अंतरराष्ट्रीय
टिम पेन का करियर खत्म होने के कगार पर
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान टिम पेन का करियर खत्म होने के कगार पर है, क्योंकि तस्मानिया के अनुबंधित खिलाड़ियों की सूची से विकेटकीपर को बाहर कर दिया गया है और ऐसा लग रहा है कि उनका टीम में वापसी करना आसान नहीं होगा। तस्मानिया और क्वींसलैंड दोनों ने 2022-23 के लिए अपने तेज गेंदबाजी लाइनअप को मजबूत किया है। दोनों राज्यों ने आज सुबह अगले सत्र के लिए अपनी टीम की घोषणा की।
लेकिन, पिछली गर्मियों की एशेज श्रृंखला से पहले एक विवाद के बाद टेस्ट कप्तान के रूप में पद छोड़ने वाले पेन को तस्मानिया की टीम में शामिल नहीं किया गया।
अपनी कप्तानी के इस्तीफे के बाद पेन ने पिछले सत्र के अंत में एक अनौपचारिक कोचिंग भूमिका में तस्मानियाई क्रिकेट में वापसी की थी।
तस्मानिया की अनुबंध सूची आज जारी होने तक उनका करियर खत्म होते दिखाई दे रहा है। उन्होंने अपने करियर में 35 टेस्ट और 147 प्रथम श्रेणी मैच खेले हैं।
ऑस्ट्रेलिया के सफेद गेंद के तेज गेंदबाज केन रिचर्डसन ने बुल्स के साथ करार किया है, जबकि पूर्व खिलाड़ी ने वनडे और टी20 अंतर्राष्ट्रीय तेज गेंदबाज बिली स्टेनलेक ने क्वींसलैंड से टाइगर्स की ओर रुख किया है। इस बारे में क्रिकेट डॉट को डॉट यूके की रिपोर्ट में जानकारी दी गई।
अंतरराष्ट्रीय
वेंस की पाकिस्तान यात्रा से पहले सुरक्षा को लेकर चिंता, सालों बाद यूएस के किसी शीर्ष अधिकारी का पाक दौरा

नई दिल्ली, 10 अप्रैल : अमेरिका और ईरान के बीच इस हफ्ते के अंत में पाकिस्तान में बातचीत होने वाली है। अमेरिका की तरफ से इस बैठक में शामिल होने के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपने डेलिगेशन के साथ इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति के इस दौरे से संबंधित सुरक्षा को लेकर काफी चिंताएं हैं। सालों के बाद अमेरिका का कोई आला अधिकारी पाकिस्तान का दौरा कर सकता है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान के दौरे को लेकर गहरी चिंता है। व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सुरक्षा चिंता की वजह से वेंस को पाकिस्तान ना जाने की सलाह दी है।
फिलहाल यह कन्फर्म नहीं है कि जेडी वेंस इस बैठक में शामिल होने जाएंगे या नहीं, लेकिन व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस्लामाबाद जाएंगे।
किसी भी अमेरिकी अधिकारी के लिए पाकिस्तान के दौरे पर जाने से पहले उनके लिए सबसे बड़ा खतरा आतंकवाद है। पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों की सक्रियता की वजह से वहां पर किसी भी दूसरे देश के नेता की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगता है।
वेंस ऐसे समय में पाकिस्तान की यात्रा कर सकते हैं, जब अमेरिका ने खुद इस देश के लिए ‘लेवल 3: यात्रा पर पुनर्विचार करें’ की एडवाइजरी जारी की हुई है। इसकी मुख्य वजह आतंकवाद, अपराध और अशांति का खतरा है।
इसके अलावा अमेरिका ने हाल ही में लाहौर और कराची के वाणिज्य दूतावास से गैर-जरूरी अमेरिकी कर्मचारियों को सुरक्षा कारणों से हटा लिया गया था। यही सब कारण हैं, जिसकी वजह से अमेरिकी के कोई भी नेता या अधिकारी पाकिस्तान जाने से बचते हैं।
पाकिस्तान में अमेरिकी अधिकारियों और दूतावास पर हमले की कई घटनाएं इतिहास में सामने आई हैं। ताजा मामला, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद देखने को मिला था, जब उग्र भीड़ ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को घेरा और उसमें तोड़फोड़ की। इसके बाद पेशावर में अमेरिकी कांसुलेट बंद कर दिया गया और कराची और लाहौर में वीजा सेवाएं निलंबित हुईं।
