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Thursday,29-October-2026
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राजनीति

बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा ने दिया इस्तीफा

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बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद बुधवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया। इसके पहले दिन विजय कुमार सिन्हा ने विधानसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव में लगाए गए आरोपों का भी जवाब दिया। सदन में अपने संबोधन में सिन्हा ने कहा कि नई सरकार के गठन के बाद मैं खुद ही अपने पद से इस्तीफा दे देता, लेकिन मुझे पद से हटाने की कोशिश शुरू कर दी गई। मुझ पर सदस्यों ने मनमानी करने, तानाशाही करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि जब नई सरकार का गठन हो रहा था तभी 9 अगस्त को ही विधानसभा सचिव को मेरे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की सूचना दे दी गई थी। उसके बाद मैंने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया ताकि सदन में इसका जवाब दे सकूं।

सिन्हा ने कहा कि छोटे कार्यकाल में कई काम और कार्यक्रम किए। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में प्रयास किया कि सत्ता और विपक्ष को साथ लेकर चलूं। निष्पक्षता से सदन का दायित्व निभाया।

उन्होंने कहा कि हमेशा विधानसभा के सभी सदस्यों की मान मर्यादा, सदन की गरिमा बढ़ाने की कोशिश की। सिन्हा ने कहा कि लोकतंत्र में संख्या बल महत्वपूर्ण है। अब नए राजनीतिक घटनाक्रम के तहत नया गठबंधन हुआ।

उन्होंने इस्तीफा देते हुए कहा कि आगे सदन का संचालन नरेंद्र नारायण यादव करेंगे।

राष्ट्रीय समाचार

नीट पेपर लीक मामला: फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोप तय करने पर सुरक्षित रखा फैसला

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नीट पेपर लीक मामले में दिल्ली की विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोप तय करने पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। सीबीआई ने मामले में 14 आरोपी बनाए हैं, जबकि करीब 20 हजार से पन्नों की चार्जसीट दाखिल की है।

राऊज एवेन्यू कोर्ट की विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने इस मामले में 12 अगस्त को सीबीआई के आरोप पत्र पर संज्ञान लिया था। सीबीआई ने मामले में अपना पहली चार्जशीट जुलाई में दाखिल की थी, जबकि केंद्रीय जांच एजेंसी ने पेपर लीक मामले की जांच के लिए मई 2026 में केस दर्ज किया था। अब विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट 18 नवंबर को अपना आदेश सुनाएगी।

आरोपियों में यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रहलाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और मनीषा संजय हवालदार शामिल हैं।

केंद्रीय एजेंसी का दावा है कि तीन विषय विशेषज्ञों ने दिल्ली में एनटीए कार्यालय से अलग-अलग तरीकों से नीट परीक्षा के प्रश्न लीक किए। आरोपी ऐसा इसलिए कर सके, क्योंकि गोपनीय अनुभाग से बाहर निकलते समय उनकी तलाशी नहीं ली गई।

सीबीआई ने जांच से पाया कि जीव विज्ञान (वनस्पति विज्ञान और प्राणी विज्ञान) दस्तावेज को तेजस दभाडे ने 20 अप्रैल और 21 अप्रैल को स्नेहांजलि देशमुख और दिया शिंदे के नोट्स की फोटोकॉपी से टाइप किया था। ये नोट्स मनीषा संजय वाघमारे ने धनंजय निवृत्ति लोखंडे के माध्यम से सत्यजीत सोलुंके और तेजस को उपलब्ध कराए थे।

एजेंसी ने कहा कि नीट परीक्षा के लीक हुए भौतिकी प्रश्नों वाले दो दस्तावेज हैं। इनमें से एक कथित रूप से आरोपी मनीषा संजय हवालदार के हस्तलेखन में है और इसमें 9 पन्नों में 68 प्रश्न हैं। उन्होंने इसे 25 अप्रैल को व्हाट्सएप के जरिए सह-आरोपी मनीषा गुरुनाथ मंधारे को भेजा। आरोपी मनीषा संजय हवालदार ने वही प्रश्न आरोपी तेजस हर्षदकुमार शाह को 14 अप्रैल 2026 को दिए।

सीबीआई ने कहा कि रसायन विज्ञान पेपर लीक के संबंध में जांच से पता चला है कि दस्तावेज साक्षी धूमल के हस्तलेखन में हैं, जो उन अभ्यर्थियों में से एक हैं जिन्होंने पुणे में आरोपी पीवी कुलकर्णी के आवास पर कक्षाएं लीं, सिवाय खतीब मदीहा बेगम से बरामद दस्तावेज के, जो आरोपी शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर के हस्तलेखन में है। शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर ने यही दस्तावेज अपने बेटे आदित्य के माध्यम से पीवी कुलकर्णी से प्राप्त किया।

सीबीआई ने कहा कि जांच के दौरान पूरे भारत में यानी राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू और कश्मीर, कर्नाटक, हरियाणा, बिहार, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में कई तलाशियां की गई हैं। लीक हुए प्रश्नों की भौतिक प्रतियां और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं। 42 उपकरण और मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल और विकास बिवाल के आवाज के नमूने भी जब्त/एकत्र किए गए हैं।

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अपराध

झारखंड पुलिस में सब-इस्पेक्टर बताकर युवती से दुष्कर्म का आरोपी गयाजी से गिरफ्तार

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झारखंड पुलिस में दरोगा होने का झूठा रौब दिखाकर एक युवती को अपने जाल में फंसाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोपी को बिहार के गया जिले से गिरफ्तार किया गया है। रांची पुलिस और गया के मुफस्सिल थाना की संयुक्त टीम ने मानपुर इलाके में एक गुप्त ठिकाने पर छापेमारी कर आरोपी को गिरफ्तार किया।

