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Tuesday,31-March-2026
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अंतरराष्ट्रीय

जर्मनी में अभी अर्थव्यवस्था मंदी के कोई स्पष्ट संकेत नहीं

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 म्यूनिख स्थित आईएफओ इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक रिसर्च द्वारा जारी मासिक बिजनेस क्लाइमेट इंडेक्स अप्रैल के 91.9 अंक से बढ़कर मई में 93.0 अंक हो जाने से ‘जर्मन अर्थव्यवस्था में रुझान उज्‍जवल हो गया है।’ समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने इंस्टीट्यूट के हवाले से कहा, “अभी मंदी के कोई संकेत नहीं दिख रहा है।”

मुद्रास्फीति की चिंताओं, भौतिक बाधाओं और रूस-यूक्रेन संघर्ष के सामने जर्मन अर्थव्यवस्था ने साबित किया कि वह अपनी पुरानी स्थिति पर लौटने के लिए सक्षम है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, “ऊर्जा और मोटर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण जर्मनी में अप्रैल में मुद्रास्फीति 7.4 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो 40 साल का सर्वोच्च स्तर है।”

पिछली बार कीमतों में तेजी की यह रफ्तार 1980 में शुरू हुए ईरान-इराक युद्ध के दौरान दिखी थी।

फेडरेशन ऑफ जर्मन इंडस्ट्रीज के मुख्य कार्यकारी जोआखिम लैंग ने कहा, “ऊर्जा इंस्टीट्यूट आपूर्ति में व्यवधान से यूरोपीय अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बहुत अधिक है।”

उन्होंने आगाह किया कि रूसी गैस निर्यात में रुकावट यूरोप में विकास को रोक देगी और यूरोपीय संघ में आर्थिक मंदी ला देगी।

इस बीच, जर्मनी के लोग रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर चिंतित है।

प्रबंधन सलाहकार मैकिन्जे एंड कंपनी के एक हालिया अध्ययन के अनुसार, “तीन में से एक नागरिक को डर है कि चल रहे संकट का आर्थिक विकास पर स्थायी प्रभाव पड़ेगा, और संभवत मंदी का कारण बन सकता है।”

उपभोक्ताओं और कंपनियों पर ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के प्रभावों को कम करने के लिए, जर्मनी की सरकार ने बुनियादी कर-मुक्त भत्ते में वृद्धि, लंबी दूरी के यात्रियों के लिए उच्च माइलेज भत्ते, सार्वजनिक परिवहन के लिए छूट टिकट के साथ-साथ कई उपायों को अपनाया है।

व्यापार

महावीर जयंती के अवसर पर मंगलवार को बंद है शेयर बाजार, कमोडिटी मार्केट में शाम में होगा कारोबार

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मुंबई, 31 मार्च : मंगलवार को महावीर जयंती के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार बंद है। ऐसे में बीएसई और एनएसई पर किसी भी तरह की खरीद-बिक्री या सेटलमेंट की प्रक्रिया नहीं होगी। निवेशकों को अब अगले कारोबारी दिन यानी बुधवार, 1 अप्रैल 2026 तक इंतजार करना होगा, जब बाजार सामान्य रूप से फिर खुलेंगे।

हालांकि 1 अप्रैल को बाजार खुल जाएगा और ट्रेडिंग सामान्य तरीके से होगी, लेकिन इस दिन ‘सेटलमेंट हॉलिडे’ रहेगा। इसका मतलब यह है कि निवेशक शेयर खरीद या बेच तो सकेंगे, लेकिन पे-इन और पे-आउट, यानी पैसों और शेयरों का वास्तविक निपटान, उसी दिन नहीं होगा, बल्कि बाद में पूरा किया जाएगा।

महावीर जयंती के कारण कमोडिटी बाजार में भी बदलाव देखने को मिलेगा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) में सुबह का सेशन पूरी तरह बंद रहेगा, यानी दिन में कोई ट्रेडिंग नहीं होगी। हालांकि शाम 5 बजे से रात 11:30 बजे तक ट्रेडिंग फिर शुरू हो जाएगी। वहीं नेशनल कमोडिटी और डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (एनसीडीईएक्स) पूरे दिन के लिए बंद रहेगा।

इसी बीच, निफ्टी का शुरुआती संकेत देने वाला गिफ्ट निफ्टी सुबह 9:10 बजे के आसपास करीब 1 प्रतिशत यानी 250 अंक की बढ़त के साथ 22,690 पर ट्रेड करता दिखा, जो बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

वैश्विक बाजारों की बात करें तो अमेरिकी बाजारों में गिरावट देखने को मिली। एसएंडपी 500 0.39 प्रतिशत गिरा, जबकि नैस्डैक 0.73 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।

एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही। निक्केई 100 अंक यानी 0.23 प्रतिशत गिरा, हैंग सेंग 50 अंक से ज्यादा यानी 0.24 प्रतिशत नीचे रहा, जबकि कोस्पी करीब 2 प्रतिशत गिर गया।

कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट देखी गई। ब्रेंट क्रूड लगभग 2.37 प्रतिशत गिरकर 104.84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 2 प्रतिशत गिरकर 100.83 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा।

इसके साथ ही आपको बताते चलें कि इस सप्ताह निवेशकों के लिए ट्रेडिंग के मौके सीमित रहेंगे। 31 मार्च की छुट्टी के बाद 3 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को गुड फ्राइडे के कारण फिर से बाजार बंद रहेगा। ऐसे में पूरे हफ्ते में 5 ट्रेडिंग दिनों में से बाजार सिर्फ 3 दिन ही खुलेगा। खास बात यह है कि गुड फ्राइडे के दिन भारत के साथ-साथ अमेरिका जैसे बड़े वैश्विक बाजार भी बंद रहेंगे।

गुड फ्राइडे के बाद अगली बड़ी छुट्टी 14 अप्रैल 2026 को डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर जयंती के मौके पर होगी, जब शेयर बाजार बंद रहेगा। इसके अलावा साल 2026 में महाराष्ट्र दिवस, बकरी ईद, मुहर्रम, गणेश चतुर्थी, गांधी जयंती, दशहरा, दिवाली, गुरुपर्व और क्रिसमस जैसे अवसरों पर भी बाजार में ट्रेडिंग नहीं होगी।

लगातार छुट्टियों के कारण इस हफ्ते बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। ऐसे में निवेशकों को ट्रेडिंग और निवेश की योजना बनाते समय इन छुट्टियों और सेटलमेंट नियमों को ध्यान में रखना चाहिए, ताकि किसी तरह की असुविधा से बचा जा सके।

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व्यापार

लगातार पांचवें हफ्ते गिरा शेयर मार्केट, वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव में बाजार

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मुंबई, 28 मार्च : लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के चलते लगातार पांचवें हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली।

आखिरी कारोबारी दिन यह 2.09 प्रतिशत गिरकर 22,819.60 पर बंद हुआ। हालांकि सप्ताह के दौरान निफ्टी50 में 0.52 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई, जबकि इसके पिछले हफ्ते इसमें गिरावट देखने को मिली थी। पिछले एक महीने में निफ्टी 8.23 प्रतिशत गिर चुका है।

वहीं बीएसई सेंसेक्स शुक्रवार को 1,690.23 अंक यानी 2.25 प्रतिशत गिरकर 73,583.22 पर बंद हुआ। पूरे हफ्ते में इसमें 1.94 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जबकि पिछले एक महीने में इसमें 8.29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

पूरे हफ्ते बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा और इंडेक्स पर दबाव दिखा, हालांकि बीच-बीच में रिकवरी की कोशिश भी हुई।

निफ्टी बैंक ने बाजार से कमजोर प्रदर्शन किया और शुक्रवार को 2.67 प्रतिशत गिरकर 52,274 के करीब बंद हुआ। पूरे हफ्ते में इसमें करीब 2.16 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई।

बाजार पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव का रहा, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी और बाजार घटनाओं पर निर्भर बना रहा।

वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 98 से 115 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहीं, जिससे महंगाई और आर्थिक स्थिरता पर दबाव बना हुआ है।

सेक्टर के हिसाब से देखें तो निफ्टी मेटल और पीएसयू बैंक सबसे ज्यादा गिरने वाले सेक्टर रहे। वहीं निफ्टी आईटी और फार्मा ही ऐसे सेक्टर रहे, जिनमें क्रमशः 1.17 प्रतिशत और 0.11 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी गिरावट में रहे। निफ्टी मिडकैप100 में 1.38 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप100 में 0.63 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

इस दौरान भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ और डॉलर के मुकाबले 94 के पार चला गया, जिसका कारण महंगा कच्चा तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक जोखिम कम नहीं होता, तब तक बाजार सीमित दायरे में ही रहेगा और उतार-चढ़ाव बना रहेगा। हालांकि घरेलू निवेश और तनाव में कमी आने पर बाजार को सपोर्ट मिल सकता है।

फिलहाल निफ्टी 22,850-22,750 के स्तर पर स्थिर होने की कोशिश कर रहा है। ऊपर की तरफ 23,000-23,100 का स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

