अंतरराष्ट्रीय
पेटीएम ने दूसरी तिमाही के परिणाम साझा किए, ओपीएस से राजस्व 64 प्रतिशत बढ़कर 10.9 बिलियन हुआ
उपभोक्ताओं और व्यापारियों के लिए भारत के अग्रणी डिजिटल इकोसिस्टम, पेटीएम ने अपनी दूसरी तिमाही की आय रिपोर्ट की घोषणा की। डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवा मंच ने वित्त वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही में परिचालन से अपने राजस्व में सालाना 64 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 10.9 अरब रुपये की वृद्धि दर्ज की है, जो गैर-यूपीआई भुगतान मात्रा (जीएमवी) में 52 प्रतिशत की वृद्धि और वित्तीय सेवाओं और अन्य राजस्व क्षेत्र में 3 गुना से अधिक की वृद्धि से प्रेरित है। वित्त वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही में कंपनी का योगदान लाभ बढ़कर 2.6 अरब रुपये हो गया है, जो साल-दर-साल 592 प्रतिशत की वृद्धि है। योगदान मार्जिन पिछले वर्ष के 5.7 प्रतिशत से राजस्व के 24.0 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
पेटीएम ने वित्त वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही (4,255 मिलियन रुपये) में राजस्व का एक बेहतर समायोजित ईबीआईटीडीए मार्जिन (39 प्रतिशत) पोस्ट किया है।
दूसरी तिमाही की आय पर कंपनी के प्रबंधन ने कहा, “गैर-यूपीआई जीएमवी के विकास ने निरंतर भुगतान राजस्व वृद्धि को प्रेरित किया है और हमारी यूपीआई के नेतृत्व वाली भुगतान मात्रा में वृद्धि हमारी वित्तीय सेवाओं की पेशकश के एक महत्वपूर्ण रैंप में अनुवाद कर रही है। हम पूरे भारत में डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाओं की पहुंच को व्यापक रूप से अपना रहे हैं। पेटीएम ने वित्त वर्ष 22 की दूसरी तिमाही में मजबूत स्थिति देखी है, जो उपभोक्ताओं और व्यापारियों के मजबूत दो-तरफा पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमाण है जिसे हमने बनाया है। हमने अपने भुगतान सेवाओं के कारोबार में विकास की गति को बनाए रखा है, अपने वित्तीय सेवाओं के कारोबार का आक्रामक रूप से विस्तार किया है और वाणिज्य और क्लाउड सेवाओं के लिए पूर्व-कोविड वॉल्यूम के रास्ते पर हैं।”
पेटीएम के ग्रॉस मर्चेडाइज वैल्यू (जीएमवी) की वृद्धि सक्रिय उपयोगकर्ता जुड़ाव और व्यवसायों में अपनाने से प्रेरित थी। वित्त वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही के लिए कंपनी का जीएमवी 1,956 बिलियन रुपये था, जो 107 प्रतिशत साल दर साल था और विकास की गति अक्टूबर 2021 में जारी रही, जहां जीएमवी 832 बिलियन रुपये में 131 प्रतिशत साल दर साल था।
वित्त वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही में कंपनी का औसत मासिक लेन-देन करने वाले उपयोगकर्ता (एमटीयू) सालाना आधार पर 33 प्रतिशत बढ़कर 57.4 मिलियन हो गए हैं और अक्टूबर 2021 में 63 मिलियन एमटीयू के साथ ट्रांजेक्टरी जारी है, अक्टूबर 2020 में 47 मिलियन एमटीयू की तुलना में 35 प्रतिशत की सल दर साल वृद्धि हुई। वित्त वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही के लिए मासिक जीएमवी प्रति लेनदेन उपयोगकर्ता 55 प्रतिशत सालाना बढ़कर 11,369 रुपये हो गया।
पेटीएम, जो अपने वित्तीय सेवा मंच को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, उसने भुगतान और वित्तीय सेवाओं से अपने राजस्व में 69 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 8,426 मिलियन रुपये की वृद्धि देखी, जबकि वाणिज्य और क्लाउड सेवाओं के राजस्व में 47 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 2,438 मिलियन हो गई।
