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Wednesday,14-October-2026
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प्रशांत किशोर का बड़ा विचार : 2024 की जीत के लिए ‘कांग्रेस के पुनर्जन्म’ का रखा प्रस्ताव

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चुनावी रणनीति चैंपियन, प्रशांत किशोर ने कांग्रेस के भारी पतन को देखते हुए 2024 में जीतने के लिए ‘कांग्रेस के पुनर्जन्म’ का प्रस्ताव रखा है।

कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के सामने एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति में, किशोर ने ‘कांग्रेस का पुनर्जन्म’ के अपने विषय में ‘आत्मा की रक्षा, एक नया शरीर बनाने’ के बारे में बात की है।

संकल्प में एक नई कांग्रेस बनाना शामिल है जो जनता के लिए पसंद का राजनीतिक मंच है। प्रस्तुति में किशोर कहते हैं, हकदारी, जवाबदेही की कमी और चाटुकारिता की भावना को नष्ट करें।

यह नोट करता है कि शायद पहली बार, कांग्रेस नेतृत्व लक्ष्यों, रणनीति, पद्धति, दृष्टिकोण, रणनीति और आगे के रास्ते के मामले में पूरी तरह से गठबंधन नहीं करता है। एकता का पूर्ण अभाव, कभी-कभी भ्रम और गतिरोध का कारण बनता है।

यह सुझाव देता है कि एक गैर-गांधी कार्यकारी अध्यक्ष/उपाध्यक्ष की आवश्यकता है जो कांग्रेस नेतृत्व के निर्देश के अनुसार जमीन पर प्रभावी ढंग से काम कर सके।

यह एक राष्ट्रीय चरित्र के साथ कांग्रेस प्लस गठबंधन संरचना की वकालत करता है, लेकिन इसमें 5-6 भागीदार होते हैं।

कांग्रेस को एनसीपी, डीएमके, झामुमो, वाईएसआर कांग्रेस और टीएमसी जैसे कुछ क्षेत्रीय गठबंधनों के साथ लोकसभा की 75-80 फीसदी सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए।

संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर, किशोर ने 15,000 जमीनी स्तर के नेताओं की पहचान करने और सार्थक रूप से संलग्न करने और पूरे भारत में 1 करोड़ पैदल सैनिकों को सक्रिय करने का आह्वान किया है।

‘इंडिया डिजव्र्स बेटर’ गैर-राजनीतिक प्रभावितों को रणनीतिक समर्थन और संसाधन प्रदान करने के लिए एक एकीकृत मंच बनाने और सत्तारूढ़ व्यवस्था के खिलाफ एक निरंतर अभियान चलाने का विषय है।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

पाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा के हालात नाजुक, पुलिस फायरिंग में एक शख्स की मौत

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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में गवर्नर शासन लागू किए जाने के विरोध में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रांत में आपातकाल लागू होने के बाद राजनीतिक तनाव और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।

संघीय सरकार की ओर से रविवार को आपातकाल की घोषणा और खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू किए जाने के बाद हालात बिगड़ गए हैं। इस कदम से जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार का कामकाज निलंबित हो गया है।

सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में सड़क पर गोलीबारी होती दिखाई दे रही है। वीडियो में हथियारबंद सुरक्षाकर्मी लोगों का पीछा करते नजर आ रहे हैं, जबकि कई लोग जान बचाने के लिए भागते दिख रहे हैं। एक अन्य वीडियो में पुलिसकर्मियों को लाठियों से लोगों की पिटाई करते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

स्थानीय मीडिया ने पुलिस के हवाले से बताया कि मंगलवार को गवर्नर शासन के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रांत के बारा बाजार इलाके में राष्ट्रीय डेटाबेस एवं पंजीकरण प्राधिकरण (नादरा) के एक कार्यालय में आग लगा दी। इस दौरान कथित तौर पर 15 पुलिसकर्मियों को भी बंधक बना लिया गया।

पीटीआई के विधायक इकबाल अफरीदी ने दावा किया कि हिंसा में पार्टी के 11 कार्यकर्ता घायल हुए और एक की मौत हो गई। पाकिस्तानी अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के अनुसार, इन हताहतों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

खैबर जिले के पुलिस अधिकारी वकार अहमद के मुताबिक, मंगलवार दोपहर पीटीआई के सैकड़ों समर्थक गवर्नर शासन के विरोध में बारा बाजार में एकत्र हुए थे। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और कथित तौर पर गोलियां चलाईं। इसके बाद प्रदर्शनकारी कुछ समय के लिए वहां से हट गए।

करीब 90 मिनट बाद तनाव फिर बढ़ गया, जब प्रांतीय विधानसभा के सदस्य अब्दुल गनी के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों का एक और बड़ा समूह मीनार चौक से बारा चौक की ओर मार्च करते हुए पहुंचा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार विरोधी नारे लगाए।

