मनोरंजन
जेम्स कैमरून की ‘अवतार 2’ का शीर्षक ‘अवतार : द वे ऑफ वॉटर’ रखा गया
लंबे इंतजार के बाद, निर्देशक जेम्स कैमरून आखिरकार दर्शकों के लिए ‘अवतार’ का सीक्वल ला रहे हैं। जिसका टाइटल ‘अवतार: द वे ऑफ वॉटर’ रखा गया है। फिल्म थिएटर मालिकों की वार्षिक माटिंग में डिज्नी ने सिनेमाकॉन में बहुप्रतीक्षित फिल्म के नए फुटेज का अनावरण किया।
सिनेमा कॉन में उपस्थित लोगों को 3डी में एक मिनट लंबा ट्रेलर दिखाया गया, जिसमें कोई संवाद नहीं था। प्रदर्शकों को ग्रह के क्रिस्टल नीले महासागरों और झीलों के व्यापक ²श्यों के माध्यम से पेंडोरा की चमकदार दुनिया में विभिन्न क्षेत्रों में दिखाया गया।
फुटेज में नावी की स्थानीय जनजाति को व्हेल और पेलिकन जैसी विभिन्न प्रजातियों के साथ बातचीत करते हुए भी दिखाया गया है।
पहली फिल्म की घटनाओं के एक दशक से भी अधिक समय के बाद, ‘अवतार: द वे ऑफ वॉटर’ सुली परिवार उनके बाद आने वाली परेशानी, जिंदा रहने के लिए वे जो लड़ाइयां लड़ते हैं और जिन त्रासदियों को वे सहते हैं, की कहानी बताना शुरू करता है।
ट्रेलर 6 मई को मार्वल की ‘डॉक्टर स्ट्रेंज इन द मल्टीवर्स ऑफ मैडनेस’ से पहले सिनेमाघरों में विशेष रूप दिखाया जाएगा।
कैमरून ने एक पूर्व-रिकॉर्ड किए गए वीडियो के जरिए सभी को फिल्म के बारे जानकारी दी।
उनका कहना है कि यह सबसे बड़ी स्क्रीन और सबसे इमर्सिव 3 डी उपलब्ध के लिए डिजाइन किया गया है, और सिनेमा क्या कर सकता है इसकी सीमाओं का परीक्षण करने के लिए इसे तैयार किया गया है।
निर्माता जॉन लैंडौ ने संकेत दिया कि ‘परिवार’ चार अनुक्रमों के केंद्र में होगा। प्रत्येक अनुवर्ती फिल्म एक स्टैंडअलोन फिल्म के रूप में चलेगी और अपने निष्कर्ष पर आएगी।
लैंडौ ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि दर्शकों को ऐसा अनुभव मिले, जो उन्हें कहीं और नहीं मिला हो, और यह विशेष रूप से सिनेमाघरों में होना चाहिए।
‘अवतार 2’ 16 दिसंबर को लॉन्च होगी, जिसके सीक्वल 20 दिसंबर, 2024, 18 दिसंबर, 2026 और 22 दिसंबर, 2028 को आएंगे।
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जब सुनील शेट्टी ने खोला था एक्शन हीरो बनने का राज, बोले- ’75 प्रतिशत मेहनत और 25 प्रतिशत किस्मत का है खेल’

बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी ने 90 के दशक में एक्शन, रोमांस, कॉमेडी और गंभीर भूमिकाओं से अपनी अलग पहचान बनाई है। हालांकि, एक्शन हीरो के तौर पर बनी उनकी छवि आज भी सबसे ज्यादा चर्चा में रहती है। अपने एक पुराने इंटरव्यू में सुनील शेट्टी ने बताया था कि किसी कलाकार के लिए सफलता हासिल करना सिर्फ किस्मत की बात नहीं होती। इसके पीछे लगातार मेहनत, सीखने की इच्छा और अपनी गलतियों को सुधारने का जज्बा भी जरूरी है। उन्होंने कहा था कि इसमें 75 प्रतिशत मेहनत और 25 प्रतिशत किस्मत का योगदान है।
इंटरव्यू में सुनील शेट्टी ने कहा, ”75 प्रतिशत मेहनत, 25 प्रतिशत किस्मत जरूर है, लेकिन मैंने बहुत मेहनत की है। हमेशा सीखने की कोशिश की। आलोचनाओं को खुले दिल से स्वीकार किया है और यह समझने की कोशिश की है कि सामने वाला क्या कहना चाहता है। अपनी कमियों को दूर करने और अपनी खूबियों पर काम करने की कोशिश की।”
सुनील ने आगे कहा, ”एक अभिनेता के तौर पर मैं समझता हूं कि हर कलाकार में कुछ कमजोरियां और कुछ मजबूत पक्ष होते हैं। इसलिए मेरा ध्यान अपनी कमियों को धीरे-धीरे सुधारने और अपनी मजबूत बातों को दर्शकों के सामने बेहतर तरीके से पेश करने पर रहा।”
