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Monday,06-April-2026
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कुलदीप यादव ने सफल सर्जरी के बाद फिटनेस के लिए शुरू किया अभ्यास

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भारत के क्रिकेटर कुलदीप यादव ने घुटने की सफल सर्जरी के बाद फिटनेस के लिए फिर से अभ्यास शुरू कर दिया है। चोट की वजह से वह आईपीएल 2021 के दूसरे फेज से बाहर हो गए थे और अब भारतीय टीम में वापसी के लिए तैयारी कर रहे हैं। कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) का प्रतिनिधित्व करने वाले कुलदीप को इस साल आईपीएल के दूसरे फेस में यूएई से स्वदेश वापस लौटना पड़ा था, क्योंकि उन्हें अभ्यास के दौरान घुटने में चोट लग गई थी।

मंगलवार को स्पिनर ने सोशल मीडिया पर अपने अभ्यास सत्र की तस्वीरें पोस्ट करते हुए ट्वीट पर कहा, “एक और दिन करीब आया।”

कुलदीप ने सितंबर के अंतिम सप्ताह में घुटने की सफल सर्जरी करवाई थी और आईपीएल 2021 में अबू धाबी में केकेआर बायो-बबल छोड़ने के बाद उन्होंने इसको लेकर ट्विटर पर अपडेट किया था।

यह संभावना नहीं है कि कुलदीप 30 अक्टूबर को घरेलू टूर्नामेंट सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में खेलते हुए नजर आ सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय

आईआरजीसी के खुफिया प्रमुख मेजर जनरल खदेमी की मौत

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तेहरान/तेल अवीव, 6 अप्रैल : ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की खुफिया विंग के प्रमुख मेजर जनरल खदेमी की मौत हो गई है। ईरानी स्टेट मीडिया ने बयान जारी कर इसकी पुष्टि की।

ईरान ने इस हमले के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे देश को अस्थिर करने की साजिश करार दिया है। आईआरजीसी के जनसंपर्क विभाग ने सोमवार को घोषणा की।

बयान के अनुसार, मेजर जनरल खादेमी ने खुफिया और सुरक्षा क्षेत्रों में क्रांति, शासन और इस्लामी मातृभूमि की लगभग आधी सदी तक ईमानदारी और साहस के साथ रक्षा करते हुए महत्वपूर्ण, स्थायी और अनुकरणीय योगदान दिया है।

तस्नीम न्यूज एजेंसी ने खदेमी की मौत को क्रांति की हत्या बताते हुए एक्स पोस्ट में बताया कि ब्रिगेडियर खदेमी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की खुफिया शाखा के शक्तिशाली और शिक्षित प्रमुख सोमवार सुबह एक अमेरिकी-इजरायली हमले में शहीद हो गए।

ईरान ने खदेमी की मौत को बड़ा नुकसान बताते हुए कहा कि उनकी विरासत देश की सुरक्षा नीतियों को आगे भी दिशा देती रहेगी। उनके अंतिम संस्कार को लेकर जल्द ही आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

वहीं, इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी खुफिया प्रमुख खदेमी के मारे जाने की पुष्टि करते हुए अपनी सैन्य बल की तारीख की।

द टाइम्स ऑफ इजरायल ने रक्षा मंत्री का बयान प्रकाशित किया, जिसके मुताबिक आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल आयल जमीर के साथ “एक समीक्षा बैठक के दौरान इस हमले की जानकारी दी गई थी।”

ईरान के शीर्ष अधिकारियों की मौत की पुष्टि की यह एक नई श्रृंखला है। 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के एक महीने से ज्यादा बीत गए हैं। यूएस-इजरायल के पहले हवाई हमले में ही ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत हो गई। उनके साथ कई कमांडर्स भी मारे गए। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली लारीजानी, नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसीरी

ब्रिगेडियर जनरल और चीफ ऑफ द जनरल स्टाफ के सलाहकार जमशेद इशाकी समेत तमाम बड़े नाम मारे गए दिग्गजों की लिस्ट में शामिल हैं।

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अंतरराष्ट्रीय

ईरान को लेकर ट्रंप की धमकियों का पूरे अमेरिका में हो रहा है विरोध

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TRUMP

वॉशिंगटन, 6 अप्रैल : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला करने की हालिया धमकी ने देश के भीतर विरोध को जन्म दिया है। कानूनी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकती है जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तेहरान के साथ तनाव लगातार बढ़ रहा है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा नहीं खोलता है, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स और पुलों को निशाना बना सकता है।

पोलिटिको के अनुसार, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “मंगलवार ईरान में पावर प्लांट डे और ब्रिज डे होगा-सब एक साथ। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ होगा। उस स्ट्रेट को खोलो, नहीं तो तुम लोग नरक में जियोगे, देख लेना।”

