राजनीति
सीडब्ल्यूसी आज करेगी कांग्रेस चुनाव कार्यक्रम पर फैसला
कांग्रेस ने पार्टी अध्यक्ष पद के लिए चुनाव कार्यक्रम तय करने के लिए रविवार को अपनी कार्यसमिति की बैठक बुलाई है। यह बैठक गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे के बाद होगी, जिन्होंने आरोप लगाया है कि चुनाव की पूरी प्रक्रिया मजाक थी और प्रॉक्सी को बढ़ावा दिया जा रहा था।
पार्टी के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने अपने ट्वीट में कहा, “सीडब्ल्यूसी की एक आभासी बैठक 28 अगस्त, 2022 को दोपहर 3:30 बजे, कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव की तारीखों की अनुसूची को मंजूरी देने के लिए आयोजित की जाएगी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सीडब्ल्यूसी की बैठक की अध्यक्षता करेंगी।”
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए शीर्ष विकल्प के रूप में उभरे हैं। सूत्रों ने कहा कि सोनिया गांधी ने उनसे मेडिकल जांच और इलाज के लिए विदेश जाने से पहले एक बैठक के दौरान चुनाव लड़ने का अनुरोध किया था।
सूत्रों ने पुष्टि की है कि कांग्रेस शीर्ष पद के लिए गांधी परिवार से अलग चेहरा देख रही है। गहलोत ने खुद कहा है कि मीडिया में ये बातें सामने आ रही थीं और उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
कांग्रेस का केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण अगले कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा के लिए पार्टी की कार्य समिति से मंजूरी का इंतजार कर रहा है क्योंकि राहुल गांधी के इनकार के बाद भी सबसे पुरानी पार्टी शीर्ष पद के लिए आम सहमति के उम्मीदवार की तलाश में है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
नेपाल में भारत के पूर्व सैनिकों से संवाद करेंगे सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ

भारत के थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा का आज अंतिम दिन है। जनरल सेठ अपनी इस यात्रा में नेपाल के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात कर चुके हैं। यात्रा के अंतिम दिन वह नेपाल के पोखरा में आयोजित पूर्व सैनिक रैली में शामिल होने जा रहे हैं। इस दौरान वे वीर नारियों और वीरता पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित करेंगे।
जनरल धीरज सेठ यहां भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों के साथ भी संवाद करेंगे। इसके बाद वे बुधवार को ही स्वदेश लौट आएंगे। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराना व ऐतिहासिक रोटी-बेटी का रिश्ता रहा है। जनकपुर-अयोध्या व लुम्बिनी-बोधगया का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव यहां के लोगों के रिश्तों को एक अलग गहराई प्रदान करता है। यह एक ऐसा संबंध है जिसकी दुनिया में कोई दूसरी मिसाल मिलना मुश्किल है। वहीं भारत व नेपाल की साझेदारी साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी आधारित है।
गौरतलब है कि थल सेना प्रमुख की यह नेपाल यात्रा 17 अगस्त को प्रारंभ हुई थी। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य भारत व नेपाल के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करना तथा दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी संबंधों, सहयोग एवं समन्वय को सुदृढ़ करना था। यहां हुई विभिन्न बैठकों के दौरान भारत और नेपाल के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों पक्षों ने मौजूदा रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने और सहयोग के नए क्षेत्रों की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
वहीं, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना से जुड़े खिलाड़ियों का भी उत्साहवर्धन किया है। सेना प्रमुख व भारतीय सेना के सभी रैंकों ने सूबेदार नरेंद्र (मुक्केबाजी) और सूबेदार अरविंद सिंह (रोइंग) को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर तथा सूबेदार छोटे लाल यादव (मुक्केबाजी) को द्रोणाचार्य पुरस्कार मिलने पर हार्दिक बधाई दी है।
सेना ने अपने एक संदेश में बताया कि पुणे स्थित सेना पैरालंपिक नोड को खेलों, विशेष रूप से पैरा-खेलों के प्रोत्साहन और विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार 2025 से भी सम्मानित किया गया है। ये प्रतिष्ठित सम्मान खेल प्रतिभाओं को निखारने और उत्कृष्टता के लिए प्रेरित करने के प्रति भारतीय सेना की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
