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Tuesday,15-September-2026
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हरमनप्रीत के आतिशी शतक से भारत ने 23 वर्षों में इंग्लैंड में पहली वनडे सीरीज जीती

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कप्तान हरमनप्रीत कौर (नाबाद 143) के आतिशी शतक से भारत ने इंग्लैंड को दूसरे वनडे में मंगलवार को 88 रन से हराकर 23 वर्षों में इंग्लैंड की जमीन पर पहली बार वनडे सीरीज जीत ली। भारत ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अपराजेय बढ़त बना ली है।

भारत ने 50 ओवर में पांच विकेट पर 333 रन का विशाल स्कोर बनाया और फिर इंग्लैंड को 44.2 ओवर में 245 रन पर ढेर कर मुकाबला जीत लिया। 111 गेंदों में 18 चौकों और चार छक्कों की मदद से नाबाद 143 रन बनाने वाली हरमनप्रीत को प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला। हरमनप्रीत का यह पांचवां वनडे शतक था जिसकी बदौलत भारत ने अपना दूसरा सर्वाधिक स्कोर बनाया।

अपनी 143 रनों की पारी में हरमनप्रीत ने मैदान के चारों दिशाओं में कुछ कमाल के शॉट्स लगाए, जिसमें कई बेहतरीन पुल, स्लॉग स्वीप, कट जैसे शॉट थे। उनकी इस पारी की बदौलत ही भारत 333 का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा करने में सफल रहा, जो अंतत: उन्हें 88 रनों की जीत दिलाने में कामयाब रहा।

इस साल दूसरी बार भारत की टीम 300 का स्कोर पार करने में सफल रही है। इसस पहले उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ विश्व कप में 317 का स्कोर बनाया था। वनडे इतिहास में भारतीय टीम सिर्फ़ चार ही बार 300 से ज्यादा का स्कोर बनाने में सक्षम हो पाई है और उसमें दो उन्होंने इसी साल बनाए हैं।

यास्तिका भाटिया के आउट होने के बाद हरमनप्रीत बल्लेबाजी करने आईं और उनके आने के कुछ ही देर बाद स्मृति मंधाना भी पवेलियन लौट गई। उस व़क्त भारत का स्कोर तीन विकेट के नुकसान पर 99 रन था। उस समय एक बार के लिए ऐसा लगा कि भारत के बल्लेबाज एक बार फिर से टीम को निराश कर सकते हैं।

हालांकि इसमें भी कोई दो मत नहीं है कि हरमनप्रीत अब पहले की तुलना में टीम को ज्यादा बेहतर तरीके से संभाल रही हैं। खास कर के जब से मिताली राज के जाने के बाद उन्हें सभी फॉर्मेट का कप्तान बनाया गया, वह पूर्ण अधिकार के साथ टीम को आगे लेकर जा रही हैं। कई बार ऐसा प्रतीत भी हुआ है कि टीम की सभी खिलाड़ी भी एक साहसी नेतृत्वकर्ता के साथ कदम से कदम मिला कर चलने का पूरा प्रयास कर रहीं हैं।

हरमनप्रीत का पचासा 64 गेदों में आया और उसके बाद के 50 रन उन्होंने 36 गेंदों में बनाएं। शतक पूरा करने के बाद उन्होंने सिर्फ़ 11 गेंदों में 43 रन बटोरे।

तीसरे विकेट के पतन के बाद हरलीन देओल क्रीज पर आई और वहीं से भारत ने फिर से एकबार संभलने का प्रयास करते हुए, बड़े स्कोर की नींव रखना शुरू कर दिया। पहले सात ओवर में दोनों बल्लेबाजों ने संभल कर बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ़ 24 रन बटोरे। हालांकि इस दौरान रन रेट भी 4.75 का हो गया लेकिन दोनों बल्लेबाजों ने कुछ व़क्त के लिए इस चीज से अपना ध्यान हटा कर क्रीज पर टिकने का मन बना लिया था।

हरलीन को क्रीज पर समय बिताना पसंद है और उसके बाद ही वह बड़े शॉट्स लगाती हैं। इस पारी में उन्होंने कुछ ऐसा ही करने का प्रयास किया। पहले 36 गेंदों पर उन्होंने सिर्फ़ 18 ही रन बनाए थे लेकिन उसके बाद केट क्रॉस के खिलाफ आगे निकल कर बड़ा शॉट लगाते हुए, उन्होंने अपनी पारी का गियर बदल लिया। 66 गेंदों में हरलीन ने अपना पचासा पूरा किया और उसके बाद वह और भी आक्रामक हो गईं। हालांकि टीम के रन रेट को बढ़ाने के प्रयास में वह बेल की गेंद पर डीप मिडविकेट की दिशा में कैच दे बैठी। उस समय भारत का स्कोर 40 ओवर में 212 रन था।