आतंकवाद और सुरक्षा कारणों की वजह से अब तक केवल पांच अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने ही पाकिस्तान का दौरा किया, जिनमें ड्वाइट डी. आइजनहावर, लिंडन बी. जॉनसन, रिचर्ड निक्सन, बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू. बुश शामिल हैं। 2006 के बाद किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया।
हालांकि, इसके पीछे एक कारण अमेरिका में हुए 26/11 का वो हमला भी है। अमेरिका को संदेह था कि इस हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान ने पनाह दी है। हालांकि, पाकिस्तान इससे इनकार करता रहा। फिर अमेरिका ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा, जिसके बाद से दोनों देशों के संबंधों में काफी दूरी आई।
इसके अलावा, पाकिस्तान में चीन का दबदबा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में यह भी एक कारण हो सकता है कि अमेरिका इस देश से दूरी बनाकर रखे हुए है। वहीं 2011 के बाद पहली बार अमेरिकी के किसी शीर्ष अधिकारी का पाकिस्तान का दौरा होने वाला है।
द संडे गार्जियन के अनुसार, सिक्योरिटी प्लानर्स ने आने वाले डेलिगेशन की सुरक्षा के लिए एक बड़ा मोटरकेड सिस्टम तैयार करना शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि अमेरिकी मिलिट्री एयरक्राफ्ट के लॉजिस्टिक्स टीम और इक्विपमेंट लेकर आने के बाद तैयारियां और तेज हो गईं। इस तरह के बड़े इंतजाम इस दौरे की सांकेतिक अहमियत और युद्ध के समय की डिप्लोमेसी से जुड़े असली सुरक्षा खतरों, दोनों को दिखाते हैं।
बीते दिन पाकिस्तान में ईरानी राजदूत रेजा अमीरी मोगादम ने ईरानी डेलिगेशन के पाकिस्तान पहुंचने को लेकर सोशल मीडिया पर जानकारी दी। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया।
ईरानी राजदूत ने अपने पोस्ट में अमेरिकी वार्ताकारों के साथ सीजफायर के मुद्दे पर बातचीत के लिए ईरान के एक डेलिगेशन के पाकिस्तान आने की घोषणा की थी। यह पोस्ट पहले रेजा अमीरी मोगादम के सोशल मीडिया हैंडल पर थी, जो अब नजर नहीं आ रही है। इसकी पीछे की वजह सुरक्षा से संबंधित हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय
‘इजरायल के विनाश की बात बर्दाश्त नहीं’, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बयान पर भड़के पीएम नेतन्याहू; दी चेतावनी

तेल अवीव, 10 अप्रैल : ईरान के साथ अमेरिका के सीजफायर की घोषणा के कुछ घंटे बाद ही इजरायल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह पर बड़ा हमला कर दिया। इस हमले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा हुई। वहीं दोनों पक्षों के बीच सीजफायर की मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल के इस हमले को लेकर कुछ ऐसा कहा जिससे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भड़क उठे।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पाकिस्तान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि इजरायल के विनाश की बात को बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। पीएम नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का इजरायल को खत्म करने का आह्वान बहुत बुरा है। यह ऐसा बयान नहीं है जिसे किसी भी सरकार से बर्दाश्त किया जा सके, खासकर उस सरकार से जो शांति के लिए न्यूट्रल आर्बिटर होने का दावा करती है।”
दरअसल, पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक्स पर पोस्ट में लिखा “इजरायल बुरा है और इंसानियत के लिए श्राप है। इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है, लेबनान में नरसंहार हो रहा है। इजरायल बेगुनाह नागरिकों को मार रहा है, पहले गाजा, फिर ईरान और अब लेबनान, खून-खराबा लगातार जारी है।”