वकार अहमद ने बताया कि चौराहे पर पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और यातायात संकेतकों में आग लगा दी।

इसके बाद हालात और बिगड़ गए। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने तहसील नगरपालिका कार्यालय के भीतर 15 पुलिसकर्मियों को बंद कर दिया और उनके हथियार तथा वर्दियां अपने कब्जे में ले लीं।

पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि कम से कम पांच प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। पुलिस ने अशांति फैलाने की कथित कोशिश के आरोप में 50 लोगों को गिरफ्तार भी किया।

हालांकि, पेशावर के तीन प्रमुख अस्पतालों में शामिल हयाताबाद मेडिकल कॉम्प्लेक्स के एक डॉक्टर ने ‘डॉन’ को बताया कि अस्पताल में एक दर्जन से अधिक घायलों को लाया गया है। इनमें चार पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

प्रदर्शन खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू किए जाने के विरोध में किए गए। इस फैसले के बाद पीटीआई नेता सोहेल अफरीदी की प्रांत के मुख्यमंत्री के रूप में भूमिका भी प्रभावहीन हो गई है।

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राष्ट्रीय समाचार

कमाल के कलाम : गैरराजनीतिक पृष्ठभूमि वाले ‘मिसाइल मैन’, जिनके फैसलों ने सरकार को सोच में डाला

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‘भारत रत्न’ से सम्‍मानित एपीजे अब्दुल कलाम को सिर्फ भारत नहीं बल्कि पूरी दुनिया एक महान वैज्ञानिक के तौर पर जानती है। इसमें कोई दोराय नहीं कि ‘मिसाइल मैन’ कहलाए अब्दुल कमाल के नेतृत्व में ही भारत एक परमाणु हथियार संपन्न देश बन पाया। हालांकि अब्दुल कमाल की भविष्य को देखने वाली उस ‘वैज्ञानिक’ सोच का जिक्र बहुत सीमित होता है, जब देश के राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने अपने फैसलों से सरकारों को भी हैरानी में डाल दिया था।

15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में जन्मे एपीजे अब्दुल कलाम 25 जुलाई 2002 को भारत के 11वें राष्ट्रपति बने। वे ऐसे राष्ट्रपति थे, जिनकी कोई राजनीतिक या कानूनी पृष्ठभूमि नहीं थी लेकिन उनके फैसले राष्ट्रहित में रहे। कलाम ने संवैधानिक प्रमुख के तौर पर, न सिर्फ राजनीति में काम करने का नया नजरिया पेश किया बल्कि यह भी साबित कर दिया कि उनका गैर-राजनीतिक और गैर-कानूनी बैकग्राउंड असल में राष्ट्रपति भवन की पुरानी परंपराओं को तोड़ने में मददगार साबित हो सकता है। उन्होंने यह साबित कर दिया था कि वे महज ‘रबर स्टैम्प’ जैसे संवैधानिक प्रमुख नहीं हैं।

उसी सोच को दर्शाता किस्सा यह है कि अनुच्छेद 111 का इस्तेमाल हुआ, जब उन्होंने ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट बिल’ को दोबारा विचार के लिए संसद को लौटा दिया था। संविधान का अनुच्छेद 111, संसद की ओर से पारित विधेयकों पर राष्ट्रपति की सहमति से संबंधित होता है। यह राष्ट्रपति के तौर एपीजे अब्दुल कलाम की ओर से 30 मई को इसके महत्व को समझने तक एक सामान्य प्रावधान बना रहा।

2006 में अलग-अलग पार्टियों के 43 सदस्यों को संसद से अयोग्य ठहराए जाने का डर था और राज्य विधानसभाओं के 200 अन्य सदस्यों पर भी यही खतरा मंडरा रहा था, इसलिए कानून मंत्री रहे एचआर भारद्वाज पर जल्दबाजी में बिल का मसौदा तैयार करने का सभी पार्टियों की ओर से दबाव था।

राष्ट्रपति को दी गई कई याचिकाओं के जरिए सत्ताधारी वर्ग के प्रभावशाली प्रतिनिधियों, जिनमें वाम मोर्चा के 11 सांसद भी शामिल थे, की विधायी सदस्यता को चुनौती दी गई थी। कलाम ने संविधान के अनुच्छेद 103(2) के तहत इन मामलों को चुनाव आयोग को भेजने में काफी दिलचस्पी दिखाई थी। कई लेखों में इसका जिक्र मिलता है।