एक्शन हीरो बनने के सफर के बारे में सुनील शेट्टी ने दिलचस्प बात बताई। उन्होंने बताया कि एक्शन हीरो की छवि बनाना आसान नहीं था। इसके लिए उन्हें ऐसे स्टंट करने पड़े, जिनमें चोट लगने का खतरा रहता था। कई बार उन्हें इतना दर्द सहना पड़ा कि शरीर की हड्डियों तक इसका असर पड़ा।
सुनील शेट्टी ने कहा, ”एक्शन इमेज बनाने के लिए मैंने ऐसे एक्शन और स्टंट करें, जिनसे मेरी जान जा सकती थी, जिनसे मुझे चोट लगी और मेरे शरीर की हर हड्डी टूट गई। ये सब आसान नहीं था। उस दौर की एक्शन फिल्मों में कलाकारों के लिए स्टंट बहुत मुश्किल होते थे। मेरा मकसद सिर्फ स्टंट करना नहीं था, बल्कि पर्दे पर एक ऐसे एक्शन हीरो की छवि बनाना था, जिसे देखकर दर्शकों को यकीन हो कि वह किसी भी मुश्किल का सामना कर सकता है। मैं चाहता था कि दर्शक मेरे एक्शन को सच मानें।”
सुनील शेट्टी ने साल 1992 में ‘बलवान’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद ‘मोहरा’, ‘बॉर्डर’, ‘धड़कन’, ‘हेरा फेरी’, ‘मैं हूं ना’, ‘फिर हेरा फेरी’ और ‘आवारा पागल दीवाना’ जैसी कई फिल्मों में उन्होंने काम किया।
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राजपाल यादव की मुश्किलें बढ़ीं, 16 करोड़ के कर्ज की वसूली के लिए बैंक ने संपत्तियों पर चिपकाया नोटिस

बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। चेक बाउंस मामले में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे अभिनेता के खिलाफ सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने कर्ज वसूली की प्रक्रिया तेज कर दी है। बैंक ने शाहजहांपुर स्थित राजपाल यादव की दो संपत्तियों को नीलामी के लिए चिह्नित करते हुए वहां नोटिस चस्पा कर दिया है। बैंक का कहना है कि अभिनेता पर करोड़ों रुपए का कर्ज बकाया है, जिसकी वसूली के लिए यह कार्रवाई की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मुंबई शाखा ने शाहजहांपुर में स्थित राजपाल यादव की संपत्तियों पर नीलामी संबंधी नोटिस लगाया है। बैंक रिकॉर्ड के मुताबिक, अभिनेता पर 16 करोड़ 61 लाख 64 हजार रुपए का ऋण बकाया है। बैंक ने कर्ज की वसूली के लिए उनकी गिरवी रखी गई संपत्तियों को अपने कब्जे में लेकर नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
बैंक द्वारा जिन संपत्तियों की नीलामी की जा रही है, उनमें शाहजहांपुर शहर में स्थित एक संपत्ति और गांव में स्थित खेत व मकान शामिल हैं। इन दोनों संपत्तियों का आरक्षित मूल्य बैंक ने 3 करोड़ 19 लाख 26 हजार रुपए तय किया है। बैंक की ओर से जारी प्रक्रिया के अनुसार, इन संपत्तियों की ई-नीलामी 9 सितंबर 2026 को कराई जाएगी।
बताया जा रहा है कि राजपाल यादव ने यह ऋण अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए लिया था। फिल्म के निर्माण के लिए बैंक से आर्थिक मदद ली गई थी लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी। इसके बाद ऋण की किस्तों का भुगतान समय पर नहीं हो पाया और धीरे-धीरे ब्याज बढ़ता गया। अब यह रकम बढ़कर 16 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई है।
ऋण लेते समय राजपाल यादव ने अपनी पत्नी राधा यादव और मां गोदावरी यादव की संपत्तियों को भी गारंटर के रूप में गिरवी रखा था। बैंक अब इसी आधार पर संबंधित संपत्तियों पर कार्रवाई कर रहा है। बताया जा रहा है कि शाहजहांपुर के अलावा मुंबई स्थित उनकी कुछ अन्य संपत्तियों को लेकर भी बैंक की वसूली प्रक्रिया चल रही है।
बता दें कि इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए तीन महीने की कैद की सजा सुनाई थी।
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‘वह मुझे कभी बेटी तो कभी छोटी बहन की तरह मानते थे’, प्रदीप रावत को याद कर स्मृति खन्ना हुईं भावुक