कंपनी के ऋण देने वाले क्षेत्र में भारी वृद्धि देखी गई क्योंकि वित्त वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही में वितरित ऋणों की संख्या सालाना आधार पर 714 प्रतिशत बढ़कर 2.8 मिलियन से अधिक हो गई। ऋण देने के कारोबार ने तेजी से पैमाने के परिणामस्वरूप मजबूत वृद्धि दिखाना जारी रखा। कंपनी के वित्तीय संस्थान के भागीदारों ने अक्टूबर 2021 में लगभग 1.3 मिलियन ऋण वितरित किए, वर्ष-दर-वर्ष वितरित किए गए ऋणों की संख्या में 472 प्रतिशत की वृद्धि हुई और कुल मिलाकर 6,270 मिलियन रुपये का संवितरण हुआ, जिसका अर्थ है कि वर्ष-दर-वर्ष वितरित किए गए ऋणों के मूल्य में 418 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
पेटीएम का मर्चेट बेस वित्त वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही में बढ़कर 23 मिलियन हो गया, जो वित्त वर्ष 2021 की दूसरी तिमाही में 18.5 मिलियन था। वित्त वर्ष 2021 की दूसरी तिमाही में उपकरणों का आधार बढ़कर 1.3 मिलियन हो गया, जो कि वित्त वर्ष 2021 की दूसरी तिमाही में 0.3 मिलियन था। कंपनी ने कहा कि हमारे तैनात आधार के रूप में व्यापारी भागीदारों के बीच उपकरण अक्टूबर 2021 तक बढ़कर लगभग 1.4 मिलियन हो गए।
व्यापार
भारतीय शेयर बाजार साल के दूसरे दिन भी हरे निशान में खुला, सेंसेक्स-निफ्टी में उछाल

मुंबई, 2 जनवरी: कैलेंडर वर्ष 2026 के दूसरे और सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख बेंचमार्क बढ़त के साथ हरे निशान में खुले। यह नए साल का लगातार दूसरा दिन है जब घरेलू बाजार में बढ़त देखने को मिली है।
नए साल 2026 के दूसरे कारोबारी दिन खबर लिखे जाने तक (9:20 बजे के करीब) निफ्टी 25.50 अंक यानी 0.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ 26,172.35 पर था, जबकि सेंसेक्स 104.95 अंक या 0.12 प्रतिशत की तेजी के साथ 85,293.55 पर ट्रेड कर रहा था। इस दौरान ऑटो और मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
व्यापक बाजार की बात करें, तो निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.31 प्रतिशत की तेजी रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.2 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहा था।
सेक्टरवार देखें, तो निफ्टी ऑटो इंडेक्स 0.73 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद निफ्टी पीएसयू बैंक 0.7 प्रतिशत और निफ्टी मेटल 0.56 प्रतिशत चढ़ा। दूसरी ओर निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स 1.2 प्रतिशत गिर गया, जिसमें आईटीसी के शेयर में आई तेज गिरावट का बड़ा योगदान रहा।
शुरुआती कारोबार में मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एशियन पेंट्स, बीईएल, एचडीएफसी बैंक, एनटीपीसी और टाटा स्टील के शेयरों में 1.3 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। वहीं आईटीसी का शेयर 4 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया और यह सबसे बड़ा नुकसान झेलने वाला स्टॉक रहा। इसके अलावा टाइटन, एचसीएल टेक, एक्सिस बैंक और टेक महिंद्रा के शेयरों में भी गिरावट देखी गई।
बाजार के जानकारों का कहना है कि दिसंबर महीने में पैसेंजर व्हीकल की बिक्री में सालाना आधार पर 25.8 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी ऑटो सेक्टर के लिए एक अच्छा संकेत है। इससे भी ज्यादा अहम बात यह है कि यह आंकड़ा देश की अर्थव्यवस्था में जारी ग्रोथ की रफ्तार को साफ तौर पर दिखाता है। आगे यह देखना होगा कि क्या यह वृद्धि, भले ही धीमी गति से हो, आगे भी जारी रहती है। लेकिन अर्थव्यवस्था में ग्रोथ का बना रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही बाजार के लिए जरूरी कमाई (अर्निंग्स) की बढ़ोतरी सुनिश्चित कर सकता है और बाजार को मजबूती के साथ धीरे-धीरे ऊपर ले जा सकता है।
