अंतरराष्ट्रीय समाचार
महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन पर भारत में 11 सितंबर को राजकीय शोक घोषित
महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन से पूरा देश शोक में है। उनके सम्मान में ब्रिटेन में आज से 10 दिन का राजकीय शोक मनाया जाएगा, निधन के बाद से ही। बकिंघम पैलेस के बाहर लोगों को भारी हुजूम उमड़ना शुरू हो गया था।
जब तक कि महारानी का अंतिम संस्कार नहीं हो जाता, तब तक राजकीय शोक जारी रहेगा। बता दें कि महारानी का अंतिम संस्कार 10 दिन बाद किया जाएगा। हालांकि अंतिम संस्कार की तारीख घोषित होना अभी बाकी है।
वहीं, भारत में भी ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के सम्मान में देश में रविवार को एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। और इस दिन राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा।
केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को एक वक्तव्य जारी कर कहा कि ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का गुरूवार को निधन हो गया और सरकार ने उनके सम्मान में देश भर में एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है।
ग्रह मंत्रालय द्वारा ट्वीट करते हुए कहा कि महामहिम महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन पर सम्मान के निशान के रूप में 11 सितंबर को एक दिवसीय राजकीय शोक होगा।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
इजरायली राजदूत अजार ने भारत और इजरायल के स्टार्टअप, इको सिस्टम और शिक्षा की सराहना की

भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में भारत और इजरायल की शिक्षा, स्टार्टअप और इको सिस्टम की सराहना की। हाल के दिनों में भारत और इजरायल के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में तेजी आई है। इस बीच इजरायली राजदूत ने ये बयान दिया।
भारत में इजरायली राजदूत रूवेन अजार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “स्टैनफोर्ड के एक नए विश्लेषण के अनुसार, अमेरिका के बाहर की 18 शीर्ष यूनिवर्सिटी में से 6 इजरायली और 5 भारतीय को इस बात की संभावना के लिए चुना गया है कि उनके ग्रेजुएट में से कोई एक वेंचर-बैक्ड स्टार्टअप शुरू करेगा, जिससे एक यूनिकॉर्न कंपनी बनेगी!”
अजार का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और इजरायल के बीच तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। स्टैनफोर्ड का यह विश्लेषण वेंचर कैपिटल फंडिंग और यूनिकॉर्न बनने की दर के आधार पर किया गया है। इसके साथ ही इजरायली राजदूत ने द जेरुसेलम पोस्ट का एक लेख भी साझा किया।
इसमें दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज के पूर्व छात्रों द्वारा शुरू किए गए स्टार्टअप्स की सफलता को मापा गया। द जेरुसेलम पोस्ट में लिखा गया कि स्टैनफोर्ड के एक नए विश्लेषण के मुताबिक, नेगेव की बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी इस मामले में इजरायल में पहले और अमेरिका के बाहर की यूनिवर्सिटी में तीसरे नंबर पर है। इस बात की संभावना ज्यादा है कि उसका कोई ग्रेजुएट जो वेंचर-बैक्ड स्टार्टअप शुरू करेगा, वह आगे चलकर एक यूनिकॉर्न कंपनी बनाएगा।
अमेरिका के बाहर की 18 शीर्ष रैंक वाली संस्थाओं में छह इजरायली विश्वविद्यालय शामिल हुए, जो किसी भी अन्य देश से ज्यादा हैं। इजरायली संस्थानों में बेन-गुरियन विश्वविद्यालय का ऑड्स रेशियो 6.6 रहा, जो सबसे ऊंचा है। इसके बाद राइखमान विश्वविद्यालय, टेक्नियन-इजरायल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बार-इलान विश्वविद्यालय, तेल अवीव विश्वविद्यालय और हिब्रू विश्वविद्यालय यरूशलम का नंबर आता है।
इजरायली संस्थानों में राइखमान विश्वविद्यालय 5.4 के ऑड्स रेशियो के साथ दूसरे स्थान पर रहा। इसके बाद टेक्नियन 3.1 के साथ, बार-इलान विश्वविद्यालय 2.9 के साथ, तेल अवीव विश्वविद्यालय 2.8 के साथ और हिब्रू विश्वविद्यालय 2.2 के साथ रहा। शीर्ष 18 में भारत के 5 संस्थान शामिल थे, जबकि कनाडा के 3 और यूनाइटेड किंगडम के 2 संस्थान इस सूची में थे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान के साथ शांति समझौता बरकरार रखने के लिए अमेरिका पर दबाव बनाना जरूरी है: राष्ट्रपति पेजेश्कियन