अभिनेत्री स्मृति खन्ना ने दिवंगत अभिनेता प्रदीप रावत को भावुक श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके साथ बिताए खूबसूरत पलों को याद किया। उन्होंने कहा कि फिल्मों की दुनिया से शुरू हुई पहचान धीरे-धीरे एक ऐसे रिश्ते में बदल गई, जो परिवार जैसा बन गया था। वह हमेशा उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानते थे और हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाते थे।
आईएएनएस से खास बातचीत में स्मृति खन्ना ने कहा, ”मेरी पहली मुलाकात प्रदीप दादा से एक पार्टी में हुई थी। हम एक दोस्त के जरिए मिले थे। पहली मुलाकात में ही हमारे बीच अच्छा जुड़ाव बन गया। इसके बाद हमारी दोस्ती लगातार मजबूत होती गई और धीरे-धीरे यह एक खूबसूरत पारिवारिक रिश्ते में बदल गया। प्रदीप दादा, उनकी पत्नी कल्याणी और हमारा पूरा परिवार अक्सर साथ समय बिताया करता था।”
स्मृति ने आगे बताया कि दोनों परिवारों के बीच इतना अपनापन था कि एक-दूसरे के घर आना-जाना, साथ बैठकर खाना खाना, जन्मदिन मनाना और छुट्टियों पर जाना आम बात थी। हम एक-दूसरे के घर जाया करते थे। जन्मदिन साथ मनाते थे, रात के खाने पर मिलते थे और कई बार देर रात तक बैठकर बातें करते थे। छुट्टियां भी हमने साथ बिताईं। मेरे जन्मदिन पर प्रदीप दादा हमेशा मौजूद रहते थे। हम घंटों तक अंताक्षरी खेलते थे, हंसते थे और खूब बातें करते थे। उनके साथ बिताया गया हर पल आज भी मेरी यादों में ताजा है।”
स्मृति ने कहा, ”प्रदीप रावत केवल अच्छे अभिनेता ही नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों से भरपूर इंसान भी थे। वह अक्सर अपने संघर्ष, काम और जिंदगी से जुड़े किस्से सुनाते थे, जिनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता था। उनकी हर बात में सीख होती थी। हमारे बीच स्नेहभरा रिश्ता था। वह कभी मुझे अपनी छोटी बहन की तरह मानते थे तो कभी बेटी की तरह। उन्होंने हमेशा प्यार, सम्मान और अपनापन दिया।”
उन्होंने कहा, ”प्रदीप दादा की हाजिरजवाबी कमाल की थी। वह बिना किसी कोशिश के लोगों को हंसा देते थे। उनकी बातें सभी को ठहाके लगाने पर मजबूर कर देती थी। उनमें ऐसी एनर्जी थी कि उनके आते ही पूरा माहौल बदल जाता था। यही बात उन्हें सबसे अलग बनाती थी।”
स्मृति ने बताया, ”उन्होंने मेरे अभिनय करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह हमेशा मुझे सही सलाह देते थे और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। वह कहते थे कि मेहनत करते रहो। उन्होंने कुछ लोगों को मेरा नाम भी सुझाया। यह उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी थी कि वह हमेशा चाहते थे कि उनके आसपास के लोग आगे बढ़ें और सफल हों।”
अभिनेत्री ने प्रदीप रावत के अभिनय की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा, ”प्रदीप दादा एक असाधारण अभिनेता थे। चाहे उन्हें खलनायक का किरदार मिला हो या किसी गंभीर भूमिका, उन्होंने हर बार अपने अभिनय से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। उनकी पर्दे पर मौजूदगी इतनी प्रभावशाली होती थी कि उनका हर किरदार यादगार बन जाता था।”
स्मृति ने कहा, ”कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद प्रदीप दादा ने काम के प्रति कभी लापरवाही नहीं दिखाई। उन्होंने शूटिंग जारी रखी और अपने काम को पूरी ईमानदारी से निभाया। मैंने हमेशा उनकी हिम्मत और समर्पण की सराहना की है। वह वास्तव में बेहद साहसी इंसान थे। उनका जीवन और उनका संघर्ष हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।”
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