एक्सपर्ट के अनुसार, ऑटो उद्योग से जुड़ी सकारात्मक खबरों का असर काफी हद तक पहले ही कीमतों में दिख चुका है। पिछले साल जो सेक्टर पीछे रह गया था, वह कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर है, जिसमें आगे चलकर तेजी आने की अच्छी संभावना है। ब्याज दरों में कटौती और जीएसटी में राहत का पूरा फायदा अभी तक इस सेक्टर की मांग में नजर नहीं आया है। ऐसे में अल्पकाल में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को साल के पहले कारोबारी सत्र में सपाट बंद हुआ। सेंसेक्स में मामूली गिरावट आई और निफ्टी में थोड़ी बढ़त दर्ज की गई। इस दौरान बीएसई सेंसेक्स 32 अंक या 0.04 प्रतिशत गिरकर 85,188.60 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 17 अंक या 0.06 प्रतिशत बढ़कर 26,146.55 पर बंद हुआ और 26,100 के स्तर से काफी ऊपर बना रहा।
व्यापार
साल के आखिरी दिन सस्ता हुआ सोना-चांदी, रिकॉर्ड तेजी के बाद सिल्वर में 14,000 रुपए से ज्यादा की गिरावट

gold
मुंबई, 31 दिसंबर: साल 2025 के आखिरी कारोबारी दिन, बुधवार को कीमती धातुओं, खासकर चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। इससे पहले चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंची थी, जिसके बाद निवेशकों ने मुनाफा कमाने के लिए बिकवाली की।
घरेलू वायदा बाजार में शुरुआती कारोबार में चांदी 16,000 रुपए से ज्यादा गिर गई और यह 2,32,228 रुपए के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गई। हालांकि बाद में इसमें थोड़ी रिकवरी देखने को मिली। वहीं सोने की कीमतों में भी 900 रुपए से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली।
खबर लिखे जाने तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी 14,124 रुपए यानी 5.63 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,36,888 रुपए प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। जबकि फरवरी डिलीवरी वाला सोना 782 रुपए यानी 0.57 प्रतिशत गिरकर 1,35,884 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया। कारोबारी सत्र के दौरान चांदी 2,32,228 रुपए तो सोना 1,35,618 रुपए के इंट्रा-डे लो तक पहुंच गया।
यह गिरावट 2025 में अधिकांश समय में हुई तेज बढ़त के बाद आई है। अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के बंदरगाहों पर हमला और चीन के नौसैनिक अभ्यास जैसे अंतरराष्ट्रीय तनावों के चलते सप्ताह के शुरुआत में सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग तेजी से बढ़ी थी, जिनसे कीमती धातुओं की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिली थी।
विश्लेषकों के अनुसार, दिसंबर में चांदी की कीमत 24 प्रतिशत बढ़ी और पिछले एक साल में इसमें 135 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसका कारण मांग ज्यादा होना और सुरक्षित निवेश की ओर लोगों का झुकाव है।
घरेलू स्पॉट गोल्ड (तुरंत खरीदा-बेचा जाने वाला सोना) की कीमत इस साल अब तक 76 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 70 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी है। यह 1979 के बाद सबसे अच्छी सालाना बढ़त मानी जा रही है।
मेहता इक्विटी लिमिटेड के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री ने कहा कि मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ने से सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी। रूस और यूक्रेन के बीच शांति बातचीत में भी रुकावट आई, जब रूस ने यूक्रेन पर राष्ट्रपति के आवास पर ड्रोन हमला करने का आरोप लगाया।
इसी दौरान, अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के बंदरगाहों पर हमलों और चीन के नौसैनिक अभ्यासों ने अमेरिका-ताइवान तनाव को बढ़ा दिया, जिससे कीमती धातुओं को सपोर्ट मिला। लेकिन बाद में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के विवरण आने के बाद कीमतों में बढ़त सीमित हो गई, क्योंकि अगले साल ब्याज दरों में ज्यादा कटौती की उम्मीद कम हो गई।