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि अमेरिका को दोनों देशों के बीच हस्ताक्षर किए गए शांति समझौते (एमओयू) पर कायम रहने के लिए मजबूर करना चाहिए।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि एमओयू पर ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्यों के बीच एक राय है।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, पेजेश्कियन ने कहा कि उनका मानना है कि यह एमओयू भविष्य में ईरान के विदेशी संबंधों का केंद्र बिंदु होगा।
उन्होंने कहा, “हमें दुश्मन को उस बात पर मजबूर करने की कोशिश करनी चाहिए जिस पर उसने हस्ताक्षर किया है। इस एमओयू से देश, इलाके और हमारे साथियों की सुरक्षा बेहतर होगी।”
इस बीच, ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री सैयद माजिद इब्न अल-रजा ने रविवार को कहा कि तेहरान हर दुश्मन की धमकी को वास्तविक और गंभीर मानता है। उन्होंने इसे महज मनोवैज्ञानिक युद्ध करार दिए जाने को खारिज कर दिया।
अल-रजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “हम न तो आश्चर्यचकित होंगे और न ही निष्क्रिय रहेंगे। हम धमकियों को अपनी तैयारी बढ़ाने, अपनी रोकथाम क्षमता मजबूत करने और अपनी ताकत विकसित करने के आधार के रूप में इस्तेमाल करते हैं।”
यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ नए हमले टालने की बात कहने के बाद आया।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर अपने पोस्ट में कहा कि अमेरिका पूरी तरह तैयार है और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ सैन्य आतंक, ताकत और शक्ति के उस स्तर पर कार्रवाई के लिए तैयार है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं देखा गया।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान और अन्य मध्य पूर्वी देशों के अनुरोध पर उन्होंने हमला टाल दिया है। उन्होंने एक आगामी समझौते का हवाला दिया जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत और पूरी तरह से खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को समाप्त करना शामिल होगा।
इससे पहले अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि अमेरिका और इजरायल ईरानी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हफ्ते के अंत में हमले शुरू कर सकते हैं।
18 जून को, ईरान और अमेरिका ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत दोनों देशों को आखिरी समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिनों के अंदर बातचीत करनी थी। हालांकि, उनके बीच हाल ही में हुए तनाव के कारण बातचीत का नतीजा अधर में लटका हुआ है।
अमेरिकी सेना ने पिछले महीने ईरानी ठिकानों पर कई हमले किए। उनका कहना था कि ये हमले होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में किए गए थे और इनका मकसद कमर्शियल शिपिंग को धमकाने की ईरान की क्षमता को कम करना था। ईरान ने इस इलाके में अमेरिकी सैन्य बेस और जगहों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव पहुंचे नई दिल्ली, दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने पर फोकस

उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव, भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत करने के लिए सोमवार को आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे।
उनके आने का स्वागत करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव का नई दिल्ली में आधिकारिक दौरे पर आने पर बहुत गर्मजोशी से स्वागत है।”
सैदोव भारत सरकार के निमंत्रण पर तीन से पांच अगस्त तक भारत में रहेंगे। अपने दौरे के दौरान, उज्बेक के विदेश मंत्री राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलेंगे और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ भी बातचीत करेंगे।
वह नई दिल्ली में एक बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे, जिसमें दोनों देशों के बीच आर्थिक और कमर्शियल सहयोग बढ़ाने के मौकों पर बात करेंगे।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और उज्बेकिस्तान व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा, शिक्षा और कनेक्टिविटी जैसे कई क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करना चाहते हैं।
दौरे से पहले, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 20 जुलाई को सैदोव के साथ टेलीफोन पर बात की, जिसमें दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।
बातचीत के बाद, विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने कहा कि बातचीत व्यापार, निवेश और दूसरे क्षेत्र में हमारे द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने पर केंद्रित थी। सैदोव ने भी बातचीत को अहम बताया और कहा कि दोनों पक्ष अपने विदेश मंत्रालयों के बीच नियमित और भरोसे पर आधारित बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए।
भारत और उज्बेकिस्तान ने अपनी रणनीतिक साझेदारी के तहत करीबी डिप्लोमैटिक एंगेजमेंट बनाए रखा है। दोनों देशों ने मई में नई दिल्ली में फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन का 17वां राउंड आयोजित किया, जहां अधिकारियों ने द्विपक्षीय सहयोग की प्रोग्रेस की समीक्षा की और आपसी फायदे के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
सैदोव के दौरे से भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है, खासकर आर्थिक साझेदारी बढ़ाने और मध्य एशिया में दोनों रणनीतिक साझेदारों के बीच सहयोग के नए क्षेत्र तलाशने में।
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