अपराध
किशोरों को वयस्क जेलों में रखना उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करना है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता राष्ट्रीय अदालतों द्वारा बताई जाने वाली सबसे पुरानी अवधारणाओं में से एक है, और किशोरों को वयस्क जेलों में बंद करना कई पहलुओं पर उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करना है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की पीठ ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता की अवधारणा को कहीं अधिक व्यापक व्याख्या मिली है और आज स्वीकार की गई धारणा यह है कि स्वतंत्रता में वे अधिकार और विशेषाधिकार शामिल हैं, जिन्हें लंबे समय से एक स्वतंत्र व्यक्ति द्वारा खुशी की व्यवस्थित खोज के लिए आवश्यक माना जाता है।
पीठ ने सोमवार को दिए एक फैसले में कहा, यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि किशोरों को वयस्क जेलों में बंद करना कई पहलुओं पर उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करना है।
पीठ ने कहा कि किशोर न्याय प्रणाली के पदाधिकारियों में बच्चे के अधिकारों और संबंधित कर्तव्यों के बारे में जागरूकता कम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक बार बच्चा वयस्क आपराधिक न्याय प्रणाली के जाल में फंस जाता है, तो बच्चे के लिए इससे बाहर निकलना मुश्किल होता है।
शीर्ष अदालत ने एक हत्या के दोषी की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं, जिसने उम्रकैद की सजा काट रहे अपराध के समय नाबालिग होने का दावा किया था। याचिकाकर्ता, जिसकी सजा को 2016 में शीर्ष अदालत ने बरकरार रखा, उसने कोर्ट से उत्तर प्रदेश सरकार को उसकी सही उम्र के सत्यापन के लिए निर्देश देने की मांग की।
याचिकाकर्ता विनोद कटारा की ओर से पेश अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा ने कहा कि उनके मुवक्किल ने किशोर होने की दलील नहीं दी थी, फिर भी कानून उन्हें किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2011 के प्रावधानों के संबंध में इस समय भी इस तरह की याचिका दायर करने की अनुमति दे रहा है।
याचिकाकर्ता को परिवार रजिस्टर प्रमाण पत्र भी प्राप्त हुआ, जहां उसका जन्म वर्ष 1968 दिखाया गया था, और दावा किया कि अपराध के समय वह 14 वर्ष का था।
पीठ ने कहा, ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ समय बाद, रिट आवेदक यूपी पंचायत राज (परिवार रजिस्टरों का रखरखाव) नियम, 1970 के तहत जारी परिवार रजिस्टर दिनांक 02.03.2021 के रूप में एक दस्तावेज प्राप्त करने की स्थिति में था। फैमिली रजिस्टर सर्टिफिकेट, रिट आवेदक का जन्म वर्ष 1968 के रूप में दिखाया गया है।
कोर्ट ने कहा कि यह रिकॉर्ड पर रखे गए दस्तावेजी सबूत हैं जो कानून के संघर्ष में एक किशोर की उम्र निर्धारित करने में एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
शीर्ष अदालत ने चिकित्सा आयु निर्धारण परीक्षण का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह का परीक्षण तीन डॉक्टरों की एक टीम द्वारा किया जाएगा, जिनमें से एक डॉक्टर को रेडियोलॉजी विभाग का प्रमुख होना जरुरी है।
आगे कहा गया, हम आगरा के सत्र न्यायालय को इस आदेश के संचार की तारीख से एक महीने के भीतर कानून के संबंध में रिट आवेदक के किशोर होने के दावे की जांच करने का निर्देश देते हैं।
शीर्ष अदालत ने सत्र अदालत को याचिकाकर्ता द्वारा उद्धृत परिवार रजिस्टर को सत्यापित करने का निर्देश दिया।
अपराध
सिरसा में युवक की चाकुओं से गोदकर हत्या, लड़की के भाई और उसके साथी ने दिया वारदात को अंजाम