एक्सपर्ट ने बताया कि चांदी को 2,45,150 से 2,42,780 रुपए के स्तर पर सपोर्ट, तो वहीं 2,54,810 से 2,56,970 रुपए के बीच रजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है।
इस साल सोने और चांदी की कीमतें बढ़ने के पीछे कई कारण रहे, जैसे केंद्रीय बैंकों द्वारा ज्यादा खरीद, अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, अमेरिकी टैरिफ को लेकर चिंता, भू-राजनीतिक तनाव और गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में मजबूत निवेश।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के बड़े बाजारों में चांदी का भंडार लगातार कम हो रहा है। शंघाई और कॉमेक्स बाजारों के बीच कीमतों का अंतर भी घट रहा है, जिससे यह साफ होता है कि चांदी की उपलब्धता सीमित होती जा रही है।
व्यापार
भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला, सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट

मुंबई, 30 दिसंबर: कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला। इस दौरान व्यापक बिकवाली के चलते बाजार के प्रमुख बेंचमार्क गिरावट के साथ कारोबार करते हुए नजर आए।
शुरुआती कारोबारी सत्र में खबर लिखे जाने तक 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 136 अंक यानी 0.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 84,559.40 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। जबकि एनएसई निफ्टी 48.90 अंक यानी 0.19 प्रतिशत गिरकर 25,893.20 पर ट्रेड कर रहा था।
इस दौरान निफ्टी के सभी इंडेक्स लाल निशान में ट्रेड कर रहे थे। व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.14 प्रतिशत की गिरावट आई तो वहीं निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में 0.7 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.6 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी में 0.4 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा में 0.34 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
निफ्टी पैक में इटरनल, अपोलो हॉस्पिटल, टाटा कंज्यूमर, अल्ट्राटेक सीमेंट, जियो फाइनेंशियल, मैक्स हेल्थकेयर और टाटा स्टील सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे। जबकि श्रीराम फाइनेंस, टीएमपीवी, हिंडाल्को, बीईएल, अदाणी पोर्ट्स और एक्सिस बैंक टॉप गेनर्स में शामिल रहे।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा कि हालांकि साल के आखिर में बाजार में कमजोरी दिख रही है, लेकिन यह बाजार की दिशा में कोई बड़ा बदलाव नहीं दर्शाता है। एडवांस-डिक्लाइन रेशियो गिरावट के पक्ष में ज्यादा रहा, जिसकी वजह से कल निफ्टी करीब 100 अंक गिर गया। यह समझना जरूरी है कि यह गिरावट कम कारोबार (लो वॉल्यूम) में हुई है। बाजार की दिशा में स्पष्ट बदलाव नए साल की शुरुआत में ही देखने को मिलेगा, जब बड़े संस्थागत निवेशक दोबारा सक्रिय होंगे।
उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल निवेशकों के लिए बेहतर यही होगा कि वे बाजार पर नजर बनाए रखें और किसी नए ट्रिगर या स्पष्ट दिशा का इंतजार करें, हालांकि बाजार में आई कमजोरी का फायदा उठाकर अच्छी और मजबूत बड़ी कंपनियों (हाई क्वालिटी लार्जकैप) के शेयरों में धीरे-धीरे निवेश किया जा सकता है।
एक्सपर्ट ने आगे कहा कि दो दिन बाद आने वाले ऑटो बिक्री के आंकड़े यह संकेत देंगे कि अर्थव्यवस्था में चल रही खपत की तेजी कितनी टिकाऊ है। आर्थिक विकास के नजरिए से भी ये आंकड़े काफी अहम होंगे।
सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 345.91 अंक या 0.41 प्रतिशत गिरकर 84,695.54 पर बंद हुआ था। तो वहीं एनएसई निफ्टी50 100.20 अंक या 0.38 प्रतिशत गिरकर 25,942.10 पर क्लोज हुआ।
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