भारतीय सेना का कहना कि युद्धभूमि से लेकर खेल के मैदान तक, सेना उत्कृष्टता, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ राष्ट्र की सेवा करती रहेगी।
राजनीति
अमेरिका राजदूत के कश्मीर दौरे पर उमर अब्दुल्ला बोले- ‘किसी दूसरे देश के राजदूत से शिकायत करना मेरी आदत नहीं’

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की बुधवार को प्रस्तावित कश्मीर यात्रा पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे देश के राजदूत से शिकायत करना मेरी आदत कभी नहीं रही। हमारे मुद्दों का समाधान वाशिंगटन नहीं करेगा, बल्कि हमारी केंद्र सरकार को करना है।
पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, “हमारी समस्याओं का उनसे (अमेरिकी राजदूत) कोई खास लेना-देना नहीं है। किसी दूसरे देश के राजदूत से शिकायत करना मेरी आदत कभी नहीं रही। हमारे मुद्दों का समाधान वाशिंगटन में नहीं, बल्कि हमारी केंद्र सरकार के पास है।”
उन्होंने कहा कि किसी दूसरे देश के राजदूत से अपने ही देश के बारे में शिकायत करना मेरे लिए बहुत गलत होगा। यह मेरी आदत नहीं है। मैं निश्चित रूप से जम्मू-कश्मीर और हमारी स्थिति के बारे में बात करूंगा, लेकिन न तो शिकायत करूंगा और न ही उनसे समाधान खोजने की कोशिश करूंगा।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को श्रीनगर शहर का व्यापक दौरा किया। इस दौरान उन्होंने चल रही विकास परियोजनाओं का निरीक्षण किया, सार्वजनिक सुविधाओं का जायजा लिया और शहरी बुनियादी ढांचे तथा सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किए जा रहे महत्वपूर्ण नागरिक कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।
श्रीनगर का दौरा करने पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, “श्रीनगर शहर जम्मू-कश्मीर की पहचान है। हम देश का एकमात्र ऐसा क्षेत्र हैं, जिसकी दो राजधानियां हैं। गर्मियों में श्रीनगर और सर्दियों में जम्मू। जाहिर है, दोनों शहरों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। श्रीनगर शहर में कुछ अहम प्रोजेक्ट्स का निरीक्षण करने के लिए हम आज सुबह 6.30 बजे से ही निकले हुए हैं। डाउनटाउन से लेकर अपटाउन तक पूरे शहर में लगभग 10 से 12 प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की गई। अधिकतर प्रोजेक्ट्स में संतोषजनक प्रगति हो रही है। एक-दो प्रोजेक्ट्स को थोड़ी और तेजी की जरूरत है, और हम उस पर ध्यान देंगे।”
अब्दुल्ला ने कहा कि इन दौरों का फायदा यह होता है कि जो हमें विधानसभा में बताया जाता है और जो जमीनी हकीकत है, दोनों की तुलना का मौका मिलता है। मैं श्रीनगर के निवासियों को यही भरोसा दिलाऊंगा कि आगे भी प्रोजेक्ट्स हाथ में लिए जाएंगे और बड़ी-बड़ी समस्याओं को दूर करेंगे। खासकर भीड़ और ट्रैफिक की समस्याओं के मद्देनजर भी कदम उठाने की जरूरत है। यहां पार्किंग की भी एक बड़ी मुसीबत रहती है। इसका हल निकाला जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, “श्रीनगर के कुछ हिस्सों में जल-जमाव की समस्या पुरानी है। यह पिछले दो या पांच सालों में पैदा नहीं हुई है। कॉलोनियां कहां बनीं, किसने इजाजत दी और कैसे बनीं, यह न तो आप जानते हैं और न ही मैं। जब ये कॉलोनियां बनीं, तो इन्हें विकसित करने वालों ने जल निकासी (ड्रेनेज) का कोई इंतजाम नहीं किया। जब कॉलोनी विकसित की जा रही थी, तब जल निकासी की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? अब हमें इन कॉलोनियों में जल निकासी की व्यवस्था करनी पड़ रही है, और हम ऐसा कर भी रहे हैं। हालांकि, यह काम रातों-रात नहीं हो जाएगा।”
नेशनल कॉन्फ्रेंस के घोषणापत्र पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, “क्या पांच साल बीत चुके हैं? क्योंकि अभी दो साल भी पूरे नहीं हुए हैं। मैंने पहले दिन से ही कहा है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का घोषणापत्र एक दिन, एक हफ्ते, एक महीने या एक साल के लिए नहीं था। यह पांच साल का रोडमैप है। पांच साल बाद मुझसे यह सवाल पूछिए और मैं आपको विस्तार से जवाब दूंगा। लेकिन कोई यह नहीं कह सकता कि हमने अब तक अपने घोषणापत्र को नजरअंदाज किया है। हर मुद्दे पर किसी न किसी तरह से काम किया गया है और जो भी काम बाकी है, उसे हम आने वाले समय में पूरा करेंगे।”
राष्ट्रीय समाचार
राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, बोले- बच्चों पर हुई बर्बरता की तारीफ करनी चाहिए?

जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि संसद से महज आधा किलोमीटर दूर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन और कील लगी लाठियों का इस्तेमाल किया गया, जिसमें एक बच्चे की आंख चली गई और एक बच्ची का कान कट गया।
राहुल गांधी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “मोदी सरकार के मंत्री कह रहे हैं कि दिल्ली पुलिस की तारीफ करनी चाहिए। संसद से आधा किलोमीटर दूर, शांतिपूर्ण छात्रों पर पैलेट गन चली, कील लगी लाठियां चलीं, एक बच्चे की आंख चली गई, एक बच्ची का कान कट गया। इस बर्बरता की तारीफ करनी चाहिए?”
उन्होंने कहा कि वह खुद उन घायल बच्चों से मिले हैं और हजारों वीडियो देश ने देखे हैं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार का “मूल मंत्र ही असत्य और हिंसा” है। उन्होंने कहा कि पहले बच्चों पर लाठी चलाओ और फिर कह दो कि कुछ हुआ ही नहीं।
राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए कहा, “पूरे सत्र ‘लापता’ अमित शाह विपक्ष से भागते रहे। और प्रधानमंत्री ने आज तक छात्रों से माफी नहीं मांगी।”
उन्होंने आगे कहा कि देश के लिए सबसे बड़ा खतरा ऐसे लोग हैं, “जिन्हें न अपनी गलती दिखती है और दिखने पर मानते नहीं।” राहुल गांधी ने सरकार से देश के बच्चों से झूठ नहीं बोलने की अपील करते हुए कहा कि उनके पास “आंखें हैं और याददाश्त भी।”
इससे पहले, जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि प्रदर्शन के दौरान “एक भी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचा” और किसी की हड्डी तक नहीं टूटी। उन्होंने कहा कि कोई भी प्रदर्शनकारी गंभीर चोट के कारण अस्पताल में भर्ती नहीं है।
रिजिजू ने दावा किया कि हजारों लोग प्रदर्शन में शामिल हुए थे और इनमें से कई ऐसे लोग भी थे, जिन्होंने छात्रों के नाम पर प्रदर्शन में घुसकर हिंसा भड़काने की कोशिश की। उन्होंने आम आदमी पार्टी, “डफली बजाने वाले आंदोलनकारियों”, भीम आर्मी और समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों पर भी प्रदर्शनकारियों को उकसाने का आरोप लगाया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर इसी तरह का प्रदर्शन कांग्रेस के शासनकाल में हुआ होता, तो स्थिति कहीं अधिक गंभीर होती और हजारों लोगों की मौत हो सकती थी। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान एक भी लाठी का इस्तेमाल नहीं किया और प्रदर्शनकारियों को केवल उस समय रोका गया, जब वे जबरन संसद की ओर बढ़ने लगे।
रिजिजू ने कहा था कि प्रदर्शन में कोई मौत नहीं हुई और इतने बड़े आंदोलन को संभालने के लिए दिल्ली पुलिस और प्रशासन की तारीफ की जानी चाहिए।
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