बैंक निफ्टी के लिए 52,000-51,800 का स्तर अहम सपोर्ट है, जबकि ऊपर की तरफ 53,000-53,600 का स्तर रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बाजार में जोरदार बिकवाली जारी रखी और हफ्ते में करीब 25,000-30,000 करोड़ रुपए की निकासी की। मार्च में अब तक यह आंकड़ा 1.13 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है, जो वित्त वर्ष 2026 में सबसे बड़ी मासिक बिकवाली है।

हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने मजबूती से खरीदारी की और हफ्ते में 25,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश किया, जिससे बाजार को कुछ सपोर्ट मिला।

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राजनीति

भारत के पास 60 दिनों का कच्चे तेल का भंडार, एलपीजी की एक महीने की पूरी व्यवस्था: सरकार

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नई दिल्ली, 26 मार्च : सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट कहा कि भारत में पेट्रोलियम और एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे ‘जानबूझकर अफवाह और गलत जानकारी फैलाने वाले अभियान’ से गुमराह न हों, जिनका उद्देश्य बेवजह डर पैदा करना है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि भारत के पास कुल 74 दिनों की भंडारण क्षमता है और फिलहाल करीब 60 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। इसमें कच्चा तेल, पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पाद और रणनीतिक भंडारण शामिल हैं, जबकि ‘हम मध्य पूर्व संकट के 27 वें दिन में हैं’। इसके साथ ही मंत्रालय ने कहा कि देश के सभी खुदरा ईंधन आउटलेट्स के पास पर्याप्त मात्रा में ईंधन मौजूद है।

सरकार ने एक बयान में कहा कि देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है। हर नागरिक के लिए लगभग दो महीने तक की सप्लाई सुनिश्चित है, चाहे वैश्विक हालात कैसे भी हों।

इसके अलावा, अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की खरीद भी पहले से तय कर ली गई है। सरकार ने कहा कि भारत आने वाले कई महीनों तक पूरी तरह सुरक्षित है और भंडार कम होने जैसी बातें पूरी तरह गलत हैं।

दुनिया के कई देशों में जहां ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं, राशनिंग लागू की जा रही है और पेट्रोल पंप बंद हो रहे हैं, वहीं भारत में ऐसी कोई स्थिति नहीं है। सरकार ने कहा कि कुछ जगहों पर घबराहट में खरीदारी सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाहों के कारण हुई है।

सरकार ने यह भी बताया कि तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंपों को मिलने वाला क्रेडिट बढ़ाकर 3 दिन कर दिया है, ताकि किसी भी पंप पर कामकाजी पूंजी की कमी के कारण ईंधन की कमी न हो।

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद भारत अब 41 से ज्यादा देशों से कच्चा तेल मंगा रहा है और पहले से ज्यादा सप्लाई मिल रही है। देश की सभी रिफाइनरी 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं और अगले 60 दिनों की सप्लाई पहले से तय है।

एलपीजी को लेकर भी सरकार ने कहा कि कोई कमी नहीं है। घरेलू उत्पादन 40 प्रतिशत बढ़ाकर रोजाना 50 टीएमटी कर दिया गया है, जबकि कुल जरूरत लगभग 80 टीएमटी है। यानी अब आयात की जरूरत कम होकर सिर्फ 30 टीएमटी रह गई है।

इसके अलावा, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से 800 टीएमटी एलपीजी पहले ही भारत के लिए भेजा जा चुका है, जो देश के 22 आयात टर्मिनलों पर पहुंचेगा। सरकार के अनुसार, कम से कम एक महीने की एलपीजी सप्लाई पूरी तरह सुनिश्चित है और आगे भी लगातार व्यवस्था की जा रही है।

तेल कंपनियां रोजाना 50 लाख से ज्यादा सिलेंडर की डिलीवरी कर रही हैं। साथ ही, ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई 50 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है।

सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को भी बढ़ावा दे रही है, क्योंकि यह सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण के लिए बेहतर है। भारत रोजाना 92 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति माह (एमएमएससीएमडी) गैस खुद पैदा करता है, जबकि कुल जरूरत 191 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति माह है, जिससे भारत एलपीजी की तुलना में गैस पर आयात के मामले में काफी कम निर्भर है।

देश में पीएनजी नेटवर्क भी तेजी से बढ़ा है। 2014 में जहां 57 क्षेत्र थे, वहीं अब 300 से ज्यादा क्षेत्रों में यह सुविधा पहुंच चुकी है। वहीं घरेलू पीएनजी कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ से ज्यादा हो गए हैं।

सरकार ने साफ किया है कि पीएनजी को बढ़ावा एलपीजी की कमी के कारण नहीं दिया जा रहा है, बल्कि यह एक बेहतर और सस्ता विकल्प है। एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है।

मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे ईंधन और गैस से जुड़ी जानकारी के लिए सिर्फ सरकारी आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।

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