इजरायल के खिलाफ आग उगलते हुए पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा, “मैं उम्मीद और प्रार्थना करता हूं कि जिन लोगों ने फिलिस्तीनी धरती पर इस कैंसर जैसे राज्य का निर्माण किया है, वे यूरोपीय यहूदियों से छुटकारा पाएं और उन्हें नरक में जलाएं।”
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बीते दिन इजरायल के हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने बताया कि इजरायल के हमले के बाद लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम से फोन पर बातचीत की।
पीएम शहबाज ने एक्स पर लिखा, “मैंने आज शाम लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम से बात की। मैंने लेबनान के खिलाफ इजरायल के लगातार हमले की कड़ी निंदा की और इन दुश्मनी की वजह से लेबनान में हजारों लोगों की जान जाने पर दुख जताया। मैंने इस्लामाबाद में होने वाली ईरान-अमेरिका बातचीत के जरिए बातचीत को आसान बनाने समेत शांति की कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान की प्रतिबद्धता को फिर से सुनिश्चित किया।”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नवाफ सलाम का शुक्रिया जिन्होंने पाकिस्तान की शांति की कोशिशों की सराहना की और लेबनान और उसके लोगों को निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों को तुरंत खत्म करने के लिए हमारे लगातार समर्थन की जरूरत पर जोर दिया।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय इजरायली कार्रवाई इस इलाके में शांति और स्थिरता बनाने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को कमजोर करती है और अंतरराष्ट्रीय कानून और बुनियादी मानवीय सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से लेबनान के खिलाफ इजरायल के हमलों को खत्म करने के लिए तुरंत और ठोस कदम उठाने की अपील करता है।
बता दें, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सीजफायर लागू होने के कुछ ही घंटों बाद, इजरायल ने लेबनान पर एक दिन का सबसे बड़ा हमला किया, जिसमें 300 से ज्यादा लोग मारे गए और 1,100 से ज्यादा घायल हुए।
अंतरराष्ट्रीय
विदेशों में चीन को टक्कर देने के लिए निजी क्षेत्र को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा अमेरिका

वॉशिंगटन, 10 अप्रैल : संयुक्त राज्य अमेरिका को वैश्विक बाजारों में अपने निजी क्षेत्र को अधिक आक्रामक तरीके से उतारना चाहिए ताकि चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला किया जा सके। उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडाउ ने वाणिज्यिक कूटनीति को अमेरिकी विदेश नीति की “मुख्य आधारशिला” बताया।
आर्थिक जुड़ाव को भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और दीर्घकालिक वैश्विक स्थिरता दोनों के केंद्र में रखते हुए लैंडाउ ने तर्क दिया कि वाशिंगटन को अपने व्यवसायों को विदेशों में प्रतिस्पर्धा के लिए बेहतर तरीके से सक्रिय करना होगा।
उन्होंने अटलांटिक काउंसिल के ग्लोबल प्रॉस्पेरिटी फोरम में अपने संबोधन में कहा, “हर दिन मैं जिस एक सवाल के साथ उठता हूँ…वह यह है कि हम कैसे सुनिश्चित करें कि अमेरिकी निजी क्षेत्र दुनिया के हर कोने में चीनी संस्थाओं को पछाड़ रहा हो?”
लैंडाउ ने स्वीकार किया कि कई देश अमेरिकी कंपनियों को पसंद करते हैं, लेकिन चीन की निरंतर मौजूदगी और वित्तीय सहायता के कारण अक्सर उसकी ओर रुख करते हैं। उन्होंने कहा, “आप किसी चीज़ को ‘कुछ नहीं’ से नहीं हरा सकते। चीनी यहाँ मौजूद हैं… अमेरिकी निजी क्षेत्र कहाँ है?”
