अधिकार को प्रतिबंधित/बाधित करता है। एक बार फिर सलाह दी जाती है कि व्यापक जनहित में और शासन प्रणाली के सामंजस्यपूर्ण और संवैधानिक कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए ऐसे कृत्यों से बचना चाहिए।

राष्ट्रीय समाचार

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने पर अभिजीत दिपके का हमला, बोले-सरकार को विरोध की आवाज से दिक्कत

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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन पर रोक लगा दी है। कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके ने निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र को लोगों के विरोध करने के विचार से दिक्कत थी।

अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आज पीएम मोदी ने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की तय जगह के तौर पर हटा दिया। कल वे लोकतंत्र को ही खत्म कर देंगे। तानाशाह को कभी विरोध-प्रदर्शन की जगह से दिक्कत नहीं थी। दिक्कत तो लोगों के विरोध करने के विचार से थी।”

दरअसल, गृह मंत्रालय की कमेटी की सिफारिश के आधार पर दिल्ली पुलिस ने नई गाइडलाइंस जारी करते हुए जंतर-मंतर को तय विरोध स्थल की सूची से हटा दिया है। अब विरोध प्रदर्शन के लिए तीन नई जगहें; रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबी मैदान (पूर्वी दिल्ली) तय की गई है।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने नागरिकों के विरोध-प्रदर्शन के अधिकार के लिए मौजूदा तय जगह के अलावा अन्य उपयुक्त स्थानों की जांच के लिए एक समिति बनाई थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर यह फैसला किया गया है। इन तीनों जगहों पर प्रदर्शन के लिए विस्तृत और संशोधित एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) अलग से जारी की जाएगी। दिल्ली पुलिस का यह आदेश 28 अप्रैल 2022 के पुराने स्टैंडिंग ऑर्डर में आंशिक बदलाव है।

जंतर-मंतर लंबे समय से देश में लोकतांत्रिक विरोध का केंद्र रहा है। लगातार किसी न किसी मुद्दे को लेकर वहां प्रदर्शन होते रहे हैं। हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन करने की कोशिश की थी। उस दौरान पुलिस और प्रशासन ने कई सख्त कदम उठाए थे। सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया था।

उस प्रदर्शन के दौरान स्थिति ऐसी बनी थी कि दिल्ली सरकार को करीब 45 मेट्रो स्टेशन बंद करने पड़े थे और कई ट्रेनों को भी रद्द करना पड़ा था, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

सरकार का कहना है कि जंतर-मंतर पर बार-बार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों से मध्य दिल्ली में यातायात और जनजीवन प्रभावित होता है। इसी को देखते हुए प्रदर्शन स्थलों को शहर के बाहरी इलाकों में शिफ्ट किया गया है। वहीं विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इसे विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश बताया है।

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राष्ट्रीय समाचार

वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में मिले-जुले रह सकते हैं नतीजे, चुनिंदा क्षेत्रों में मांग मजबूत : रिपोर्ट

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वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में कॉरपोरेट नतीजे अलग-अलग सेक्टर्स में मिले-जुले रह सकते हैं। हालांकि, इस दौरान लागत पर दबाव बने रहने के बावजूद, कुछ खास इंडस्ट्रीज को मजबूत मांग से सहारा मिलेगा। यह जानकारी सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

पीएल कैपिटल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) को मौजूदा अच्छे औसत इक्विटी एसेट्स से फायदा होने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के अनुसार, कवरेज दायरे में आने वाली कंपनियों की मुख्य आय में तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 3.6 प्रतिशत और साल-दर-साल आधार पर 11.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है।

इसके अलावा, बैंकों में लोन ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है, जबकि शुद्ध ब्याज मार्जिन पर निगरानी रखनी होगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑटो और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की तरफ से लोन बांटने की स्थिर वृद्धि से ग्रोथ को सहारा मिल सकता है, लेकिन बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, ऑटो सेक्टर में रिटेल मांग और त्योहारों के लिए स्टॉक जमा करने से आपूर्ति को बढ़ावा मिला, लेकिन कच्चे माल की ऊंची लागत और सप्लाई-चेन में रुकावटों से मुनाफे पर असर पड़ने की उम्मीद है।

इसके अलावा, बिल्डिंग मटीरियल सेक्टर में अलग-अलग ट्रेंड देखने को मिल सकते हैं। पाइप का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहने की उम्मीद है, जबकि वुड पैनल को निर्यात से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सीमेंट इंडस्ट्री के वॉल्यूम में सालाना आधार पर लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है, हालांकि ईंधन की ऊंची लागत से मुनाफे पर दबाव पड़ने की संभावना है।

इसी तरह, कंज्यूमर स्टेपल्स में दोहरे अंकों की ग्रोथ का अनुमान है, हालांकि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में महंगाई और बारिश की अनिश्चितताओं का असर पड़ सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वायर और केबल की ग्रोथ से कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर को फायदा होने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के अनुसार, इंडस्ट्रियल सेक्टर में ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन पर फोकस करने वाली कैपिटल गुड्स कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद है, जबकि इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन गतिविधियों पर काम पूरा करने से जुड़ी चुनौतियों का असर पड़ सकता है।

इसमें आगे कहा गया है कि इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े काम की रफ्तार स्थिर रहने की उम्मीद है, हालांकि नए ऑर्डर मिलने की गति धीमी हुई है।

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अपराध

ओडिशा से रायपुर लाया जा रहा 23.5 किलो गांजा जब्त, चार तस्कर गिरफ्तार

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छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अंतर्राज्यीय चेकपोस्ट पर बड़ी सफलता हासिल की है।

पुलिस ने एक कार से 23.500 किलोग्राम गांजा बरामद कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले में करीब 19.95 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की गई है।

पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि किआ कैरेंस कार (ओडी 02 सीटी 3301) में अवैध गांजा लेकर कुछ तस्कर ओडिशा से छत्तीसगढ़ की ओर आ रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने एनएच-53 स्थित अंतर्राज्यीय चेकपोस्ट पर नाकेबंदी की। कुछ देर बाद संदिग्ध वाहन को रोककर उसकी जांच की गई।

कार में सवार चारों व्यक्तियों से पूछताछ के दौरान उनके जवाब संदिग्ध पाए गए। पूछताछ करने पर उन्होंने कार में गांजा होने की बात स्वीकार की। तलाशी लेने पर वाहन की पिछली सीट के पीछे रखी सफेद रंग की बोरी से 23.500 किलो गांजा बरामद हुआ, जिसकी अनुमानित कीमत 11.75 लाख रुपए बताई गई है।

आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे गांजा ओडिशा के बौध जिले से लेकर रायपुर (छत्तीसगढ़) पहुंचाने जा रहे थे।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गांजे के अलावा तस्करी में प्रयुक्त किआ कैरेंस कार (कीमत 8 लाख रुपए) और चार मोबाइल फोन (कीमत 20,500 रुपए) भी जब्त कर लिए। कुल जब्त संपत्ति की कीमत 19,95,500 रुपए आंकी गई है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान केशव गाई गौउरिया (32), स्वागत महाकुल (26), मनतोष पौड (28) और रविन्द्र बस्तिया (26) के रूप में हुई है। सभी आरोपी ओडिशा के बौध जिले के निवासी हैं।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ थाना सिंघोडा में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) II(बी) के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब गांजे की सप्लाई चेन, सोर्स प्वाइंट, डेस्टिनेशन प्वाइंट और आर्थिक लेन-देन की भी जांच कर रही है।

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