यह बयान उस समय आया है जब इस रणनीतिक जलमार्ग को लेकर तनाव बढ़ रहा है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक अहम मार्ग है।

ट्रंप ने ईरान को जलडमरूमध्य खोलने के लिए एक समयसीमा भी दी। सीएनएन के अनुसार, उन्होंने संकेत दिया कि यदि तेहरान कार्रवाई नहीं करता, तो हमले हो सकते हैं।

व्हाइट हाउस ने स्थिति को संभालने की कोशिश की। प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि अमेरिका “हमेशा कानून के दायरे में रहकर काम करेगा।”

कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत गंभीर चिंता का विषय है।

द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, पावर प्लांट और परिवहन प्रणाली जैसे ढांचे “ईरान में नागरिक जीवन की नींव हैं” और उनका विनाश “ज्यादातर मामलों में अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध माना जा सकता है।”

अंतरराष्ट्रीय कानून नागरिक ठिकानों पर हमले की अनुमति नहीं देता, जब तक कि वे सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग में न हों और सैन्य लाभ नागरिक नुकसान से अधिक न हो।

द वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, एक कानूनी विशेषज्ञ ने कहा कि “सभी पुलों या पावर प्लांट्स पर बिना भेदभाव के हमला करने की धमकी देना युद्ध अपराध करने की धमकी के समान हो सकता है।” इन टिप्पणियों पर दोनों दलों के नेताओं ने आलोचना की है।

द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, सीनेटर क्रिस मर्फी ने ट्रंप के बयान को “पूरी तरह असंतुलित” बताया। रिपब्लिकन प्रतिनिधि डॉन बेकन ने कहा कि अमेरिकी “अपने राष्ट्रपति से अशोभनीय भाषा की उम्मीद नहीं करते,” और नेतृत्व में आत्मसंयम जरूरी है।

हाउस माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफ्रीज़ ने कहा कि प्रशासन ने अमेरिका को “बिना योजना के एक लापरवाह युद्ध” में धकेल दिया है।

कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने प्रशासन का समर्थन भी किया। प्रतिनिधि माइक लॉरलर ने सैन्य अभियान को “अविश्वसनीय ऑपरेशन” बताया।

ईरान ने अमेरिकी दबाव को खारिज कर दिया है। सीएनएन के अनुसार, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य “तब तक बंद रहेगा जब तक ईरान को युद्ध क्षति का भुगतान नहीं मिल जाता।”

ट्रंप ने अपनी बयानबाजी और तेज कर दी। द वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि यदि ईरान नहीं मानता, तो वह “अपने हर पावर प्लांट और अन्य संयंत्र खो सकता है।”

उन्होंने कहा, “अगर उन्होंने मंगलवार शाम तक कुछ नहीं किया, तो उनके पास कोई पावर प्लांट और कोई पुल नहीं बचेगा।”

इन बयानों से अमेरिका के सहयोगियों में भी चिंता बढ़ी है। द वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, इन टिप्पणियों ने सहयोगियों को झटका दिया है, खासकर तब जब वॉशिंगटन कूटनीतिक प्रयास भी कर रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि यह रणनीति दबाव और बातचीत का मिश्रण है लेकिन इसमें तनाव बढ़ने का खतरा भी है।

द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, “अमेरिका की भाषा और कार्रवाई के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं,” और इस तरह की बयानबाजी अंतरराष्ट्रीय मानकों को कमजोर कर सकती है।

पेंटागन ने नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की किसी योजना की पुष्टि नहीं की है और इस पर सवालों को यूएस सेंट्रल कमांड की ओर भेजा है।

ट्रंप ने अपनी रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि ईरान पर दबाव जरूरी है और बातचीत की संभावना अभी भी बनी हुई है।

फॉक्स न्यूज के अनुसार, उन्होंने कहा, “हम स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखे हुए हैं।” यह टकराव होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है। यहां किसी भी व्यवधान का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार पर पड़ सकता है।

हालिया तनाव अमेरिका-ईरान संबंधों के सबसे गंभीर चरणों में से एक माना जा रहा है, जिसमें सैन्य दबाव, आर्थिक जोखिम और तीखी बयानबाजी शामिल है।

पिछले अनुभव बताते हैं कि नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले की धमकियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच और व्यापक संघर्ष का खतरा बढ़ा सकती हैं। विश्लेषकों का कहना है कि स्थिति अभी भी बदलती हुई है और कूटनीतिक व सैन्य दबाव लगातार बढ़ रहे हैं।

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अंतरराष्ट्रीय

ट्रंप की धमकी से होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा संकट, तेल कीमतों में आया उछाल

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वाशिंगटन, 6 अप्रैल : ईरान के साथ-साथ होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार और आपूर्ति शृंखलाएं दबाव में आ रही हैं। तेल की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जहाजरानी मार्गों में से एक पर व्यवधान की आशंकाएं बढ़ रही हैं।