वहीं हरमनप्रीत का पचासा 64 गेंदों में आया और उसके बाद के 50 रन उन्होंने 36 गेंदों में बनाएं। शतक पूरा करने के बाद तो हरमनप्रीत एक अलग ही मूड में बल्लेबाजी करने लगीं और सिर्फ़ 11 गेंदों में 43 रन बटोरे। भारतीय टीम ने अंतिम तीन ओवर में 62 रन लूटे।

हरमनप्रीत और हरलीन के बीच चौथे विकेट के लिए हुए 113 रन की साझेदारी ने ही भारत को इंग्लैंड के खिलाफ अंतिम दस ओवरों में 121 रन बनाने में सक्षम बनाया।

इस सब के अंत में हरमनप्रीत ने यह सुनिश्चित किया कि वह और उनकी पूरी टीम अनुभवी तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी को एक उपयुक्त विदाई देने के उद्देश्य से तीसरे वनडे में लॉर्डस के मैदान पर उतरेगी।

विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड की टीम 47 रन पर तीन विकेट गंवा कर संकट में फंस गयी। डैनी वायट ने 65 और कप्तान एमी जोन्स ने 39 रन बनाये लेकिन लक्ष्य के दबाव में इंग्लैंड की टीम अपने विकेट गंवाती रही। निचले क्रम में शार्लेट डीन ने 44 गेंदों पर 37 रन बनाये लेकिन ये पर्याप्त नहीं थे और मेजबान टीम 245 रन पर सिमट गयी।

रेणुका सिंह ने 57 रन देकर चार विकेट झटके जबकि दयालन हेमलता को छह रन पर दो विकेट मिले।

अंतरराष्ट्रीय

कुवैत ने नेतन्याहू की सीरिया यात्रा को बताया ‘संप्रभुता का उल्लंघन’

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कुवैत ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सीरिया दौरे पर घोर आपत्ति की है। कड़ी निंदा करते हुए इसे “अवैध प्रवेश” करार दिया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सीरिया की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है।

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि वह “अपने भाई सीरियाई अरब गणराज्य की भूमि में इजरायली प्रधानमंत्री के अवैध प्रवेश” की कड़े शब्दों में निंदा करता है।

बयान में कहा गया कि नेतन्याहू का सीरिया में प्रवेश देश की संप्रभुता और उसकी भूमि की अखंडता का “घोर उल्लंघन” है। मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन बताया।

कुवैत ने सीरिया में इजरायल की लगातार घुसपैठ और सैन्य कार्रवाइयों पर भी चिंता जताई। मंत्रालय के मुताबिक, सीरियाई क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही हैं और सुरक्षा एवं स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।

कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीरिया में इजरायल की लगातार कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे कदमों के खिलाफ रुख अपनाने और सीरिया की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

यह बयान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां सीरिया में इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर अरब देशों की ओर से लगातार आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुवैत ने अपने बयान में सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान को अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

दरअसल, नेतन्याहू रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और आईडीएफ के डिप्टी चीफ-ऑफ-स्टाफ मेजर-जनरल तामिर यदाई के साथ बुधवार को इजरायली कब्जे वाले दक्षिणी सीरिया में सैनिकों से मिलने गए थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि अपने दम के बल पर इजरायल ने रणनीतिक रूप से अहम स्थलों पर सफलतापूर्वक कब्जा कर रखा है। दक्षिणी सीरिया में, इजरायली सैनिक एक तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में तैनात हैं; वे दिसंबर 2024 में लंबे समय तक शासक रहे बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद देश के अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़े थे।

इजरायल उस इलाके में मौजूद है जो पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाला बफर जोन था; यह जोन 1974 से इजरायल के कब्जे वाले गोलन हाइट्स में इजरायली और सीरियाई सेनाओं को अलग करता था।।

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अंतरराष्ट्रीय

मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

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भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।

सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”

इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।

गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”

गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”

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अंतरराष्ट्रीय

ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

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ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।

इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।

ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।

हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।

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