सिरसा, 10 जून: हरियाणा के सिरसा में कुछ युवकों द्वारा एक युवक की चाकुओं से गोदकर बड़ी बेरहमी से हत्या करने का मामला सामने आया है। मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा हुआ है। हमलावरों के हमले से संदीप नामक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया जिसे, सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया है।
मौत से पहले के -वीडियो में युवक गंभीर रूप घायल दिखाई दे रहा है। युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह घटना की जानकारी दे रहा है। पुलिस ने मृतक के परिजनों के बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
संदीप कुमार (22) सिरसा शहर के एकता नगर का निवासी था। संदीप का पिछले करीब दो वर्षों से वाल्मीकि मोहल्ला निवासी एक युवती के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। बताया जा रहा है कि दोनों एक-दूसरे को लंबे समय से जानते थे। हालांकि, युवती के परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले भी कई बार तनाव की स्थिति उत्पन्न हो चुकी थी।
घटना वाले दिन युवती के भाई ने अपने एक साथी के साथ मिलकर संदीप को बातचीत करने के बहाने घर से बाहर बुलाया। युवक बिना किसी आशंका के उनसे मिलने पहुंच गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ ही देर बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई।
आरोप है कि युवती के भाई और उसके साथी ने संदीप पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से वह खुद को संभाल नहीं पाया और लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़ा। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और युवक के परिजनों ने तुरंत घायल युवक को अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने युवक को मृत घोषित कर दिया। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। सिरसा के नागरिक अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हो गए।
मोहल्ला निवासी राजू लाडवाल ने बताया कि संदीप कुमार और एक लड़की के बीच काफी समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। हत्या की यह वारदात पूर्व नियोजित थी और आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से युवक को बुलाकर हमला किया। पुलिस ने मृतक के परिजनों की शिकायत के आधार पर युवती के भाई और उसके साथी के खिलाफ हत्या सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। सिरसा शहर थाना प्रभारी बलराज सिंह ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जल्द ही आगामी कार्रवाई की जाएगीएगी।
अपराध
एनआईए ने आतंकवादी शहजाद भट्टी से जुड़े टेरर-गैंगस्टर मामलों में पंजाब और हरियाणा में 18 जगहों पर ली तलाशी

नई दिल्ली, 9 जून: नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने मंगलवार को पाकिस्तान में रहने वाले आतंकवादी शहजाद भट्टी से जुड़े तीन टेरर-गैंगस्टर नेटवर्क मामलों के सिलसिले में पंजाब और हरियाणा में कई जगहों पर तलाशी ली।
एनआईए की टीमों ने दोनों राज्यों के नौ जिलों में 18 जगहों पर कई ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली और जरूरी जानकारी इकट्ठा करने के लिए कई लोगों से पूछताछ की। उन्होंने कई डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज भी जब्त किए, साथ ही उन लोगों की गतिविधियों, कम्युनिकेशन नेटवर्क और पैसों के लेन-देन से जुड़ी जानकारी भी हासिल की, जो इन तीन मामलों में एजेंसी की नजर में हैं।
तलाशी के दौरान इकट्ठा की गई सभी जानकारी और सबूतों को जांच-पड़ताल और फॉरेंसिक व टेक्निकल जांच के लिए भेजा गया है, ताकि सीमा पार की बड़ी साजिश का पता लगाया जा सके।