आरोपी की पहचान अविनाश कुमार उर्फ राज शर्मा के रूप में हुई है, जो गया के मुफस्सिल थाना क्षेत्र स्थित विष्णु विहार कॉलोनी निवासी बताया गया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर रांची ले आई है।

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में पीड़िता की लिखित शिकायत के आधार पर इसी वर्ष 15 मई को रांची महिला थाने में भारतीय न्याय संहिता और संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की कांड संख्या 15/26 के तहत दर्ज इस मुकदमे में गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

शिकायतकर्ता युवती के अनुसार, आरोपी ने खुद को झारखंड पुलिस में सब-इस्पेक्टर (दारोगा) बताकर सोशल मीडिया और मोबाइल फोन के जरिए उससे संपर्क साधा था। आरोप है कि वर्दी और पद का खौफ तथा झूठा प्रभाव दिखाकर उसने युवती को विश्वास में लिया और उसका यौन शोषण किया।

आरंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि जब पीड़िता को आरोपी के दावों की पोल खुलने और उसकी असली पहचान का पता चला, तो उसने हिम्मत जुटाकर रांची महिला थाने का दरवाजा खटखटाया और लिखित शिकायत दर्ज कराई।

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही रांची पुलिस और महिला थाना की विशेष टीम आरोपी की सुरागकशी में जुटी हुई थी। तकनीकी अनुसंधान और सर्विलांस के जरिए रांची पुलिस को यह पुख्ता सुराग मिला कि नाम बदलकर छिप रहा आरोपी वर्तमान में बिहार के गया जिले में शरण लिए हुए है।

इसके बाद रांची पुलिस की एक विशेष टीम गया पहुंची और स्थानीय मुफस्सिल थाना पुलिस के सहयोग से मानपुर क्षेत्र में घेराबंदी कर उसे दबोच लिया।

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राजनीति

सूखा राहत पर शिवसेना उद्धव गुट का हमला, किसानों को 5,000 रुपए की मदद को बताया छलावा

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शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने गुरुवार को राज्य सरकार द्वारा सूखा प्रभावित किसानों को अग्रिम राहत के तौर पर 5,000 रुपए देने की घोषणा की कड़ी आलोचना की। पार्टी ने इस फैसले को धोखाधड़ीपूर्ण और खोखला दिखावा करार दिया। पार्टी का कहना है कि सूखे से जूझ रहे किसानों को वास्तविक और पर्याप्त सहायता की आवश्यकता है और 5,000 रुपए की यह राहत केवल एक दिखावटी कदम है, जिससे किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होने वाला।

ठाकरे गुट ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में छपे एक तीखे संपादकीय में तर्क दिया है कि महाराष्ट्र में सूखे की मार झेल रहे लगभग 1.50 करोड़ किसानों के साथ मजबूती से खड़े होने के बजाय सत्ताधारी सरकार ने “33 प्रतिशत की शर्त” लगाकर असल में उनकी पीठ में छूरा घोंपा है।

संपादकीय में कहा गया है कि सरकार ने 5,000 रुपए की अग्रिम सहायता तुरंत बांटने के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन अब इस राहत को केवल उन्हीं इलाकों तक सीमित कर दिया गया है, जहां फसल के नुकसान का आकलन (पंचनामा) पूरा हो चुका है और फसल का नुकसान 33 प्रतिशत से अधिक है। इसमें बताया गया है कि इस तरह के सख्त नियम लागू करने से भीषण सूखे के इस दौर में संकट से जूझ रहे 1.50 करोड़ किसानों में से लगभग आधे किसान पूरी तरह खाली हाथ रह जाएंगे।

खरीफ की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है और बारिश न होने के कारण रबी की बुआई भी लगभग नामुमकिन लग रही है। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी और चारे का भारी संकट पैदा हो गया है। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि जो निजी फाइनेंस कंपनियां और साहूकार कर्ज वसूली के लिए किसानों को परेशान कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद किसानों को डराने-धमकाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।

संपादकीय में नांदेड़ और लातूर के उन मामलों का जिक्र किया गया है, जहां कर्ज के दबाव में आकर किसानों ने अपनी जान दे दी। कहा है कि इससे यह सवाल उठता है कि क्या सरकार के आदेश वास्तव में जमीनी स्तर तक पहुंच भी रहे हैं या नहीं।

संपादकीय में कहा गया है कि मानसून खत्म होने के कई हफ्तों बाद ‘मृदा एवं जल संरक्षण विभाग ने अचानक पानी सोखने वाले गड्ढे खोदने का काम शुरू कर दिया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने इन देर से उठाए गए कदमों को बहुत देर हो जाने के बाद की गई कार्रवाई की संज्ञा दी है। पार्टी ने कहा कि चूंकि अब बारिश की कोई उम्मीद नहीं है, इसलिए सवाल यह उठता है कि क्या सरकार इन हजारों नए खोदे गए गड्ढों को पानी के टैंकरों से भरने की योजना बना रही है?

संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि ऐसी परियोजनाएं ग्रामीण इलाकों की प्यास बुझाने के बजाय, ठेकेदारों और बिचौलियों की जेबें भरने के लिए बनाई गई हैं।

इस गंभीर वास्तविकता को सामने रखते हुए संपादकीय में कहा गया है कि सत्ता में बैठे लोग भले ही बड़े-बड़े दावे करते हों, लेकिन प्रशासन की नौकरशाही की अड़चनें और पात्रता संबंधी शर्तें एक ऐसे “अल नीनो” की तरह काम करती हैं, जो प्राकृतिक सूखे से भी कहीं अधिक खतरनाक साबित होती हैं।

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