सीएनएन के अनुसार, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा न खोलने पर ईरानी ऊर्जा केंद्रों पर हमले की धमकी के बाद रविवार को तेल की कीमतों में तेजी आई।”

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ब्रेंट क्रूड 1.4 प्रतिशत बढ़कर 110.60 डॉलर हो गया, जबकि अमेरिकी क्रूड 1.8 प्रतिशत बढ़कर 113.60 डॉलर हो गया है।

ईरान और ओमान के बीच स्थित संकरा जलमार्ग होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यहां किसी भी प्रकार की व्यवधान का बाजारों पर तत्काल प्रभाव पड़ता है।

वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा हर साल इस स्ट्रेट से होकर गुजरता है, जिससे यह दुनिया के सबसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील चोकपॉइंट्स में से एक बन गया है।

मौजूदा गतिरोध ने पहले ही जहाजरानी प्रवाह को बाधित करना शुरू कर दिया है। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, बहरीन के विदेश मंत्री ने कहा, “ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों के आवागमन में बाधा डालने से टैंकरों का आवागमन 90 प्रतिशत से अधिक कम हो गया है और अब यह वैश्विक खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा बन गया है। इसका प्रभाव केवल ऊर्जा बाजारों तक ही सीमित नहीं है। समुद्री व्यापार में व्यवधान से खाद्य और उर्वरक आपूर्ति शृंखलाएं भी प्रभावित हो रही हैं।”

बहरीन के मंत्री ने कहा कि संकट जहाजों को होने वाले शुरुआती खतरों से कहीं आगे बढ़ गया है और अब वैश्विक स्थिरता के लिए एक व्यापक खतरा पैदा कर रहा है। इसके परिणाम अब केवल ऊर्जा बाजारों तक ही सीमित नहीं हैं।

बाजार में अस्थिरता ईंधन की कीमतों में पहले से ही दिखाई दे रही है। संयुक्त राज्य अमेरिका में संघर्ष से जुड़ी कच्चे तेल की बढ़ती लागत के कारण गैसोलीन की कीमतों में उछाल आया है।

फॉक्स न्यूज के अनुसार, राष्ट्रीय औसत गैसोलीन की कीमत लगभग 4.11 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जो हाल के हफ्तों में तेजी से बढ़ी है। लगभग हर क्षेत्र में कीमतें बढ़ी हैं और कुछ क्षेत्रों में तो राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर पहुंच गई हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, “ईरान के साथ जारी संघर्ष के चलते कच्चे तेल की लागत बढ़ने से गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।”

जेट ईंधन की कीमतों में भी भारी उछाल आया है, जिससे एयरलाइनों की परिचालन लागत बढ़ गई है और हवाई किराए में वृद्धि तथा उड़ान क्षमता में कमी की संभावना बढ़ गई है।

फॉक्स न्यूज़ ने उद्योग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया, “अमेरिका में जेट ईंधन की कीमतों में पिछले कई वर्षों में सबसे तेज वृद्धि हुई है, कुछ ही हफ्तों में ये दोगुनी से भी अधिक हो गई हैं।”

विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट में लंबे समय तक व्यवधान से वैश्विक रसद पर और दबाव पड़ सकता है, विशेष रूप से एशिया और यूरोप के ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर असर पड़ेगा।

तत्काल कीमतों में उछाल के अलावा, यह स्थिति वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता को बढ़ावा दे रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, तेल बाजारों ने सप्ताहांत के घटनाक्रम पर बढ़ती कीमतों और व्यापक आर्थिक चिंताओं के साथ प्रतिक्रिया व्यक्त की।

रिपोर्ट में कहा गया है, “रविवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 111 डॉलर तक पहुंच गई। इस संघर्ष ने उन बाजारों को हिला दिया है जो पहले से ही आपूर्ति में व्यवधान के प्रति संवेदनशील हैं।”

सीएनएन के अनुसार, ओमान ईरान के साथ अंतिम दौर की बातचीत में शामिल रहा है, जबकि पाकिस्तान सहित क्षेत्रीय देशों ने भी चर्चा में भाग लिया है। इन प्रयासों के बावजूद ईरान ने संकेत दिया है कि जब तक उसकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वह स्ट्रेट को बंद रखेगा, जिससे और तनाव बढ़ने का खतरा बढ़ गया है।

सीएनएन के अनुसार, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि जलमार्ग “तब तक अवरुद्ध रहेगा जब तक ईरान को युद्ध क्षति के लिए मुआवजा नहीं मिल जाता।”

इस संकट ने ऊर्जा उत्पादकों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भी चेतावनी जारी कर दी है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ओपेक+ के सदस्यों ने ऊर्जा बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान और लंबे समय तक आपूर्ति में व्यवधान की संभावना पर चिंता व्यक्त की है।

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