भारद्वाज ने ‘अयोग्यता निवारण अधिनियम 1959’ में संशोधन किया और बदले हुए बिल को संसद के पिछले सत्र में पास कर दिया गया। 25 मई को कलाम को यह बिल मिला लेकिन संवैधानिक विशेषज्ञों से चर्चा करने के बाद उन्होंने अपनी मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। यह राष्ट्रपति की ओर से शक्ति के स्वतंत्र प्रयोग की संवैधानिक मान्यता का एक दुर्लभ उदाहरण था।

यह भी सब जानते हैं कि एपीजे अब्दुल कमाल और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बीच रिश्ता बेहद गहरा था। हालांकि, वाजपेयी सरकार और एपीजे अब्दुल कलाम के बीच कुछ ऐसे प्रमुख ऐतिहासिक प्रसंग रहे, जब कलाम ने वाजपेयी के प्रस्ताव या सिफारिश को तुरंत स्वीकार नहीं किया था।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 1998 में एनडीए सरकार में एपीजे अब्दुल कलाम को मंत्री बनाना चाहते थे लेकिन कलाम ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था। इसके चार साल बाद 2002 में वे राष्ट्रपति बने। पूर्व राष्ट्रपति ने किताब ‘टर्निंग पॉइंट्स: ए जर्नी थ्रू चैलेंजेज’ में इसका जिक्र किया था।

एक और किस्सा यह था कि फरवरी 2004 में लोकसभा का कार्यकाल पूरा होने से छह महीने पहले उसे भंग करने की तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सिफारिश को स्वीकार करना। बहुत कम लोग जानते थे कि कलाम ने उस सिफारिश को तुरंत स्वीकार नहीं किया था।

कुछ लेखों में जिक्र मिलता है कि एपीजे अब्दुल कलाम ने सिफारिश पर गहराई से सोचा, तत्कालीन अटॉर्नी-जनरल सोली सोराबजी से सलाह ली और फैसला लेने से पहले उन सभी दस्तावेजों को देखा, जिनमें सोराबजी की ओर से उन्हें भेजे गए राष्ट्रपति की शक्तियों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले भी शामिल थे। उनसे पहले किसी भी राष्ट्रपति ने इस जिम्मेदारी को उनसे अधिक गंभीरता से नहीं लिया था।

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राष्ट्रीय समाचार

भारतीय सेना ने 12वीं पास के लिए 90 पदों पर निकाली वैकेंसी, ऐसे करें अप्लाई, जानें सैलरी

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भारतीय सेना में शामिल होकर देश सेवा की भावना रखने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा मौका सामने आया है। इंडियन आर्मी ने टेक्निकल एंट्री स्कीम (टीईएस-57) के तहत 90 (अस्थायी) पदों पर अविवाहित पुरुष उम्मीदवारों से आवेदन एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करके आमंत्रित किए हैं।

इन सभी रिक्तियों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 14 अक्टूबर के दोपहर 12 बजे से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 12 नवंबर तक तय की गई है। एप्लीकेशन फॉर्म भरने के इच्छुक उम्मीदवार ज्वाइन इंडियन आर्मी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि के दोपहर 12 बजे तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्थान से फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमेटिक्स (पीसीएम) में कुल मिलाकर कम से कम 60 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं या उसके बराबर की परीक्षा पास की हो। इसके अलावा, कैंडिडेट्स का जेईई (मेंस) 2026 में शामिल होना जरूरी है।

आवेदकों की न्यूनतम आयु 16.5 वर्ष और अधिकतम आयु 19.5 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना 1 जुलाई 2027 के आधार पर की जाएगी।

योग्य अभ्यर्थियों का चयन आवेदनों की शॉर्टलिस्टिंग, एसएसबी इंटरव्यू, चिकित्सा परीक्षण और मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स को ट्रेनिंग के दौरान 56,100 रुपए प्रति माह स्टाइपेंड के तौर पर दिए जाएंगे। वहीं, लेफ्टिनेंट के पद पर परमानेंट होने के बाद उनकी शुरुआती सैलरी 56,100 से 177,500 रुपए के बीच होगी। इसके अलावा, कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे।

कैंडिडेट्स ध्यान दें कि ये वैकेंसी प्रोविजनल हैं और इस कोर्स के लिए कैडेट ट्रेनिंग विंग्स (सीटीडब्ल्यू) में ट्रेनिंग की क्षमता के आधार पर इनमें बदलाव किया जा सकता है। उस समय संगठन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इन वैकेंसी की संख्या बढ़ाई या घटाई जा सकती है। वहीं, कोर्स के 4 वर्ष सफलतापूर्वक पूरे होने पर, कैडेट्स को सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर परमानेंट कमीशन दिया जाएगा।

अभ्यर्थियों को भर्ती, योग्यता, चयन प्रक्रिया, आदि से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर संबंधित पोस्ट के लिए जारी विस्तृत नोटिफिकेशन को चेक करने की सलाह दी जाती है।

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