उन्होंने तर्क दिया कि वाशिंगटन को उन बाधाओं को दूर करना होगा-जैसे जोखिम की धारणा, जानकारी की कमी और जटिल नियम जो अमेरिकी कंपनियों को विदेशों में निवेश से रोकती हैं। उन्होंने कहा, “हम कुछ जोखिमों को बढ़ा-चढ़ाकर आंक सकते हैं,” और जोड़ा कि सरकार को कंपनियों की मदद करनी चाहिए ताकि वे “जोखिमों का सही आकलन” कर सकें और “उन्हें कम कर सकें।”
उनके दृष्टिकोण के केंद्र में “तीन स्तंभों” वाली वाणिज्यिक कूटनीति है: निर्यात बाजारों का विस्तार, अमेरिकी निवेश को विदेशों में बढ़ावा देना और अमेरिका में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आकर्षित करना।
लैंडाउ ने कहा, “समग्र उद्देश्य यह है कि हम अपने देश को अधिक समृद्ध बनाएं” और जोर दिया कि आर्थिक जुड़ाव शून्य-योग खेल नहीं है। पूरी बात यह है कि ऐसे ‘विन-विन’ समाधान खोजे जाएं जो दोनों पक्षों को लाभ पहुंचाएं।
उन्होंने इस आलोचना को भी खारिज किया कि मजबूत वाणिज्यिक फोकस से अमेरिकी विदेश नीति अत्यधिक लेनदेन आधारित हो जाती है। उन्होंने कहा, “सभी संबंध किसी न किसी पारस्परिक लाभ की भावना पर आधारित होते हैं।”
लैंडाउ ने कहा कि पश्चिमी गोलार्ध अमेरिका की भागीदारी का “स्वाभाविक केंद्र” बना हुआ है, जिसका कारण निकटता और आपूर्ति श्रृंखला का एकीकरण है।
उन्होंने वेनेजुएला को दीर्घकालिक अवसर के रूप में बताया, इसे “बहुत, बहुत समृद्ध देश” कहा, जिसकी अर्थव्यवस्था में तेज गिरावट आई है।
विस्तृत रूप से उन्होंने तर्क दिया कि आर्थिक विकास राजनीतिक रूप से अस्थिर क्षेत्रों को स्थिर करने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा, “आर्थिक समृद्धि लगभग सभी संघर्षों का प्रमुख तत्व है,” और उदाहरण दिए जहाँ निवेश परियोजनाओं ने राजनीतिक विभाजन को कम करने में मदद की।
वैश्विक संघर्षों पर लैंडाउ ने कहा कि अमेरिका मध्य पूर्व में “स्थायी और प्रभावी युद्धविराम” की दिशा में काम कर रहा है और जोड़ा कि वाशिंगटन ने विरोधियों की क्षमताओं को कम करने के अपने सैन्य उद्देश्यों को “प्रभावी रूप से हासिल” कर लिया है।
उन्होंने विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में पूंजी तक पहुंच के महत्व पर भी जोर दिया, इसे “पूरे तंत्र की जीवनरेखा” बताया।
उन्होंने सरकार और व्यवसायों के बीच बेहतर समन्वय की अपील की। उन्होंने कॉर्पोरेट नेताओं के लिए अपने संदेश का वर्णन करते हुए कहा, “मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ जिससे आपका काम आसान हो?”
इस फोरम में नीति निर्माताओं और वित्तीय संस्थानों के बीच यह बढ़ती सहमति भी सामने आई कि वैश्विक विकास के लिए निजी पूंजी बेहद महत्वपूर्ण होगी। वक्ताओं ने कहा कि उभरते बाजारों में अधिकांश नई नौकरियां सरकारों से नहीं बल्कि निजी क्षेत्र से आने की उम्मीद है।
हाल के वर्षों में अमेरिका ने पारंपरिक कूटनीति के साथ-साथ आर्थिक रणनीति पर अधिक जोर दिया है, खासकर चीन की बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव के जवाब में। वाशिंगटन ने विदेशी निवेश को समर्थन देने और जोखिम प्रबंधन के लिए यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कार्पोरेशन जैसे साधनों का विस्तार किया है।
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