गैंगस्टर से आतंकवादी बने भट्टी द्वारा सीमा पार से चलाए जा रहे नेटवर्क के पीछे की बड़ी साजिश का पता लगाने के लिए एनआईए की चल रही जांच के तहत, कुछ लोगों को आगे की पूछताछ के लिए जांच में शामिल होने का नोटिस जारी किया गया है। आज की तलाशी का मकसद भट्टी के साथियों और उन अन्य लोगों की पहचान करना था जो इन तीनों मामलों से जुड़ी आतंकवादी साजिश में शामिल थे।
एनआईए की अब तक की जांच में जालंधर, पंजाब में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रोजर संधू के घर पर मार्च 2025 में हुए ग्रेनेड हमले का कनेक्शन शहजाद भट्टी से जुड़ा पाया गया है। अप्रैल 2026 में एनआईए ने भट्टी को भगोड़ा घोषित करते हुए और मामले में एक अन्य आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
एनआईए को यह भी पता चला है कि भट्टी ने नवंबर 2025 में सिरसा, हरियाणा के महिला पुलिस स्टेशन में हुए धमाके और जनवरी 2026 में अंबाला, हरियाणा के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन में हुए धमाके की भी साजिश रची थी। सिरसा मामले में एनआईए ने मई 2026 में भट्टी और पाकिस्तान में मौजूद एक और हैंडलर, सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलोच, समेत नौ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
बलदेव नगर पुलिस स्टेशन का मामला कार बम धमाके से जुड़ा है, जिसमें गिरफ्तार एक आरोपी भट्टी के संपर्क में पाया गया था। आतंकी हमलों से जुड़े सभी कनेक्शन का पता लगाने की एनआईए की जोरदार कोशिशों के तहत इन मामलों की जांच जारी है।
अपराध
कर्नाटक: ब्लैकमेल कर व्यापारी से 2.77 करोड़ रुपए वसूलने के आरोप में यूथ कांग्रेस नेता और उसका साथी गिरफ्तार

मंगलुरु, 9 जून: कर्नाटक के मंगलुरु में जबरन वसूली का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने एक प्रमुख व्यापारी को ब्लैकमेल करने और लगभग दो साल में 2.77 करोड़ रुपए वसूलने के आरोप में यूथ कांग्रेस के एक पदाधिकारी और उसके साथी को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों की पहचान मंगलुरु यूथ कांग्रेस के महासचिव निजाम और जितेश के तौर पर हुई है। आरोप है कि जितेश ने पहले व्यापारी को अपने जाल में फंसाया और बाद में उसकी अश्लील तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल करके उसे ब्लैकमेल किया। पुलिस ने बताया कि जितेश ने शुरू में 35 लाख की मांग की और वीडियो को पीड़ित की पत्नी को दिखाने की धमकी दी। अपनी बदनामी के डर से व्यापारी ने चेक के जरिए यह रकम दे दी।
जब पैसों की मांग जारी रही तो व्यापारी ने मदद के लिए निजाम से संपर्क किया, हालांकि पुलिस का आरोप है कि निजाम ने मदद करने के बजाय जितेश का साथ दिया और जबरन वसूली के इस रैकेट में शामिल हो गया।
इसके बाद दोनों ने आत्महत्या की एक झूठी कहानी रची। निजाम ने मई 2024 में व्यापारी को बताया कि जितेश ने आत्महत्या कर ली है और सुसाइड नोट में पीड़ित का नाम लिखा है। कहानी को सच साबित करने के लिए आरोपियों ने जितेश की मौत और अंतिम संस्कार की तस्वीरें दिखाईं और व्यापारी को आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी दी।
गिरफ्तारी और सामाजिक बदनामी के डर से व्यापारी पैसे देता रहा। पुलिस ने बताया कि 2024 से 2026 के बीच पीड़ित से कुल 2.77 करोड़ रुपए वसूले गए। यह धोखाधड़ी तब सामने आई जब जून 2026 में व्यापारी ने जितेश को मंगलुरु में जिंदा देखा। जिस व्यक्ति को वह मरा हुआ समझ रहा था, उसे जिंदा देखकर वह हैरान रह गया और उसने उरवा पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने निजाम और जितेश दोनों को गिरफ्तार कर लिया। मामले की और जानकारी के लिए आगे की जांच चल रही है। इस बीच गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर मंगलुरु और पूरे कर्नाटक के कई राजनीतिक नेताओं के साथ निजाम की तस्वीरें वायरल हो गई हैं।
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